चलती ट्रेन मैं लिया जन्नत का मज़ा

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Mar 13, 2017.

  1. 007

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    बात एक महीने पुरानी हैं, मुझे बुसिनेस्स ट्रिप के लिए देल्ही जाना था और दोस्तों उस ट्रिप की जब भी मुझे याद आती हैं पता नहीं अपने आप मेरा लंड खड़ा हो जाता हैं और मैं मुठ मारने के लिए बेक़रार हो जाता हूँ| दोस्तों आज वह देल्ही की ट्रिप मैं आप सबसे शेयर करने जा रहा हूँ|

    मुझे आज भी साफ़ साफ़ याद हैं, सितम्बर का महीना था और मौसम बहुत सुहाना था, मेरी शाम को आठ बजे की ट्रेन थी, दोस्तों के साथ मैं स्टेशन पर पहुंच गया और प्लेटफार्म पर ट्रैन के आने का वेट करने लगा था| ट्रेन को आने मैं अभी15 - 20 मिनट बचे थे और मैं अपने दोस्तों के साथ प्लेटफार्म पर गप्पे मार रहा था|

    तभी मेरी नज़र कुछ दूर खड़ी एकलड़की पर पड़ी, उसने लाल रंग का टॉप और ब्लू कलर की जीन्स पहनी हुई थी, उसके बाल कमर तक थे खुले हुए और बहुत स्लिम और सेक्सी फिगर था उसका, उसने कंधो पर ब्लैक कलर का चोट बैग टांग रखा था और एक और रोलिंग सूट केस उसके पास था| उसने रेड कलर के ईयर रिंग्स पहने हुए थे, और उसकी मदमस्त जवानी और खूबसूरती देखकर उसके चेहरे से मेरी नज़र नहीं हट रही थी|

    अब ट्रेन को आने मैं १० मिनट और बचे थे और मैं मन ही मन सोच रहा था की काश आज ट्रेन आये हीनहीं ताकि मैं उसे बस देखता रहूँ| अब हर कुछ पलो मैं अपने दोस्तों से आँखे चुरा कर मैं उसे बिच बिच मैं देखने लगा|

    शायद उस लड़की को भी एहसासहो गया था की मैं उसे बार बार देख रहा हूँ, और अब वह कभी अपने बालों पर हाथ फेरती और कभी तिरछी नज़रो से मेरी तरफ देखती, वह उससे ज्यादा दूर नहीं खड़ी थी इसीलिए मैं समझ गया था की शायद उसका कोच नंबर और मेरा कोच नंबर शामे ही होगा|

    यह सब ख्याल मेरे दिमाग मैं शक्ल ही रहे थे और तब तक ट्रैन भी गयी| मेरे दोस्तों को थोड़ी जल्दी थी तो वह मेरे ट्रेन मैं चढ़ते ही मुझे सी ऑफ करके चले गए और मैं ट्रेन पर अपनी सीट पर आकर बैठ गया, मैंने ऐ. सी. थ्री टायर मैं रिजर्वेशन करवाया हुआ था और अपना सामान मैंने अपने बर्थ पर सेट करने के बाद मैं अपने मोबाइल पे बिजी हो गया|

    शायद कुछ मिनट ही बीते होंगे और मुझे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ वह लड़की का भी सेम ही कम्पार्टमेंट था, जस्ट मेरी सामने वाली सीट मुझे अपनी किस्मत पर भरोसा नहीं हुआ और जैसे ही वह सीट पर बैठी मैंने उसे एक हलकी स्माइल दी और उसने भी मुझे एक हलकी स्माइल दी| मैंने उससे पूछा क्या आप भी देल्ही जा रही उसने कहा हाँ, फिर उसने भी मेरे बारे मैं पूछा मैंने उसे बताया की मैं प्राइवेट फर्म मैं जॉब करता हूँ, और बुसनेस्स टूर के लिए देल्ही जा रहा हूँ, उसने अपना नाम नेहा बताया और बातो बातो मैं कब ट्रैन शुरू हो गयी पता नहीं चला| चूँकि ऑफ सीजन चल रहा था हमारे कम्पार्टमेंट मैं बस तीन ही लोग बैठे हुए थे, नेहा मैं और एक अंकल|

    अंकल साइड लोअरबर्थ पर बैठे हुए थे और नावेलपढ़ने मैं व्यस्त हो गए, खैर तब तक मैं और नेहा और फ्रैंक हो गए और मुझे पता चला की वह दिल्ली मैंबस जॉब करती हैं और मेरे शहर की ही रहने वाली थी, और मुझे यह जान कर बहुत ख़ुशी हुई|

    नेहा को शायद मेरी बाते और मेरा सेन्स ऑफ़ ह्यूमर बहुत पसंद आरहा था और अब वह मेरे ही बर्थ पर आकर बैठ गयी और मुझे अपने मोबाइल से अपनी पिक्स दिखने लगी थी, और अब ऐसा लग रहा था जैसे वह मेरी बहुतसालो से फ्रेंड हैं, उसका मेरे कंधे पर हाथ रखना अपने बाल सवारना और मुझे रस्यमयी नज़रो से देखना मुझे बहुत पसंद आरहा था, उसकी खुसबू से मैं पागल हुआ जा रहा था और जब कभी वह मुझे छूती मेरे जीन्स मैं टेंटबन रहा था, पता नहीं नेहा ने यह नोट किया या नहीं|

    नेहा के साथ बातो मैं कब नो बज गए पता नहीं चला और फिर हमने साथ मैं डिनर किया हम दोनों ने अपना डिनर एक दूसरे के साथ शेयर किया, हम दोनों ही घर से डिनर पैक करके लाये थे, मुझे हैरानी हो रही थी की बाजु वाले अंकल ने डिनर अब तक क्यों नहीं किया लेकिन मैंने उनसे बात करने की एक बार भी कोशिश नहीं की क्योंकि मैं नेहा के साथ बहुत फ्रेंडली हो गया था|

    अगले एक घंटे तक मैं उससे बात करते रहा औरथा ऐसा लग रहा था शायद नेहा भी साड़ी रात मुझसे बात करने वाली हैं, तभी मेरा ध्यान बाजु वाले अंकल के तरफ गयाऔर वह अपना नावेल और पानी की बोतल पैक करने लगे, मुझे लगा शायदअब वह सोने वाले हैं, लेकिन मेरी ख़ुशी की ठिकाना नहीं रहा जब मैंने देखा जब ट्रेन भोपाल स्टेशन पर रुकी और वह उतर गए, मैं अब सोचने लगा अब और कोई चढ़े नहीं और भगवान ने मेरी सुन ली, और ट्रेन शुरू हो गयी|

    अब मैं और नेहा अपने कम्पार्टमेंट मैं अकेले थे, और अब मैंने सोचा क्यों ना नेहा के साथ फ़्लर्ट करू और मैंने नेहा के कंधे पर हाथ डाल दिया और नेहा ने ने भी इसका विरोध नहीं किया, मेरा लंड भी जीन्स के अंदर टाइट हो गया था, और पता नहीं नेहा को क्या हुआ उसने मेरी जीन्स की चैन खोलकर मेरा लंड अपने हाथ मैं ले लिया जैसे वह भी इसी मौके का इंतज़ार कर रही थी, मैंने बैठे बैठे लाइट बंद कर दी और कम्बल से दोनों को ढक दिया, उसके कोमल हाथ कम्बल के अंदर मेरे डिक को जोर जोर से सहला रहे थे और मैं उसके बूब्स को दबा रहा था, मैंने उसके टॉप के अंदर से हाथ डाल दिया था और उसके प्यारे बूब्स दबा रहा था उसके बूब्स बिल्कुल परफेक्ट साइज के थे ना ज्यादा बड़े और ना ज्यादा छोटे|

    मैंने उसके बूब्स दबाते दबाते उसको होठो को अपने होठो से लगाया और उसके मुलायम होठो का रस पिने लगा, उसके कोमल हाथ अभी भी मेरे लंड को सहला रहे थे और मेरे हाथ उसके बूब्स को| अब मैंने उसे बर्थ पर लेता दिया और उसका टॉप निकल और फिर उसका जीन्स, हलकी रौशनी जैसे ही उसके चेहरे पर पड़ती थी वह किसी अप्सरा से काम नहीं लग रही थी,

    उसकी ब्रा को मैंने ऊपर किया और मैं उसके ऊपर लेटकर अब उसके बूब्स चूसने लगा, वह हलकी हलकी सिसकिया ले रही थी जिससे मुझे और जोश आरहा था, लगभग15 मिनट बाद मैंने उसके पाँव उठाये और एक जातके से उसकी अंडर वियर निकल दिया और अपना गरम और टाइट लंड उसकी वेजिना मैं डाल दिया, असली मज़ा तो अब आरहा था शुरुवाती कुछ जातके मारने के बाद मैंने महसूस किया मुझे ज्यादा म्हणत नहीं करनी पड़ रही हैं, और ट्रैन के ज़टके मेरे झटको के साथ सही ताल मेल बिठा रहे थे, और ऐसा अनुभव मैंने जिंदगी मैं पहली बार किया था| मैं उसे जोर जोर से झटके मार रहा था और उसके दोनों हाथ मैंने पकड़ लिए थे और अब अपने होठो से फिर उसके होठो को चूमने लगा, उसकी गरम साँसे मेरी साँसों मैं घुल रही थी|

    मुझे इस बात का भी दर था की कोई आना जाये इसीलिए अब मैंने अपनी स्पीड बढ़ादी और उसे बहुत जोर जोर के झटके मारने लगा, करीब20 मिनट झटके मारने के बाद मैंने अपना स्पर्म्स उसके अंदर ही गिरा दिए, और कुछ पल मैं उसके ऊपर ऐसे ही लेता रहा| उसने मुझे जोर से पकड़ लिया था, हम दोनों की साँसे फूल गयी थी, और दोनों एक साथ सांस ले रहे थे, और हम दोनों को कब नींद आयी पता नहीं चला और करीब रात को दो बजे मेरी नींद खुली और नेहा कोदेखा, वह गहरी नींद मैं सो रही थी| मैंने उसे डिस्टर्ब ना करते हुए नेहा की बर्थ पर जाकर सो गया| क्योंकि हम दोनों मेरी बर्थ पर लेते हुए थे|

    सुबह 7 बजे हमारी नींद खुली और हम चाय पीने लगे, वह ऐसे शर्मा रही थी जैसे नयी नयी दुल्हन हो, आठ बजे तक दिल्ली का स्टेशन गया हम दोनों साथ मैं बहार निकले हमने एक दूसरे का एड्रेस और नंबर शेयर कर लिया था| स्टेशन के बहार मैन उसे ओटो पर बिठाते हुए उसके माथे पर किस किया, इस बात को करीब दो महीने हो गए पर हम लोग रोज़ फ़ोन पर बात करते हैं, मैं दिल्ली जाने के लिए बेक़रार हूँ और नेहा से मिलने के लिए तड़प रहा हूँ|

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