ट्रेन में चुदाई की दास्तान

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Sep 11, 2017.

  1. 007

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    //krot-group.ru हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम शान है. अब में आपका ज्यादा समय ख़राब ना करते हुए सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ. में चाची के घर से वापस नागपुर मेरे कॉलेज जा रहा था. मेरा अचानक से जाना हुआ था इसलिए मुझे रिजर्वेशन नहीं मिला था तो मैंने सोचा कि अकेला हूँ, समान भी नहीं है तो जनरल में ही चला जाता हूँ. अब जनरल की भीड़भाड़ तो आपको पता ही है.

    में जनरल बोगी में चढ़ा ही था कि ट्रेन चल पड़ी. अब धक्का मुक्की करते हुए मुझे किसी तरह से थोड़ी सी जगह मिल गई थी तो मैंने राहत महसूस की. अब जहाँ में बैठा था, वहाँ मेरी राईट साइड में एक 22-23 साल की महिला या यूँ कहिये की लड़की बैठी थी, लेकिन वो शादीशुदा थी इसलिए मैंने महिला कहा था, लेकिन शायद वो बहुत गरीब फेमिली से थी, जैसा कि उसके कपड़े देखकर लग रहा था.

    अब वो खिड़की के पास थी और में उसके साईड में था और फिर मेरे बाद में एक 50 साल का बूढा आदमी बैठा था. जब सर्दी का मौसम था इसलिए मैंने उनसे कहा कि खिड़की बंद कर दीजिए, तो उसने खिड़की बंद कर दी. अब शाम के लगभग 8 बज़ रहे थे. अब सभी यात्री लगभग सोने ही लगे थे. अब वो भी खिड़की पर अपना सिर टिकाकर सो गई थी. अब मुझे भी नींद सी आने लगी थी, लेकिन ट्रेन के हिलने से उसकी जांघे मेरी जांघों से टकरा रही थी. अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

    थोड़ी देर में झपकी लेते हुए मैंने अपना सिर उनके कंधे पर रख दिया, तो में एकदम से होश में आया और फिर मैंने अपना सिर हटा लिया. तो उनको भी लगा कि मैंने जानबूझकर नहीं रखा है इसलिए वो कुछ नहीं बोली. फिर कुछ देर के बाद फिर से ऐसा ही हुआ, तो मैंने फिर से अपना सिर हटा लिया. फिर इस तरह से जब 3-4 बार ऐसा हो गया, तो वो बोली कि कोई बात नहीं आप आराम से अपना सिर रख लिज़िए, क्योंकि जब-जब मेरा सिर टकराता था, तो उनकी भी नींद खुल जाती थी.

    अब में उनके कंधे पर अपना सिर रखकर सो गया था. अब मुझे पता नहीं था कि नींद में ही मेरा हाथ उनकी जाँघ पर था और ट्रेन के हिलने से उनकी कोमल जांघे रगड़ खा रही थी. फिर नींद में ही मैंने अपना दूसरा हाथ उनके गले में डाल दिया तो उसने मेरी हथेली पर अपना सिर रख दिया, क्योंकि खिड़की से शायद उसे चोट लग रही थी.

    थोड़ी देर के बाद मेरी नींद खुली तो में अपनी पोज़िशन देखकर चौंक गया, लेकिन में वैसे ही पड़ा रहा, क्योंकि कुछ करने से वो जाग सकती थी, लेकिन मुझे लगा कि शायद उसे भी यह सब अच्छा लग रहा है. फिर में सीधा होकर बैठ गया और उसका सिर अपने कंधे पर रख लिया. तो उसने भी आराम से अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया, तो इसी दौरान उसका गाल मेरे गाल से टच हुआ, तो मुझे तो एक झटका लगा.

    अब उधर मेरा एक हाथ उसकी जांघों को रगड़ रहा था. अब मेरा लंड मेरी पैंट के अंदर टाईट होने लगा था और अब चुदाई का भूत मेरे मन में जागने लगा था. फिर मैंने उसे शाल ओढ़ाने के बहाने अपना हाथ उसकी चूचीयों पर रखा और शांत हो गया, ताकि उसे लगे कि मैंने जानबूझकर नहीं किया है.

    थोड़ी देर के बाद जब वो कुछ नहीं बोली, तो मेरा साहस बढ़ गया और में उसकी चूचीयाँ हल्के से सहलाने लगा. फिर वो कुछ नहीं बोली और मेरी तरफ और सरक गई. अब मैंने उसके मन की बात जान ली थी और फिर अपना काम चालू रखा.

    थोड़ी देर के बाद मैंने उसका हाथ मेरी पैंट पर महसूस किया. अब वो मेरी पैंट के ऊपर से मेरे लंड को सहला रही थी. फिर मैंने नजर घुमाकर देखा तो सभी पैसेंजर सो रहे थे. अब मैंने उसे अच्छी तरह अपनी शाल में छुपा लिया था और उसकी साड़ी ऊपर कर थी और फिर उसकी पेंटी पर अपना एक हाथ लगाया, उसकी पेंटी गीली हो चुकी थी. अब वो मेरी पैंट की चैन खोल रही थी, तो तभी कोई स्टेशन आया. फिर हम लोग उसी तरह पड़े रहे.

    फिर उस स्टेशन पर बहुत सारे लोग उतर गये, शायद वो लोग जनरल पैसेंजर थे. अब रात के 12 बज रहे थे. अब ट्रेन चल पड़ी थी. अब मेरी सामने वाली सीट पर 4 पैसेंजर थे और मेरी सीट पर हम लोग और वही बूढा बैठा था. अब ट्रेन रुकने से सभी जाग गये थे. फिर मैंने सामने वाले से पूछा कि आप लोग कहाँ उतरेंगे? तो वो लोग बोले कि अगले स्टॉप पर.

    तभी वो बुढा बोला कि मुझे भी जगा देना भाई. तो मैंने पूछा कि अगला स्टॉप कब आएगा? तो वो बोले कि 40 मिनट के बाद. फिर मैंने अपनी शाल से अपना एक हाथ बाहर निकालकर उसके बैग से कंबल निकालकर हम दोनों को पूरी तरह से ढक लिया. फिर 10 मिनट में फिर से सभी लोग सो गये.

    मैंने उनसे उनका नाम पूछा, तो उसने अपना नाम सुनीता बताया और बोली कि उसका पति मुंबई में रिक्शा चलाता है और उसकी शादी को अभी 8 महीने ही हुए है, उसकी अपनी सास से नहीं बनती थी इसलिए अपने मायके जा रही है, जो नागपुर से 5-6 स्टॉप पहले है और शायद 4 बजे आएगा. तो मैंने पूछा कि सुनीता, तुम्हें यह सब बुरा तो नहीं लग रहा है? तो वो बोली कि अच्छा लग रहा है साहब, मेरे पति ने तो आज तक मुझे तन का सुख नहीं दिया, वो दारू पीकर आता है और सो जाता है और फिर वो रोने लगी. तो मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया और बोला कि रो मत और फिर में उसकी चूचीयाँ दबाने लगा.

    सुनीता : सस्स, थोड़ा धीरे साहब.

    में : ब्लाउज खोल दूँ.

    सुनीता : खोल दीजिए, साहब.

    फिर मैंने उसका ब्लाउज खोल दिया, उसने अंदर बहुत ही टाईट ब्रा पहन रखी थी, जो मुझसे खुल नहीं रही थी. फिर उसने अपना हाथ पीछे करके अपनी ब्रा खोल दी.

    फिर में उसकी चूचीयों को सहलाने लगा और वो मेरे लंड को प्यार से सहला रही थी. अब जब में उसके निप्पल को पकड़ता था, तो उसके मुँह से सस्स्स्स, हाईईईईईई की आवाज निकल जाती थी.

    सुनीता : साहब में आपका लंड अपने मुँह में ले लूँ? तो मैंने कहा कि हाँ ले लो और चूसो. तो वो मेरा लंड चूसने लगी और फिर मैंने अपना एक हाथ पीछे ले जाकर उसकी पैंटी उतार दी और अपना हाथ उसकी चूत पर रखा. उसकी चूत बहुत गर्म थी और उस पर घने बाल थे. उसकी पूरी चूत और बाल गीले थे.

    अब मेरा पूरा हाथ गीला हो गया था. फिर मैंने अपना हाथ सूंघकर देखा, क्या खुशबू थी? फिर मैंने उसकी चूत का पानी चाट लिया, सच कहता हूँ मुझे बहुत मज़ा आ गया था. फिर तभी सामने वाले ने बूढ़े से कहा कि चाचा जी चलो बैतूल आ गया. फिर हम दोनों जैसे थे वैसे ही पड़े रहे. फिर थोड़ी देर में जब ट्रेन चली, तो करीब पूरा डब्बा खाली था.

    में : सुनीता, कभी किसी से चूत चुसवाई है.

    सुनीता : नहीं साहब.

    में : आज में चूसता हूँ.

    सुनीता : साहब दर्द तो नहीं होगा ना?

    में : बहुत मज़ा आएगा, तुम्हे मेरा लंड चूसने में मज़ा तो आ रहा है ना?

    सुनीता : हाँ साहब, बहुत मज़ा आ रहा है, आपका लंड तो बहुत बड़ा है, मेरे पति का तो बहुत ही छोटा है, वो पूरा खड़ा भी नहीं होता है. अब में समझ गया था कि यह लड़की सेक्स की भूखी है. फिर मैंने 69 की पोज़िशन बनाई और फिर हम दोनों चालू हो गये. फिर मैंने उसके चूत के बालों को हटाकर अपने दोनों हाथों से उसकी चूत के दोनों होंठो को अलग किया और अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दी. तो तभी वो बोली कि साहब क्या कर रहे हो? अब मैंने उसका सिर पकड़कर अपने लंड पर दबा दिया था.

    अब वो भी ज़ोर-ज़ोर से मेरा लंड चूसने लगी थी. फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी, तो थोड़ी देर में ही उसने अपना पानी छोड़ दिया. तो मैंने उसकी चूत की एक एक बूँद को चाट लिया. फिर मेरे लंड ने अपना पानी छोड़ा, तो वो अपना मुँह हटाने लगी, शायद उसे अच्छा नहीं लग रहा था, लेकिन मैंने उसका सिर पकड़कर अपने लंड पर दबा दिया और कहा कि क्या कर रही हो सुनीता? इस अमृत के लिए तो लड़कियाँ मरती है और तुम इसे बर्बाद कर रही हो.

    वो मेरा पूरा वीर्य पी गयी और बोली कि साहब ये तो बहुत अच्छा लगा. फिर हम दोनों ने बाथरूम में जाकर पेशाब किया और वहीं एक दूसरे को फिर से गर्म करने लगे थे. फिर में उसकी दोनों टाँगों के नीचे बैठकर उसकी चूत पीने लगा. फिर थोड़ी देर के बाद वो बोली कि क्या करते हो साहब? अब तो अपने लंड का स्वाद मेरी चूत को चखाओ.

    फिर मैंने उसका एक पैर ऊपर करके अपना लंड उसकी चूत पर लगाया और हल्का सा एक धक्का मारा. तो उसकी चीख निकल गई उउउइईईईईई साहब, में मर जाऊंगी, निकालो ना, आआअ. फिर मैंने उसके होंठ अपने मुँह में ले लिए और एक जोरदार धक्का मारा, तो इस बार मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ पूरा अंदर चला गया. फिर उसके मुँह से सिर्फ़ गून-गून की आवाज निकली.

    थोड़ी देर में उसकी चूत में रास्ता बन गया और अब मेरा लंड आसानी से आ जा रहा था. अब उसे भी मज़ा आ रहा था, लेकिन उसने कहा कि साहब मेरे पैर दर्द कर रहे है. तो मैंने उसे लेट्रिंग सीट पर बैठा दिया और उसको चोदना चालू किया. अब वो साहब और जोर से, मेरी चूत को फाड़ डालो साहब, बहुत मजा आ रहा है, आआहह, ऊहह, चोदो साहब, मेरी कुंवारी चूत की प्यास बुझा दो बोले जा रही थी. अब में भी जोश में आकर झटके मारने लगा था. अब वो भी अपनी गांड उचकाने लगी थी.

    फिर 10 मिनट के बाद वो बोली कि साहब और जोर से करो. तो में समझ गया की वो झड़ने वाली है, तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. फिर थोड़ी देर के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गये. फिर उसने मुझे कसकर अपने सीने लगा लिया और तब जाकर छोड़ा जब मेरा लंड सिकुडकर छोटा होकर उसकी चूत से बाहर निकल गया. फिर उसने पानी से मेरा लंड धोया और फिर अपनी चूत को साफ किया और फिर हम लोग अपने कपड़े पहनकर सीट पर आकर बैठ गये. अब सर्दी में भी हम लोग पसीने-पसीने हो गये थे.

    थोड़ी देर में मुझे नींद आ गई और में उसकी गोद में अपना सिर रखकर सो गया. फिर मेरी नींद एक चाय वाले ने तोड़ी, तो मैंने देखा कि वो लड़की वहाँ नहीं थी. तो मैंने चाय वाले से पूछा कि भैया गाड़ी कहाँ खड़ी है? तो वो बोला कि साहब नागपुर से एक स्टेशन पहले, तो में रात की बात याद करके मन ही मन मुस्कुराने लगा.
     
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