ऐश्वर्या की सुहाग रात - 1 - Suhagraat Hindi Stories

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Apr 27, 2016.

  1. 007

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    //krot-group.ru ऐश्वर्या की सुहाग रात - 1 - Suhagraat Hindi Stories

    This story is part 1 of 2 in the series

    ऐश्वर्या की सुहाग रात - 1

    मेरा नाम है राहिल. में 22 साल का मेडिकल स्टूडेंट हूँ. छ्हे महीने पहले मेरी शादी मेरे बाजुवाले अंकल (मेरी माताजी के छोटे भाई) की 18 साल की लड़की ऐष्वार्या से हुई है. शादी के वक्त ऐष्वार्या कच्ची कंवारी थी और बहुत ही शर्मीली थी. उस का शर्मिलपन का सामना कर के कैशे में ने ऐश को पहली बार चोदा इस की ये कहानी है, कहानी हमारी सुहाग रात की.

    बाजुवाले अंकल की लड़की होने से में उसे बचपन से जानता हूँ. कई बार में ने मामी को उस के नॅपी बदलते देखा था. उस वक्त ऐशह की छोटी सी पीकी भी में ने देखी थी लेकिन मेरे दिमाग़ में सेक्स का ख्याल तक आया नहीं था. भोस के बाएँ होंठ पर का काला तिल अभी भी मुझे याद है. मुझे क्या पता था की एक दिन में ही इस पीकी को चोदूंगा.

    ऐशवार्या 5' 8" लंबी है. इंतेज़ार 110 ल्ब्ष. रंग गोरा. चाहेरा गोल, आँखें भूरी और बड़ी बड़ी. पतली सीधी नासिका और पतले होंठ. बॉल काले हिप्स से नीचे तक के लंबे. हाथ पाँव चिकनी और कोमल. बड़े संतरे की साइज़ के दो स्तन सिने पे ऊपर की ओर लगे हुए हैं. गोल गोल और चिकनी स्तन की पतली चमड़ी के नीचे खून की नीली नीली नसें दिखाई देती है. स्तन के सेंटर में 1" की छोटी अरेवला है जो गुलाबी रंग की है. अरेवला के बीच छोटे किस्मीस के दाने जेसेही घुंडी है. अरेवला और निपल्स बहुत सेन्सिटिव है और चुद्वाते वक्त कड़े हो जातें है. वैशहे ही ऐशह के स्तन कठिन है जो चोदने के समय ज़्यादा कठोर हो जातें है.

    केल के खंभे जेसेही सुडोल जाँघ के बीच ऐशह की भोस उलटे खड़े टीकोन जेसेही है. जब वो जांघें मिला के पाँव लंबे रखती है तब भोस की दरार का छोटा सा हिस्सा ही दिखाई देता है. जांघें चौड़ी कर के ऊपर उतने से भोस ठीक से देखी जा सकती है. मन्स घनी है और काले घ्ंघराले झाट से ढाकी हुई है. बड़े होंठ भरपूर है. मन्स और बड़े होंठ चोदते वक्त होते हुए प्रहार ज़िलानए को काबिल है. छोटे होंठ यूँ दिखाई नहीं देते, इतने पतले और नाज़ुक है और बड़े होंठ से ढके हुए रहते है. केवल चोदते वक्त फूल के वो बाहर निकल आते है. ऐशह की क्लाइटॉरिस 1" लुंबी और मोटी है, छोटे से पेनिस जेसेही दिखती है. क्लाइटॉरिस का छोटा सा मट्ठा चर्री जैशहा दिखता है. ऐशह की क्लाइटॉरिस बहुत सेंसीटवे है. कभी कभी ऐशह मूड में ना हो तो में उस की क्लाइटॉरिस को सहला के गर्म कर लेता हूँ. ऐशह की चुत याने योनि छोटी और चुस्त है. च्छे महीने से हर रात में उसे चोदता हूँ फिर भी वो कंवारी जेसेही ही है. अभी भी लंड डालने में मुझे सावधानी रखनी पड़ती है चाहे वो कितनी भी गीली क्यूँ ना हो. एक बार लंड अंदर जाय उस के बाद कोई तकलीफ़ नहीं होती, में आराम से धक्के लगा के चोद सकता हूँ.

    हमारी माँगनी तो दो साल से हुई थी लेकिन एक या दूसरे कारण से शादी मोकूफ़ होती चली थी. में मेडिकल कॉलेज में पढ़ता था और हॉस्टिल में रहता था. वो अपने फॅमिली के साथ रहती थी और आर्ट्स कॉलेज में पढ़ती थी. हम दोनो अक्सर मिला करते थे लेकिन उस ने मेरे से वचन लिया था की शादी से पहले में "वो" की बात तक नहीं करूँगा. "वो" मायने चोदना. जब मौका मिले तब हम चुम्मा- चाटी करते थे. किस करते वक्त वो शर्म से आँखें मूंद लेती थी. कभी कभी वो मुझे स्तन सहलाने देती थी, कपड़े के आर पार लेकिन मेरे हाथों पर अपना हाथ रख के पकड़ रखती थी. उस ने मुझे भोस को छूने नहीं दिया था, ना तो उस ने मेरे लंड को छुआ था. हर वक्त उस के जाने के बाद में कम से कम तीन बार हॅस्ट-मैथुन कर लेता था.

    आख़िर हमारी शादी हो गयी और सुहाग रात आ पहॉंची. ये कहानी है उस रात की जब हम ने पहली चुदाई की. वो तो कच्ची कंवारी थी. में ने 19 साल की उमर में सब से पहले मेरी भाभी मंजुला और छोटी बहन नेहा को एक साथ चोदा था. हालाँकि में ने कॉलेज में और हॉस्पिटल में दो तीन नुर्सों के साथ चुदाई की थी मगर मुझे काफ़ी अनुभव नहीं था. ऐशह की शर्म और योनि पटल में ने कैषहे थोड़ा इस की ये कहानी है.

    लंड और चुत को ज़बान होती तो अपने आप अपनी कहाननी सुनाते. लेकिन वो तो एक ही काम जानते हेँ - चोदना. इसी लियाए आइए में ही आप को सुनाता हूँ कहानी उन दोनो के पहले मिलन की.

    सुहाग रात आ पहॉंची.

    में नर्वस था ? थोड़ा सा. मुझे पता था की सोमी (हमारी सर्वेंट और ऐशह की दोस्त जो चार साल से शादी शुजा है) ने ऐशह को सेक्स के बड़े मे काफ़ी जानकारी दी थी, लेकिन प्रात्यक्ष अनुभव तो आज होने वाला था. प्यारी ऐशह को चोदने के लिए में आतुर था लेकिन मन में कई सवाल उठाते थे जैशहे की, मेरा बदन उसे पसंद आएगा ? मेरा लंड वो ले सकेगी ? उस का योनि पटल कितना कड़ा होगा, टूतने पर उसे कितना दर्द हॉआगा ? आख़िर "देखा जाएगा" ऐशहा सोच कर में रात की राह देखने लगा.

    सोमी और मंजुला भाभी ने मिल कर शयंकंड सजाया था. फूल, फूल और फूल. चारो ओर फूल ही फूल. पलंग पर केवल गुलाब की पत्तियाँ. बगल में टेबल पर पानी, दूध, मिठाई, कॉंडम के च्छे पॅकेट्स और लूब्रिकॅंट की ट्यूब. बात रूम में हमारे नाइट ड्रेस, गरम पानी, टवल्ज़ और कुच्छ दवाइयाँ.

    स्नान कर के में पहला जा कर पलंग पर बैठा. मेरे पास चोदने के आसनो की एक अच्छी किताब थी जो में देखता था की में ने सोमी की आवाज़ सुनी. ज़त से में ने किताब छुपा दी और बैठ गया. सोमी ऐशह को लिए अंदर आई और कहने आगी, "जीजू, हमारे ऐष्बाहन बहुत शर्मीले हेँ और उन्हों ने एक बार भी लंड लिया नहीं है. तो ज़रा संभाल के चोदीयेगा."

    "इतनी फ़िकर हो तो तू ही यहाँ रुक जा और हमें बताती रहेना की की करना, कैषहे करना"

    "ना बाबा, ना. आप जाने और वो जाने. आप दोनो को चोदते देख कर मुझे दिल हो जाय तो में क्या करूँ?" इतना कहे खिलखिलत हंस कर वो भाग गयी. में ने उठ कर दरवाजा बंद किया.

    में घुमा तो ऐशह अचानक मेरे पाव पड़ी. में ने उसे कंधों से पकड़ कर उठाया और कहा, "अरे पगली, ऐशहे पाव पड़ने की ज़रूरात नहीं है. तू तो मेरे हृदय की रानी हो, तेरा स्थान मेरे हृदय में है, पाव में नहीं." सुन कर वो मूज़ से लिपट गयी. हलका सा आलिंगन दे के में ने कहा, "ऐशहे करतें हैं. ये सब कपड़े और शृंगार उतार के नाइट ड्रेस पहन लेटें हैं जिस से हमें जो करना है वो आराम से कर सकें." मेरा मतलब चोदने से था ये वो समाज गयी और तुरंत शरमा गयी.

    बाथरूण में जा कर मेने पहले कपड़े बदले, बाद में वो गयी. जब वो बाहर निकली तब में पलंग पर बैठा था. मेरे पास बुलाने पर वो मेरे नझडीक आई. में ने उनकी कमर पकड़ कर पास खींची और मेरी चौड़ी की हुई जाँघ के बीच खड़ी कर दी. उसके हाथ पकड़ कर में ने कहा, "अरे वाह, अच्छी डिज़ाइन बनाई है महेंडी की. हम हर साल शादी की साल गिराह पर महेंडी रचाने का प्रोग्राम करेंगे. और हाँ, अकेले हाथ पर है या और कोई जगा पर ?"

    "पाव पर भी है." उस ने कहा.

    "उस के सिवा ?" में ने पूछा तो वो खूब शरमाई और टेढ़ा देखने लगी.

    बात ये थी की सोमी ने मुझे बताया था की ऐशह के स्तन पर भी महेंडी रचाई है. में ने उस की हथेली पर चुंबन किया और हाथ मेरे गले से लिपटाए. कमर से खींच कर आलिंगन दिया तो मेरा सर उसके स्तन के साथ दब गया. उस ने मेरे बालो में उंगलियाँ फिरानी शुरू कर दी. कुच्छ देर के बाद उस का च्चेरा पकड़ कर मुँह पर चुंबन करने का प्रयत्न किया लेकिन उस ने करने नहीं दिया.

    उस को ज़रा हटा कर में ने जाँघ सिकुड़ी और उस को ऊपर बिठया. मेरा दाहिना हाथ उस की कमर पकड़े हुआ था जब की बया हाथ जाँघ सहला रहा था. कोमल कोमल और चिकनी ऐशह को आशलेष में लेना मुझे बहुत अच्च्छा लगता था. उस के बदन की सुवास मुझे एग्ज़ाइट कर रही थी और मेरा लंड हिलने लगा था. धीरे धीरे मेरा हाथ उसकी पीठ पर रेंगने लगा.

    ड्रेस के नीचे ब्रा की पट्टी को पा कर में ने पूछा, "अरे, तू ने तो ब्रा पहन रक्खी है. निकाल नहीं सकी क्या ? लाओ, में निकाल दम ?" मेरी उंगलियाँ ब्रा का हुक तक पहॉंछे इस से पहेले उस ने सर हिला के ना कही और खड़ी हो गयी. में ने भी खड़ा हो कर उस को मेरे बाँहो पाश में जकड़ लिया. लेकिन अफ़सोस, उसने अपने हाथ छाती के आगे करॉस कर रकखे थे इसी लिए उस के स्तन मुझे छू ना सके. थोड़ी पर उंगली रख कर में ने उसका चाहेरा उठाया और होंठ से होंठ का स्पर्श किया. उस के बदन में ज़ूरज़ुरी फैल गयी. आँखें बंद रखते हुए उस ने मुझे फिर से चुंबन कर ने दिया. में ने कहा, "ऐशह, प्यारी, आँखें खोल मेरा चाहेरा देखना तुज़े पसंद नही है क्या ?"

    धीरे से वो बोली, "पसंद है, बहुत पसंद है" उस ने आँखें खोली. मेरी आँख से आँख मिलते ही वो फिर से शरमा गयी और दाँत से अपने होंठ कातने लगी. में ने ज़त से मुँह से मुँह चिपका के चुंबन किया. इस बार उस के होंठ मेरे मुँह मे ले कर में ने चूसे

    अभी तक ऐशह ने मुँह खोला नहीं था. में ने कहा, "ऐशह, मुँह खोल थोड़ा सा" और फिर से किस करने लगा. जब उसने अपने होंठ खोले नहीं तब में ने मेरी जीभ उस के होंठ पर फिराई और कड़क बना कर होंठ बीच डाली. मुझे ऐशहा महसूस होने लगा की में उस की पीकी के होंठ खोल कर अपना लंड अंदर डाल रहा हूँ. उदाहर मेरा लंड भी तन गया था. मेरी जीभ अपने होंठ पर पाते ही ऐशह ने मुँह खोला . मेरी ज़बान उसके मुँह में पैथी और चारो ओर घूम फिरी. मुझे बहुत स्वीट लगा ये चुंबन. उस के मुँह की सुवास, अंदर की कोमल त्वचा, उस के दाँत, होंठ सब पर में ने अपनी जीभ फिराई. फ्रेंच किस करते करते में ने उसे पलंग पर लेता दिया.



    ​

    मेरे हाथ उस के स्तन पर जाने लगे. उस ने अभी भी अपनी छाती ढँक रक्खी थी. में ने उस के हाथ हटाने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुवा. में ने जाबर दस्ती नहीं करनी थी इसी लिए में ने फिर से फ्रेंच किस शुरू की. अब में उस के मुँह पर से हाथ कर गाल पर, गाल से गले पर, गले से उस के कान पर ऐशहे अलग अलग स्थान पर किस करने लगा. जब मेरे होंठों ने कान को च्छुए तब उस को गुदगुदी होने लगी और वो हंस पड़ी. अब मुझे रास्ता मिल गया. मेरा एक हाथ जो कमर पे था उस से में ने उस की कमर कुरेदी. ज़्यादा गुदगुदी होने से वो चाट पता गयी और छाती से उस के हाथ हाथ गये. तुरंत में ने उस का स्तन थाम लिया. मेरा हाथ हटाने का उस ने हलका सा प्रयत्न किया लेकिन में स्तन को सहलौन ये उस को भी पसंद था इसी लिए ज़्यादा ज़ोर नहीं किया. भरे भरे, कठिन और गोल गोल स्तन में ने नाइटी के आरपार सहलाए लेकिन मन नहीं भरा. खुले हुए स्तन के साथ खेलने को में तरस रहा था.

    में ने कहा, "कितने सुंदर है तेरे स्तन ! कड़े कड़े और गोल. मेरी हथेली में समाते भी नहीं है. अभी अभी बड़े हो गये लगतें हैं. लेकिन ये क्या ? स्तन पर तो घुंडी होनी चाहिए वो कहाँ है ? में देखूं तो." ऐशहा बोल कर में ने नाइटी के हुक्स खोलना शुरू किए. उस ने शर्म से मेरे हाथ पकड़ लिए. में ने थोड़ा सा ज़ोर लगाया तो उस ने भी ज़ोर से हाथ पकड़ रकखे. उँचे स्तन रूपी परबत बीच के मैदान में हमारे हाथों की लड़ाई हो गयी.

    उस की मर्ज़ी बिना कुच्छ नहीं करने का मेरा निश्चय था इसी लिए में ने आग्रह छोडा और हार काबुल कर ली. उधर मेरा लंड तुमक तुमक करने लगा था. किस करते हुए और एक हाथ से उसका पेट सहलाते हुए में ने कहा, "प्यारी, कब तक छुपे रखोगी अपने स्तन ? मुझे देखने तो दे. तेरी मंज़ूरी बिना में स्पर्श नहीं करूँगा."

    वो ज़रा नर्म हुई. शरमाते शरमाते वो टेढ़ा देखने कागी और छाती से हाथ हटके अपनी आँखो पर रख दिए. में ने नाइटी के हुक्स खोले लेकिन जब नाइटी के फ्लॅप हटाने लगा तब फिर से उस ने मेरे हाथ पकड़ लिए. थोड़ा ज़ोर करके में ने नाइटी खोली और ब्रा में क़ैद स्तन खुले किए. गोरे गोरे स्तन का जो हिस्सा खुला हुवा उस पर में ने किस करनी शुरू कर दी. चुंबन की बौच्हार से वो एग्ज़ाइट हो ने लगी थी. उस का चाहेरा लाल हो गया था और साँसे तेज़ी से चलाने लगी थी. फिर भी वो पीठ के बाल सोई हुई होने से में उस की ब्रा निकाल नहीं सका क्यूँ की ब्रा का हुक पीठ पर था. वो करवट बदले एसा मुझे कुच्छ करना था.

    मुँह पर किस करते हुए में ने नाइटी ज़्यादा खोली और उस के सपाट पेट पर हाथ रेंगने लगा. उस को गुदगुदी होने लगी. में ने ज़्यादा कुरेदी तो वो गुदगुदी से चाट पातने लगी और थोड़ी घूमी . में इन उसे आगोश में लिया और मेरी उंगलियाँ ब्रा के हुक पर पहॉंच गयी. आलिंगन से इस वक्त उस के स्तन मेरे सिने से चिपका गये और दब गये. मेरे हाथ ुआस्की पीठ पर घूमने लगे. उसके बदन पर रों ए खड़े हो गये. मेरी उंगलिओ ने ब्रा का हुक खोल दिया.

    अब वो मुझे ज़्यादा सहकार देने लगी. अपने आप वो पीठ के बाल हो गयी. खुली हुई ब्रा में हाथ डाल कर जब में ने उस के नंगे स्तन को पकड़ा तो उस ने विरोध नहीं किया. वो शरमाती रही और में स्तन सहलाता रहा. छोटी छोटी निपल्स कड़ी होने लगी थी जिसे में ने छिपाती में ले कर मसाला. एक दो बार मेरे से ज़रा ज़ोर से स्तन दबाया गया. वो चीख उठी और मेरे हाथ पे अपन हाथ रख दिए लेकिन मेरे हाथ हटाए नहीं. काई दिनों के बाद उस ने मुझे बताया था की मेरा स्तन का सहलाना उसे बहुत प्यारा लगता था.

    दोनो स्तनों पर महेंडी लगी हुई थी. मोर की डिज़ाइन में घुंडीओ को मोर की चौंछ बनाई थी. गोरे गोरे स्तन पर लाल रंग की डिज़ाइन देख कर में खुद को रोक ना सका. दोनो स्तन को मुट्ठी में ले कर दबोच लिए और किस की बरसात बरसा दी. मुँह खोल कर अरेवला के साथ घुंडी को मुँह में लिया, चूसा और दाँत से काटा. ऐशह के मुँह से सी सी होने लगी. उस ने मेरा सर अपने स्तन पर दबाया. मेरे लंड में से निकलता कम रस से मेरी निक्केर गीली होती चली.

    में बैठ गया और उस के पैर पर हाथ फिराने लगा. घुतनो से ले कर जैशहे जैशहे मेरा हाथ ऊपर तरफ सरक ने लगा वैशहे वैशहे उसकी नाइटी ऊपर खिसकती गयी और उस की चिकनी जांघें खुली होती चली. उस ने जाँघ चिपकाए हुए रक्खी थी, में ने चौड़ी करने का प्रयास किया लेकिन असफल रहा. आहिस्ता आहिस्ता मेरे हाथ उस की पेंटी पर पहुँचे. पेंटी टाइट थी और काम रस से गीली हुई थी. पतले कपड़े की पेंटी उस की भोस के साथ चिपक गयी थी. में ने भोस के होंठ और बीच की दरार को उंगलिओ से टटोला. ऐशह के भारी हिप्स अब हिल ने लगे. में भोस सहलाता रहा, मुँह पर किस कराता रहा और वो शर्म से आँखें बंद कर के मुस्कराती रही.

    अब में ने पेंटी उतरने को ट्राइ किया. जेसे मेरी उंगलियाँ पेंटी की कमर पट्टी पर पहुँची उस ने मेरा हाथ पकड़ लिया. फिर एक बार हमारे हाथों बीच जंग हो गई उस के सपाट पेट के मैदान पर. में फिर हारा. हाथ हटा के पेट सहलाने लगा और स्तन की निपल्स चूसने लगा.

    इतने प्रेमोपचार के बाद उस के स्तन काफ़ी सेन्सिटिव हो गये थे. जेसे मेरी जीभ ने निप्पल का स्पर्श किया की वो चाट पता गयी और अचानक शिथिल हो गयी. उस के हाथ पाव नर्म पड़ गये. में पेंटी उतार ने लगा तो कोई विरोध नहीं किया, अपने चूतड़ उठा के पेंटी उतार ने में सहकार दिया. मुझे जाँघ चौड़ी करने दी. हारा हुआ सैनिक की तरह मानो उसने शरणागती स्वीकार ली. फ़र्क इतना था की वो आनंद ले रही थी और मंद मंद मुस्कराती रही थी

    में ने खड़ा हो कर अपने कपड़े उतारे वो मेरा बदन देखती रही, ख़ास कर के मेरे तातार और ज़ुलते हुए लंड को. में ने कहा, "ऐशह, देख में ने सब कपड़े उतार दिए है. अब तू भी उतार दे." कुच्छ बोले बिना मूज़ से मुँह फिराए वो बैठ गयी. नाइटी ुआत्तर के वो मेरी तरह नंगी हो गयी और मेरी ओर पीठ कर के लेट गयी. में उस के पीछे लेता और उसे आलिंगन में ले कर स्तन सहलाने लगा. मेरा लंड फटा जा रहा था. ऐशह को भी चुदया ने की इच्च्छा हो गयी थी क्यूँ की अपने आप घूम कर वो मेरे सांमुख हुई और मूज़ से लिपट गयी. नंगे बदन का नंगे बदन से मिलने से हम दोनो की एग्ज़ाइट्मेंट काफ़ी तरफ गयी.

    वो मेरे बाए कंधे पर अपना सर रकखे हुए थी. दाहिना हाथ से में ने उस का बया घुतन उठाया और पाव मेरी कमर पे लिपटाया. मेरा हाथ अब उस के चूतड़ पर रेंगने लगा और आहिस्ता आहिस्ता मेरी उंगलियाँ उस की पीकी की ओर जाने आगी. मेरा ठाना हुवा लंड उस के पेट से सटा था. लंड में से निकलते काम रस से उस का पेट और मन्स गीले होते चले थे. मुँह से मुँह लगा के फ्रेंच किस तो चालू ही थी. मुझे छोड़दने का इतना दिल हो गया था की में चुंबन, स्तन मर्दन, भोस मतन सब एक साथ करने लगा था.

    थोड़ी देर बाद में अलग हुआ. में ने कहा, "ऐशह, देख तो सही, तेरा कितना असर पड़ रहा है मेरे लंड पर." दाँतों में नाख़ून चबाते हुए वो मुस्कराहट के साथ देखती रही. में ने उस ला हाथ पकड़ कर लंड पर रख दिया. थोड़ी सी हिचकिचाहट के बाद उस ने उंगलिओ से लंड को छुआ. लंड ने झटका मारा. में ने उसे ठीक से लॅंड मुट्ठी में पकड़ाया. में स्तन से खेलता रहा और वो लंड से. लड़की के हाथ में लंड पकड़ावा ने का मेरा पहला अंभव था जब की किसी मर्द का लंड पकड़ ने का उस के लिए पहला अनुभव था. उस की कोमल उंगलिओ का स्पारह मुझे इतना उत्ट्तेजक लगा की उस की जांघें चौड़ी कर के, चुत में लंड घसाद के उस को चोद डालने की तीव्र इच्च्छा हो गयी मुझे. बड़ी मुश्किल से में ने अपने आप पर काबू पाया क्यूँ की मुझे ऐशह को काफ़ी गर्म करना था जिस से लंड का पहला प्रवेश कम कष्ट डाई हो.

    लेकिन सबूरी की भी कोई हड्द होती है. जब मुझे लगा की ज़्यादा देर करूँगा तो उस के हाथ में ही में झड जाउंगा तब में ने उसे पीठ के बाल लेटाया. उस की जांघें चौड़ी कर के में बीच में आ गया. ऐशह की भोस और चुत पीछे की ओर होने से एक तकिया उस के चूतड़ के नीचे रखना पड़ा. अब उस की चुत मेरे लंड के लावाले में आई.

    लंड लेनेकी घड़ी आ पहॉंची थी. मगर ताजूबि की बात ये थी की ऐशह का डर और शर्म दोनो कहीं गायब हो गये थे. उस ने खुद ही अपने घुतनों को कंधे तक ऊपर उठाए. जाँघ चौड़ी कर के मुसाक़ाती हुई वो मेरे लंड को देखती ही रही. लंड लेने का दिल हो जाय तब बेशरम बन के लड़की क्या नहीं कराती ?

    एग्ज़ाइट्मेंट की वजह से ऐशह की पीकी सूज गयी थी. छोटे होंठ जो वैशहे अंदर छुपे रहते है वे बाहर निकल आए थे. तातार बनी हुई क्लाइटॉरिस का छोटा सा सर भी दिखाई दे रहा था. सारी भोस गीली गीली थी. एक हाथ में लंड पकड़ कर में ने बड़े होंठ पर रगड़ा. आगे से पीछे और पीछे से आगे ऐशहे पाँच सात बार रगड़ ने के बाद लंड का सर भोस की दरार में रगड़ा और क्लाइटॉरिस के साथ टकराया. ऐशह के हिप्स डोलने लगे. वो अब मेरे जेसेही ही चोदने को तत्पर हो गयी थी. में ने कान में पूछा, " क्या ख्याल है, प्यारी ? लंड लेओगी ?"

    बिना बोले उस ने मुस्कुराते हुए ज़ोर ज़ोर से सर हिला के हां कही. मेने लंड की टोपी चड़ा के मस्तक को धक दिया. ऐशहा कर ने की वजह ये थी की टोपी से धक्का हुआ लंड का मट्ठा 'स्लाइड' हो के चुत में पेसटा है, खुला मट्ठा घिस के अंदर घुआसटा है. नयी नावली चुत के वास्ते लंड 'स्लाइड ' हो के घुसे ये अच्च्छा है. में ने एक हाथ से भोस चौड़ी कर के दूसरे हाथ से लंड का मट्ठा चुत ले मुँह में रख दिया. लंड का मट्ठा मोटा था और चुत का मुँह छोटा, इसी लिए मुझे ज़रा ज़ोर करना पड़ा. पूरा मट्ठा चुत में गया की योनि पटल पर जा के रुक गया. में ने लंड थोड़ा वापस खींचा और फिर से डाला. ऐशहे फकत एक इंच की लंबाई से में ने आठ दस धक्के लगाए. चुत में से और लंड में से भर पूर पानी ज़रने लगा था और चुत का मुँह अब आसानी से लंड का मट्ठा ले सकता था.

    ऐश्वर्या की सुहाग रात - Suhagraat Hindi Stories (Completed)
     
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