बॉस की बीवी की कुंवारी गांड चोदी

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Nov 16, 2017.

  1. 007

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    प्रेषक : राहुल .

    हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। दोस्तों में एक बार फिर से आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों को अपने जीवन की एक सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ, जो आज से करीब पांच महीने पुरानी बात है। में जब एक कोचिंग क्लास में चपड़ासी का काम करता था, मुझे जल्दी सुबह करीब 6.00 बजे जाकर क्लास को खोलने जाना पड़ता था। पूजा करके मेरे बॉस क्लास में बच्चों को पढ़ाने चले जाते और उसके बाद में उनके घर पानी लेने चला जाता, यह मेरा रोज़ का काम था। मेरे बॉस की पत्नी जिसका नाम निर्मला था, में उनको भाभी कहकर बुलाता था। वो दिखने में बहुत सुंदर होने के साथ साथ उनका स्वभाव भी बहुत अच्छा हंसमुख था। उनकी लम्बाई 5.2 इंच थी और गोरा रंग लंबे बाल 36 इंच आकार के बूब्स थे। उनकी पतली कमर गांड बड़ी चौड़ी थी और जब भी में उनके घर जाता तो में एकदम चकित होकर बस उनको ही देखता रहता था और इतने कम समय में वो भी मुझसे अब बहुत अच्छी तरह से घुल मिल गयी थी। ऑफिस में आकर में भाभी के बारे में सोचकर कभी कभी मुठ भी मार लेता और ऐसा करने पर मेरा वीर्य निकल जाने के बाद मेरा बस जोश ही ठंडा होता और मेरे मन से अपनी भाभी के विचार नहीं जाते थे। में हर समय उनके ही बारे में सोचने लगता और वो मुझे बहुत पसंद थी और मेरा उन पर दिल आ गया था।

    एक दिन जब में सुबह पानी लेने उनके घर गया तो मैंने देखा कि उस समय दरवाजा खुला हुआ था और में बिना किसी आवाज, आहट से घर के अंदर चला गया, लेकिन मुझे भाभी कहीं दिख ही नहीं रही थी। तब मैंने सोचा कि शायद वो किचन में होगी यह बात सोचकर में किचन की तरफ जा ही रहा था, तभी बीच में मैंने देखा कि उनके बेडरूम का दरवाजा खुला हुआ था, इसलिए मेरी नज़र उसके अंदर चली गयी। अब मैंने देखा कि मेरी वो हॉट सेक्सी भाभी शायद अभी नहाकर ही आई थी। वो उस समय सिर्फ़ एक टावल को लपेटे हुए खड़ी थी और उन्होंने मुझे भी देख लिया था। वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और फिर झट से उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया, थोड़ी देर के बाद वो साड़ी पहनकर अपने कमरे से बाहर आ गई। अब तक मेरा लंड वो मजेदार द्रश्य देखकर पहले से ही टाइट हो चुका था और उन्होंने भी बात मेरे लंड की तरफ देखकर वो समझ चुकी थी। अब भाभी ने मुझे पानी भरकर दे दिया। वो मेरी तरफ देखकर हल्का सा मुस्कुराने भी लगी थी और उसके बाद में क्लास में वापस आ गया और दोपहर के समय मुझसे मेरे बॉस ने कहा कि मुझे उनके घर से कुछ काम की फाईल लेकर आना है। फिर में उनके घर चला गया और भाभी ने दरवाजा खोल बाहर धूप बहुत होने की वजह से मुझे पसीना आ रहा था, भाभी ने मुझसे कहा कि अंदर आ जाओ, पानी पी लो थोड़ी देर बैठकर जाओ और फिर में अंदर चला गया। फिर भाभी मेरे लिए पानी लेकर आ गई, में अब पानी पी रहा था।

    उस समय भाभी मुझे लगातार देख रही थी, थोड़ी देर बाद वो मेरे सामने फाईल और दो गिलासों में एकदम ठंडा शरबत लेकर आ गई। तो एक गिलास उन्होंने मुझे दे दिया, में शरबत को पीते पीते उनकी तरफ ही लगातार देख रहा था क्योंकि मुझे उनके ब्लाउज में से उनके बड़े आकार के बूब्स बाहर उभरे हुए नजर आ रहे थे और उनके गोरे मुलायम पेट पर भी बल पड़ रहे थे, में वो मनमोहक द्रश्य बड़ा चकित होकर देख रहा था। दोस्तों शायद भाभी ने मेरी इस गंदी नजर को एकदम ठीक तरह से समझ लिया था कि में क्या और किस नियत से देख रहा हूँ? फिर मैंने वो शरबत खत्म किया और उठकर वो फाइल लेकर जाने लगा, तभी उन्होंने मुझे पीछे से आवाज़ दी कि सुनो अरुण। तो मैंने तुरंत पीछे पलटकर कहा हाँ जी भाभी? उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया और मुझसे वो पूछने लगी, अरुण में दो तीन दिन से कुछ गौर कर रही हूँ? मैंने कहा, हाँ बताओ ना भाभी आप क्या गौर कर रही हो? तब उन्होंने कहा तुम ऐसा क्या देखते हो मेरे अंदर, तुम्हे ऐसा क्या अच्छा लगा? अब मैंने उनको कोई भी जवाब दिया नहीं और में मुस्कुराता हुआ वहां से बाहर चल पड़ा। फिर दूसरे दिन सुबह जब में पानी लेने दोबारा उनके घर गया तब मैंने देखा कि भाभी उस समय मेक्सी पहने हुए थी। फिर मैंने पानी का खाली जग उन्हे दे दिया और उसके बाद में भी उनके पीछे किचन में चला गया, मैंने देखा कि वो नीचे झुककर उस जग में पानी भर रही थी जिसकी वजह से उनके बूब्स मुझे साफ साफ नज़र आ रहे थे। तभी उन्होंने पलटकर देखा कि में उनके बूब्स की तरफ घूरकर देख रहा हूँ, उन्होंने मुझसे पूछा क्यों ऐसे क्या देख रहे हो? क्या कभी तुमने औरत की छाती नहीं देखी क्या? में उनके मुहं से यह बात सुनकर शरम से पानी पानी हो गया और तभी मैंने उनसे माफी मांगी।

    फिर उन्होंने मुझसे कहा कि अरुण तुम मुझसे माफी मत मांगो, अगर तुम्हे अच्छा लगता है, तो देखो मुझे कोई भी आपत्ति नहीं है। अब मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके उनसे कहा कि भाभी में क्या करूं? आप हो ही इतनी सुंदर कि में अपनी नजर को रोक ही नहीं पाता। मैंने बहुत बार कोशिश की लेकिन में हर बार नाकाम रहा। फिर भाभी ने मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा कि ठीक है, लेकिन देखने के बाद तुम क्या करते हो? तुम कुछ करते भी तो नहीं देखने से क्या होता है? करने से ही सब कुछ होता है। दोस्तों में इन शब्दों को भाभी की तरफ से आगे बढ़ने के लिए हाँ का इशारा समझकर में अब भाभी को अपनी बाहों में लेकर उनको चूमने लगा, मैंने उन्हे एकदम दबोच लिया था। फिर उन्होंने मुझसे अपने आप को छुड़ाने के लिए मुझे धक्का दे दिया, लेकिन मैंने उनको कसकर दबोचा हुआ था इसलिए उनके इस विरोध का कोई भी फायदा नहीं हुआ। अब मैंने भाभी को सामने वाली दीवार से सटा दिया और में उनके होंठो, गर्दन पर अपने होंठो से चूमने लगा और उसी समय मेरे हाथ उनके गाउन के अंदर जाकर उनके बूब्स को दबा रहे थे। फिर कुछ ही देर में वो भी एकदम गरम हो चुकी थी, इसलिए उन्होंने मुझसे कहा कि अरुण अभी नहीं बाहर का दरवाजा खुला हुआ है और वैसे भी अभी कुछ देर बाद काम वाली आ जाएगी इसलिए हम अभी यह सब नहीं कर सकते। अब मैंने यह पूरी बात सुनकर उनको तुरंत ही छोड़ दिया।

    फिर उसके बाद मैंने अपने आपको संभाला और उन्होंने अपने कपड़े ठीक किए और फिर में पानी लेकर वापस ऑफिस चला गया। फिर उसी दिन दोपहर के समय मेरे बॉस ने मुझसे कहा कि अरुण मुझे काम से गोधरा जाना है, इसलिए तुम आज एक बजे के बाद की दो क्लास बंद करके वापस अपने घर चले जाना। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है और वो अपने काम से ठीक समय पर चले गये, लेकिन में अब भी वहीं था। में करीब एक घंटे बाद जाने की सोच ही रहा था कि हमारे ऑफिस के फोन की घंटी बजी। मैंने फोन उठाकर बात करना शुरू किया, तब मुझे पता चला कि सामने मेरी वही हॉट सेक्सी भाभी थी, जिसको में कुछ घंटे पहले उसकी चुदाई करते हुए उसके कहने पर रुक गया था।

    फिर उन्होंने मुझसे कहा कि अरुण तुम्हारे साहब गोधरा गये है, क्लास की चाबी तुम अपने साथ ले जाओगे या मुझे घर पर देकर जाओगे? अब मैंने उनसे कहा कि जैसा आप कहे में वैसा ही कर लूँगा, उन्होंने कहा कि ठीक है में तुम्हे दोबारा फोन करके बताती हूँ कि तुम्हे क्या करना है? थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि भाभी खुद हमारे ऑफिस में आ गई, वो उस समय साड़ी पहने हुए थी और अब उन्होंने मुझसे आते ही पूछा कि तुम्हे बचे हुए शाम के बच्चो को आज की छुट्टी करनी थी क्या, तुमने उन सभी को बता दिया? मैंने कहा कि हाँ मैंने सभी को बोल दिया है कुछ आए थे उनको भी बताने के बाद वो सब भी चले गये। फिर भाभी ने कहा कि हाँ ठीक है अरुण, लेकिन में इस समय यहाँ क्यों आई हूँ तुमने मुझसे यह नहीं पूछा? मैंने उनको कहा कि आप मेरे बॉस की पत्नी हो आप जब भी चाहे यहाँ आ सकती है, में कौन होता हूँ आपसे पूछने वाला? तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि हाँ तुम्हारी यह बात भी एकदम सही है, में तुम्हारे बॉस की पत्नी हूँ, लेकिन अब में तुम्हे बता देना चाहती हूँ कि में आज तुम्हारी पत्नी बनाने के लिए यहाँ पर आई हूँ और अब सुबह की हमारी वो अधूरी कहानी उस काम को पूरा करने के लिए यहाँ पर आई हूँ अरुण। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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    अब मैंने तुरंत पलटकर उनकी तरफ देखा और में उनके पास चला गया, मैंने झट से उन्हे अपनी बाहों में जकड़कर सामने वाली टेबल पर बैठा दिया और फिर में उनके गुलाबी रसभरे होंठो को चूमने चूसने लगा था और वो भी मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी। तो मैंने कुछ देर बाद चूमते हुए ही उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और उन्होंने मेरे लंड को पेंट के ऊपर से ही पकड़ लिया और वो उसको सहलाने लगी, तब भाभी ने मुझसे कहा कि अरुण आज में भी माँ बनना चाहती हूँ, क्या तुम मुझे एक बच्चा दे सकते हो? अब मैंने उनको कहा कि भाभी वो सब तो में आपको जरुर दे सकता हूँ, लेकिन कहीं इसके बारे में मेरे बॉस को पता ना चल जाए? में भाभी से यह बात कहते हुए नीचे बैठ गया और अब में उनकी गहरी बड़े आकार की नाभि को प्यार करने लगा, क्योंकि उनकी वो नाभि बहुत ही सेक्सी आकर्षक थी, जिसको देखकर में ललचाने लगा था। अब मैंने उनको कहा कि भाभी आप बहुत ही सेक्सी हो, तब उसने मुझसे कहा कि अरुण अब में आज से तुम्हारी पत्नी बन चुकी हूँ इसलिए तुम मुझे भाभी मत कहो सीधा सीधा निर्मला कहो।

    फिर मैंने उनसे कहा कि हाँ आज से बस तुम मेरी ही हो नीरू और मैंने उसको वहीं नीचे जमीन पर ही लेटा दिया और में उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगा। फिर मैंने उससे कहा कि नीरू आज में तुम्हे पूरी नंगी करूँगा और जी भरकर तुम्हारी चुदाई करूंगा। फिर उसने मुझसे कहा कि हाँ जान तुम जितना चाहे उतना मुझे चोदो, आज तुम मुझे पूरा नंगा करके चोदो, लेकिन तुम्हे आज मुझे वो मज़ा वो सुख देना है जिसके लिए में अब तक तरस रही हूँ। आज तुम्हे मुझे पूरा कर दो, क्योंकि अब तक में बस अधूरा ही जीवन जी रही हूँ। अब मैंने भी उसके मुहं से यह बात सुनकर तुरंत जोश में आकर उसके सारे कपड़े उतार दिए और साथ ही मैंने अपने भी कपड़े उतार लिए जिसकी वजह से अब हम दोनों उस ऑफिस में पूरी तरह से से एक दूसरे के सामने नंगे थे। अब में अपना मुहं उसके दो पैरो के बीच उसकी चूत पर लगा दिया, उस समय मेरे दोनों हाथ उसके गोलमटोल बूब्स को दबा भी रहे थे और मेरी जीभ उसकी चूत को चाट रही थी। अब नीरू के मुहं से आहहह्ह्ह आह्ह्ह्ह ऊफ्फ्फ की आवाज़ निकल रही थी, क्योंकि वो बहुत गरम हो रही थी और वो जोश में आकर मेरा सर उसकी चूत पर ज़ोर से दबा रही थी।

    फिर वो मुझसे कहने लगी आह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह अरुण आज तक किसी ने मेरी चूत को ऐसे नहीं चाटा, आज तुमने मुझे यह मज़ा पहली बार दिया है। फिर मैंने महसूस किया कि उसकी चूत से अब पानी भी निकल रहा था, तब मैंने अपनी दो उँगलियों को उसकी चूत में डाल दिया और फिर में उनको चूत के अंदर बाहर करने लगा, जिसकी वजह से वो सिसकियाँ ले रही थी और मुझसे कहने लगी आह्ह्ह्ह ऊफ्फ्फ तुमने यह क्या आग लगा दी? अब तुम इस आग को बुझा भी दो प्लीज। फिर मैंने उससे कहा कि रानी अभी तो यह आग लगी है, मैंने अभी से इसको बुझा दिया तो फिर मज़ा क्या आएगा? अब तुम लो मेरा यह लंड इसको तुम तैयार कर दो तब यह तुम्हारी इस आग को बुझा देगा और मैंने उससे यह बात कहते हुए अपना लंड उसके मुहं में दे दिया।

    अब वो मेरे लंड को चूसने लगी और एकदम पागलों की तरह वो मेरे लंड को अपने मुलायम हाथों में लेकर उसको मसल रही थी और अपने मुहं में पूरा भरकर चूस भी रही थी। फिर मैंने कुछ देर बाद उसको ज़मीन पर लेटा दिया, उसके बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत के दरवाजे पर रख दिया और एक ज़ोर से धक्का दे दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा पांच इंच का लंड उसकी चूत की दीवार को चीरता फाड़ता हुआ अंदर जा पहुंचा, लेकिन उस दर्द की वजह से उसके मुहं से आअहह ऊईईईई माँ मर गई की आवाज निकल गई। फिर वो हकलाते हुए मुझसे कहने लगी, आह्ह्ह्ह अरुण में मर गयी तुम्हारा लंड दर्द के साथ साथ मज़ा भी दे रहा है, तुम आज मुझे ज़ोर से और भी ज़ोर से चोदो अरुण, आज तुम मेरे दर्द की तरफ बिल्कुल भी ध्यान मत देना। अब मैंने उसके मुहं से वो बात सुनकर पूरी तरह जोश में आकर पहले से भी तेज धक्के देना शुरू कर दिए, मैंने देखा कि उसकी दोनों आखें बंद थी और में धक्के देने के साथ साथ उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबा भी रहा था और उसकी चुदाई भी किए जा रहा था। फिर मैंने करीब सात मिनट के बाद अपने लंड पर कुछ गरम पानी महसूस किया, शायद निर्मला अब झड़ चुकी थी, क्योंकि अब मुझे उसके चेहरे पर संतोष साफ साफ नजर आ रहा था, लेकिन मेरा काम होना अभी भी बाकी था, इसलिए में उसको वैसे ही लगातार तेज धक्के मार रहा था। वो धीरे धीरे एक बार फिर से गरम होने लगी थी।

    अब में अपना एक हाथ उसके पैर पर घुमा रहा था, उसके मुहं से आआहह आऊऊ की आवाज़ निकल रही थी। फिर थोड़ी देर बाद वो एक बार फिर से झड़ गयी और करीब तीस मिनट तक में उसको वैसे ही लगातार धक्के देकर चोदता रहा। फिर तीस मिनट में तो वो तीन बार झड़ चुकी थी। अब मैंने भी अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में निकाल दिया, जिसकी वजह से उसकी चूत मेरे वीर्य से भर चुकी थी और अब में अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकालने लगा था, लेकिन तभी उसने मुझसे ऐसा करने से मना कर दिया। अब वो मुझसे कहने लगी कि अरुण थोड़ी देर तुम ऐसे ही रहने दो, इसका जब मन करेगा तब यह खुद ही छोटा होकर अपने आप निकल जाएगा। फिर मैंने उसके कहने पर ऐसे ही अपना लंड उसकी चूत में छोड़ दिया और में अब उसके ऊपर ही लेट गया, वो मेरे सर में उंगली को घुमा रही थी। अब में उसके बूब्स को चूस रहा था और कुछ देर बाद मेरा लंड ठंडा होकर अपने आप उसकी चूत से बाहर आ गया, तब में उसके ऊपर से उठा और खड़ा हुआ उसने तुरंत लपककर मेरा लंड पकड़ लिया और उसको अपने मुहं में डाल लिया, वो मेरे लंड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी, जिसकी वजह से मेरा लंड थोड़ी देर बाद वापस तनकर चुदाई के लिए तैयार हो गया।

    अब मैंने उसको टेबल के कोने पर बैठा दिया और दोबारा अपने लंड को उसकी चूत में डाल दिया और फिर में ज़ोर ज़ोर से धक्के देने लगा। दोस्तों एक बार फिर से मैंने निर्मला को वैसे ही मस्त मज़े से तेज धक्के लगाकर करीब बीस मिनट तक चोदा और इस बार वो दो बार झड़ी, कुछ देर बाद मैंने जैसे ही अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला वो झट से उठकर खड़ी होकर उसने अपने कपड़े उठा लिए। तो मैंने उसके हाथ से उसके वो कपड़े छीन लिए और अब मैंने उससे कहा कि रानी अभी मेरा जी नहीं भरा तुम अभी से क्यों मुझे अधूरा छोड़कर जा रही हो? यह बात कहकर मैंने उसको टेबल पर ही बैठाकर उसके दोनों पैरों को ऊपर उठा दिए और अपने लंड को उसकी गांड के छेद पर रख दिया, तभी वो मुझसे कहने लगी नहीं अरुण तुम वहां मत अपना लंड डालो वरना वो फट जाएगी, प्लीज मुझे बहुत दर्द होगा तुम्हारा बहुत मोटा होने के साथ साथ लंबा भी है।

    फिर मैंने उससे कहा कि हाँ आज तो इसको भी फाड़ देना है, इसने मुझे बहुत तड़पाया है, क्योंकि यह हर रोज मुझे लटक मटककर झटके दिखाती थी, इसलिए में आज इसके भी मज़े लेना चाहता हूँ और यह भी मेरा एक सपना है, जिसको में आज ही पूरा करना चाहता हूँ प्लीज तुम मुझे अब ना रोको। फिर यह बात कहकर मैंने ज़ोर से धकका दे दिया और अपना आधा लंड मैंने उसकी गांड में डाल दिया उस धक्के की वजह से होने वाले दर्द से वो बहुत ज़ोर से चिल्ला उठी, आह्ह्ह्ह अरुण में मर गई ऊऊईईईईईईई आईईई प्लीज बाहर निकालो इसको, यह मुझे बड़ा दर्द दे रहा है प्लीज, तुम मेरे ऊपर थोड़ा सा रहम करो वरना में मर ही जाउंगी। दोस्तों मैंने उसकी बातों पर बिल्कुल भी ध्यान ना देते हुए एक और धक्का दे दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड अब उसकी गांड के अंदर जा चुका था और में अब अपने लंड को उसकी बिना चुदी कुंवारी गांड के अंदर डालकर आगे पीछे करने लगा।

    फिर कुछ देर बाद जब उसका दर्द मज़े में बदल गया तो उसने मेरे कंधो को पकड़कर सस्स्स्स्सह आह्ह्ह ऊह्ह्ह करते हुए वो उछल उछलकर मुझसे अपनी गांड मरवा रही थी और करीब दस मिनट तक वैसे ही धक्के देकर उसकी गांड मारने के बाद मैंने अपना पूरा वीर्य उसकी गांड में डाल दिया। अब मैंने अपना लंड उसकी गांड से बाहर निकाला, जिसके बाद निर्मला ने अपने कपड़े पहने और मैंने भी कपड़े पहन लिए। तब मैंने उससे पूछा कि क्यों अब मुझे कब ऐसा मौका मिलेगा मेरी रानी, जब में तुम्हारे साथ ऐसे मज़े ले सकता हूँ? तो वो मुस्कुराते हुए बोली कि कल सुबह जब तुम घर आओगे ना, तब में राह देखूँगी, क्योंकि तुमने वो मज़ा सुख दिया है, जिसके लिए में कितनी तरस रही थी आज तुमने मुझे मेरी उम्मीद से भी ज्यादा दिया है, यह काम वैसे मेरे पति का है, लेकिन आज से तुम ही मेरे दूसरे पति बन चुके हो, अब तुम मुझे हमेशा ही इस तरह से मज़े देना मेरी जमकर चुदाई करना और तुम इस काम में बहुत अनुभवी हो, तुम्हारे लंड में भी बहुत ताकत बड़ी देर तक जमे रहने की वो बात है जो मेरे पति में नहीं है। वो कुछ देर में ही मुझे प्यासा छोड़कर सो जाते है, जिसके बाद में पूरी रात बस तरसती ही रह जाती हूँ। दोस्तों उसने मेरे साथ उसकी उस पहली चुदाई से खुश होकर अपनी वो बात पूरी करके मेरे होंठो को चूम लिया, वो मुझसे गले लगी और उस दिन मेरा मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था कि में निर्मला को छोड़कर वापस अपने घर चला जाऊं, लेकिन मुझे मेरी मजबूरी की वजह से जाना ही पड़ा और वो भी मेरे साथ ही अपने घर के लिए निकल पड़ी। वो बहुत खुश थी और मेरी तो खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था, क्योंकि भगवान ने मुझे बड़ी मस्त हॉट सेक्सी भाभी चुदाई करने के लिए दी थी जिसको पाकर में धन्य हो गया। दोस्तों यह थी मेरी सच्ची चुदाई की कहानी ।।

    धन्यवाद .

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