एक सीकरेट एजेंट - Secret Agent Sex Story - 23

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Apr 27, 2016.

  1. 007

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    एक सीकरेट एजेंट - Secret Agent Sex Story - 23
    पॉलिसी फक और फर्गेट वाली थी. रोमिला मे जाने क्या खूबी थी की वो उसके साथ ऐसे पेश नही आ सका था. नशे मे उसके पहलू मे गार्क होकर जाने क्या

    कुछ वो बकता था. अब लड़की उससे उखाड़ गयी, उखाड़ कर जाने वह कहा-कहा क्या वाहितवाही बकती. जो कुछ उस आइलॅंड पर ख़ुफ़िया तरीके से चल रहा था,

    उसकी रु मे लड़की का उसके अंगूठे से निकल जाना मेजर सेक्यूरिटी रिस्क बन सकता था.
    नही, नही, वो खुद ही आपनी सोच से घबरा गया था, ऐसा नही होना चाहिए था, उसका मिलना ज़रूरी था.
    ताकि उसको फ़ौरन एलिमिनेट किया जा सके और सेक्यूरिटी रिस्क को कम किया जा सके.
    वापसी मे उसने खुद काई बार और कलूबो के चक्कर लगाए और रोमिला सावंत की बाबत दर्याफ़्त किया. वो आइलॅंड का थानेदार था इसलिए उशे यकीन था की

    कोई उससे झूठ बोलने की हिम्मत नही कर सकता था.
    हर जगह से एक ही जवाब मिला.
    नही, रोमिला वाहा नही आई थी.
    सिवाय लीडो क्लब के.
    हन, कोई टीन घंटे पहले रोमिला वाहा आई थी और उसने वाहा की करमाला नाम की एक बारबाला से कुछ रुपये उधार हासिल करने की कोशिश की थी.
    कोशिश कामयाब हुई थी.
    नही, बारबाला उसको उधार देने की स्तिति मे नही थी, या उधार देना नही चाहती थी. तब रोमिला फ़ौरन ही वाहा से चली गयी थी.
    वापसी मे वो फिर जमशेद जी पार्क के सामने से गुजरा.
    बेवड़ा तब भी दीं-दुनिया से बेख़बर बेंच पर पड़ा था. उसके पोज़ तक मे कोई तब्दीली नही आई थी. उसकी एक बाँह तब भी नीचे लटकी हुई थी और

    उंगलिया घास पर पड़ी खाली बोतल को चू रही थी.
    ज़रूर पूरी बोतल अकेला ही चढ़ा गया था.
    एकबारगी उशे ख़याल आया की वो ही उशे जीप पर लाद ले और थाने ले चले लेकिन उशे मंजूर ना हुआ की एक मातहत हवलदार का काम खुद थाने का

    शो करे.
    वो ही करेगा खुद का काम, उसने आपने आप को समझाया, थाने पहुच कर तलब कराता हू सेयेल को.
    जीप को आयेज बढ़ाने से पहले उसने डॅशबोर्ड पर चमकती घड़ी पर एक निगाह डाली.
    एक बजा था.
    तब एकाएक उशे ख़याल आया की उसने इतने तीयओ की नाकाम खाक छानी थी लेकिन एक जगह उसके जहाँ से उतार गयी थी जो की एकाएक उशे तब याद आई थी.
    सेलर्स बार.
    जो की ओल्ड याच क्लब के करीब था.
    वो उस बार से बखूबी वाकिफ़ था, आख़िर आइलॅंड का मालिक था. इसलिए जानता था की वो बहुत ही घटिया दर्जे का बार था और वैसी ही उसकी क्लिंट लिस्ट थी. रोमिला

    जैसी चिकनी, ठस्सेदार लड़की की वो वाहा कल्पना नही कर सकता था. लेकिन क्या पता लगता था, क्या पता वो इशी वजह से वाहा गयी हो क्योंकि कोई भी उसकी

    वाहा कल्पना नही कर सकता था.
    उसने सेलर्स बार का भी चक्कर लगाने का फ़ैसला किया.
    जब इतनी जगहो की खाक छानी थी तो एक जगह और सही.

    -------------

    सेलर्स बार के मालिक का नाम रामदास मानवर था जो की वाहा का बारमेन भी था.
    उसके हुकुम पर बार के बाहर लगा विशाल नीयान बोर्ड साइन ऑफ कर दिया गया था, किचन और बार सर्विस बंद की जा चुकी थी, भीतर की भी ज़्यादातर बत्तिया

    बुझाई जा चुकी थी और खाली मेज पर कुर्सिया उल्टा कर रख दी गयी थी ताकि सुबह फर्श ढोने मे कोई दिक्कत पेश ना आती.
    ग्राहक या तो सब आपनी मर्ज़ी से उठ कर जा चुके थे या जाने को मजबूर किए जा चुके थे.
    सिवाय एक नौजवान, पताका लड़की के जो की बार के एक कोने मे बार स्टूल पर बैठी हुई थी.
    आपनी तरफ से चलता मानवर उसके सामने पहुचा.
    लड़की ने सिर ना उठाया.
    मानवर हल्के से खाँस.
    लड़की के सामने एक गिलास था जो वोड्का-लाइम से दो-तिहाई भरा हुआ था और पता नही कब से उसने उसमे से घूँट नही भरा था.
    उसने गिलास पर से सिर उठाया.
    " मेरे को बार बंद करने का " मानवर खुश्क स्वर मे बोला.
    लड़की की निगाह स्वयमेव ही वॉल क्लॉक की तरफ उठ गयी.
    " 5 मिनिट और प्लीज़ " रोमिला अनुनायपूर्ण स्वर मे बोली.
    " पाँचवी बार 5 मिनिट और कह रही हो. खाली तुम्हारी वजह से मैं इधर है वरना अभी तक घर पहुच गया होता. सारा स्टाफ नक्की कर गया लेकिन मैं

    साला अभी भी इधर है "
    " सॉरी, बस पाँच मिनिट और. बस, आख़िरी बार बोली मैं , मेरा एक फ़्रेंड इधर आने वाला है, बस, आता ही होगा "
    " दो घंटे से इधर हो, दो घंटे मे नही आया तो अब क्या आएगा "
    " आएगा, पहले कॉंटॅक्ट नही हुआ ना, अभी 15 मिनिट पहले कॉंटॅक्ट हुआ ना, वो चल चुका है, बस, आता ही होगा "
    " मैं और इंतजार नही कर सकता, घर से दो बार बीवी का फोन आ चुका है. मैं सॉरी बोलता है, मेरे को क्लोज़ करने का, बाहर जाकर फ्रेंड का इंतज़ार करो "
    " मैं तुम्हारे टाइम की फीस भर सकती हू "
    " फीस भर सकती हो, क्या फीस भर सकती हो "
    " जो तुम बोलो "
    " जो फीस मैं बोलू, उसको भरने का रॉकदा है तुम्हारे पास "
    " मेरा फ्रेंड आके देगा ना "
    " नही चलेगा, आउट प्लीज़ "
    " बस थोड़ी देर और प्लीज़ "
    " नो "
    " मेरे पास इस ड्रिंक का पेमेंट करने का भी रॉकदा नही है "
    " वांडा नही, कन्सिडर युवर ड्रिंक ऑन थे हाउस "
    " प्लीज़ मैं . "
    " वॉट प्लीज़, मेरे को रात इधर खोती नही करने का, बाहर चलो "
    " लेकिन. "
    " ठीक है बैठो, मैं लॉक करके जाता है "
    मानवर ने एक नाइट लाइट को छोड़ कर बाकी बची बत्तिया बंद की और सच मे ही बाहर को चल दिया.
    रोमिला स्टूल पर से उठी और बार-बार घड़ी पर निगाह डालती बाहर को चल पड़ी.
    आपने ड्रिंक की तरफ उसने झाँक कर भी ना देखा.
    वो बाहर जाकर बार के आयेज सायबाण के नीचे खड़ी हो गयी.
    मानवर बाहर निकला, उसने ताले लगाए और चाबिया एक थैले के हवाले की. उसने संजीदगी से करीब खड़ी, बेचैनी से पहलू बदलती, परेशानहाल रोमिला

    की तरफ देखा.
    " किधर की लिफ्ट माँगता है तो बोलो " वो सहानुबहोतिपूर्ण स्वर मे बोला.
    " अरे, मैने बोला ना की मेरा एक फ्रेंड इधर आने वाला है " रोमिला चिढ़ कर बोली," फिर कैसे इधर से जा सकती हू "
    मानवर ने लापरवाही से कंधे उचकाय. परे एक ज़ेन खड़ी थी जिसमे वो जा सवार हुआ. कार को सड़क पर डालने के लिए उशे बॅक करना ज़रूरी था.




    उसने वैसा किया तो वो एक बार फिर रोमिला के करीब पहुच गया था.
    " रात के इस टाइम यहा से कोई टॅक्सी या ऑटो मिलना बहुत मुश्किल है " वो बोला," सोच लो, अगर फ्रेंड नही आया तो रात इधर ही कटेगी "
    " हमदर्दी का शुकरिया, अब पीछा छोड़ो "
    " स्पेशल करके फ्रेंड है, गॅरेंटी की ज़रूर आएगा "
    " हाँ "
    " ओ.क, गुड लक और गुड नाइट "
    पीछे रोमिला अकेली खड़ी रह गयी.
    जो अंदेशा वो जाहिर करके गया था उसमे दूं था. नीलेश के ना आने की सूरात मे उसको भारी परेशानी का सामना करना प़ड़ सकता था, उसकी दुश्वारीयो

    मे एक नयी दुश्वारी का इज़ाफा हो सकता था.
    वो नीलेश को वापिस फोन भी नही कर सकती थी क्योंकि उसके मोबाइल का चार्ज ख़त्म था, पहले भी उसने बार के प्फो से फोन किया था.
    वो जगह आइलॅंड के घने बसे और रोनक वाले हिस्से से, जो की वेस्टलॅंड कहलाता था, बहुत बाहर था इसलिए जाहिर था की नीलेश ने बहुत फ़ासले से आना था

    और आना कैसे था इसकी उशे कोई खबर नही थी. वो जानती थी की खुद का कोई वाहन उसके पास नही था और रात की उस घड़ी पब्लिक ट्रांसपोर्ट मिलने मे

    दिक्कत हो सकती थी.
    दुश्वारी के उस आलम मे वो सब आपने आप को तस्सल्ली थी वरना क्या पता की उसका ख़याल बदल गया हो और उसने उधर का रुख़ भी ना किया हो. उसने उससे

    रॉकदा भी तो माँगा था. क्या पता रॉकदे की वजह से बिदाक गया हो और मुँह छुपा के बैठ गया हो.
    नीलेश वाहा पहुचे ही नही इस ख़याल ने उशे बहुत डराया.
    रात की उस घड़ी वो उजाड़, बियबाण जहा परिंदा भी पर नही मार रहा था. करीब ओल्ड याच क्लब थी लेकिन वो आइलॅंड का एक पुराना लॅंडमार्क ही था. वो एक

    मुद्दत से बंद थी और अब तो उसकी इमारात भी खंडहर होती जा रही थी.
    जहा वो खड़ी थी वाहा रोशनी का साधन सायबाण मे टिमटिमाता एक बीमार सा बल्ब था, बार का मालिक जिशे शायद उशी की सहूलियत के मद्देनजर जलता

    छोड़ गया था. उस वीराने मे और नीमंढेरे मे अब उशे बाक़ायड़ा दर लगने लगा था.
    उसने सामने निगाह दौड़ाई.
    सड़क से पार का इलाक़ा पहाड़ी था और वाहा बिखरे-बिखरे से कुछ मकान बने हुवे थे. उनमे से काफ़ी फ़ासले के सिर्फ़ एक मकान मे रोशनी थी, बाकी सब

    अंधेरे के गर्त मे डूबे हुवे थे.
    बावक्त ज़रूरात क्या उशे उस रोशन मकान से कोई मदद हासिल हो सकती थी.
    और नही तो वो वाहा से नीलेश का फोन ही ट्राइ कर सकती थी.
    फिर आपनी नाकारातमान सोच पर उशे खुद ही गुस्सा आने लगा.
    नीलेश आएगा, उसने खुद को तस्सली दी, ज़रूर आएगा. वो वादाखिलाफी नही कर सकता. रॉकदे के बड़े मे वो आकर आपनी कोई मजबूरी जाहिर कर सकता है

    लेकिन आने मे कोताही नही कर सकता.
    वो कोई आम आदमी नही था जो आम आदमियो की तरह आम हरकतें कराता, ख़ास आदमी था वो.
    ख़ास आदमी.
    क्या ख़ासियत थी उसमे, कौन था वो. आइलॅंड पर किस फिराक मे था. किसी फिराक मे तो बराबर था. उसकी हरकतें ही ऐसी थी जो की गनीमत थी की सिर्फ़ उसकी

    तीखी निगाह मे ही आई थी.
    कौन था.
    क्या उस गोवनी रसेटिएर फ्रांसिस मगनारो के किसी दुश्मन का, किसी प्रोफेशनल राइवल का कोई जासूस था.
    नही, नही, दुश्मन का जासूस तो कोई दुश्मन जैसा ही रसेटिएर, गॅंग्स्टर, मवाली होता. नीलेश तो उशे भला आदमी जान पड़ा था.
    उसकी ये भी मजबूरी थी की आपनी कोन्सिका क्लब की कोल्लेगुएस मे से किसी से माली मदद माँगने वो नही जा स्काती थी. क्लब मे उसकी इतनी करीबी दो ही बारबालाए

    थी, यासमीन और डिंपल, लेकिन उस घड़ी उसका उन पर भी अएतबार नही बन रहा था, उनमे से कोई भी उसकी खबर पुजारा को कर सकती थी और पुजारा उसकी

    बाबत आयेज महाबोले को खबरदार कर सकता था.
    महाबोले के ख़याल से ही उसके शरीर मे झुरजुरी दौड़ गयी. उसने महाबोले से पंगा लिया था जो की उसकी सबसे बड़ी ग़लती थी. उसकी आमद के वक़्त उशे सदानंद रावले को घर नही लाना चाहिए था. वो भी किया तो शायद उसकी ख़ाता माफ़ हो जाती लेकिन उसने तो बाक़ायदा उसके साथ ज़ुबानदरजई की, उशे हूल दी की वो उसका, महाबोले का ऐसा बुरा कर सकती थी जो उशे बहुत भारी पड़ता.
    क्यो जोश मे उसका माता फिर गया था और वह महाबोले जैसे दरिंदे की मूँछ का बाल नोचने पर आमादा हो गयी थी.
    हिम्मत करके वो लीडो क्लब की करमाला से, जो की पहले कोन्सिका क्लब मे उसके साथ बारबाला थी, मदद माँगने गयी थी लेकिन करमाला ने सॉफ बोल दिया था की उसके पास उशे देने के लिए छोटा-मोटा रॉकदा भी नही था.
    जो की सरासर झूठ था, कमीनी देना ही नही चाहती थी, उसकी कोई मदद करना ही नही चाहती थी, उसके सामने ही ऐसा मिज़ाज दिखा रही थी जैसे उसकी आमद से बेजार हो.
    कोना-कोना आइलॅंड का रुख़ करना उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी ग़लती थी लेकिन गोआ मे रॉनी दसौजा ने उशे ऐसे अबजबाग दिखाए थे, ऐसा यकीन दिलाया था की वो आइलॅंड पर चाँदी काट-ती की आपने बॉस मगनारो के साथ जब उसने आइलॅंड का रुख़ किया था तो वो भी उसके साथ चली आई थी. वाहा पहुच कर ही उशे मालूम हुआ था की आने वाली संभ्रांत टूरिस्ट महिलाओ मे से आधी वाहा आती ही ख़ास मौज-मेले की तलब लेकर थी इसलिए ईज़ी ले थी और उस जैसी बारबालो का धंधा बिगाड़ती थी.
    रॉकदे की ज़रूरात उसको इसलिए तो थी ही की उसकी जेब खाली थी, उसका सब सामान पीछे बोरडिंग हाउस मे छूट गया था, इसलिए भी थी क्योंकि रॉकदे की मजबूती के बिना वो आइलॅंड से कूच नही कर सकती थी. स्टीमर पर कदम रखने के लिए वो पीओर पर कदम भी रखती तो पालक झपकते ही महाबोले की गिरफ़्त मे होती. सेलर बार मे ही उशे एक सेलर मिला था जो स्टीमर के पीओर छोड़ चूकने के बाद उशे बीच समुद्रा मे उस पर चढ़ा देने का जुगाड़ कर सकता था.
    वो इस हक़ीकत से वाकिफ़ थी की आइलॅंड पर कोस्ट गार्ड्स की छावनी थी और छावनी का आपना प्राइवेट पीओर था. उस सेलर का ऐसा दावा था की उधर भी उसका ऐसा जुगाड़ था की वो मोटरबोट पर उसको वाहा से पिक कर सकता था. लिहाजा उसने कब, कैसे आइलॅंड छोड़ा, किसी को हरगिज़ खबर ना लगती.
    फीस दो हज़ार रुपये.
    एक बार आइलॅंड से निजात मिल जाने के बाद फिर आयेज की आयेज देखी जाती.
    महाबोले की ताक़त आइलॅंड तक ही सीमित थी, उशे यकीन था की आइलॅंड से बाहर वो ना तो उशे ढूँढ सकता था और ना ही उसका कुछ बिगाड़ सकता था.
    तभी दूर से कही आती एक कार के एंजिन की आवाज़ उसके कानो मे पड़ी. साथ ही कार की हेडलाइट्स से सड़क के दोनो ओर की झाड़ियो और पेड़ रोशन हुवे.
    थॅंक गोद, अट लास्ट.

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