गोरी पावरोटी सी फूली चूत चोद कर मज़ा

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Dec 21, 2017.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

    //krot-group.ru इस बार मैं दो Antarvasna सालों के बाद छुटि्टयों में घर आया था। हमारे घर के पीछे वाले घर मे एक औरत रहती थी। उन्हे मैं आंटी कहता था । दोनों घरों के बीच में सिर्फ़ एक दीवार थी जिसमें एक दरवाजा था जिससे दोनो घरों में आना जाना था क्योंकि दोनो घरों में घरेलू संबन्ध थे। आंटी के पति अधिकतर दौरे पर बाहर ही रहते थे। अब मेरी उम्र 15 वर्ष हो गयी थी मेरा चेहरा गोल कद छोटा है देखने मे मैं १३ या १४ साल का लगता हूँ । अगर कुछ बडा़ है तो वह है मेरा ६.५ लम्बा और डेढ इन्च मोटा गधे के जैसा लण्ड।

    मेरे अन्दर जवानी अंगड़ाई लेने लगी थी। मैंने आंटी को पूरे दो सालों के बाद देखा था और वो मुझे बला की खूबसूरत लगी थी। उनके भरपूर 31 वर्ष के गदराये गुलाबी जिस्म ने मेरे अन्दर की आग को और भड़का दिया था। उनके उरोज आम औरतों से काफी बड़े थे वो उनके टाईट लोकट ब्लाउज में बिल्कुल गोल बड़े बड़े बेल जैसे दिखते थे जिन्हे देखकर मेरा मन उन्हें हाथों में पकड़ने को और अच्छी तरह दबाने को करता रहता था मैं उनको चोदने की कल्पना भी करने लगा था। मैं उन्हें चोरी चोरी देखता था क्योंकि मुझे डर लगता था कि पता नहीं वो क्या सोचेंगी।

    एक दिन अचानक मैंने कमाल का नजारा देखा। उस दिन मैं तकरिबन १० बजे सुबह अपनी छत के कमरे में धूप में बैठने के लिये गया क्योंकि उन दिनों सर्दियां थी। मैं अपनी खिड़की के पास जा कर कुरसी पर बैठा था ।वहां से सामने आंटी के घर के बाथरूम की खिड़की और अन्दर का नजारा बिलकुल साफ दिख रहा था। तभी आंटी बाथरूम के अन्दर आयी। मैंने सोचा आज मौका अच्छा है मैं नीचे जाकर दूरबीन उठा लाया ।

    मैंने दूरबीन से देखा तो नीचे का नजारा और भी साफ व बिलकुल नजदीक दिखने लगा। मैं सोचने लगा कि कमरे में अंधेरा और बाहर तेज धूप होने के बजह से मै आंटी को नही दिख सकता और आंटी के घर के चारों तरफ ऊंची दीवार थी इसलिये उसने सोचा भी नही होगा कि उस को कोई देख रहा है। मैं उसे छुप कर देखने लगा आंटी ने पेटीकोट ब्लाउज पहन रखा था और ऊपर से टावल डाल रखी थी। वह नहाने आयी थी।

    मैं अभी सोच ही रहा था कि तभी उसने ब्लाउज उतार दिया और टब पर बैठ गयी। उन्होंने अपनी टांगे सामने पड़े कुरसी पर रख ली और पीछे को हो कर आराम से बैठ गयी जिस की बजह से उस के बड़े बड़े स्तऩ चोली से बाहर को फटे पड रहे थे। तभी अचानक आंटी अपने भारी सीने की तरफ देखने लगी और उसे अपने हाथ से ठीक करने लगी। अचानक उसने चोली का स्ट्रैप खोल दिया और उसे उतार कर रख दिया और उनके बड़े बड़े दूध से सफेद उरोज ऐसे फड़फड़ाये जैसे दो बड़े बड़े सफेद कबूतर फड़फड़ा कर आजाद हो गये हों। कबूतरों की चोचे यानि निप्पल हलके भूरे रंग के बहुत ही बडे़ थे जो कि उस समय इरैकट थे ।
    गोरी पावरोटी सी फूली चूत

    मेरा दिल उनको चूसने को कर रहा था। तभी आंटी ने पेटीकोट भी खोल दिया और उनकी मोटी मोटी चिकनी गुलाबी जांघों भारी नितंबों से पेटीकोट नीचे सरक गया मैं बड़े गौर से उनके गदराये गोरे गुलाबी जिस्म को देखने लगा । उनकी मोटी मोटी चिकनी गुलाबी जांघों भारी नितंबों ने मेरे अन्दर आग लगा दी थी। मैं उस को चोदने के लिये और भी बेकरार होने लगा। पहली बार ऐसा नजारा देखने के कारण मुझे अपनी आंखो पर विश्वास नहीं हो रहा था कि मै यह सब देख रहा हूं। मैंने अपने आप को थोड़ा संभाला पर मैं अपने लण्ड को खड़ा होने से नही रोक पाया ।


    तभी आंटी टब में खड़ी हो गयी अब वो शावर के नीचे नहाने लगी पानी उनके नंगे गदराये गोरे गुलाबी जिस्म से होता हुआ उनक़ी बड़ी बड़ी चूचियों के निप्पलों से टपक रहा था। मोटी मोटी चिकनी गुलाबी जांघों के बीच उसकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत से होता हुआ भारी नितंबों सुन्दर टांगों पर छोटी छोटी नदियां बनाता हुआ टब में गिर रहा था। आप यह हिंदी सेक्सी कहानी अन्तर्वासना - स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |

    मैंने फिर देखा तो आंटी एक हाथ से जिस्म पर साबुन लगा रही थी तभी उस ने चूचियों पर जो कि बिलकुल गोल और बहुत ही गोरे रंग की थी साबुन मलने लगी। मैं यह सब देख कर बहुत ही उतेजित हो रहा था। फिर उसने अपने दोनो हाथों की उगलियों से निप्पलस को पकड़ कर अच्छी तरह साबुन मलने लगी। काफी देर तक वो चूचियों पर साबुन मलती रही। थोड़ी देर बाद वे टब में लेट गयी। आंटी एक हाथ से अपने चूचियों पर और दूसरे हाथ से अपनी चूत पर साबुन रगड़ रही थी और आंखे बन्द कर के मजे ले रही थी ।

    अच्छी तरह साबुन लगा चुकने के बाद फिर से वो अपनी नंगी सैक्सी देह शावर के नीचे़ धोने लगी पानी उनके नंगे गदराये गोरे गुलाबी जिस्म से साबुन धो रहा था। उसके बाद फिर वो वैसे ही अपने कमरे में चली गयी। अब मैंने आंटी को चोदने के लिये और भी बेकरार हो उठा। पर यह सम्भव नहीं लग रहा था। एक दिन मेरी किस्मत का सितारा चमका । हुआ यों मैं नहा धोकर टावल लपेटे अपने कमरे में गया तो देखा आंटी खिड़की के पास रखी कुरसी पर रखी दूरबीन के पास खड़ी मुस्करा रही थी जैसे सब समा गयी हो। मैं घबड़ा गया। तभी आंटी मेरी घबराहट देख मुस्करा के बोली- कुछ सामान ऊपर से उतारना है शाम को आ जाना।

    मैंने सकपकाते हुए जवाब दिया जी अच्छा। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वो भी चुदासी है मेरे फौलादी लण्ड से गोरी पावरोटी सी फूली चूत चुदवाना चाहती है क्योंकि टावल की ओर देख रही थी। वह नाराज न हो कर मुझे बहाने से अपने घर बुला रही थी। मैं तो इंतजार मे ही था किस दिन मौका लगे और मैं उसको चोदूं। सो मैंने पक्का इरादा कर लिया कि यदि आंटी चुदवाना चाहेगी तो जरूर चोदूंगा।

    शाम को मैं उनके घर पहुंचा। मैंने चौड़े पायेचे का नेकर व शर्ट पहन रखा था डाइनिंग टेबल पर खडे़ हो कर ऊपर की सेल्फ से सामान उतारने लगा।आंटी भी उसी टेबल के नीचे से सेल्फ को नीचे से देखने लगी। उनकी साड़ी का दुपट्टा सरक गया वो ब्रा नहीं पहने थी जिससे ब्लाउज़ में उनकी चूचियों का नजारा मेरे सामने आ गया। हाय क्या कमाल की चूचियां थीं। एक पल को तो लगा कि दो चांद झांक रहे हों। अब काम करना मेरे बस में नहीं था। मैं खड़े खड़े उस खूबसूरत नजारे को देखने लगा।


    ब्लाउज़ के ऊपर से पूरी की पूरी चूचियां नजर आ रही थीं। यहां तक कि उनके खडे गुलाबी निप्पल भी साफ मालूम दे रहे थे। शायद उन्हें मालूम था कि मैं ऊपर से फ्री शो देख रहा हूं। इसीलिए मुझे छेड़ने के लिए वो और आगे को झुक गई जिससे उनकी पूरी की पूरी चूचियां नजर आने लगीं।

    हाय क्या नजारा था। मैं खुशी खुशी चूचियों की घाटी में डूबने को तैयार था। ऐसा लगता था मानो दो बड़े बड़े खरबूजे साथ साथ झूल रहे हों। मुझे भी मालूम था कि वो नीचे से फ्री शो देख रही थी। मेरे चौड़े पायेचे के नेकर के नीचे से मेरा फौलादी लण्ड उन्हें साफ दिख रहा था। मैं सामान उतारकर उन्हें पकड़ाने लगा। तभी लाइट चली गयी अंधेरे में आंटी ने सामान पकड़ने के लिए हाथ ऊपर उठाये तो दाहिना हाथ मेरे चौडे पायेचे के नेकर में चला गया आंटी ने जैसे मौका ताड़ा और लपक कर मेरा फौलादी लण्ड थाम लिया ।

    तभी मैं बौखलाकर बोल पड़ा - अरे आंटी आपने अंधेरे में गलती से सामान के बजाए मेरा वो पकड़ लिया । तो आंटी हॅसकर बोली - अच्छा कोई बात नही तुम नीचे आ जाओ जब लाइट आ जायेगी तब सामान उतारेंगे ।

    और बाये हाथ से सहारा देकर मुझे नीचे उतारा मैं अंधेरे में लड़खड़ाया तो गिरने से बचने मैंने हाथ आगे किये तो गल्ती से आंटी की चूचियां हाथों में आ गयी मैंने भी मौका ताड़ा और लपक कर दोनों चूचियां थाम ली क्योंकि वो अभी भी मेरा फौलादी लण्ड थामे हुए थी तो आंटी हॅसकर बोली - देखो कही गिर न जाना ठीक से पकड़े रहो।" और दाये हाथ में थमे मेरे लण्ड को बाये हाथ में थामते हुए बोली - ये वो वो क्या लगा रखा है इसका नाम नही पता इसे लण्ड कहते हैं।

    हाय इतनी सी उमर और इतना बड़ा लण्ड। लण्ड है या हथौड़ा।"
    फिर अपने दाये हाथ से मेरा बाये हाथ खीचकर पेटीकोट के ऊपर अपनी चूत पर रखकर इठलाकर बोली - और इसे चूत ले पकड़ और हां जो तुमने दाये हाथ में पकड़ रखा है उन दोनों को चूचियां कहते हैं इन्ही सब चीजो को ही तो तुम दूरबीन से देखा करते थे।" मैं मारे बौखलाहट और उत्तेजना के बोल पड़ा - हां अरे नहीं पर आंटी ये आप क्या कर रही हैं।"
    बाये हाथ में थामे लण्ड को दाहिने हाथ से सहलाते हुए आंटी बोली - तुझे चोदना सिखला रही हूं |
    मैंने कहा -पर मुझे पता नही क्या कुछ हो रहा है मेरा वो यानी लण्ड बेहद कड़ा हो कर बहुत दर्द भी कर रहा है।

    आंटी हॅसकर बोली - कोई बात नही मैं सब ठीक कर दूंगी। बस तू जैसे जैसे मैं बताऊ वैसे वैसे करता जा। जैसेकि अपनी पसन्द की चीजे मिल जाने पर उन्हे प्यार करते हैं सहलाते हैं खाली पकड़ कर बैठे नही रहते।"

    मैंने मारे जोश उत्तेजना खुशी के दाहिने हाथ से दोनों चूचियां ब्लाउज के ऊपर से सहलाते हुए और बाये हाथ से पेटीकोट के ऊपर से चूत सहलाते हुए कहा - जैसा आप कहें। सारे कमरे में आंटी उत्तेजना भरी आवाजे सिसकारियाँ उठ रही थी। -इस्स्स्स्स् ऊउह इस्स्स्स्स्स ऊउह इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्"

    वो दोनों हाथों से मेरा बेहद कड़ा लण्ड सहला व रह रहकर दबा रहीं थी । थोड़ी देर मे आंटी सिसकार कर बोली - इस्स्स्स्स् ऊउह हाय खाली सहलाता ही रहेगा या कुछ मेरी तरह जोर भी लगायेगा।"


    फिर मुझसे रहा नही गया और मैनें दाये हाथ से दोनों चूचियों को धीरे धीरे दबाने लगा और बाये हाथ से पावरोटी सी फूली चूत पेटीकोट के ऊपर से पकड़ने व दबाने लगा।आंटी उत्तेजना में सिसकारियं भरे जा रही थी।आंटी तिरछी होकर इस तरह से खड़ी थी कि उनका बॅाया कंधा मेरे सीने से लग रहा था मेरा दॉंया हाथ उनकी गरदन के पीछे से उनकी ब्लाउज में कसी बड़ी बड़ी चूचियों जोकि उनके बड़े गले से फटी पड़ रही थी को सहला व दबा रहा था यहां तक कि उनके उत्तेजना से खड़े निप्पल भी हाथ में साफ महसूस हो रहे थे। मेरा बॉंया हाथ पेटीकोट के ऊपर से उनकी फूली चूत पर सरकता हुआ उनके गुदगुदे चिकने पेट और नाभी को टटोलने लगा फिर मैंने नाभी मे उंगली डाल दी।

    आंटी ने चिहुँककर सिसकारी भरी- ऊउह इस्स्स्स्स्इस्स्स्स्स् और मेरे नेकर के बटन खोलने लगी मेरी भी हिम्मत बढ़ी और मैं ऊपर से उनके ब्लाउज के अंदर हाथ डाल कर बड़ी बड़ी चूचियों और निप्पल टटोलने लगा और मेरे बॉंये हाथ ने पेटीकोट के अंदर सरककर उनकी पावरोटी सी फूली चूत दबोच ली आंटी ने उत्तेजना में सिसकारी भरी। फिर मुझसे रहा नही गया और मैं आंटी के ब्लाउज के बटन खोलने लगा तभी मैंने बॉंये हाथ से पेटीकोट का नारा खीच लिया और उनकी मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों भारी नितंबों से पेटीकोट नीचे सरक गया मैं पागलों की तरह उनके गदराये जिस्म को टटोलने लगा । उनकी मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों भारी नितंबों को दबोचने टटोलने लगा।

    मेरा लम्बा तगड़ा फौलादी लण्ड बेहद कड़ा होकर आंटी के दोनों गुदाज हाथों में फुफकार रहा था। ब्लाउज के बटन खुलते ही दो बड़े बड़े दूध से सफेद कबूतर फड़फड़ाकर आजाद हो गये।उनकी बड़ी बड़ी चोचे निप्पल खडे़ थे मैंने उनके निप्पलो को बारी बारी से होंठों में ले कर चुभलाने चूसने लगा। अब आंटी से भी बर्दास्त नही किया जा रहा था। आंटी मेरा लण्ड पकड़कर खींचते हुए डाइनिंग टेबल के पास ले गयीं और टेबल से टिककर बोली - अब जल्दी से आजा तुझे असली चुदाई सिखा दूं।

    ऐसा कहकर मेरा लण्ड अपनी दोनों मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों के बीच दबाकर मसल़ने लगी अब मेरे होठ और हाथ उनके सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर पहुँच रहे थे और सहला टटोल दबोच रहे थे। मैं उनके गदराये जिस्म पर जॅहा तॅहा मुंह मार रहा था और आंटी धीरे धीरे डाइनिंग टेबल पर लेटती जा रही थी धीरे धीरे वे पूरी तरह लेट गयीं केवल दोनों टांगे नीचे लटकी थी और मैं उनके बीच मे खड़ा होकर आंटी के गदराये जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचकर उनके ऊपर झुककर बड़ी बड़ी चूचियों और सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मार रहा था बीच बीच मे उनके निप्पलो को बारी बारी से होठों में ले कर चुभला व चूस रहा था अब आंटी से और रहा नही गया और मेरा लण्ड अपनी चूत पर रगड़ते हुए बोली -इस्स्स्स्स् अब जल्दी लण्ड डाल। मैंने कहा - जैसा आप कहें पर चूत का रास्ता तो दिखायें।
     
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