मेरी मस्त नौकरी लग गई

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Dec 1, 2017.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

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    प्रेषक : साधना .

    हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम साधना है। मेरा फिगर बड़ा ही मस्त है और में 32 साल की हूँ। मेरा फिगर साईज 36-28-38 है और में बड़े ही गरीब घर से हूँ। मेरे पास सब कुछ है और मेरे ससुराल में मेरा एक देवर है, उसका नाम बिल्लू है, उसका एक दोस्त मोनू है। मेरे पढ़ी लिखी होने के कारण मुझे घर पर ज्यादा दिन तक बैठना पसंद नहीं था। मेरे पति अपने काम में ज्यादा वक़्त देते है। फिर इस दौरान मैंने उनसे पूछा कि में नौकरी करना चाहती हूँ। तब उन्होंने मना कर दी, लेकिन फिर मेरे बार-बार कहने पर वो मान गये। फिर मोनू जी ने मुझे नौकरी पर लगा दिया। अब वो अपने काम से आते जाते तो कई बार रास्ते में मुझे मिल जाते थे और मुझसे कहते कि बैठो मेरे साथ। में बैठ जाती थी और यह सोचती कि 10 रुपये बचेंगे तो काम आयेंगे। फिर तो वो लगभग रोज ही उस रास्ते पर मिल जाते थे और में उनकी मोटरसाईकिल पर बैठ जाती थी। फिर वो जानबूझकर ब्रेक मारते तो मेरे बोबे उसकी पीठ पर टकराते, जिससे उन्हें बहुत मजा आता था।

    अब समस्या यह हो रही थी की में रोज घर पर जल्दी पहुँच जाती थी। फिर घर वाले पूछते कि आज जल्दी कैसे आई? तो एक दो बार तो मैंने कह दिया था कि मोनू जी मिल गये थे। अब घरवाले भी समझदार थे तो उन्होंने कुछ नहीं कहा था, लेकिन यह सब कुछ में जानती थी कि वह क्या सोचते है? अब रोज 1 घंटे का फर्क होता था। फिर मैंने मोनू जी को कह दिया तो वो बोले कि आप चिन्ता मत करो, में सब कुछ संभाल लूंगा। मेरे घर से मेरा ऑफिस 20 किलोमीटर दूर था। वो अब रोज ही मुझे लेने छोड़ने आ जाते थे, लेकिन वो घर से कुछ दूरी पर मुझे बैठाते उतारते थे। तब मैंने कहा कि मोनू जी इतनी जल्दी जाकर में ऑफिस में क्या करुंगी? तो तब मोनू जी ने कहा कि क्यों ना हम कहीं बैठकर घूमकर ही अपने टाईम पर ही घर और ऑफिस पहुँचा करें। तब मैंने कहा कि ठीक है। अब उन्होंने मुझे अपना नम्बर दे दिया था। अब मुझे भी उनके साथ समय बिताना अच्छा लगता था और फिर धीरे-धीरे में सब बातें उन्हें बताती और वो मुझे बताते थे।

    अब में जब भी उनकी मोटरसाईकिल पर बैठती तो ज्यादा दूरी नहीं रहती थी। अब मोनू जी ने मेरे हाथ पर हाथ रखना, कभी-कभी कंधे पर हाथ रखना चालू कर दिया था, अब हम कभी-कभी सेक्स की बात भी कर और सुन लेते थे। वो एक बात हरदम कहते थे कि साधना तुम्हारे बोबे बड़े मस्त है। तब मैंने कहा कि आपकी पत्नी के भी तो है। फिर वो कहते कि उसके बोबे तो छोटे-छोटे बोर जैसे है। तब में कहती कि ठीक है जैसे भी है। अब हम दोनों अश्लील बातें करते थे। फिर घर जाने पर भी मोनू जी का फोन आता और हम दोनों के बीच में सेक्स की बात होती थी। अब घरवालों को कुछ पता नहीं था। अब वो मुझे अपनी मोटरसाईकिल बैठाते थे तो मेरा हाथ पकड़कर अपनी जांघ पर रख देते थे और फिर धीरे-धीरे में उसका जायजा लेने लगती थी। अब उसको पता चल गया था, तो उसने मेरे हाथ को पकड़कर अपने लंड पर रख दिया। अब उस वक्त में एक ही बात सोच रही थी आह क्या मस्त लंड है?

    फिर हम घर पहुँच गये। फिर उसने मुझसे पूछा कि कैसा है? तो तब मैंने कहा कि रात को बताऊंगी। फिर रात को फोन आया, उस वक्त मेरे पति नहीं आए थे, वो 12 बजे तक आएंगे।

    फिर मोनू जी का फोन आया और कुछ इस तरह बात हुई।

    मोनू जी : क्यों साधना? कैसा लगा मेरा लंड?

    में : ऊपर से तो बिल्डिंग अच्छी लगती है, लेकिन।

    मोनू जी : लेकिन क्या?

    में : पता तो अंदर जाकर चलता है कि वह कितनी अच्छी और मजबूत है?

    मोनू जी : आप अपने आपको लेकर तैयार रहो कि बिल्डिंग में कब जाना है?

    में : मैंने कहा कि देखते है?

    मोनू जी : रात में कितनी ट्रिप हो जाती है?

    में : 2-3 बार लगभग ज्यादातर 2 बार होती है।

    मोनू जी : में तो 1 घंटे के बाद ही तैयार जाता हूँ।

    में : मतलब पूरी रात मिल जाए तो 4-5 बार आराम से करते होंगे?

    मोनू जी : हाँ, सच कह रहा हूँ।

    में : रहने दो।

    मोनू जी : वो तो वक्त आयेगा तो बता दूंगा, इससे ज्यादा हो सकता है, लेकिन उससे कम नहीं।

    में : क्या? लेकिन बोलो।

    मोनू जी : उसके बोबे छोटे-छोटे है वरना में

    में : में वरना, क्या?

    मोनू जी : वरना 2 बार तो बोबे पकड़कर उनको ही चोद दूँ।

    में : अच्छा।

    मोनू जी : कल सुबह ऑफिस मत जाना।

    में : नहीं मुझे घर पर हिसाब देना पड़ता है।

    मोनू जी : वो पैसा मुझसे ले लेना, लेकिन वो 10 घंटे मेरे होंगे।

    में : लेकिन।

    मोनू जी : लेकिन क्या?

    में : हम 10 घंटे कहाँ पर बितायेंगे?

    मोनू जी : उसकी चिंता तू मतकर बस।

    में : बस क्या?

    मोनू : बस यह कि कल तू मेरे साथ है और अपने बोबे मुझे देगी।

    में : ठीक है सुबह देखती हूँ।

    मोनू जी : साधना आज अपने पति से लास्ट बार चुदवा ले, उसके बाद तो तू मेरा ही लंड खाएगी।

    में : अच्छा, इतना आसान नहीं है।

    मोनू जी : जब लंड देखेगी तो पता चलेगा।

    में : अच्छा, आज रात में चुदवाती हूँ सुबह का सुबह देखेंगे।

    मोनू जी : कम चुदवाना, क्योंकि कल दिन में मुझसे चुदवाना है, तुझे पूरा नंगा करके चोदूंगा।

    में : ठीक है, में वैसे भी रात को नंगी स़ोती हूँ, ओके बाए।

    फिर मोनू जी बोले कि मेरी चूत का ध्यान रखना, अब वह तेरी नहीं मेरी है, ठीक है। तो तब में बोली कि रात में मेरा पति मुझे नंगा करके चुदाई करता है। फिर मैंने मेरे पति से कहा कि हम कम चुदाई करते है, मुझे सुबह जल्दी जाना है। तो वो मान गये और बोले कि कोई बात नहीं, तुम अपने कपड़े खोलकर सो जाओ। तो तब मैंने कहा कि ठीक है। फिर में उनकी बाँहों में ही नंगी सो गई। फिर में सुबह जल्दी से 9 बजे की जगह 8 बजे ही घर से निकल गई। फिर मैंने उन्हें फोन किया तो वो आ गये। ऐसा लग रहा था कि वो रात में सोए नहीं है। फिर कुछ दूर चलने के बाद मोनू जी ने मेरा हाथ पकड़कर अपनी जांघ पर रख दिया तो तब में बोली कि इतनी भी क्या जल्दी है? फिर मोनू जी ने फिर से मेरे हाथ को पकड़कर अपने लंड पर रख दिया। तब में बोली कि यह तो तैयार है। तो तब मोनू जी ने कहा कि आज इसे मस्त चूत मिलने वाली है। तो तब मैंने कहा कि हाँ वो तो है। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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    अब वो मुझे एक घर में ले आए थे। फिर अन्दर जाते ही उन्होंने मुझे जोर से पकड़ लिया और मेरे बोबे दबाने लगे। तो तब मैंने कहा कि आप इस तरह से मत करो, आराम से करो। फिर तब मोनू जी ने कहा कि ठीक है और अब वो अपने हाथ से आराम से मेरे बोबे दबा रहे थे। तब मैंने कहा कि क्यों ऐसे ही करोगे? मेरा ब्लाउज नहीं खोलोगे? तो तब वो बोले कि साधना आज सब कुछ खोलूँगा, तुझे पूरी नंगी कर दूंगा। तब मैंने कहा कि कर दो किसने रोका है? तो तब उन्होंने कहा कि आज दिखाता हूँ कि लंड क्या होता है? तो तब में बोली कि दिखाओ। फिर तब मोनू जी ने कहा कि दिखा रहा हूँ। तब में बोली कि ठीक है, आज में भी पूरे दिन आपका लंड देखने आई हूँ, में भी तो देखूं कि कितना दम है? जो भी कुछ है सामने आ जाएगा। फिर उन्होंने एक बार फिर से मेरे बोबो को अपने मुँह में लेने की कोशिश की तो तब में बोली कि पहले ब्रा तो खोलो। तब मोनू जी बोले कि नहीं तुझे तो ऐसे ही तडपाऊंगा और फिर मेरी गर्दन पर पप्पी कि झड़ी लगा दी। अब मोनू जी पीछे से मेरे बोबो को मेरी ब्रा के ऊपर से मसल रहे थे।

    अब मुझे उनके लंड का एहसास हो रहा था। अब वो मेरी ब्रा के ऊपर से मेरे बोबे बड़ी अच्छी तरह से मसल रहे थे, सच पूछो तो क्या मसल रहे थे? अब मुझे जन्नत जैसा एहसास हो रहा था। फिर मैंने अपने एक हाथ को पीछे ले जाकर उनके लंड को पकड़ा तो उनका लंड तो एकदम उठा हुआ था। फिर मोनू जी ने कहा कि अब अपनी साड़ी खोल दो। तब मैंने कहा कि आप ही खोल दो। फिर उन्होंने मेरी साड़ी को अलग करके मुझे ब्रा और पेटीकोट में घुमाया और फिर मोनू जी ने मेरा पेटीकोट खोल दिया और फिर बोले कि साधना थोड़ा घूम जा, तो में घूम गई। फिर वो अपने आप मेरे पास आए और मेरी पेंटी को खोलकर मेरी चूत को चाटने लगे। अब में मस्त होकर उनके मुँह को अपनी चूत पर दबा रही थी। अब उन्होंने मुझे खूब मस्त कर दिया था। फिर वो बोले कि अब अपनी ब्रा को खोल दो। तो तब मैंने कहा कि साड़ी, ब्लाउज, पेंटी आपने खोली है तो अब यह भी खोल दो।

    फिर उसने अपने आप ही मेरी ब्रा को खोलकर मुझे पूरा नँगी कर दिया। अब में अपनी शर्म छोड़कर उनकी गोदी में बैठ गई थी। अब उनका लंड मेरी गांड में टच हो रहा था। अब वो आराम से मेरे बोबे मसलकर मुझसे पूछ रहे थे।

    मोनू जी : साधना मुँह में लंड लोगी?

    में : नहीं जी।

    मोनू जी : क्यों पति का नहीं लेती हो?

    में : लेती हूँ ना, वो तो चलते फिरते अपने लंड को मेरे मुँह में डाल देते है।

    मोनू जी : तो फिर मेरा भी लो।

    में : चलो खोलकर निकालो।

    मोनू जी : तुम निकाल लो मेरी रानी, आह।

    में : आह मेरे राजा, वाह यह तो बड़ा मस्त है।

    मोनू जी : लेकर देख।

    में : हाँ वो तो लूंगी ही।

    मोनू जी : चल अपने मुँह में ले।

    में : हाँ, यार कम से कम बाल तो काटे होते यार।

    मोनू जी : गलती हो गई, ओके।

    अब में उनका लंड अपने मुँह में लेकर चूस रही थी। तब वो बोले कि क्या मस्त चूसती हो साधना? मजा आ गया, सच में ऐसा लगता है कि तू रोज मुँह में लेती है और अब मोनू जी आआ ऊहहह, करने लगे थे। अब वो अपने आपको काबू में नहीं रख पा रहे थे और बोले जा रहे थे साधना तू रोज मुँह में लिया करना, सच में मुझे मजा आ गया, मैंने बहुत बार मेरी बीवी को चोदा, मुँह में दिया, लेकिन वो मजा नहीं आया, जो तुने मुझे दिया है, मस्त रांड है तू तो। तब मैंने कहा कि में रांड नहीं हूँ। फिर थोड़ी देर के बाद उसने मेरे मुँह में ही अपना वीर्य छोड़ दिया। अब में अपने मुँह में से उनके लंड को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी। अब उन्होंने मेरा सिर दबा दिया था और उनका सारा का सारा वीर्य मेरे मुँह में भर गया था। अब में मोनू जी के साथ नंगी बराबर में लेट गई थी और अपने बोबो को उनके मुँह में दे दिया था, जिसे उन्होंने चूस-चूसकर लाल कर दिया था। फिर में बोली कि आप तो फ्री हो गये, चलो ना मेरी चूत चाटो। अब इस दौरान वो खुद ही मेरी चूत को चाटने लगे थे और भगवान जाने क्या-क्या बोल रहे थे? आह बहुत मजा आ रहा है और अपनी एक उंगली अन्दर बाहर करके चोद रहे थे। अब में झड़ने की तैयारी में थी।

    फिर में बोली कि मोनू जी मेरी क्रीम को खाओगे? तो तब उन्होंने कहा कि हाँ मेरी जान, चल दे और फिर उन्होंने अपना मुँह मेरी चूत पर रख लिया और मेरा सारा का सारा जूस पी गये। फिर में 30 मिनट तक ऐसे ही उन्हें अपनी बाँहों में लेकर पड़ी रही। फिर उन्होंने मुझसे पूछा कि साधना कैसा है मेरा लंड? तब मैंने कहा कि बहुत ही मस्त है, लेकिन सिर्फ चूसने में। तब मोनू जी ने कहा कि चल अब तेरी चूत मारता हूँ। फिर मैंने कहा कि इतनी भी जल्दी क्या है? अभी तो 1 घंटा ही हुआ है बाकि 9 घंटे क्या करोगे? तो तब मोनू जी बोले कि मेरे लंड पर बिठाऊँगा। तब मैंने कहा कि अच्छा लो बैठ जाती हूँ। तो तब मोनू जी बोले कि हाँ आजा मेरी पत्नी। तब में बोली कि आ गई पतिदेव। फिर उन्होंने मेरी दोनों टांगे खोलकर अपना 7 इंच लम्बा लंड मेरी चूत में डाल दिया और जोर-जोर से चोद रहे थे। अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

    फिर मोनू जी ने कहा कि साधना हम एक दूसरे को अपने-अपने तरीके से गाली गलौज करके चोदते है। तो तब मैंने कहा कि ठीक है। फिर मोनू जी बोले कि रंडी क्या मस्त चुदवाती है तू? तो तब मैंने कहा कि साले तेरी बीवी तो किसी काम की नहीं है। तब मोनू जी बोले कि तभी तो तेरे पास आया हूँ। तब मैंने कहा कि चोद जब तक जी चाहे, जोर-जोर से चोद। फिर मोनू जी बोले कि जान तेरे पास सब कुछ है, गांड दिखाने के लिए, बोबे दबाने के लिए, मस्त रंडी है तू। फिर तब मैंने कहा कि हाँ हूँ, लेकिन तू भड़वा है, तू अपने दोस्त की बीवी को चोद रहा है। अब वो मेरी दोनों टांगे अपने कंधे पर रखकर जबरदस्त तरीके से अपना लंड पेल रहे थे। फिर में 20 मिनट के बाद बोली कि अब में झड़ने वाली हूँ। तब मोनू जी बोले कि झड़ जाओ, लेकिन में तो आपको चोदूंगा। तब मैंने कहा कि हाँ मेरे राजा चोदो जितना मर्जी हो चोदो, में मना नहीं करूंगी, धक्के पर धक्के मार-मारकर मेरी चूत का भोसड़ा बना दो। फिर थोड़ी देर के बाद उन्होंने पूछा कि अन्दर झड़ जाऊं। तब मैंने कहा कि झड़ जाओ। फिर उन्होंने अपना सारा वीर्य मेरी चूत के अंदर ही छोड़ दिया और मेरे ऊपर ही लेट गये।

    फिर मैंने मेरा एक बोबा उनके मुँह में दे दिया और उनसे कहा कि मेरे राजा मेरा पति थक गया है, आजा दूध पी ले। फिर मोनू जी बोले कि अब से सब कुछ मेरा है ना। तब मैंने कहा कि हाँ मेरे पति सब कुछ तुम्हारा है। तब मोनू जी ने कहा कि झूठ कल बुलाऊंगा तो मना कर देगी, चल लंड फिर से खडा हो जा, मार ले इसकी गांड, चूत, मुँह में, जहाँ चाहे दे दे कल मिले ना मिले किसने देखा है? तो तब मैंने कहा कि मोनू जी जब भी आपका दिल करे आ जाना, में भी आपकी, यह चूत, यह शरीर भी आपका बस। फिर उस दिन उन्होंने दो बार घोड़ी बनाकर और तीन बार चूत में चोदा, सही बताऊँ तो में तो उनकी दिवानी हो गई थी। अब 10 दिन तक लंड नहीं मिले तो भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। में अभी भी उनसे चुदाई करवाती हूँ और खूब मजे लेती हूँ ।।

    धन्यवाद .

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