गाण्ड चुदवाई और चूत चोदी एक साथ -1

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Dec 4, 2017.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

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    //krot-group.ru gaand chudai जैसे कि मैंने आपको बताया था कि उस दिन मेरा दोस्त और उसकी गर्ल-फ्रेण्ड मेरे घर पर आए थे और उन्होंने मुझे नंगा देख लिया था.. पर उसकी गर्ल-फ्रेण्ड शीतल की शरारती नज़र मुझे कुछ अजीब सी लगी थी। मैं उसी दिन से उसके बारे में सोच रहा था कि अगर मुझे इसकी रजा मिल जाए तो ये बंदी मुझे चोदने को मिल सकती है।

    अब इसकी रजामन्दी कैसे ली जाए.. मैं उसके बारे में सोचने लगा.. तो मुझे ध्यान आया कि मेरी कहानी जो यहाँ प्रकाशित होने वाली है.. अगर मैं ये उसे पढ़ने के लिए दे दूँ.. तो मेरी बात बन सकती है।

    जब मेरी स्टोरी प्रकाशित हुई तो मैंने तीनों भागों के लिंक उसे वॉट'स अप (Whatsapp) पर भेज दिए।
    मैं 2 दिन तक उसके जबाव का इन्तजार करता रहा और फिर तीसरे दिन उसका कॉल आया।
    शीतल- हाय आशीष..
    मैं- हाय.. हाउ आर यू? तुम मुझ पर गुस्सा तो नहीं हो ना?
    शीतल- हा हा हा.. गुस्सा क्यों?

    मैं- मैंने तुम्हें सेक्स स्टोरी की लिंक्स भेजी.. इसलिए..
    शीतल- अरे नहीं.. उसमें गुस्से की क्या बात.. और तब जब कि मैं तुम्हें पूरा का पूरा देख चुकी हूँ.. डोन्ट वरी.. मुझे गुस्सा नहीं आया.. सिर्फ़ मैं थोड़ी काम में बिज़ी थी..

    मैं- ओके.. थैंक गॉड.. कैसी लगी कहानी तुम्हें?
    शीतल- ओह.. तुम्हारे साथ तो बहुत बुरा हुआ यार.. मैंने तो सोचा भी नहीं था कि उस दिन इतना सब कुछ हुआ होगा.. वेरी सैड.. मुझे बहुत बुरा लगा कि एक हिजड़े (हिजड़ी) Shemale ने तुम्हारी ले ली.. और वो भी उन सब लोगों के सामने..

    मैं- हम्म..
    शीतल- आशीष एक बात पूछू.. बुरा तो नहीं मानोगे?
    मैं- नहीं शीतल.. पूछो ना..

    शीतल- जाहिर है.. तुम्हें बहुत दर्द हुआ होगा.. पर तुम्हें वो उत्पीड़न कैसा लगा.. कुछ तो पसंद आया होगा ना.. कि इतनी सारी लड़कियों के सामने कोई तुम्हें फक कर रहा है..

    मैं- पहले तो बहुत बुरा लगा था.. पर दूसरे दिन जब मैंने ठीक से सोचा तो एक चीज़ अच्छी भी लगी कि मैं उन सबके सामने एक हिजड़े से चुदा हुआ हूँ..
    शीतल- हम्म.. ग्रुप में ऐसा किसी ने किया तो कुछ मर्दों को अच्छा लगता है.. और एक बात पूछनी है?
    मैं- बेझिझक पूछो शीतल..

    शीतल- क्या तुम इस शनिवार मेरे घर आ सकते हो?
    मैं- क्यों.. कोई काम है?

    शीतल- हाँ.. कुछ काम ही है.. उस दिन तुम्हें उस हालत में देखा है.. तब से मैं चाहती हूँ कि तुम्हें एक दिन के लिए मेरे यहाँ बुला लूँ और पूरे दिन के लिए बिना कपड़ों का ही रखूँ.. मुझे तुम्हारी छोटी सी नुन्नू बहुत अच्छी लगी.. मैं भी इसका अनुभव लेना चाहती हूँ.. क्या तुम आ सकते हो और मेरी इच्छा पूरी कर सकते हो?

    मन में तो मेरे लड्डू फूट रहे थे.. मैं भी उस दिन से इसके सामने फिर से नंगा होने का बहाना सोच रहा था.. 2-3 बार तो उसके नाम से मुठ्ठ भी मार चुका था।

    मैं- जी ठीक है.. कितने बजे आना है?
    शीतल- सुबह जल्दी ही आ जाओ तो अच्छा है.. साथ बिताने के लिए उतना ही ज़्यादा वक्त मिलेगा।
    मैं- ओके शीतल ठीक है.. तुम मुझे अड्रेस एसएमएस कर दो.. मैं ब्रेकफास्ट के वक्त तक पहुँच जाऊँगा।

    शीतल- ठीक है.. वैसे और एक बात कहनी थी..
    मैं- बोलो..
    शीतल- उस दिन जैसे पूरे 'शेव्ड' थे तुम.. बिल्कुल वैसे ही पूरी तरह से शेव करके आना.. ऊपर.. नीचे और आगे से.. पीछे से.. समझ रहे हो न?
    मैं- ओह.. ओके पक्का..

    शीतल- तुम्हारे लिए एक सरप्राइज भी है..
    'सरप्राइज.. वो क्या है..?'
    'वो तुम इधर आओगे तभी जान पाओगे.. वर्ना सरप्राइज कैसा हुआ..'

    मैं- ओके.. आई विल सी.. बाय.. सी यू..
    शीतल- यस.. बाय..

    मैं मन ही मन सोचने लगा कि क्या सरप्राइज होगा.. इतना शेव करके आने को बोल रही है.. मतलब जरूर मुझे कुछ करने को मिलेगा.. मैं बहुत ही पॉज़िटिव सोचने लगा।

    शनिवार को..

    सुबह जल्दी उठ कर मैं तैयारी करने लगा.. मैंने शुक्रवार को ही लेडीज रेज़र खरीद लिया था.. गाण्ड के बाल लेडीज रेज़र से अच्छे से निकलते हैं इसलिए.. सुबह उठते ही मैंने बहुत अच्छी तरह से 2-3 बार रेज़र फेर कर पूरे के पूरे बाल निकाल दिए.. उसके बाद मैं रोज़ की तरहा नंगा नहाया।

    जब मैं साबुन लगा रहा था.. तब मेरा ही हाथ मेरी गाण्ड पर घूम रहा था.. तो मुझे बहुत ही अच्छी फीलिंग आ रही थी, फटाफट नहा कर मैं रेडी हो गया.. जैसे कि मैं जानता था कि वहाँ जाकर सारे कपड़े उतारने ही हैं.. इसलिए मैंने अन्दर के दो कपड़े यानि.. बनियान और अंडरवियर पहने ही नहीं.. सिर्फ़ जीन्स और टी-शर्ट डाल कर मैं उसके घर की ओर चल पड़ा।

    रास्ते में मुझे बहुत ख्याल आ रहे थे कि मेरे लिए क्या सरप्राइज होगा।
    मैंने उसके लिए एक फ्लावर बुके खरीदा।

    उसके घर..

    वो पुणे की एक बहुत बड़ी टाउनशिप में एक बिल्डिंग के 22 वें माले पर रहती थी.. सेक्यूरिटी एंट्री करने के बाद ऊपर जाने तक मुझे लिफ्ट से लगभग 2 मिनट लग गए.. 22 वें माले का कॉरीडोर बहुत चौड़ा था और वहाँ से पूरा पुणे दिखाई दे रहा था।

    सुबह की धीमी ठंड.. हल्की हवाएं.. एक रोमान्टिक माहौल का अनुभव करा रही थीं।
    उसी खुशनुमा माहौल में मैं गाना गुनगुनाते हुए उसके फ्लैट के सामने पहुँच गया.. और मैंने डोर बेल बजाई।

    शीतल ने दरवाजा खोला..
    वॉववव ववव. क्या गजब की खूबसूरत लग रही थी वो..

    गोरी-गोरी धुली सी त्वचा.. शायद अभी-अभी नहा कर आई थी.. स्लीवलेस टॉप.. उसमें से दिखता हुआ उसका दुधारू क्लीवेज.. मस्त लग रही थी।

    उसके टॉप की लम्बाई भी मुश्किल से नाभि तक ही थी.. उससे उसकी नाभि बहुत ही मस्त दिख रही थी.. नीचे एक जीन्स की शॉर्ट.. जो नाभि के नीचे कमर से शुरू होकर आधी जाँघों पर खत्म हो चुकी थी।

    उसकी दूधिया नंगी जाँघें.. बहुत ही मस्त लग रही थीं.. टॉप के चुस्त होने की वजह से ये उसके कड़े निप्पल दिखने से समझ आ रहा था कि उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी है और अपने 34 डी नाप के मम्मे सिर्फ टॉप के पीछे ही छुपाए हुए हैं.. उसकी कमर लगभग 32 इन्च की होगी और नितंब 36 इन्च या या थोड़े ज़्यादा रहे होंगे।

    मैं तो उसे उसी हालत में देखता रह गया.. तब उसी ने मुस्कुराते हुए मुझे झिंझोड़ा और कहा- आशीष.. ऐसे क्या देख रहे हो.. पहले कभी किसी को ऐसा नहीं देखा क्या.. और यहीं पर खड़े रहोगे या अन्दर भी आओगे?
    जैसे ही उसके बोल मेरे कानों में पड़े.. मैं हड़बड़ा गया.. और 'सॉरी' कह कर.. नीचे को देखने लगा।

    शीतल- चलो.. अन्दर आ जाओ..
    मैं- हाँ.. ये लो फूल.. तुम्हारे लिए..

    शीतल ने चहकते हुए कहा- वॉववव.. मेरे लिए.. सो स्वीट.. बहुत मस्त है.. तुम्हारी अच्छी पसन्द है.. थैंक यू सो मच.. तुम बैठो मैं पानी लेकर आती हूँ.. और हाँ.. जैसे कि मैंने कहा था कि घर में आते ही तुम अपने कपड़े उतार दोगे.. तो मैं पानी लेकर आती हूँ.. तब तक तुम अपने कपड़े.. ठीक है न..!

    मैं कुछ कहता इससे पहले वो इठलाती हुई अन्दर चली गई..। मैं सोच में पड़ गया.. आज पहली बार कोई मुझे कपड़े उतारने को खुद से कह रहा था और मैं सोच में पड़ा था।

    आज तक इतनी सारी औरतों के सामने नंगा हो जाने के बावजूद मेरा यह हाल था..

    वो पानी लेकर आई और उसने मुझे आवाज़ लगाई
    शीतल- आशीष.. आशीष.. क्या हुआ.. तुम आज कुछ खोए-खोए से लग रहे हो..? मैंने कहा था कपड़े उतार कर रखो!

    मैं- जी.. जी.. व..वो.. ऐसी कोई बात नहीं.. दरअसल मैं सोच रहा था कि अभी-अभी तो आया हूँ..

    शीतल- तो.. तो क्या हुआ.. और वैसे भी तुम खुद को.. अपने घर के अन्दर बिना कपड़ों का ही तो रहना पसंद करते हो ना.. तो इसे भी अपना ही घर समझो और चलो जल्दी से मुझे कपड़े दे दो.. तो मैं इन्हें कमरे में रख कर आती हूँ..
    इतना कहकर वो सामने के सोफे पर बैठ गई और मेरे कपड़े उतारने का इन्तजार करने लगी।

    सोफे पर बैठने के बाद उसकी सिर्फ़ नंगी टाँगें ही मुझे दिख रही थीं.. जिससे मेरे अन्दर हलचल शुरू हो गई थी।
    मैंने अपना टी-शर्ट उतार दिया.. और जीन्स के बटन खोल कर पीछे मुड़ने लगा.. तभी..

    शीतल- उधर क्यों मुँह घुमा रहे हो.. मेरी तरफ मुँह करके खड़े रहो और वैसे ही उतार दो..

    आज पहली बार मैं न जाने क्यों शरमा रहा था.. पर जैसे-तैसे मैंने जीन्स को कमर के नीचे सरकाया और आख़िरकार निकाल ही दी..

    उसकी नंगी टाँगों की तरफ देखने से पैन्ट के अन्दर ही मेरा लंड आधा खड़ा हुआ था.. जैसे ही उसने उसे देखा..तो उसके मुँह से आवाज निकली।

    शीतल- अरे.. वाहह.. यह तो बड़ा भी होता है.. हाँ.. आशीष.. हा हा हा. हा हा.. उस दिन से काफ़ी अच्छी साइज़ है आज.. उस दिन तो मुझे लग रहा था जैसे.. किसी न्यू बोर्न बेबी की नुन्नी.. इतने बड़े लड़के को लगाई गई है.. हा हा हा..

    मैं शरमाते हुए बोला- क्या शीतल.. तुम भी ना..

    शीतल- ओह.. सो क्यूट.. चलो लाओ अपने कपड़े मुझे दे दो..

    मैं अपने कपड़े उसके हाथ में दे ही रहा था.. तो उसने अपने बाल संवारने के लिए हाथ उठाए.. मेरी नज़र उसके क्लीन शेव्ड दूधिया बगलों पर पड़ी..

    मुझे शेव्ड की हुई बगलें बहुत पसंद हैं और उसकी मस्त जवानी देख कर मेरा लंड पूरा का पूरा तन गया..

    शीतल- अरे वाह.. आशीष तो ये है तुम्हारा असली साइज़.. बहुत मस्त है यार.. मोटा भी और लंबा भी.. ज़रा वो स्किन पीछे करके अपना सुपारा तो दिखाओ..

    वो ऊपर हाथ रखकर ही बातें करने लगी.. शायद उसे पता चल चुका था कि मेरा लण्ड उसकी चिकनी बगलें देख कर ही खड़ा हो गया था और बगलों को देखकर ही ये सब हरकतें हो रही हैं।

    मैंने लौड़े की चमड़ी को पीछे करते हुए अपना सुपारा बाहर निकाला.. गहरा गुलाबी सुपाड़ा देखकर वो बोल उठी- वॉववव ववव.. यार बहुत मस्त है.. इधर आओ..
    मैं उसकी तरफ लण्ड हिलाता हुआ बढ़ा और बिल्कुल उसके सामने जाकर खड़ा हो गया।
    शीतल ने एक हाथ बालों से निकाल कर धीरे-धीरे.. मेरे लंड की तरफ बढ़ाया और ठीक पकड़ने से पहले मुझे पूछा- ज़्यादा एग्ज़ाइट्मेंट में यहीं पर निकाल तो नहीं दोगे ना तुम.. नहीं तो मैं हाथ नहीं लगाती.. बाद के लिए बाकी रखूँगी..

    मैं- नहीं शीतल.. टेन्शन मत लो.. नहीं निकलेगा..

    फिर उसने धीरे-धीरे मेरी नाभि से उंगलियाँ फेरते हुए मेरे अण्डकोष पर घुमाईं.. उसका कोमल स्पर्श बहुत मस्त था.. वो हल्के से मेरे बाल्स खींच रही थी.. उसकी लंबी उंगलियाँ मेरे अण्डकोष पर और लंड पर घूमने लगीं।

    अब उसने अपनी मुट्ठी में मेरे लंड को पकड़ लिया.. और कहा- वाउ.. बहुत गरम हुआ है यार.. शायद तुम्हें मेरा जिस्म बहुत पसंद आया है।
    मैं- हाँ शीतल.. उस दिन जब मैं तुम्हारे सामने अचानक नंगा आ गया था.. और जिस तरह से तुमने मुझे देखा था.. तब से ही मैं चाहता था कि तुम्हारा हाथ मेरे नंगे बदन पर घूमे।

    शीतल- ह्म्म्म्म.. क्या तुम्हें मेरी चिकनी बगलें बहुत पसंद हैं?

    मैं- हाँ शीतल.. मुझे लड़कियों के गोरे-गोरे शेव्ड आर्म्पाइट्स बहुत अच्छे लगते हैं.. मैं उन्हें चूमना और चाटना भी पसंद करता हूँ।

    शीतल- सच.. वॉवववव.. सो रोमान्टिक.. क्या मेरे आर्म्पाइट्स लिक करोगे?

    मेरी तो जैसे लॉटरी ही लग गई थी, मैं- नेकी और पूछ-पूछ.. शीतल आज तुम जो कुछ भी कहोगी.. मैं वो करने के लिए तैयार हूँ।

    शीतल- हम्म.. ठीक है.. अभी घूम जाओ.. और नीचे झुक कर हो जाओ.. मुझे मेरे राजा का छेद देखना है.. जिसे उन बेरहम औरतों और लड़कियों ने एक शीमेल के लंड से चोदा है।

    मैं घूम कर नीचे कुत्ता जैसा झुक कर खड़ा हो गया.. उसमें मुझे पैरों को फैलाने को कहा.. मैंने दोनों पैर फैला दिए।
    अब वो चुदासी सी होकर खुल कर बात करने लगी थी।

    शीतल- ओह.. वॉवववव.. आशीष क्या मस्त गाण्ड है तुम्हारी.. अगर मैं सिर्फ़ गाण्ड की फोटो निकाल लूँ और किसी भी औरत या मर्द को दिखाऊँ.. तो कोई नहीं कह सकता कि ये एक मर्द की गाण्ड है.. सचमुच यू हैव आ नाइस न सेक्सी गाण्ड.. एक भी बाल नहीं रखा है तुमने.. वाउ..

    वो अपनी लंबी उंगलियाँ धीरे-धीरे मेरी गाण्ड से घुमाने लगी.. वो हल्के से मेरे नितम्बों को भी दबा रही थी.. और अचानक उसने अपनी उंगली मेरी नितम्बों की दरार.. जहाँ शुरू होती है.. वहाँ रख दी..

    मैं समझ गया था कि ये अब उंगली मेरी दरार में घुमाएगी.. मेरी धड़कनें तेज़ हो गईं.. और उसने धीरे-धीरे अपनी उंगली नीचे की तरफ घुमा दी, मुझे बहुत मस्त फीलिंग आ रही थी.. जैसे ही उसकी उंगली मेरे छेद पर आ गई.. उसने वहाँ रोक दी और थोड़ी सी ज़ोर लगा कर दबा दी.. फिर उंगली नीचे फिरा कर मेरे अण्डकोष तक लेकर गई।

    शीतल- वॉववव.. आशीष क्या मस्त छेद है तुम्हारा.. सच में ऐसा छेद देख कर तो कोई भी तुम्हारी गाण्ड मारना चाहेगा.. उस हिजड़े ने बहुत बेदर्दी से मेरे राजा के छेद को चोदा है ना.. फिकर ना करो.. मैं आज मेरी जीभ से इस पर दवाई लगा दूँगी।

    यह सुनकर मैं तो दिन में ख्वाब देखने लगा कि कब वो वक़्त आ जाए।

    मैं- थैंक्स.. शीतल..

    शीतल- चलो सीधे हो जाओ और बैठ जाओ.. मैं कॉफी लेकर आती हूँ.. और साथ में तुम्हारा सरप्राइज भी..

    मैं चौंका.. वो एक शरारती मुस्कान देकर वो अन्दर चली गई..

    मैं सोफे पर बैठ कर सामने पड़ा हुआ पेपर पढ़ने लगा.. लगभग 10-15 मिनट के बाद शीतल कॉफी लेकर आई और सामने के सोफे पर बैठ कर उसने आवाज़ लगाई- दीदी.. आ जाओ..!

    मैं एकदम से हड़बड़ा उठा..
    मैं- क्या कोई और भी है घर में?

    शीतल- हाँ मेरी दीदी हैं.. तुम्हारा सरप्राइज..
    मैं- ओह.. शीतल पर मैं उनके सामने ऐसे..?
    शीतल- कम ऑन आशीष.. बी ब्रेव.. इतनी औरतों के सामने.. औरतें ही क्या मर्द और हिजड़े के सामने भी नंगे हो चुके हो.. उसमें मेरी दीदी और जुड़ जाएंगी तो क्या फरक पड़ेगा..

    तभी उसकी दीदी अन्दर से बाहर आईं.. मैं उन्हें देख कर पूरा दंग रह गया।

    उन्होंने अपने बाल ऊपर बांधे हुए थे.. आँखों में बहुत गुस्सा सा.. ब्रा इतनी कसी हुई कि उनके मम्मे उसमें समा नहीं रहे थे.. शायद 36 सी नाप के होंगे.. उन्होंने पूरी काले रंग की वेस्टर्न स्टॉकिंग पहनी हुई थीं।
    जैसे ही मेरी नज़र उनकी कमर पर पड़ी.. मैं पूरी तरह से सरप्राइज हो गया था..
    शायद यही मेरा सरप्राइज था.. उन्होंने अपनी कमर पर एक बड़ा सा डिल्डो बाँध रखा था..
    मैं आँखें फाड़ कर डिल्डो की तरफ.. तो कभी शीतल की तरफ.. तो कभी दीदी की आँखों में देखने लगा।

    शीतल- क्या हुआ आशीष.. ऐसे क्यों देख रहे हो?
    मैं- शीतल.. ये क्या है.. तुमने मुझे बताया क्यों नहीं.. मैं तो सरप्राइज कुछ और ही समझ रहा था.. मुझे लगा था तुम्हें मुझसे हमदर्दी हुई है और इसलिए तुमने मुझे यहाँ बुलाया है।

    शीतल- अरे गुस्सा मत हो जाओ आशीष.. तुम जैसा सोच रहे हो.. वैसा ही सरप्राइज तुम्हें मिलेगा.. पर उसके साथ तुम्हारे लिए.. ये भी एक सरप्राइज ही है.. तुम अगर दीदी का कहा मानोगे.. तो मैं तुम्हें अपने आपको सौंप दूँगी..
    मैं तुम्हें सच-सच बता देती हूँ.. देखो मेरी दीदी को मर्दों से बहुत नफ़रत है। उसके पीछे उनकी कुछ निजी वजह है.. और उन्हें femdom मतलब महिलाओं का दबदबा होना.. बहुत पसंद है..
    जब मैंने उस दिन तुम्हें पहली बार तुम्हारे घर नंगा देखा था.. तब ही मेरे मन में ख्याल आया कि तुम जैसे बंदे को मैं दीदी को सौंप सकती हूँ.. पर ये तुम्हें कैसे बताया जाए.. यह मैं सोच रही थी..
    जैसे ही तुमने मुझे अपनी आपबीती की कहानी भेजी.. मेरा मन खुशी से उछल पड़ा.. कि अब तो इसे जाल में फंसाना और भी आसान हो गया है.. मैंने तुरंत दीदी से फोन पर बात की और उन्हें बुला लिया और हम लोगों ने आज का प्लान बनाया.. पर जैसे कि तुम जानते हो.. मुझे तुमसे हमदर्दी भी थी.. तो मैंने दीदी से कहा कि इस बार हम सिर्फ़ उसे सजा ही नहीं देंगे.. बल्कि उसे भी उसका हिस्सा भी मिलेगा.. एंजाय करने के लिए.. मैंने उसकी आँखों में मेरे जिस्म को पाने के लिए भूख देखी है।

    तभी शीतल की दीदी बोली- तब ही मैंने इससे कह दिया.. कि ठीक है तुझे इसे खुद को सौंपना है.. तो सौंप दे.. पर उसे एक तरफ से मुझे भी संतुष्ट करना होगा..

    अब मुझे पूरी बात समझ में आ गई थी.. यह भी एक तरह की सजा ही थी.. बस फ़र्क इतना है कि यहाँ मुझे एक मनचाही औरत चोदने के लिए मिलने वाली थी.. पर मुआवजे में मुझे अपनी गाण्ड भी मरवानी होगी!

    मैं सोच में डूबा था.. मेरा मन 'ना' कहने का था.. पर शीतल का मादक बदन मेरे आँखों के सामने घूमने लगा.. उसकी नंगी जाँघों का मस्त अहसास.. शेव्ड आर्म्पाइट्स मुझे जरूर चाहिए थीं।

    मैंने ठान लिया कि जो कुछ भी हो जाए.. मैं आज शीतल को चोद कर ही जाऊँगा।

    डिल्डो देखने के बाद और ये सब सुनने के बाद मेरे लंड की जान निकल गई थी.. उधर कॉफी ठंडी हो गई थी और इधर मेरी नुन्नी..

    शीतल- क्या सोच रहे हो आशीष?
    मैं- कुछ नहीं शीतल.. मैं जरा घबरा गया हूँ.. इतना बड़ा डिल्डो देखकर..
     
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