देवर ने मेरे साथ सुहागरात मनाई

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Aug 17, 2017.

  1. 007

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    //krot-group.ru हेलो दोस्तों मैं Kamukta अनीता आप सभी का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। मैं पिछले कई सालो से इसकी नियमित पाठिका रही हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती जब मैं इसकी सेक्सी स्टोरीज नही पढ़ती हूँ। आज मैं आपको अपनी कहानी सूना रही थी। आशा है की ये आपको बहुत पसंद आएगी।
    दोस्तों मेरी शादी बनारस में एक अच्छे घर में हुई थी। मेरे पति सरकारी डॉक्टर थे और बनारस के सरकारी अस्पताल में नौकरी करते थे। मेरी शादी को अभी 6 महीने ही हुए थे। मेरे पति मुझसे बहुत प्यार करते थे। घर में मेरे सास, ससुर और एक देवर संजय था। वो बहुत प्यारा था और मेरा हमेशा ख़याल रखता था। वो भी डॉक्टर बनना चाहता था और अभी नीट की तैयारी कर रहा था। मैं अपनी ससुराल में बहुत खुश थी। एक दिन अचानक संजय ने मुझे फोन किया।
    "भाभी भैया का ऐक्सिडेंट हो गया है। जल्दी से अस्पताल आ जाओ" संजय बोला
    दोस्ती ये बात सुनकर मुझे चक्कर आने लगा। मैं जल्दी से अस्पताल गयी पर तब तक मेरे पति की मौत हो गयी थी। मैं बेहोश हो गयी थी। पति के मरने के बाद मैं बिलकुल मरियल हो गयी थी। अब मेरी जिन्दगी में सब तरफ अँधेरा ही अँधेरा था। मैं पूरा पूरा दिन रोती रहती थी। खाना नही खाती थी। मैं डीप्रेशन में आ गयी थी। इस तरह से 4 महीने गुजर गये। मेरे पापा मम्मी मेरी ससुराल आये हुए थे। मेरे सास ससुर और पापा मम्मी ने फैसला किया की मैं अब अपने देवर संजय पर बैठ जाऊं। मेरी शादी अब मेरे देवर से कर दी जाए।
    "बेटी!! अकेले तू इतनी लम्बी जिन्दगी नही काट सकती। तुझे अब अपने देवर से शादी करनी होगी" मेरी मम्मी बोली
    "मम्मी! जो आपको सही लगे करिये" मैंने कहा
    उसके बाद मेरी शादी मेरे देवर संजय से कर दी गयी। ये कार्यक्रम सादे समारोह में कर लिया गया। क्यूंकि मैं अब विधवा हो चुकी थी। इसलिए कोई जादा ख़ुशी का मौका नही था। पंडित ने मेरी और संजय की शादी करवा दी। फिर अग्नि के 7 फेरे लेकर हम पति पत्नी बन गये। शादी के बाद हम दोनों अपने कमरे में सुहागरात मनाने आ गये थे। अब मेरा देवर संजय ही मेरा नया पति था। मैंने लाल रंग की अच्छी सी साड़ी पहन रखी थी। मैं कमरे में आकर बेड पर एक तरफ बैठ गयी। मैं बार बार संजय को तिरछी नजरो से देख रही थी। उसने कपड़े बदल लिए और कुर्ता पजामा पहन लिया।
    वो भी बिस्तर पर एक तरफ बैठ गया था। वो काफी संकोची स्वाभाव का था। मैं तिरछी नजरो से अब अपने नये पति संजय को देख रही थी और सोच रही थी की कैसा किस्मत का खेल है। जिस देवर के साथ मैं हंसी मजाक करती थी और ठिठोली करती थी आज वो मेरा पति परमेशवर बन गया है। संजय मुझे देखने लगा। उसने धीरे से मेरे हाथ को पकड़ लिया। मैं डर गयी और कापने लगी। मैं जान गयी थी की अब वो मुझे चोदेगा।
    "भाभी अगर आज आपका सुहागरात मनाने का मन नही है तो कोई बात नही। मैं कोई जोर जबरदस्ती नही करूँगा। आप पहले मेरी भाभी हो बाद में मेरी पत्नी हो!!" संजय बोला और दूसरी तरह मुंह करके लेट गया। मैं चुप थी और अपनी जिन्दगी के बारे में सोच रही थी। अब मुझे लग रहा था की संजय बुरा लड़का नही है। धीरे धीरे मैं नार्मल हो गयी। दोस्तों मेरी सास मेरे कमरे में दूध का गिलास और मिठाई रख गयी थी।
    "संजय!!" मैंने उसे आवाज दी। उसने मेरी तरह मुंह किया
    "क्या है भाभी???" वो बोला
    "भाभी नही अब मुझे अनीता बोलो!!" मैंने कहा
    उसके बाद संजय बैठ गया। मैंने उसे अपने हाथो से दूध पिलाया। फिर हम प्यार करने लगे। संजय ने मेरे सिर पर से मेरा पल्लू हटा दिया। फिर मुझे बाँहों में भर लिया। हम दोनों किस करने लगे। संजय जल्दी जल्दी मेरे होठ चूसने लगा। कुछ ही देर में हम दोनों चुदासे हो गये।
    "अनीता चलो जल्दी से कपड़े उतार दो" संजय बोला।
    फिर वो अपने कपड़े उतारने लगा और मैं अपने। मैंने अपनी साड़ी खोलनी शुरू कर दी। फिर ब्लाउस और पेटीकोट भी निकाल दिया। फिर मैंने अपनी ब्रा और पेंटी भी उतार दी। दोस्तों मैं बहुत गोरी और सुंदर लड़की थी। मेरा बदन बहुत गोरा, भरा हुआ और सुडौल था। मेरा फिगर कमाल का था। मैं बहुत सेक्सी और हॉट माल लगती थी। 36, 30, 34 का फिगर था मेरा। छरहरा और बिलकुल फिट। मेरे बूब्स 36" के बड़े बड़े और गोल थे। मैं पूरी तरह से नंगी हो गयी और वापिस आकर बेड पर बैठ गयी। संजय भी नंगा होकर मेरे पास आ गया। उसका लंड अभी सूखा हुआ था और खड़ा नही था। संजय ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। फिर बाहों में भरकर किस करने लगा। हम दोनों कुछ ही देर में गर्म हो गये थे और एक दूसरे को किस कर रहे थे।
    संजय ने मुझे सीने से लगा लिया और मुझे वो हर जगह चूम रहा था। मेरे हाथ, पैर, कमर, पेट, गले, गाल, मत्थे सब जगह उसने चुम्बन की बारिश कर दी थी। मेरी टांगो, जांघो, और पुट्ठो को संजय हाथ से छू और सहला रहा था। मुझे अच्छा लग रहा था। मैंने अपने बाल खोल दिए थे जिससे मैं और सेक्सी माल लग रही थी। फिर संजय ने मेरे मम्मो को पकड़ लिया और हाथ से सहलाने लगा। वो मेरे उपर लेट गया और मेरे रसीले और सेक्सी होठ चूसने लगा। फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट गये और 15 20 मिनट तक हम दोनों चिपके ही रहे और मजा लेते रहे। संजय मुझे सीने से लगाकर बिस्तर पर घुमड़ी खाने लगा। हम दोनों गोल गोल करवट ले रहे थे और मस्ती कर रहे थे। कभी संजय नीचे हो जाता कभी मैं।
    "भाभी दूध पिलाओ ना" संजय बोला
    "श श श अब मैं तुम्हारी भाभी नही बीबी हूँ। प्लीस मुझे अनीता कहकर बुलाया करो" मैंने शिकायत के अंदाज में कहा
    "नही भाभी!! तुम तो मेरे लिए हमेशा भाभी रहोगी क्यूंकि भाभी बीबी से जादा सेक्सी और चुदासी माल होती है" संजय हंसकर बोला
    "अच्छा???" मैंने कहा और मैं भी हँसने लगी
    फिर संजय ने मेरे हाथ खोल दिए और मेरे आम को हाथ में पकड़ लिया और दबाने लगा। बिना देर किये संजय ने मेरे मम्मे को हाथ में ले लिया और उसका साइज पता करने लगा। मेरे दूध बहुत सुंदर थे, छातियाँ भरी हुई, सुडौल और गोल गोल थी, जैसे उपर वाले ने कितनी फुर्सत से बैठकर मेरी जैसी माल और मस्त चोदने लायक लड़की बनाई थी। मेरी उजली छातियाँ पूरे गर्व से तनी हुई थी। छातियों के शिखर पर अनार जैसे लाल लाल बड़े बड़े घेरे मेरी निपल्स के चारो ओर बने थे, जिसमे मैं बहुत सेक्सी माल लग रही थी। संजय की नजर मुझ पर जम गयी। तेजी से उसने मेरी रसीली बलखाती चुचियों को अपने वश में कर लिया और दोनों मम्मो को दोनों हाथ से दबोच लिया और तेज तेज दबाने और मसलने लगा।
    ""उ उ उ उ उ..अअअअअ आआआआ. सी सी सी सी.." मैं तेज तेज चिल्लाने लगी। संजय मेरे दूध को किसी हॉर्न की तरह दबाने लगा। मुझे भी काफी मजा आ रहा था। फिर वो लेटकर मेरे दूध मुंह में लेकर पीने लगा। मैं तडप गयी। मुझे तो जैसे जन्नत मिल गयी थी।
    'भाभी!! तुम इतनी कड़क माल हो की जो मर्द तुमको एक बार देख ले उसका लौड़ा तुरंत खड़ा हो जाएगा और वो तुमको चोदकर ही मानेगा' संजय बोला। मुझे उसकी बात अच्छी लगी। वो फिर से मुझ पर लेट गया और हपर हपर करके लपर लपर करके मेरी नुकीली बेहद कमसिन चूचियों को मुँह में भरके पीने लगा। वो तो बहुत शरारती निकला। वो मेरी नुकीली छातियों को दांत से काट रहा था और पी रहा था। मुझे दर्द भी हो रहा था, उतेज्जना भी हो रही थी और मजा भी आ रहा था। 'संजय!.प्लीस आराम से मेरे नारियल चूसो!! आराम से चूसो!!' मैंने कहा। पर उस पर कोई असर नही पड़ा। वो अपनी धुन में था। जोर जोर से मेरी सफ़ेद कदली समान चूचियाँ दांत से जोर जोर से काट कर पी रहे था। वो बहुत जादा चुदासा हो गया था। उसका बस चलता तो मेरी छातियाँ खा ही लेता। मेरी रसीली छातियों को वो जोर जोर से दबा रहा था और निपल्स पर अपनी जीभ फेरते थे और पी रहा था। दोस्तों, बड़ी देर तक यही खेल चलता रहा। संजय ने मेरे हाथ में अपना लंड दे दिया।
    "भाभी चूसो ना प्लीस" वो किसी छोटे बच्चे की तरह मनुहार करता बोला। हाय दादा!! कितना बड़ा लौड़ा था उसका। 9 इंच था। मैंने हाथ में लिया तो मैं डर गयी थी। मुझे डर लग रहा था की इतना बड़ा लंड मेरी चूत में कैसे अंदर जाएगा। फिर मैं जल्दी जल्दी उसका लंड फेटने लगी। कुछ ही देर में संजय का लंड खड़ा हो गया था। वो देखने में बहुत ही सेक्सी लंड लग रहा था। जैसे किसी गधे का लंड हो। मैं जल्दी जल्दी उसे उपर नीचे करके फेटने लगी। संजय को भी बहुत मजा आ रहा था। वो आह आह की आवाज निकाल रहा था। मैं और जल्दी जल्दी उसका लंड फेटने लगी। फिर मुंह में लेकर मैं चूसने लगी। बार बार मेरे बाल नीचे गिर जाते थे। बार बार मुझे बालों को उपर कान के पीछे ले जाना पड़ता था।
    संजय का लंड तो बहुत ही रसीला था। मैं मुंह में लेकर जल्दी जल्दी चूसने लगी। संजय मेरी चूत सहलाने लगा। धीरे धीरे मैं गर्म हुई जा रही थी। फिर मैंने उसके लंड को गले में अंदर तक भर लिया। बड़ी देर तक मैंने लंड बाहर ही नही निकाला। फिर कुछ मिनट बाद मैंने उसका लंड बाहर निकाला। उसे मेरा ये कारनामा बड़ा अच्छा लगा। फिर मैंने जल्दी जल्दी मेहनत से संजय का लंड चूसने लग गयी और हाथ से फेट रही थी। मेरा हाथ तो रुकने का नाम ही नही ले रहा था। गोल गोल मैंने अपने हाथ से संजय का मोटा लंड फेट रही थी। वो तडप रहा था। उसे बड़ा कामुक महसूस हो रहा था। बहुत सेक्सी अहसास उसे हो रहा था। संजय का लंड इतना लम्बा था की मेरे हाथ में नही आ रहा था। किसी मोटे खीरे की तरह दिख रहा था। मैं जल्दी जल्दी फेट फेट कर चूस रही थी। मेरे मुंह में उसका वीर्य चुपड़ गया था और चिपचिपे माल से डोरी जैसी निकल रही थी। मैं मेहनत से किसी रंडी की तरह उसका लंड जल्दी जल्दी चूस रही थी। अब उसका लंड और जादा फूलकर बड़ा हो गया था। मैं डर रही थी की कहीं उसका लंड मेरी चूत ना फाड़ दे।
    संजय मेरी चूत पर आ गया और उसने मेरी गोरी खूबसूरत टाँगे खोल दी। मैं शरमा गयी। 'भाभी! तेरी चूत बहुत सुंदर है। मैंने कई चूत मारी है पर तुम्हारी चूत सबसे जादा सुंदर है' संजय बोला। मुझे ये सुनकर गर्व हुआ। किसी ने तो मेरी चूत की तारीफ़ की। दोस्तों, हर सुबह मैं जब नहाती थी अपनी चूत जरुर देखती थी। उसे साबुन से मल मल कर नहलाती थी। इसलिए वो बहुत साफ़ और चिकनी थी और बहुत खूबसूरत लगती थी। वो बड़ी देर तक मेरी गुलाबी चूत के दर्शन करता रहा। फिर मेरी चूत पीने लगा। अपने ओंठ को लगा लगाकर मेरी चूत पीने लगा। मैं सिसकने लगी। दोस्तों जादातर औरतो की चूत अंदर की ओर धंसी हुई होती है, पर मेरी चूत तो खूब बड़ी सी थी और बाहर ही तरफ उभरी हुई थी। एकदम फूली हुई गुप्पा सी गुलाबी रंग की चूत थी मेरी चूत। संजय की जीभ मेरी चूत को मजे लेकर चाट रही थी। मुझे बहुत सनसनी महसूस हो रही थी। मैं अपनी चूचियों को खुद ही जोर जोर से हाथ में लेकर दबा रही थी। कहना गलत ना होगा की मुझे भी आज खूब मजा मिल रहा था।
    इसके साथ ही उसने अपनी हाथ की बीच वाली ऊँगली मेरी चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगे। "आऊ... आऊ...हमममम अहह्ह्ह्हह..सी सी सी सी.. हा हा हा.." करके मैं तेज तेज चिल्लाने लगी। मैं क्या करती दोस्तों, मेरी चूत में अजीब से सनसनाहट हो रही थी। संजय जल्दी जल्दी अपनी मध्यमा से मेरी बुर फेटने लगा। मैं अपनी कमर और पेट उपर उठाने लगी। मेरा गला बार बार सुख रहा था। अजीब हालत थी ये। मेरे तन मन में सनसनाहट हो रही थी। एक तरफ संजय की ऊँगली, तो दूसरी तरह उनकी जीभ और होठ। आज मेरा बच पाना मुश्किल ही नही नामुमकिन था।
    संजय को जाने क्या मजा मेरी चूत पीने में मिल रहा था, मैं नही समझ पा रही थी। उसकी जीभ मेरे जिस्म के सबसे कोमल और सम्वेदनशील हिस्से से खेल रही थी। ये विचित्र और अलग अहसास था। मेरे चूत के दाने को वो अपने दांत से पकड़ लेता था और उपर की तरह खीच लेता था। मैं पागल हो रही थी।
    "प्लीससस..प्लीससस.. उ उ उ उ ऊऊऊ...ऊँ-ऊँ..ऊँ.संजय अब मुझे चोद लो वरना मैं मर जाउंगी!!" मैंने कहा
    देवर ने पति बना संजय अब मुझे चोदने को रेडी था। फिर संजय ने अपना बड़ा सा लौड़ा मेरे भोसड़े पर सेट कर दिया और धक्का जोर से अंदर की तरह मारा। उसका लंड किसी मिसाइल की तरह मेरी चूत में प्रवेश कर कर गया। दोस्तों मेरे पहले पति का लंड संजय से छोटा था। वो मुझे चोदकर इतना मजा नही दे पाते थे जितना की आज संजय दे रहा था। आज मैं खुलकर अपने देवर के साथ सुहागरात मना रही थी।
    दोनों पैर उठाकर मैं संजय से चुद रही थी। वो मुझे हप हप करके चोदने लगा। मैं "आआआआअह्हह्हह..ईईईईईईई.ओह्ह्ह्हह्ह.अई..अई..अई..अई..मम्मी..." करके सिसकारी लेने लगी। मोटा लौड़ा खाने में कुछ जादा मजा आता है। क्यूंकि इससे चूत अच्छी तरह से चुद जाती है। चूत की दीवारों में मोटा लौड़ा जादा रगड़ और जादा घर्षण पैदा करता है जिससे चरम सुख मिलता है। इस तरह मैं आज संजय से मजे से चुदवाने लगी। मैं सीधा लेटकर दोनों टाँगे फैलाकर चुदवा रही थी। फिर वो अचानक जोर जोर से इतनी जोर से धक्के देने लगा की मुझे लगा की जमीन ही खिसक जाएगी। मेरे कमरे में पट पट का शोर होने लगा लगा।
    "...अई.अई..अई..अई..इसस्स्स्स्स्स्स्स्..उहह्ह्ह्ह...ओह्ह्ह्हह्ह...चोदोदोदो...मुझे और कसकर चोदोदो दो दो दो" मैं पागलो की तरह गुहार लगा रही थी। ये मेरी चुदाई और गहरी ठुकाई का मीठा शोर था। इस ध्वनि से आज मेरा घर पवित्र हो गया। मेरी चूत फटते फटते बची। फिर वो जवान लौंडा मेरी योनी में ही झड गया। 10 मिनट बाद ही वो फिर से गर्म हो गया और उसने मेरी गांड के नीचे 2 मोटा तकिया लगा दिया। फिर उसने मेरी गांड में तेल लगाकर दिया और लंड में भी तेल चुपड़ लिया। फिर संजय ने मेरी गांड पर अपना 9" का मोटा लंड सेट कर दिया और जोर से अंदर माल दिया। फिर वो मेरी गांड जल्दी जल्दी चोदने लगा। मुझे काफी दर्द हो रहा था पर मजा भी भरपूर मिल रहा था।
    संजय पूरे जोश में मेरी गांड जल्दी जल्दी चोद रहा था। उसे किसी कुवारी लड़की की तरह कसावट मिल रही थी। दोस्तों मेरे पति मेरी गांड नही मारते थे। कुछ देर बाद मैं आनंद में डूब गयी थी। मुझे बड़ा सेक्सी फील हो रहा था। संजय ने मेरी गांड चोद चोदकर छेद बड़ा कर दिया था। फिर उसने माल मेरी गांड में ही छोड़ दिया। मेरी सुहागरात पर देवर से पति बने संजय ने 3 बार मेरी चूत चोदी और 2 बार गांड मारी। सुबह जब मैं उठी तो मेरा बदन टूट रहा था। सारे बदन में दर्द हो रहा था। पर रात में मुझे भरपूर मजा मिला था। कहानी आपको कैसे लगी, अपनी कमेंट्स नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर दे।
     
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