पीछे से उसके योनि मे अपना लिंग डाल दिया

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Dec 14, 2017.

  1. 007

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    //krot-group.ru indian chut दोस्तो मेरा नाम शेखर है, मेरी उम्र २३ साल है | ये कहानी है आज से चार
    साल पहले की | उस वक़्त मैं १२वी पास कर चुका था और
    इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था यानी की एक साल ड्रॉप आउट था | मेरा एक
    दोस्त जो की मेरा बैचमेट था उसने साल २००८ मे ही पुणे के एक फेमस कालेज
    मे दाखिला ले लिया था | मेरा पहला प्यार मुझे मेरे इसी दोस्त की वजह से
    ही मिला था |
    हुआ यूँ की ये मेरा दोस्त पहले सेमेस्टर के बाद अपने घर गवालियर आया हुआ
    था, मैं भी उस वक़्त वही आया हुआ था | ह्म शुरू से ही काफ़ी अच्छे दोस्त
    रहे है | ३१ दिसम्बर की रात को हम आपस मे गप्पे लड़ा रहे थे, मैं उससे
    उसके कालेज के बारे मे पूछ रहा था | जाहिर है लड़कियों की बात तो निकलनी
    ही थी, मैने उससे पूछा की कॉलेज मे कोई गर्लफ़्रंड बनाया है क्या ? . .
    उसने कहा नही अभी कोई मिली नही वैसी | मैने मज़ाक मे ही कहा फिर मुझे कोई
    दिला दे अपने कॉलेज वाली | उसने भी मज़ाक मे ही अपने कॉलेज की एक लड़की
    का नंबर दे दिया | उस लड़की का नाम था 'अनामिका घोष' |
    स्कूल के दीनो से ही मैं लड़कियों से काफ़ी संकोच महशूस करता था | मैने
    कभी किसी लड़की से ज़्यादा बात नही की थी, तो मुझे समझ नही आ रहा था की
    इससे कैसे बात करूँ | फिर भी मैने सोचा की चलो ट्राइ करते है | अगले दिन
    ही न्यू एअर था तो मैने शुरुआत की हॅपी न्यू एअर मेसेज से, हालाँकि मैं
    कॉल करना चाहता था पर हिम्मत नही हुई | पहला मेसेज भी मैने अपने दोस्त के
    नंबर से ही किया | फिर मैने उसको अपने लोकल नंबर से मेसेज करना शुरू किया
    वो भी दोस्त के ही नाम से | उसने भी मुझे अपने कॉलेज का जान कर न्यू एअर
    विश किया | फिर नॉर्मल बातें शुरू हुई जैसे न्यू एअर पे क्या कर रही हो,
    इस एअर मे क्या करने वाली हो वग़ैरह वग़ैरह | अभी तक मैने उसे कॉल नही
    किया था क्यूंकी एक तो आवाज़ पकड़े जाने की डर थी दूसरी मेरे पास ज़्यादा
    बॅलेन्स नही थी| १२ बजे रात तक हमारी बात होती रही मेसेजस मे | ना मैने
    कॉल किया ना ही उसने | १२ बजे के बाद बस एक ही मेसेज किया न्यू एअर वाला
    क्यूँकी आपको भी मालूम होगा १ जन्वरी को टर्राफ काम नही करती | उसके बाद
    मैं और लोगो को विश करने मे लग गया |
    अगले दिन २बजे के बाद मैने एक मेसेज किया 'क्या कर रही हो' ? कुछ घंटो के
    बाद रिप्लाइ आया 'कुछ ख़ास नही' |उसका घर वैसे कोलकाता था पर वो पुणे में
    ही किसी रिश्तेदार के पास रुकी हुई थी इसीलिए शायद वो बोर हो रही थी।
    फिर शाम को मैने अपने डॅडी के मोबाइल से उसे कॉल किया दोस्त के नाम से
    ही, वो मुझे नही पहचान पाई शायद उसने मेरे दोस्त से ज़्यादा बात नही की
    होगी | थोड़ी देर की इधर उधर की बात के बाद मैने उसे अपना असली नाम बताया
    और कहा की " मैं आपका गाना सुनना चाहता था क्यूंकी मेरे दोस्त ने बताया
    की आप बहुत आच्छा गाती है"
    ये बात सच भी थी मेरे दोस्त ने मुझे पहले ही कुछ कुछ बताया था उसके बारे
    मे | वैसे दोस्तो नाम से ही आपको मालूम हो गया होगा की वो बंगाली थी और
    बंगालीयो को गाना तो बचप्पन से ही सिखाया जाता है। इस तरह हमारी बात आगे
    बढ़ी, शायद मेरा अपने बारे में सच बताना उसे अच्छा लगा। उसी रात हमारी
    बात कम से कम 1.30 घंटे चली। 1जनुअरी होने के कारण फ़ोन बार बार
    डिसकनेक्ट हो रहा था, फिर भी उसने मुझे गाना सुनाया। वाकई उसकी आवाज़
    अच्छी थी। मैंने भी उसके लिए एक गाना गया "चुरा लिया है तुमने जो दिल को
    "। इस तरह हमारी दोस्ती हो गयी।
    अगले 5 दिन हमारी बहुत ज्यादा बात होने लगी। और ज्यादा बात करने के लिए
    मैंने उसे रिलायंस CDMA सेट लेने को कहा। मुझे याद है उस समय रिलायंस
    GSM नहीं था और रिलायंस CDMA में अनलिमिटेड फ्री 999 के पैक पे था। खैर
    मैंने भी एक रिलायंस सेट ले लिया। फिर क्या हम दिन रात फ़ोन पे ऑनलाइन
    रहते थे। दोस्तों मुझे मालुम है आपलोगों में ये बहुतो के साथ हुआ होगा।
    अगले 20 दिन ऐसा ही बात चलता रहा। न मैंने उसे देखा था न ही उसने मुझे
    हालाँकि मुझे मालुम था की वो थोड़ी सांवली है लेकिन खूबसूरत है जैसा की
    मेरे दोस्त ने मुझे बताया था । मैंने अभी तक उसे प्रोपोज नहीं किया था।
    हालाँकि हम दोनों को दिल से मालुम था की "We are in LOVE " क्यूंकि हमारे
    फीलिंग्स और थॉट्स काफी मिलते जुलते थे। दोस्तों ये प्यार तो ऐसी चीज़
    है की अगर इकरार की पूरी उम्मीद हो फिर भी दिल कहने को डरता है।
    25th जनवरी को बातो ही बातो में मैंने उसे पुछा की, "तुम सारा दिन मुझसे
    बात करती हो तुम्हारे दोस्त कुछ नहीं कहते क्या"??उसने थोड़े गुस्से से
    कहा "तुम्हे क्या पता वो क्या कहते है, तुम्हे इस से क्या फर्क पड़ता है
    वो क्या कह रहे है "??मैंने कहा "प्लीज बताओ वो क्या कह रहे है।"
    उसने बताया "वो हमेशा ये पूछते है की तुम्हारा ये कैसा दोस्त है की तुम
    इससे दिन रात बात करती हो और दोस्तों के साथ ऐसा क्यूँ नहीं करती हो
    "।मैं , "अनामिका तुम क्या चाहती हो "

    "मै नहीं जानती "

    फिर थोड़ी देर खामोशी। मैंने थोडा हकलाते हुए कहा , "अनामिका आई लव यू
    ,डू यू लव मी ?"

    उसने पुछा, क्या??

    मैंने फिर से थोडा जोर से कहा , "अनामिका डू यू लव मी ??आई लव यू "

    "यस यस यस " उसने इतनी खुशी से कहा जैसे वो कब से इंतज़ार कर रही थी इन लम्हो का।

    वो सारी रात हम सो नहीं पाए जैसे की हमारी सुहागरात हो। इस दिन से ही हम
    थोड़ी रोमांटिक बातें करने लगे। इस दिन मैंने जाना की फ़ोन पे कैसे किस
    लेते है और देते है। इसके बाद तो जैसे हम दोनों की दुनिया ही अलग हो गयी।
    अगले विक में मैंने उससे अपने फोटोज मेल करने को कहा। जब मैंने फोटोज
    देखा तो और भी दीवाना हो गया , बिपाशा बासु की तरह कोम्प्लेक्स्न था
    उसका। मैंने उसे अपने फोटोज नहीं भेजे थे फिर भी वो मिलने को बेताब थी,
    मैं तो था ही। अब तो हम बस मिलने का प्लान करने लगे।
    इस बीच हम फ़ोन पर सेक्स चैट करने लगे थे। मैंने जाना की वो वर्जिन है मै
    भी वर्जिन था। पहली बार जब मैंने सेक्स चैट किया तो वो बहुत गरम हो गयी
    ,उस दिन वो कुछ भी ठीक से नहीं कर पायीं। उसने मुझे अगली बार ऐसा ना
    करने को कहा। लेकिन दोस्तों सेक्स ऐसा नशा है जो जब तक 'तन और मन ' दोनों
    तक न पंहुचे सुकून नहीं मिलता। तन को रियल सुकून देना तो फ़ोन पे पॉसिबल
    नहीं था। हम और बेताब होते चले गए।
    आप लोगों को मालूम होगा इंजिनियर एक्साम्स के फॉर्म्स दिसंबर से ही
    निकलने लगते है। मैंने अपने मई महीने के एक्साम्स के सेंटर पुणे में ही
    डाले ताकि हमारी मुलाकात भी हो जाए।
    फिर क्या मेरी बेताबी और बढती गयी और मैं मई महीने का इंतज़ार करने लगा।
    हमने ऐसा कोई प्लान नहीं किया था की हमें सेक्स करना है वैसे मेरे दिमाग
    में कुछ तो था ,लेकिन कोई फिक्स्ड नहीं था क्या करना है कैसे करना है।
    क्यूंकि मैं वर्जिन था। मैंने बस पोर्न में ही देखा था। अक्सर पोर्न
    देखते हुए masterbate (मुठ मारना) किया करता था। इतना ही नहीं एक दिन में
    3-4बार masterbate जरुर कर लेता था। सेक्स चैट करते हुए भी बहुत बार किया
    था। लेकिन masterbate करना और सेक्स करने में बहुत फर्क होता है। जो भी
    हो मैंने घर में ही सारा इन्तेजाम कर लिया था। घर से निकलने से 2-3 दिनों
    पहले मैंने अपने प्यूबिक हेयर को शेव किया। 3 पैकेट कंडोम्स MF अलग अलग
    फ्लेवर्स के रख लिए।
    एग्जाम के एक दिन पहले मैं पुणे पंहुच गया। उसी दिन मैं उससे मिलने उसके
    कॉलेज पंहुचा। ये थी हमारी पहली मुलाक़ात। वो अपने कुछ दोस्तों के साथ
    थी, मैं भी अपने पुणे वाले दोस्त क साथ था। मैं तो काफी शर्मा रहा था
    क्यूंकि ये मेरी पहली डेट थी। उसे भी थोड़ी शर्म आ रही थी। उसने ब्लैक
    जींस और वाइट टॉप पहना था। उसकी फिगर थी 34 28 32 जैसा की उसने फ़ोन पे
    बताया था। थोड़ी देर में हमारे दोस्त चले गए। हम दोनों कॉलेज कैंपस मे ही
    बेंच पे बैठे थे। मैं अभी भी शर्म से उसकी तरफ नहीं देख पा रहा था। आखिर
    उसने कह ही दिया की "तुम तो लड़की की तरह शरमा रहे हो।"
    मैं झेंप गया और कहा "नहीं मै कंहा शरमा रहा हूँ।"
    मैंने इधर -उधर नजरे दौड़ाई दूर में कुछ लोग थे पर वो हमारी तरफ नही देख
    रहे थे। मैं अपनी बात साबित करने के लिए उसके गालो को चूमने के लिए बढ़ा।
    लेकिन वो मुझसे दूर हो गयी।
    देखा, "मैं नहीं शरमा रहा हूँ, तुम शरमा रही हो।"
    फिर हम इधर-उधर की बातें करने लगे। कॉलेज कैंटीन से वो मेरे लिए कुछ खाने
    को ले कर आई थी। हमने साथ-साथ खाया। फिर थोड़ी देर में मै वंहा से चला
    आया। चूँकि मेरा दोस्त हॉस्टल मे रहता था तो मैंने ठहरने के लिए होटल ले
    लिया था।
    अगले दिन ही मेरा एग्जाम भी था। हमारा प्लान था की हम मेरे एग्जाम के बाद
    मिलेंगे। लेकिन मेरा मन अब एग्जाम देने का नहीं था।
    होटल आने के बाद मैंने रात को उससे कहा की,"मेरा एग्जाम देने का मन नहीं
    है और वैसे भी ये बहुत जरुरी एग्जाम नहीं है।" तुम सुबह को ही होटल आ
    जाओ।
    उसने भी हामी भर दी। शायद वो भी मेरे साथ ज्यादा समय बिताना चाहती थी।
    अगले दिन सुबह मै जल्दी जागकर फ्रेश होकर उसका इंतज़ार करने लगा।मैंने उस
    दिन जीन्स और शर्ट पहनी थी। मैंने कंडोम का एक पैकेट जिन्स मे रख लिया
    ताकि जरुरत पढने पे ढूंढना न पड़े। करीब आधे घंटे बाद वो आ गयी। उसे होटल
    में जाने में बहुत डर लग रहा था।
    मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा, "बिना कुछ बात किये मेरे साथ चलो।"
    थोड़ी ही देर में हम होटल के कमरे में थे। वो आकर बेड पे बैठ गयी। मैंने
    टी वी ओन किया। मै उससे थोड़ी दूर जा बैठा। आज उसने सलवार कमीज पहना हुआ
    था। उसके बाल खुले हुए थे और कानो में एअरिंग लटक रहे थे। हम टी वी
    देखते हुए बात करने लगे। मैं अभी भी उसकी तरफ देख नहीं पा रहा था। कुछ
    समय बाद हमने ब्रेकफास्ट में चाय और ब्रेड आमलेट मँगा लिया।
    चाय खत्म करने के बाद हमने बेड पे ही ब्रेड आमलेट खाना शुरु किया। खाते
    हुए भी हमारी बातचीत जारी थी। अचानक से मैंने उसे होंठों पे किस किया और
    करता ही चला गया, लगभग 30 सेकंड मेरे होंठ उसके होंठो से चिपके रहे। वो
    मुझसे दूर नहीं जा पायी। उसने अपनी आँखें बंद कर ली। ये मेरा,उसका और
    हमारा पहला किश था। जब मैंने उसे छोड़ा तो वो मुझसे नजरे नहीं मिला पा
    रही थी। उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी और वो बेड पे लेट गयी। हमने खाना
    खत्म नहीं किया था। मैंने उसे हाथ पकड़ कर बिठाने की कोशिश की.मैंने उसे
    खाने को कहा, उसने कुछ जबाव नहीं दिया बस ना मे गर्दन हिला दी। मेरी भी
    धड़कने तेज़ हो चली थी। उस के बाद हम खाने की हालत में नहीं थे।
    वो अभी भी बिस्तर पे ही लेटी थी पर शायद थोड़ी डरी हुई थी। मैं भी बिस्तर
    पर उसके बगल में लेट गया। उसने अपनी आँखें बंद की हुई थी। बगल में लेटे
    हुए ही मैं उसे निहारने लगा। उसकी सांसें अभी भी तेज़ थी और मैं उसके
    स्तनों को ऊपर नीचे होता देख पा रहा था। इसी तरह लेटे-लेटे मैं अपने
    होठों को उसके होठों के करीब ले गया। मेरी सांसें उसकी सांसो से मिल रही
    थी। उसकी सांसें और भी तेज़ हो गयी और अब तो उसके स्तन साफ-साफ नीचे-ऊपर
    होते दिखाई दे रहे थे। मुझे ये देख कर बहुत अच्छा लग रहा था। मेरा लिंग
    मे तनाव में आ चूका था और शायद उसके स्तन भी शख्त हो चुके थे। फिर मेरे
    होंठो ने उसके होठों से मिलने मे देरी नहीं की। ये चुम्बन पिछली बार से
    ज्यादा गहरा और प्रगाढ़ था। मैं उसके दोनों होंठों का रस ले रहा था। चंद
    सेकंडो में वो भी मेरा साथ देने लगी। उसके हाथ कुछ हरकत में आये। शायद वो
    मुझे गले लगाना चाहती थी। पर मैं बगल से उसके ऊपर था तो उसने मुझे गर्दन
    से पकड़ कर और भी ज्यादा करीब खिंच लिया। मुझे और ज्यादा जोश आ गया। मैं
    पागलों की तरह उसके नरम होठों को चूसने लग गया। अकस्मात ही मेरा बायाँ
    हाँथ उसके स्तनों पे चला गया और उसके दाहिने गोलाइयों को दबाने लग गया।
    मेरा अनुमान सही था, वो काफी सख्त हो चुके थे। उसने एक जोर की आंह भरी और
    मेरी गर्दन पे उसका दबाव बढ़ गया। मैंने चूमना नहीं छोड़ा था। फिर मैं
    थोडा उठा और दोनों हाथों से दोनों स्तनों को दबाते हुए उसके गालो से होते
    हुए उसके गर्दन और सीने को चूमने लगा। वो जोर-जोर से आहें भरती गयी।
    अब मैंने उसे चूमना छोड़ कर उसके स्तनों की तरफ ध्यान दिया।उसकी सांसें
    थोड़ी थमी हुई थी। मैंने गले के तरफ से कमीज़ में हाथ डाल कर उसके स्तनों
    को छुआ और कमीज़ थोड़ी ऊपर करके उसके सख्त हो चुके स्तनों को देखने की
    कोशिश कर रहा था।उसने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी।मैं उसके स्तनों का
    कुछ ही भाग देख पा रहा था।
    उसने अपनी आँखें खोली और मुझे देखते हुए उसने कहा, "मत करो।"
    लेकिन मैं नहीं रुका या फिर मैं अपने आप को रोक नहीं पाया। मैं जल्द से
    जल्द उसके गोलाइयों को निहारना चाहता था। मैं कमीज़ के गले की ओर से ही
    उन दो उभारो को बाहर निकालने की कोशिश करने लगा।
    उसने कहा, "ये ऐसे बाहर नहीं आयेंगे। "
    मैंने जल्दी से उसकी कमीज़ नीचे से गर्दन तक मोड़ दिया। अब मै उसके
    कप्नुमा ब्रा देख सकता था। पर मुझे फिर भी चैन नहीं मिला और मै कमीज़ को
    पूरा निकालने लगा।
    उसने आपत्ति जताते हुए कहा, "अब पूरा बाहर निकालोगे क्या??"
    मैंने कहा, "हाँ प्लीज निकालो न।"
    वो उठकर बैठी और अपनी कमीज़ निकाल दी। बैठे बैठे ही मैं दोनों हाथों से
    उसके नारंगियो को प्यार से गोलाई में मसलने लगा। और फिर से मैंने अपने
    होंठ उसके होंठों से लगा दिया। चुमते हुए मैंने ब्रा के कप को बूब्स के
    ऊपर खिसका दिया। पहली बार मै उसके नगन बूब्स को अपने हाथो में ले रखा था।
    ये मेरे अन्दर तूफान से कम नहीं था। मैंने अपने लिंग को इतना सख्त कभी
    नहीं महसूस किया था जितना की आज कर रहा था। मैंने चूमना छोड़ दिया और
    उसके स्तनों के दर्शन करने लगा। उसके निप्पलस नुकीले और हलके ब्राउन रंग
    के थे और उसके आस-पास का घेरा 2 रुपये के सिक्के के माप का था। जल्दी ही
    उसके निप्पल मेरे मुँह मे थे। मैं उसके दायें निप्पल को चूस रहा था और
    दूसरा मेरे दायें हथेली मे कैद था। उसने फिर से एक गहरी सांस लेते हुए
    आंह भरी। उसने जोर से मेरा सर पकड़ लिया और उसका सर पीछे की ओर लटका रहा
    था। मैंने उसके निप्पल को चूसते हुए ही अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ की
    तरफ ब्रा के हूक्स के पास ले जाकर उसे बिस्तर पे लिटा दिया। फिर मैं ब्रा
    के हूक्स को खोलने की कोशिश करने लगा। जब मेरी कोशिश के बाद भी हुक नहीं
    निकला तो मैंने कहा, "ये कैसे निकलेगा।"
    इस बार उसने बिना कुछ कहे मेरी तरफ देखा और थोडा ऊपर उठकर ब्रा के हूक्स
    खोल दिए। बाकी का काम पूरा करने में मैंने उसकी मदद की। अब उसके कमर से
    ऊपर कोई भी कपडे नहीं थे। मैं उसके स्तनों को टक टकी लगा कर देख रहा था।
    वो कभी अपनी आँखें खोलती कभी बंद कर लेती। शायद वो देखना चाहती थी मैं
    क्या कर रहा हूँ। मैंने उसके बूब्स को निहारते हुए अपना शर्ट निकाल लिया।
    मैंने शर्ट के नीचे कुछ नहीं पहन रखा था तो मैं उसकी ही अवस्था मैं आ
    गया। मैं फिर से उसके होठों को चूसने लगा। फिर तेज़ी से उसकी गर्दन और
    बूब्स चुमते हुए उसकी नाभि के पास जा पंहुचा। मैं उसकी नाभि पे
    हल्की-हल्की जीभ फेर रहा था। उसकी आँखें मटक रही थी और नाभि का भाग कॉप
    रहा था जैसे मैं तरंगे छोड़ रहा हूँ। ये देख मुझे मर्डर फिल्म का हॉट सीन
    याद आ गया था। मैं फिर भी जीभ फेरता रहा और वो पलट कर पेट के बल हो गयी
    मैंने उसकी पीठ पर जीभ चलाना जारी रखा। उसकी पीठ पे थोड़े सर के बाल आ
    रहे थे जिसे मैंने हाथों से हटाकर एक ओर कर दिया। मैं पूरी तरह से उसके
    ऊपर आकर उसके हाथों को अपने हाथों से दबाकर गर्दन से लेकर कमर तक बेतहासा
    चूमने लगा। फिर मैंने उसे पीठ के बल लिटा दिया और एक तरफ लेट कर उसके
    बूब्स को चूसने और दबाने लगा। वो फिर से आहें भरने लगी। मैं उसके निप्पलस
    से भी खेल रहा था और बारी-बारी से दोनों को चूस रहा था। बीच -बीच में मैं
    उसके मुलायम मम्मो को काट लेता था। ये उसे पसंद आ रहा था क्यूंकि उसने
    मुझे ऐसा करने से मन नहीं किया।
    उसके मम्मो को चूसते हुए मेरा हाथ उसकी सलवार के ऊपर गया। ऊपर से ही मुझे
    महसूस हो गया की वो बहुत ज्यादा गीली है। इधर मेरा लिंग अचानक फिर से
    बहुत ज्यादा तन गया। मुझे थोडा दर्द भी महसूस हुआ, मैं उसे बाहर निकालना
    चाहता था लेकिन मैं ये भी चाहता था की अनामिका खुद ही बाहर निकाले। मैं
    सलवार के ऊपर से ही उसकी योनि को रगड़ने लगा। उसके मुँह से हलकी सित्कारे
    निकल रही थी। मैंने अचानक से उसकी सलवार का नाडा खोल दिया। अब मुझे अपने
    आप पे संयम नहीं पा रहा था। मैंने अपना हाथ सीधे उसकी पैंटी के अन्दर डाल
    दिया और उसकी योनि को रगड़ने लगा। उसकी योनि बहुत ही ज्यादा गीली थी।
    उसकी योनि पे थोड़े-थोड़े बाल थे। उसने कुछ 4-5दिन पहले ही रिमूव किया
    होगा। मैंने उस वक़्त ऊँगली अंदर डालने की कोशिश नहीं की, मैं जानता था
    ये उसके लिए भी पहली बार है। थोड़ी देर इसी तरह रगड़ने के बाद मैं सलवार
    उतारने लगा। इस बार उसने फिर से आप्पति जताई। वो बोली, "मत करो
    प्लीजजजजजजजजज।"
    उसकी हाँ न में मुझे कोई फर्क नहीं लगा। वैसे भी मैं कहा रुकने वाला था।
    मैंने एक ही बार में सलवार और पेंटी दोनों उतार दी। जन्नत का द्वार मेरे
    सामने था। मैं उसकी योनि के होंठों को फैला कर देखना चाहता था लेकिन उसने
    अपनी टांगें जोड़ ली। पहले तो मैंने जबर्दस्ती से उसकी टांगें अलग करने
    की कोशिश की। फिर मैं उसके ऊपर आकर उसके होठों को चूमने लगा। चूमते-चूमते
    मैंने उसका हाथ उफान मार रहे लिंग पे दिया। पहले तो एक-दो बार वो हाथ हटा
    ले रही थी लेकिन फिर वो उसे सहालने लगी और मैं उसके बोबो को चूसने और
    मसलने लगा। उसे भी जोश आया , "मुझे देखना है" मेरे लिंग के तरफ इशारा
    करते हुए उसने कहा।
    मैंने पीठ के बल लेट गया और कहा, "खुद ही देख लो "
    वो मेरा बेल्ट खोलने लगी और मुझे उसकी थोड़ी मदद करनी पड़ी। फिर उसने
    मेरे जींस और अंडरवियर को एक साथ निचे सरका दिया। मेरा लिंग उफान मारते
    हुए तम्बू की तरह खड़ा हो गया उसके सामने। मैंने अपने सारे बचे कपडे तन
    से अलग कर दिया।
    मेरा लिंग देख कर वो डर गयी बोली "इतना बड़ा।"
    मैंने कहा कोई बात नहीं,"तुम आराम से ले लोगी।"
    मेरा लिंग बहुत ज्यादा बड़ा तो नहीं है। 7 इंच से थोडा कम ही होगा। हाँ
    लेकिन मोटा थोडा ज्यादा है। मैंने उसे अच्छे से अपना लिंग दिखाया, उसे
    बताया सुपाडा किसे कहते है वगैरह वगैरह। उसकी झिझक दूर हो चुकी थी। और
    उसे भी पहली बार का रोमांच आ रहा था। मैंने फिर से उसे किस करना शुरू कर
    दिया। पुरे शरीर पे चूमते-चाटते मैं उसकी योनि के पास पंहुचा। इस बार
    उसने अपनी टांगें नहीं जोड़ी। पहले तो मैंने उसकी प्यारी योनि को फैलाकर
    उसके दर्शन किये। ऐसा ग़जब का रोमांच मेरे जेहन में आया की में शब्दों
    में बयां नहीं कर सकता। हलकी सी गुलाबी-गुलाबी ऐसा लगा जैसे जन्नत दिख
    गया मुझे। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी योनि पे एक प्यारा सा चुम्बन
    दिया।
    उसने कहा, 'छि:'।
    मैंने कोई जवाब नही दिया। मेरे चेहरे पे मुस्कान थी। पहली बार मैंने ऐसा
    किया था मुझे भी बहूत अच्छा नहीं लगा। लेकिन फिर भी मैंने उसे ज्यादा
    एक्साइट करने का सोच के फिर से नमकीन सागर में अपने होंठ लगा दिए। मै
    उसकी क्लाइटोरिस को चूसने लगा और कभी-कभी उसे काट भी लेता। मैंने पहले ही
    किताबों मे और फिल्मो मे देखा था की ये लडकियों मे सब से संवेदनशील अंग
    होता है। मेरे ऐसा करने से वो उत्तेजना में तडपने लगी। मै उसके बूब्स भी
    दबाने लगा। मैंने ऐसा ज्यादा देर तक नहीं किया। मैं नहीं चाहता था की वो
    उस वक़्त पानी छोड़े। मैं घुटनों के बल उठा और उसे मेरा लिंग चूसने को
    कहा। वो राजी नहीं हो रही थी।
    मैंने कहा, "नहीं अच्छा लगे तो फिर मत करना।"
    फिर वो तैयार हो गयी। उसने मेरे लिंग को हाथ में पकड़ा और थोडा सा अपने
    होंठों से लगाया। मैंने अन्दर की ओर थोडा दवाब लगाया। उसने अन्दर जाने
    दिया। लेकिन वो 2 इंच से ज्यादा नहीं ले पायी क्यूंकि उसके मुँह के हिसाब
    से मेरा लिंग मोटा था। फिर वो मेरे लिंग को चूसते हुए अन्दर बाहर करने
    लगी। मैंने उसे उसकी ऊँगली अपने मुँह ले कर बताया की वो कैसे करे। वो
    मेरा अनुसरण करने लगी। फिर तो जैसे मैं जन्नत में पंहुच गया। उस वक़्त
    मुझे मालूम नहीं था की उसे वाकई अच्छा लग रहा था या मुझे खुश करने क लिए
    कर रही थी लेकिन बाद में मुझे पता चला उसे मजा आ रहा था। वो ज्यादा देर
    तक ऐसा नहीं कर पायी क्यूंकि उसके मुँह मे दर्द होने लगा। मैंने भी उसे
    फ़ोर्स नहीं किया चूँकि ये मेरे लिए पहला एक्सपीरियंस था तो मुझे पानी
    छुटने का भी डर था।
    मैंने कंडोम निकाल लिया। मैंने उसे पहले भी फ़ोन पे बता रखा था की कंडोम
    फ्लेवर मे भी आते है। मैंने पूछा कौन सा फ्लेवर?? उसने स्ट्रोबेरी पसंद
    किया।
    अब वो बिस्तर पे लेटी थी। मैंने कंडोम का पौच जैसे ही फाड़ा।
    उसने कहा, "लाओ मुझे दो।"
    मैंने पुछा , "तुम्हे आता है लगाना?"
    जवाब मे उसने यही सवाल दोहरा दिया
    मैंने कहा, "हाँ बिल्कुल आता है मुझे "
    फिर हम दोनों ने मिलकर कंडोम लगाया। सच कंहू तो मुझे अपने आप पे गर्व
    महसूस हो रहा था की मे बहुत धैर्य से ये सब कर रहा था।
    मैं उसकी टांगों के बीच मे आ गया। मैंने उससे पूछा, डालूँ ??
    उसने एक गहरी सांस ली और सहमति मे अपना सर हिलाया।
    मै अपने लिंग के सुपाडे को उसकी क्लाइटोरिस पे रगड़ने लगा। मुझे लगा की
    वो फिर से एक्साइट है तो मैंने हलके से थोडा लिंग अन्दर दाल दिया। उसकी
    हलकी सी चीख निकली।
    "बहुत दर्द हो रहा है।" उसने कहा
    मै रुक गया।अपना लिंग अन्दर डाले हुए उसके होंठों को चूसने लगा साथ मे
    मम्मे भी दबाने लग गया। इस बार मे सबसे ज्यादा जोर से दबा रहा था। इतनी
    देर में मेरा करीब आधे से थोडा कम लिंग अंदर जा चूका था। जब मैंने देखा
    की दर्द पे उसका ध्यान नहीं है तो इस बार मैंने अचानक से पूरा लिंग डाल
    दिया। वो दर्द से हाथ पैर मारने लगी। मुझे पीछे की ओर धकलने लगी। लेकिन
    मैंने अपनी पकड़ बनायीं रखी। मैंने लिंग बाहर नहीं निकलने दिया। अगर वो
    होटल मे नहीं होती तो शायद वो बहुत जोर से चीखती। मै उसी तरह लिंग डाले
    हुए फिर से उसे चूमने लगा।
    थोड़ी देर में जब उसका दर्द चला गया तो वो पुछी, "क्या सारा अन्दर चला गया??"
    मैंने मुस्कुरा कर जवाब दिया, "एस डार्लिंग "
    "पूरा अन्दर चला गया !!!!!" उसने फिर से दोहराया और उठ कर देखने की कोशिश करने लगी।
    "हाँ देखो न" मैंने उठने में उसकी मदद करते हुए कहा।
    "कितना अजीब है न किसी चीज़ को अपने अन्दर ले लेना।"
    उसकी इस बात में मुझे हंसी आ गयी। मैंने कहा, "ये तो नेचुरल है।"
    उसने सहमती जतायी। मैंने फिर से धीरे-धीरे धक्के लगाना शुरु कर दिया।
    धीरे-धीरे उसको भी मजा आने लगा। लेकिन अगर मे गति बढाता था तो उसे दर्द
    होता था। तब मैंने उसे डौगी पोजीशन के बारे में बताया। अभी तक मैंने उसके
    कुल्हे नहीं देखे थे तो मेरा भी मन था। वो ये सोच कर तॆयार हो गयी की उस
    मे दर्द कम हो। जब मैंने अपना लिंग उसकी योनि से निकाला तो देखा मेरे
    लिंग पे हल्का खून लगा था और पूरा लिंग उसके योनि रस मे सना हुआ था। अब
    मैंने उसको पेट के बल लिटा दिया। फिर कुल्हे के पास से उसे पीछे की तरफ
    उठा दिया जिससे वो डौगी पोजीशन मे आ गयी। पहले तो मैंने उसके कुलहो को
    गौर से देखा। क्या मासल कुल्हे थे। मैंने उसके कुल्हो की तारीफ करते हुए
    पीछे से उसके योनि मे अपना लिंग डाल दिया। फिर से मैंने शुरुआत धीरे-धीरे
    ही की। जब उसके कुल्हे मेरे शरीर से टकराते तो अदभुत आनंद मिल रहा था।
    कभी मै उसके कुल्हे को पकड़ लेता था तो कभी मैं उसके लटकते नारंगियों से
    खेलने लगता। यही कोई 4 मिनट इस पोजीशन मे अपना लिंग उसकी योनि में
    अन्दर-बाहर धके लगाता रहा।
    फिर जब मुझे लगा में छुट जाऊँगा तो मैंने उसे अपने ऊपर आने को कहा। मैं
    पीठ के बल लेट गया और वो अपना चेहरा मेरी तरफ करके मेरे लिंग को अपनी
    योनि मे डालते हुए बैठ गयी। अभी भी उसे पूरा अन्दर लेने में तकलीफ हो रही
    थी। मैंने उसके कुल्हो को नीचे से अपने हाथों से सहारा देकर धके लगाने
    शुरु कर दिए। वो भी मेरा साथ दे रही थी। में धयान रख रहा था की अपना पूरा
    लिंग उसकी योनि मे न डालूँ। 3-5 मिनट हुए होंगे मुझे इस तरह धके लगते हुए
    फिर मुझे लगा मेरा पानी निकलने वाला है तो मैंने जल्दी से उसको पीठ के बल
    लिटा दिया और ऊपर आकर उसके टांगो को अपने कंधे पे टिका कर जोर-जोर से धके
    लगाने लगा। कुछ 12-15 धके के बाद मेरा पानी छुट गया। उसे दर्द तो हो रहा
    था लेकिन उस दर्द में मजा ज्यादा दिख रहा था। उसके चेहरे पे एक संतोष झलक
    रहा था।
    हम इसी तरह नंगे एक दूसरे से चिपके हुए लेटे रहे। थोड़ी देर मे मैंने
    उससे बात शुरू की उसे कैसा लगा। जवाब मे उसने मुझे एक गहरा चुम्बन दिया
    और कहा मेरी स्माइल बहुत प्यारी है।
    ये थी मेरी पहली सेक्स और पहली कहानी जो की ना जाने क्यूँ मुझे भी लिखने
    को मन किया। आप लोग अपने कमेंट्स जरुर दे ताकि मैं अपनी अगली कहानी
    लिखूं।
     
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