अंजली माँ बनी रज़िया बेगम

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Oct 4, 2016.

  1. 007

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    //krot-group.ru हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम अभिषेक है और मेरी उम्र 23 साल है। में उड़ीसा से हूँ और आज में आप सबको अपनी एक सच्ची स्टोरी बताने जा रहा हूँ। ये 2 साल पहले की बात है, तब में 21 साल का था और इंजिनियरिंग के तीसरे साल की पढाई कर रहा था। मेरी फेमिली में हम 3 लोग थे में, माँ और पापा। मेरे पापा एक बैंक में कर्मचारी है और मेरी माँ हाउसवाईफ है। उनका नाम अंजली है, उम्र 43 साल, वो दिखने में बहुत गोरी और सुन्दर है। हमारा एक ड्राइवर था उसका नाम असलम था, वो मुस्लिम था, वो बहुत अच्छा आदमी था, वो माँ को भी बहुत मदद करता था, ये स्टोरी मेरी माँ और असलम की है।

    दोस्तों मेरी माँ और पापा के बीच में बहुत झगड़े होते थे, मुझे पता नहीं क्यों? लेकिन रोजाना झगड़े होते थे, तो एक दिन पापा ने माँ को तलाक दे दिया। फिर पापा ने उनके ऑफिस की एक करीबी लेडिस से शादी की और वो दोनों साथ में रहने लगे। अब तलाक के बाद माँ और में हमारे घर में रहने लगे, जो पापा ने तलाक के बाद दिया था, तब असलम ने भी हमारी नौकरी छोड़ दी और खुद की टैक्सी चलाने लगा। अब उनके तलाक के बाद लाईफ थोड़ी मुश्किल हो गयी, लेकिन जैसे तैसे हम लोग अपना गुजारा करने लगे, अब में इंजिनियरिंग के साथ-साथ पार्ट टाईम जॉब भी करने लगा और जैसे तैसे अपनी इंजिनियरिंग की पढाई पूरी की, लेकिन जब हम लोग अलग रहते थे, तब असलम रोजाना हमारे घर माँ को हर तरह की मदद करने के लिए आता था, मुझे इसमें कुछ ग़लत नहीं लगता था।

    अब में और असलम बहुत फ्री रहते थे, अब हम लोग साथ बैठकर दारू भी पीते थे और लड़कियों की बात करते थे। फिर एक दिन जब में और असलम साथ में बैठकर दारू पी रहे थे, तो असलम ने मुझे मेरी माँ के बारे में बोला कि वो मेरी माँ को बहुत प्यार करता है और शादी करना चाहता है। अब में ये सुनकर हिल गया और मेरा सारा नशा उतर गया। फिर मैंने उससे पूछा कि वो इतना गंदा मज़ाक कैसे कर सकता है? लेकिन वो बहुत सीरीयस था और बार-बार एक ही बात बोल रहा था कि वो मेरी माँ से बहुत प्यार करता है। फिर मैंने उससे पूछा कि क्या ये बात मेरी माँ जानती है? तो उसने कहा कि हाँ मेरी माँ जानती है और उन्हें कोई प्रोब्लम भी नहीं है। अब ये बात सुनकर मुझे और शॉक लगा। अब में उससे और कुछ नहीं बोला और चुपचाप घर चला गया। अब मेरे दिमाग़ में एक ही बात चल रही थी कि कब से इनका अफेयर चल रहा है? और मुझे ये ही लग रहा था कि असलम हमारे घर रोजाना मेरी माँ से मिलने आता था और वो लोग रोजाना सेक्स करते होंगे? लेकिन मैंने माँ से इसके बारे में कुछ नहीं पूछा और चुपचाप घर आकर सो गया।

    फिर अगले दिन जब में असलम से मिला, तो फिर मैंने उसको पूछा कि क्या ये सब बात सच है? तो उसने फिर से वही बोला कि हाँ ये सब बात सच है। तब मैंने उससे सीधे-सीधे पूछा कि वो मेरी माँ को कब से चोद रहा है? तो उसने कहा कि उसने आज तक कभी मेरी माँ को हाथ भी नहीं लगाया है, वो जो भी करेगा शादी के बाद ही करेगा। तब मैंने घर जाकर मेरी माँ से इसके बारे में पूछा, तो माँ हैरान हो गयी कि मुझे ये सब पता चल चुका है, लेकिन फिर भी वो हिम्मत करते हुए बोली कि हाँ वो असलम से शादी करना चाहती है। तब मैंने सोचा कि अगर माँ को इसमें खुशी मिलेगी, तो मुझे बीच में नहीं आना चाहिए। तब मैंने माँ से कहा कि माँ आप जो भी करना चाहती है करो, लेकिन एक बार सोच लो, क्योंकि वो हमारा ड्राइवर था और कोई सुनेगा तो क्या बोलेगा? तब माँ बोली कि बेटा में सिर्फ़ उसी से शादी करना चाहती हूँ। तब मैंने और कुछ नहीं बोला और उनको बोला कि जो तुम दोनों को अच्छा लगे वो करे, अब असलम भी खुश था और माँ भी खुश थी।

    फिर एक दिन असलम आया और मुझे और माँ से बोला कि वो आज हम दोनों को अपने घर घुमाने के लिए ले जायेगा। फिर वो हमें अपने घर लेकर गया, उसके घर में उसके अब्बू, अम्मी, एक छोटा भाई और एक छोटी बहन थी, वो लोग काफ़ी ग़रीब थे। असलम के छोटा भाई अल्ताफ़ का एक गेराज था, उसका अब्बू बहुत बुढ़ा हो चुका था और बेड पर ही थे। फिर उसकी अम्मी मेरे माँ को देखकर बहुत खुश हुई और बोली कि वाह मेरा बेटा तो किसी अप्सरा को ले आया है, तब मेरी माँ शर्मा गयी। फिर असलम के भाई और बहन दोनों ने आकर मेरी माँ को भाभीजान-भाभीजान कह कर नमस्ते किया। तब असलम की अम्मी ने कहा कि आज से तुम्हारा नाम अंजली नहीं रज़िया होगा और जल्दी ही तुम दोनों की शादी होगी। फिर हम सबने मिलकर वहाँ खाना खाया और वापस आ गये, उस दिन माँ बहुत खुश थी और उस दिन के बाद माँ और असलम फोन पर घंटो बात करते थे।

    फिर एक दिन असलम हमारे घर आया और बोला कि 2 दिन के बाद हम दोनों की शादी होगी, पहले कोर्ट मैरिज और फिर उसके बाद उनके घर पर उनके तरीके से निकाह होगा। अब माँ ये सुनकर बहुत खुश हो गयी और शरमा कर अंदर चली गयी। फिर हम सबने मिलकर उनकी शादी की तैयारी की और फिर 2 दिन के बाद हम सब मिलकर कोर्ट गये और उनकी कोर्ट मैरिज हुई और उसी शाम को घर लौटने के बाद असलम की अम्मी, बहन और कुछ रिश्तेदार रज़िया को अंदर कमरे में लेकर गये और नई दुल्हन की तरह तैयार किया। फिर जब मेरी माँ बाहर आई, तो में देखकर हैरान हो गया, मेरी माँ दुल्हन कि तरह सजकर बहुत खूबसूरत लग रही थी। फिर में माँ के पास गया और बोला कि माँ आप बहुत खूबसूरत लग रही हो, असलम बहुत लकी है कि उसे आप जैसी बीवी मिली है, तो वो शरमा गयी और चली गयी। अब में पूरी शाम बस मेरी माँ को देखता रहा कि मेरी माँ दुल्हन बनकर कितनी सुंदर लग रही है। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

    फिर उनका घर पर निकाह हुआ और अब बारी सुहागरात की थी। उनका घर बहुत छोटा था तो एक बड़ा रूम जो था उसे सुहागरात के लिए तैयार कर दिया, तो बाकी सब लोग हॉल में ही सोने वाले थे। अब सबने निकाह के बाद काफ़ी इन्जॉय किया और जब असलम के दोस्त और रिश्तेदार जो आए थे, सब चले गये थे। उसके बाद असलम रूम के अंदर चला गया और अपनी बहन को इशारा किया कि वो मेरी माँ यानी अब उसकी बेगम रज़िया को कमरे में लेकर जाए। फिर उसकी बहन ने मेरी माँ को पकड़ कर रूम की तरफ कर दिया। अब मेरी माँ काफ़ी शरमा रही थी कि वो अपने बेटे के सामने अपनी सुहागरात मनाने वाली है। फिर वो कमरे में चली गयी और असलम ने दरवाजा बंद कर दिया। अब में बहुत उत्तेजित था कि काश में अपनी माँ की सुहागरात देख सकूँ, लेकिन शायद ये संभव नहीं था, लेकिन पूरा असंभव भी नहीं था। अब में कुछ नहीं देख सका, लेकिन मुझे उनकी सारी बातें और आवाज़ें बाहर साफ़-साफ़ सुनाई दे रही थी, क्योंकि उनका घर काफ़ी छोटा था।

    असलम - रज़िया बेगम, आप हमारी शादी से खुश तो हो ना?

    रज़िया - बहुत खुश हूँ, लेकिन आप भी मुझे तलाक मत दे देना, मैंने आप पर बहुत भरोसा किया है।

    असलम - नहीं जानू बिल्कुल नहीं, में आपसे बहुत प्यार करता हूँ।

    फिर कहते हुए उसने रज़िया को ज़ोर से 3-4 किस दिए, जिसकी आवाज़ बाहर साफ़-साफ़ सुनाई दे रही थी।

    असलम - पहले में आपको मेडम कह कर नमस्ते करता था और आज आप मेरी बेगम बनकर मेरे बिस्तर पर सजकर मेरे से चुदने के लिए बैठी हो, कैसा लग रहा है?

    रज़िया - बहुत अच्छा लग रहा है, अब आप ही मेरे सब कुछ हो, आप जो बोलोगे में वो करूँगी, में आपको हमेशा खुश रखूँगी।

    अब शायद असलम ने अपने कपड़े और रज़िया के भी कपड़े खोल दिए थे, तभी मुझे माँ की आवाज़ सुनाई दी।

    रज़िया - असलम तुम्हारा इतना बड़ा है, मुझे तो बहुत दर्द होगा मेरी तो चूत ही फट जायेगी।

    असलम - डरो मत रज़िया जानू, में तुम्हें प्यार से चोदूंगा और सिर्फ़ चूत ही नहीं आज तुम्हारी गांड भी मारूँगा।

    रज़िया - नहीं गांड नहीं मारना प्लीज़, मुझे बहुत दर्द होगा मैंने कभी मरवाई नहीं है।

    असलम - थोड़ा दर्द होगा, लेकिन बाद में बहुत मज़ा आयेगा, में प्यार से मारूँगा।

    रज़िया - ठीक है, अगर उससे आपको खुशी मिलेगी तो मार लो, लेकिन धीरे-धीरे मारना।

    असलम - रज़िया पहले मेरे लंड को चूस कर बड़ा तो करो।

    रज़िया - मैंने कभी चूसा नहीं है, पहले तुम सीखा दो ना प्लीज़।

    असलम - ठीक है, अपना मुँह खोलो, में सिखाता हूँ।

    उसके बाद शायद माँ ने काफ़ी देर तक लंड चूसा, क्योंकि कमरे में उनके बीच कोई बातें नहीं हुई, फिर कुछ देर के बाद अचानक।

    रज़िया - असलम आआहह, प्लीज धीरे से बहुत दर्द हो रहा है, तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है आआहह ओह में मर गयी आहह।

    अब में समझ गया कि अब असलम ने माँ को चोदना शुरू कर दिया है। फिर अचानक मुझे धीरे-धीरे हंसने की आवाज़ सुनाई दी, तो मैंने पीछे मुड़कर देखा तो सिर्फ़ में नहीं बल्कि असलम का भाई, बहन और अम्मी, वो तीनों भी सब सुन रहे थे और उसकी अम्मी हंस रही थी।

    असलम - मेरी रानी अपने नये पति के साथ कैसा लग रहा है? मेरी रानी आज से तो तू रोज़ इसी तरह चुदेगी।

    रज़िया - में यही सोचकर तो परेशान हूँ कि तुम्हें रोज कैसे खुश करूँ? आज ही इतना दर्द हो रहा है आअहह इतना बड़ा है, आहह मेरी तो चूत फट जायेगी।

    असलम - अब आदत डाल दो बेगम, क्योंकि रोज़ मुझे इसी तरह खुश करना पड़ेगा।

    फिर करीब 30 मिनट तक मुझे सिर्फ़ रज़िया की चिल्लाने की आवाज़ें आती रही आहह ओह में मर गयी, छोड़ो मुझे, छोड़ मुझे, इसी तरह वो चिल्लाती रही।

    फिर अचानक से।

    असलम - अब कुत्तिया बनकर खड़ी हो जाओ रज़िया बेगम।

    रज़िया - नहीं असलम नहीं प्लीज़, तुम्हारा इतना बड़ा है कि मेरी चूत में ही दर्द हो रहा है तो मेरी गांड तो सच में फट जायेगी।

    असलम - कुछ नहीं होगा जानू, में बहुत प्यार से धीरे-धीरे डालूँगा।

    फिर जैसे तैसे रज़िया मान गयी और उसने गांड में मारना शुरू किया, अब तो वहाँ सोना मुश्किल था, क्योंकि इतनी ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ें आने लगी थी।

    रज़िया - आआहह इष्ह में मर गयी असलम, मुझ पर रहम करो, निकाल दो अपना लंड, बहुत दर्द हो रहा है।

    असलम - मेरी रानी थोड़ा से लो, बहुत मज़ा आयेगा।

    इसी तरह असलम लगभग 20 मिनट तक मेरी माँ की गांड मारता रहा और रज़िया चिल्लाती रही। फिर कुछ देर के बाद सब शांत हो गया और हम लोग भी सो गये। फिर अगली सुबह जब माँ रूम से बाहर निकली, तो वो शर्म के मारे किसी से नज़र नहीं मिला रही थी। फिर मैंने माँ से कहा कि माँ में घर जा रहा हूँ, तो माँ ने मुझे प्यार से एक किस किया और बोला ठीक है जाओ, लेकिन रोज़ मिलने आना, तो मैंने कहा कि ठीक है और में अपने घर चला गया। अब मुझे घर में बिल्कुल अकेला-अकेला लगने लगा, तो मैंने माँ से कहा तो वो बोली कि उन्होंने असलम से बात की है और में भी उनके साथ रहूँगा, तो हमने अपना घर बेच दिया और अब में भी उनके साथ रहने लगा।

    अब हम लोगों ने मिलकर एक छोटा सा टूर और ट्रेवल्स का बिज़नस खोला और सब साथ में रहने लगे। अब असलम को में कभी-कभी माँ के सामने अब्बू भी बोल देता हूँ, तो माँ हंस देती है। अब में रोज़ अपनी माँ की चुदने की आवाज़ें सुनता हूँ, अभी उनके एक छोटा बेटा भी है और आजकल मेरी माँ मुझसे ज़्यादा शरमाती भी नहीं है और कभी-कभी माँ मेरे सामने भी अपने बच्चे को दूध पिला देती है। ये सब मुझे देखकर बहुत अच्छा लगता है, आजकल में और असलम जब साथ में दारू पीते है, तो मेरी माँ भी वहाँ बैठी रहती है और मेरे सामने ही असलम मेरी माँ को यहाँ वहाँ टच करता है और उनके बूब्स भी दबाता है और अब मुझे भी ये सब देखने में बहुत मज़ा आता है ।।

    धन्यवाद .
     
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