बारिश में भीगी कुँवारी ममता (Baris Mein Bhigi Kunwari Mamata)

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Apr 27, 2016.

  1. 007

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    //krot-group.ru बारिश में भीगी कुँवारी ममता (Baris Mein Bhigi Kunwari Mamata)

    चक्रेश यादव
    दोस्तों नमस्कार, सुनाइए कैसे हैं आप?
    इस बार काफी दिनों बाद आपसे रुबरू हो रहा हूँ। में भी आपकी तरह भौज.com की नियमित पाठक हूँ ।
    यह कहानी मेरे एक दोस्त की है तो आगे उसी की जुबानी.



    ​

    मेरा नाम रवि है, मैं गोरे रंग का एक छरहरे बदन का युवक हूँ। बात तब की है जब मैं इण्टर में पढ़ रहा था।
    मुझे खेल में काफी रुचि थी जिससे मेरा शरीर एकदम फिट रहता था। स्कूल में मेरा बड़ा सम्मान था, सभी मेरी इज्जत करते थे। तमाम लड़कियाँ मुझसे किसी न किसी बहाने बात करती थी मगर मेरी उनमें कोई खास दिलचस्पी न थी।
    मुझे जो लड़की पसंद थी वो मेरे गाँव की थी, उसका नाम ममता था, वह मुझसे एक कक्षा पीछे थी।
    ममता छोटे कद की एक गोरी और स्वस्थ शरीर की खूबसूरत लड़की थी जिस पर स्कूल के कई लड़के मरते थे लेकिन ममता किसी को भी लाइन नहीं देती थी।
    मैं उसे पसंद तो करता था मगर एक समस्या ये थी कि मेरे और उसके घर से कुछ दिन पहले झगड़ा हुआ था जिसके चलते बोलचाल बंद थी।
    अपनी तरफ से बोलने की मेरी हिम्मत भी नहीं होती थी, डर था कि कहीं यह अपने घर में मेरी शिकायत न कर दे।
    वो गाँव की अन्य लड़कियों के साथ पैदल जाती थी और मैं सायकिल से जाता था।
    मैं काफी मजाकिया टाइप का था, गाँव की अन्य लड़कियाँ तो मुझसे खूब बातें करती थी लेकिन ममता चुप रहा करती।
    जब भी मैं कोई हँसने वाली बात कहता तो बाकी लड़कियाँ तो खूब मजा लेती लेकिन ममता सिर्फ मुस्कुरा कर रह जाती थी।
    दिन बीतते गए हमारे स्कूल में अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
    मैंने भी हिस्सा लिया और ममता ने भी लिया।
    वो अपनी कक्षा में अव्वल थी और मैं अपनी कक्षा में।
    कई दौर चले अंत में अपनी टीम में मैं और उसकी टीम में वो बची।
    अब मेरे और उसके बीच मुकाबला था। खूब जोर-आजमाइश हुई।अंत में जीत उसी की हुई। मैंने उसे वहीं सबके सामने मुबारकबाद दी उसने भी मुस्कुरा कर मुझे धन्यवाद कहा।
    कई दिन बीत गए बात आगे न बढ़ सकी लेकिन एक अच्छा बदलाव मैंने देखा कि ममता मुझे देखकर मुस्कुराती रहती थी।
    एक दिन में स्कूल जाते समय वो मुझे रास्ते में मिली।
    मैंने कहा- ममता पैदल क्यों चल रही हो, आओ मेरी सायकिल पर बैठ जाओ न?
    वो मुस्कुराते हुए बोली- सायकिल में कैरियर तो है नहीं कहाँ बैठाओगे?
    मैंने कहा- तो क्या हुआ? आगे डण्डे पर बैठ जाना।
    शरमाते हुए वो बोली- नहीं तुम्हारा डण्डा मुझे गड़ेगा, मैं न बैठूँगी।
    मैंने कहा- नहीं गड़ेगा नहीं, तुम आओ तो सही।
    वो थोड़ा सीरियस होते हुए बोली- देखो पीछे दो लड़के आ रहे हैं, तुम जाओ, मुझे फिर कभी सायकिल पर बैठाना।
    मुझे मन मारकर जाना पड़ा।
    कई दिन बीत गए पर ममता के करीब जाने का मौका न मिला।
    अगस्त का महीना था आकाश में काले बादलों ने डेरा डाल दिया था, बारिश के पूरे आसार थे।
    उस दिन मेरा आठवाँ घंटा खाली था तो मैं कुछ देर तो इधर उधर घूमता रहा, फिर सोचा कहीं बारिश न हो जाए इसलिए छुट्टी होने के आधा घंटा पहले ही सायकिल उठाई और घर की ओर चल दिया।
    अभी मैं स्कूल से थोड़ी दूर ही आया था कि बूँदें पड़ने लगी। मैंने सायकिल भगाई, मैं तेज बारिश शुरु होने के पहले ही घर पहुँचना चाहता था।
    स्कूल से लेकर मेरे गाँव तक एक नहरिया (छोटी नहर) थी जिसकी बगल में खेत थे और एक जगह आम का बाग पड़ता था।
    बारिश तेज होती चली जा रही थी। मैंने देखा आगे आम के बाग के थोड़ा पहले एक लड़की लम्बी चाल में चली जा रही थी।
    मैंने सायकिल और भगाई, नजदीक जाकर देखा तो वो ममता थी।
    मुझे बड़ी खुशी हुई, मैंने ब्रेक मारे और कहा- आओ जल्दी।
    उसने पहले चारों तरफ देखकर तसल्ली की कि कोई देख तो नहीं रहा है, फिर मुस्कुराकर आई और सायकिल पर आगे डंडे पर बैठ गई। मुझे तो जैसे दौलत मिल गई हो। मैंने ममता को बैठाकर सायकिल चलाना शुरुकिया।
    मेरे पैर बार बार ममता की जाँघों को छू रहे थे।
    बारिश में भीगी लड़की, जवान खूबसूरत जिस्म मुझे पागल कर रहे थे। धीरे-धीरे मेरा लंड खड़ा होकर उसकी पीठ में गड़ने लगा। वो सिमट गई पर बोली कुछ नहीं।
    तब तक आम का बाग आ गया था और बारिश तेज हो गई थी। सायकिल रोक कर मैंने कहा- ममता, बारिश काफी तेज हो गई है थोड़ी देर किसी पेड़ के नीचे रुक लिया जाए बारिश कुछ थम जाए तो चला जाएगा।
    उसने कहा- ठीक है।
    और सायकिल से उतरकर एक पेड़ के नीचे खड़ी हो गई।
    मैं भी सायकिल खड़ी करके उसके बगल में जाकर खड़ा हो गया।
    मैं उसको ऊपर से नीचे तक देख रहा था, क्या कयामत लग रही थी, भीगने के कारण उसके कपड़े शरीर से चिपककर पारदर्शी हो गए थे, सलवार जगह-जगह चिपककर उसकी मांसल जाँघों का प्रदर्शन कर रही थी।
    छाती के ऊपर दुपट्टा रखा था इसलिए मुसम्मी मैं नहीं देख पा रहा था।
    मुझे इस तरह घूरते देख वो बोली- क्या देखते हो?
    'नहीं कुछ नहीं.बस ऐसे ही !' मैं थोड़ा सकपकाया।
    'मुझे मत बनाओ मैं सब समझती हूँ।'
    मेरी चोरी पकड़ी गई, मैंने बात बदलते हुए कहा- नहीं मैं कह रहा था कि तुम्हारा दुपट्टा भीग गया है उसे निचोड़ लो।
    ममता मेरी मंशा समझ रही थी, उसने मुस्कुराते हुए अपना दुपट्टा हटाया और निचोड़ने लगी।
    दुपट्टा के हटते ही जैसे बिजली गिरी हो, गीली कुरती उसकी छातियों से चिपक गई थी जिससे उसकी छातियों का काफी हिस्सा नुमाया हो रहा था, मेरा मन कर रहा था कि तुरंत पी लूँ।
    मैंने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखा, कोई विरोध नहीं। उसने अपनी नजरें नीचे कर ली। यह देखकर मेरी हिम्मत बढ़ी मैंने अपने दोनों हाथ कंधे से सरकाकर उसकी छातियों पर रख दिए, और जैसे ही दबाना चाहा उसने मेरे हाथ पकड़ लिए और चेहरा मेरे चेहरे के करीब कर दिया।
    मैंने छातियाँ छोड़कर उसका सर पकड़ लिया और उसे चूमने लगा।
    मैं उसे चूम रहा था ऊपर से गिरती हुई पानी की बूँदें उसे और कामुक बना रही थी। मैं उसके होंठों को चूसने लगा।
    मस्ती से उसकी आँखें बंद हो चुकी थी।
    मेरा हाथ उसकी पीठ से फिसलता हुआ नितम्बों तक जाकर उनकी कठोरता को जाँचने लगा।
    वो भी जोश में आकर मुझसे बुरी तरह लिपट जाती।
    मैं कुरती के ऊपर से ही उसके निप्पल के चारों ओर उँगली घुमाने लगा। वो सिहर उठी।
    धीरे से मैंने उसकी कुरती को ऊपर उठाकर उसकी गोल छातियों को नंगा कर दिया, उसने ब्रा नहीं पहनी थी, उसकी छातियाँ तन गई थी।
    गोल व भरी हुई छातियों पर पानी की बूँदें और भी खूबसूरत लग रही थी।
    मैंने एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसना शुरु किया व दूसरे को मसल रहा था।
    इधर मेरे लंड का बुरा हाल था। मैंने चेन खोल कर उसे बाहर निकाला और ममता को पकड़ा दिया।
    उसने पकड़ लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। 5 मिनट बाद मैंने उसके सलवार का नाड़ा खोलना शुरु किया तो उसने रोक दिया और बोली- यहाँ नहीं, रास्ते का काम है। कोई आ गया तो?
    बात मेरी भी समझ में आ गई। बगल में मक्की(भुट्टे) का खेत था, मैं उसे लेकर खेत में घुस गया।
    मक्की काफी बढ़ी हुई थी इतनी कि आदमी खड़ा भी हो तो बाहर से न दिखे।
    खेत में घुसकर मैंने ममता का सलवार निकाल दिया। काले रंग की पैंटी में उसकी पावरोटी फूली थी, थोड़े बहुत विरोध के बाद मैंने पैंटी में हाथ डाल दिया।
    चूत गीली हो रही थी। थोड़ी देर तक मैं सहलाता रहा।
    ममता काफी गर्म हो चुकी थी।
    पैंटी निकाल कर मैं उसकी चूत चाटने लगा। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।
    थोड़ी ही देर में उसका पानी छूटने लगा। वो मेरे सर को अपनी चूत पर जोर से दबाने लगी।
    मैंने अपना लंड उसके मुँह में देना चाहा, वो मना करने लगी, काफी न-नुकर के बाद उसने लंड का अग्रभाग मुँह में लिया।
    मैं धीरे-धीरे उसके मुँह को चोदने लगा।
    वो भी अब मन लगाकर चूस रही थी।
    कुछ देर में मुझे लगा कि मेरा पानी निकलने वाला है तो मैंने लंड उसके मुँह से निकाल लिया और उसे चित्त लिटाकर उसकी चूत पर रगड़ने लगा।
    वो 'आऽऽह.ओऽह' की आवाजें निकाल रही थी।
    थोड़ी देर में वो अपनी चूत ऊपर उठाने लगी तो मैंने लोहा गर्म देख कर चोट कर दी।
    लंड का अग्रभाग उसकी चूत में डाल दिया, वो जोर से चीखी- आऽह. बड़ा दर्द हो रहा है बाहर निकालो।
    मगर मैंने बाहर नहीं निकाला, उसका ध्यान बंटाने के लिए मैंने उसकी छातियाँ चूसने लगा।
    बारिश के पानी से उसके चेहरे पर तमाम बूँदों को मैंने चाट लिया।
    उसका दर्द कम हो चुका था। मैंने उसके होठों को अपने होटों की गिरफ्त में लिया और एक जोर का झटका दिया।
    लंड आधा रास्ता पार कर चुका था।
    वो काँप उठी और अपने हाथ पैर पटकने लगी, बड़ी मुश्किल से मैं उसे शांत कर पाया, होंठ चूसे, निप्पल चूसे तब कहीं जाकर वो शांत हुई।
    यह सब करते हुए मैं धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर करने लगा तो 5 मिनट बाद उसे भी मजा आने लगा, वो नीचे से धक्के देकर मेरा सहयोग करने लगी।
    मैंने चुदाई की गति बढ़ा दी।
    उसके मुँह से लगातार मादक सिसकारियाँ निकल रही थी।
    ऐसी कई कहानियाँ हैं Bhauja.com डॉट कॉम पर।
    चूत कसी होने के कारण जल्दी ही मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, मैंने तुरंत लंड निकाल लिया और उसे घोड़ी बनाकर लंड अंदर डाल दिया।
    उसके मुँह से 'आऽह' निकल गई।
    मैंने ताबड़तोड़ चुदाई चालू कर दी। वो मुझे हाथ के इशारे से रोक रही थी मगर मेरे ऊपर तो शैतान हावी था।
    बारिश अपने पूरे वेग में थी जैसे बादलों ने भी मुझसे शर्त लगा ली हो कि देखें पहले किसका पानी निकलता है।
    करीब 5-7 मिनट में मेरा पानी निकल गया, हम एक दूसरे से जोर से लिपट गये और काफी देर वैसे ही पड़े रहे।
    बारिश भी अब कम हो चुकी थी।
    हमने अपने-अपने कपड़े पहने, मेरे लंड में घाव हो गया था, उसकी चूत भी दुख रही थी। यह मेरी पहली चुदाई थी।
    हमने एक-दूसरे को किस किया और घर की ओर चल पड़े


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  2. 007

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    इस बार काफी दिनों बाद आपसे रुबरू हो रहा हूँ। में भी आपकी तरह भौज.com की नियमित पाठक हूँ ।
    यह कहानी मेरे एक दोस्त की है तो आगे उसी की जुबानी.



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    मेरा नाम रवि है, मैं गोरे रंग का एक छरहरे बदन का युवक हूँ। बात तब की है जब मैं इण्टर में पढ़ रहा था।
    मुझे खेल में काफी रुचि थी जिससे मेरा शरीर एकदम फिट रहता था। स्कूल में मेरा बड़ा सम्मान था, सभी मेरी इज्जत करते थे। तमाम लड़कियाँ मुझसे किसी न किसी बहाने बात करती थी मगर मेरी उनमें कोई खास दिलचस्पी न थी।
    मुझे जो लड़की पसंद थी वो मेरे गाँव की थी, उसका नाम ममता था, वह मुझसे एक कक्षा पीछे थी।
    ममता छोटे कद की एक गोरी और स्वस्थ शरीर की खूबसूरत लड़की थी जिस पर स्कूल के कई लड़के मरते थे लेकिन ममता किसी को भी लाइन नहीं देती थी।
    मैं उसे पसंद तो करता था मगर एक समस्या ये थी कि मेरे और उसके घर से कुछ दिन पहले झगड़ा हुआ था जिसके चलते बोलचाल बंद थी।
    अपनी तरफ से बोलने की मेरी हिम्मत भी नहीं होती थी, डर था कि कहीं यह अपने घर में मेरी शिकायत न कर दे।
    वो गाँव की अन्य लड़कियों के साथ पैदल जाती थी और मैं सायकिल से जाता था।
    मैं काफी मजाकिया टाइप का था, गाँव की अन्य लड़कियाँ तो मुझसे खूब बातें करती थी लेकिन ममता चुप रहा करती।
    जब भी मैं कोई हँसने वाली बात कहता तो बाकी लड़कियाँ तो खूब मजा लेती लेकिन ममता सिर्फ मुस्कुरा कर रह जाती थी।
    दिन बीतते गए हमारे स्कूल में अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
    मैंने भी हिस्सा लिया और ममता ने भी लिया।
    वो अपनी कक्षा में अव्वल थी और मैं अपनी कक्षा में।
    कई दौर चले अंत में अपनी टीम में मैं और उसकी टीम में वो बची।
    अब मेरे और उसके बीच मुकाबला था। खूब जोर-आजमाइश हुई।अंत में जीत उसी की हुई। मैंने उसे वहीं सबके सामने मुबारकबाद दी उसने भी मुस्कुरा कर मुझे धन्यवाद कहा।
    कई दिन बीत गए बात आगे न बढ़ सकी लेकिन एक अच्छा बदलाव मैंने देखा कि ममता मुझे देखकर मुस्कुराती रहती थी।
    एक दिन में स्कूल जाते समय वो मुझे रास्ते में मिली।
    मैंने कहा- ममता पैदल क्यों चल रही हो, आओ मेरी सायकिल पर बैठ जाओ न?
    वो मुस्कुराते हुए बोली- सायकिल में कैरियर तो है नहीं कहाँ बैठाओगे?
    मैंने कहा- तो क्या हुआ? आगे डण्डे पर बैठ जाना।
    शरमाते हुए वो बोली- नहीं तुम्हारा डण्डा मुझे गड़ेगा, मैं न बैठूँगी।
    मैंने कहा- नहीं गड़ेगा नहीं, तुम आओ तो सही।
    वो थोड़ा सीरियस होते हुए बोली- देखो पीछे दो लड़के आ रहे हैं, तुम जाओ, मुझे फिर कभी सायकिल पर बैठाना।
    मुझे मन मारकर जाना पड़ा।
    कई दिन बीत गए पर ममता के करीब जाने का मौका न मिला।
    अगस्त का महीना था आकाश में काले बादलों ने डेरा डाल दिया था, बारिश के पूरे आसार थे।
    उस दिन मेरा आठवाँ घंटा खाली था तो मैं कुछ देर तो इधर उधर घूमता रहा, फिर सोचा कहीं बारिश न हो जाए इसलिए छुट्टी होने के आधा घंटा पहले ही सायकिल उठाई और घर की ओर चल दिया।
    अभी मैं स्कूल से थोड़ी दूर ही आया था कि बूँदें पड़ने लगी। मैंने सायकिल भगाई, मैं तेज बारिश शुरु होने के पहले ही घर पहुँचना चाहता था।
    स्कूल से लेकर मेरे गाँव तक एक नहरिया (छोटी नहर) थी जिसकी बगल में खेत थे और एक जगह आम का बाग पड़ता था।
    बारिश तेज होती चली जा रही थी। मैंने देखा आगे आम के बाग के थोड़ा पहले एक लड़की लम्बी चाल में चली जा रही थी।
    मैंने सायकिल और भगाई, नजदीक जाकर देखा तो वो ममता थी।
    मुझे बड़ी खुशी हुई, मैंने ब्रेक मारे और कहा- आओ जल्दी।
    उसने पहले चारों तरफ देखकर तसल्ली की कि कोई देख तो नहीं रहा है, फिर मुस्कुराकर आई और सायकिल पर आगे डंडे पर बैठ गई। मुझे तो जैसे दौलत मिल गई हो। मैंने ममता को बैठाकर सायकिल चलाना शुरुकिया।
    मेरे पैर बार बार ममता की जाँघों को छू रहे थे।
    बारिश में भीगी लड़की, जवान खूबसूरत जिस्म मुझे पागल कर रहे थे। धीरे-धीरे मेरा लंड खड़ा होकर उसकी पीठ में गड़ने लगा। वो सिमट गई पर बोली कुछ नहीं।
    तब तक आम का बाग आ गया था और बारिश तेज हो गई थी। सायकिल रोक कर मैंने कहा- ममता, बारिश काफी तेज हो गई है थोड़ी देर किसी पेड़ के नीचे रुक लिया जाए बारिश कुछ थम जाए तो चला जाएगा।
    उसने कहा- ठीक है।
    और सायकिल से उतरकर एक पेड़ के नीचे खड़ी हो गई।
    मैं भी सायकिल खड़ी करके उसके बगल में जाकर खड़ा हो गया।
    मैं उसको ऊपर से नीचे तक देख रहा था, क्या कयामत लग रही थी, भीगने के कारण उसके कपड़े शरीर से चिपककर पारदर्शी हो गए थे, सलवार जगह-जगह चिपककर उसकी मांसल जाँघों का प्रदर्शन कर रही थी।
    छाती के ऊपर दुपट्टा रखा था इसलिए मुसम्मी मैं नहीं देख पा रहा था।
    मुझे इस तरह घूरते देख वो बोली- क्या देखते हो?
    'नहीं कुछ नहीं.बस ऐसे ही !' मैं थोड़ा सकपकाया।
    'मुझे मत बनाओ मैं सब समझती हूँ।'
    मेरी चोरी पकड़ी गई, मैंने बात बदलते हुए कहा- नहीं मैं कह रहा था कि तुम्हारा दुपट्टा भीग गया है उसे निचोड़ लो।
    ममता मेरी मंशा समझ रही थी, उसने मुस्कुराते हुए अपना दुपट्टा हटाया और निचोड़ने लगी।
    दुपट्टा के हटते ही जैसे बिजली गिरी हो, गीली कुरती उसकी छातियों से चिपक गई थी जिससे उसकी छातियों का काफी हिस्सा नुमाया हो रहा था, मेरा मन कर रहा था कि तुरंत पी लूँ।
    मैंने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखा, कोई विरोध नहीं। उसने अपनी नजरें नीचे कर ली। यह देखकर मेरी हिम्मत बढ़ी मैंने अपने दोनों हाथ कंधे से सरकाकर उसकी छातियों पर रख दिए, और जैसे ही दबाना चाहा उसने मेरे हाथ पकड़ लिए और चेहरा मेरे चेहरे के करीब कर दिया।
    मैंने छातियाँ छोड़कर उसका सर पकड़ लिया और उसे चूमने लगा।
    मैं उसे चूम रहा था ऊपर से गिरती हुई पानी की बूँदें उसे और कामुक बना रही थी। मैं उसके होंठों को चूसने लगा।
    मस्ती से उसकी आँखें बंद हो चुकी थी।
    मेरा हाथ उसकी पीठ से फिसलता हुआ नितम्बों तक जाकर उनकी कठोरता को जाँचने लगा।
    वो भी जोश में आकर मुझसे बुरी तरह लिपट जाती।
    मैं कुरती के ऊपर से ही उसके निप्पल के चारों ओर उँगली घुमाने लगा। वो सिहर उठी।
    धीरे से मैंने उसकी कुरती को ऊपर उठाकर उसकी गोल छातियों को नंगा कर दिया, उसने ब्रा नहीं पहनी थी, उसकी छातियाँ तन गई थी।
    गोल व भरी हुई छातियों पर पानी की बूँदें और भी खूबसूरत लग रही थी।
    मैंने एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसना शुरु किया व दूसरे को मसल रहा था।
    इधर मेरे लंड का बुरा हाल था। मैंने चेन खोल कर उसे बाहर निकाला और ममता को पकड़ा दिया।
    उसने पकड़ लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। 5 मिनट बाद मैंने उसके सलवार का नाड़ा खोलना शुरु किया तो उसने रोक दिया और बोली- यहाँ नहीं, रास्ते का काम है। कोई आ गया तो?
    बात मेरी भी समझ में आ गई। बगल में मक्की(भुट्टे) का खेत था, मैं उसे लेकर खेत में घुस गया।
    मक्की काफी बढ़ी हुई थी इतनी कि आदमी खड़ा भी हो तो बाहर से न दिखे।
    खेत में घुसकर मैंने ममता का सलवार निकाल दिया। काले रंग की पैंटी में उसकी पावरोटी फूली थी, थोड़े बहुत विरोध के बाद मैंने पैंटी में हाथ डाल दिया।
    चूत गीली हो रही थी। थोड़ी देर तक मैं सहलाता रहा।
    ममता काफी गर्म हो चुकी थी।
    पैंटी निकाल कर मैं उसकी चूत चाटने लगा। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।
    थोड़ी ही देर में उसका पानी छूटने लगा। वो मेरे सर को अपनी चूत पर जोर से दबाने लगी।
    मैंने अपना लंड उसके मुँह में देना चाहा, वो मना करने लगी, काफी न-नुकर के बाद उसने लंड का अग्रभाग मुँह में लिया।
    मैं धीरे-धीरे उसके मुँह को चोदने लगा।
    वो भी अब मन लगाकर चूस रही थी।
    कुछ देर में मुझे लगा कि मेरा पानी निकलने वाला है तो मैंने लंड उसके मुँह से निकाल लिया और उसे चित्त लिटाकर उसकी चूत पर रगड़ने लगा।
    वो 'आऽऽह.ओऽह' की आवाजें निकाल रही थी।
    थोड़ी देर में वो अपनी चूत ऊपर उठाने लगी तो मैंने लोहा गर्म देख कर चोट कर दी।
    लंड का अग्रभाग उसकी चूत में डाल दिया, वो जोर से चीखी- आऽह. बड़ा दर्द हो रहा है बाहर निकालो।
    मगर मैंने बाहर नहीं निकाला, उसका ध्यान बंटाने के लिए मैंने उसकी छातियाँ चूसने लगा।
    बारिश के पानी से उसके चेहरे पर तमाम बूँदों को मैंने चाट लिया।
    उसका दर्द कम हो चुका था। मैंने उसके होठों को अपने होटों की गिरफ्त में लिया और एक जोर का झटका दिया।
    लंड आधा रास्ता पार कर चुका था।
    वो काँप उठी और अपने हाथ पैर पटकने लगी, बड़ी मुश्किल से मैं उसे शांत कर पाया, होंठ चूसे, निप्पल चूसे तब कहीं जाकर वो शांत हुई।
    यह सब करते हुए मैं धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर करने लगा तो 5 मिनट बाद उसे भी मजा आने लगा, वो नीचे से धक्के देकर मेरा सहयोग करने लगी।
    मैंने चुदाई की गति बढ़ा दी।
    उसके मुँह से लगातार मादक सिसकारियाँ निकल रही थी।
    ऐसी कई कहानियाँ हैं डॉट कॉम पर।
    चूत कसी होने के कारण जल्दी ही मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, मैंने तुरंत लंड निकाल लिया और उसे घोड़ी बनाकर लंड अंदर डाल दिया।
    उसके मुँह से 'आऽह' निकल गई।
    मैंने ताबड़तोड़ चुदाई चालू कर दी। वो मुझे हाथ के इशारे से रोक रही थी मगर मेरे ऊपर तो शैतान हावी था।
    बारिश अपने पूरे वेग में थी जैसे बादलों ने भी मुझसे शर्त लगा ली हो कि देखें पहले किसका पानी निकलता है।
    करीब 5-7 मिनट में मेरा पानी निकल गया, हम एक दूसरे से जोर से लिपट गये और काफी देर वैसे ही पड़े रहे।
    बारिश भी अब कम हो चुकी थी।
    हमने अपने-अपने कपड़े पहने, मेरे लंड में घाव हो गया था, उसकी चूत भी दुख रही थी। यह मेरी पहली चुदाई थी।
    हमने एक-दूसरे को किस किया और घर की ओर चल पड़े
     
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