मुझे और मेरे दोस्त को मिली माँ की ममता

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Apr 27, 2016.

  1. 007

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    प्रेषक : अनुज

    हैल्लो दोस्तों मेरा नाम अनुज है। मेरी उम्र 22 साल की है और में chudai.co.in का रेगुलर रीडर हूँ। मैंने जब लोगो को अपनी रियल स्टोरी लिखते हुए देखा तो मेरा मन भी हुआ कि में भी अपनी रियल स्टोरी लिखूं। तो इसलिए आज में आप सभी के लिये अपनी एक सच्ची घटना लेकर आया हूँ। दोस्तों ये घटना कुछ समय पहले मेरे साथ हुई और में बहुत लक्की हूँ कि वो घटना घटी और आज मुझे उस घटना से कितना मज़ा आता है में ही जानता हूँ, दोस्तों में अपनी स्टोरी शुरू करता हूँ।ये बात उस समय की है जब में बोर्डिंग मे था और गर्मी की छुट्टियाँ हुई थी। में दो महीने बाद घर जा रहा था और में बहुत उत्साहित भी था। इन दो महीने जब में घर से दूर था। मेरा एक बहुत ही पक्का दोस्त बन गया था। उसका नाम अरुण

    था। अरुण के पापा किसान थे और माँ उसकी उसके पैदा होने के साथ ही गुज़र गयी थी। वो अपनी माँ के प्यार से वंचित रह गया था। इस बार मैंने उसे कहा कि मेरे घर चल वहाँ पर मेरी माँ से तुझे अपनी सग़ी माँ की तरह प्यार मिलेगा। मेरी माँ एक बहुत ही भोली भाली औरत है और वो दूसरो का दर्द नहीं देख सकती है।मेरी माँ वैसे थोड़ी मोटी है लेकिन बहुत ही खूबसूरत है जैसे वो कोई अप्सरा हो। वो अपने कॉलेज मे मिस कॉलेज भी रह चुकी है। उनकी उम्र लगभग 37 साल की होगी और उनके बूब्स और गांड बहुत ही बड़ी है। मैंने उन्हे वैसे कभी नंगा नहीं देखा लेकिन मुझे पता है जिस दिन में उन्हे नंगा देखूँगा मेरा वैसे ही छूट जाएगा। मम्मी का ब्लाऊज बहुत बड़ा होता है और मैंने मम्मी की पेंटी भी देखी है वो भी बहुत बड़ी
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    है। में भी मम्मी का बहुत बड़ा दीवाना हूँ और मेरी भी दिली तमन्ना है की में भी उनके साथ चुदाई करूं, खैर में अपनी कहानी पर आता हूँ। दोस्तों ये कहानी आप chudai.co.in पर पड़ रहे है।फिर में और मेरा दोस्त अरुण घर पहुंचे। मम्मी मुझे देखकर बहुत खुश हो गयी और मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरी एक पप्पी ले ली और मुझे बहुत कसकर गले लगा लिया। मेरी माँ मुझसे बहुत प्यार करती थी और उनके लिए में ही सब कुछ था। पापा और माँ का रिलेशन भी बहुत अच्छा था। लेकिन वो ज़्यादा मुझसे प्यार करती थी।फिर माँ ने अरुण की तरफ देखा और पूछा कि अनुज बेटा ये कौन है? तभी में बोला कि माँ ये मेरा सबसे अच्छा दोस्त है अरुण। माँ ने उसे भी अपने सीने से लगा लिया और उसका भी गाल चूम लिया और कहने लगी कि

    अरुण तुम्हारा स्वागत है। अरुण मेरी माँ को देखे ही जा रहा था। उसने ऐसी औरत शायद पहले ही कभी देखी थी। खैर फिर हम अंदर आ गये और फ्रेश होने चले गये।तभी अरुण बोला यार तेरी मम्मी तो बहुत अच्छी है कितना प्यार करती है तुझसे, काश मेरी भी माँ होती ये कह कर वो बहुत उदास हो गया।में बोला यार मेरी माँ तेरी माँ भी तो है देखा उन्होने जैसे मेरे साथ ट्रीट किया वैसा तेरे साथ भी तो किया। फिर वो बोला कि हाँ आंटी वैसे बहुत अच्छी है। मैंने उसे कहा चल अब फ्रेश हो जा, अब दो महीने तू यहीं है और हिचकिचाना मत मेरी माँ से जितनी ममता ले सकता है ले लेना। इस बार में अपनी माँ का प्यार 50-50 कर लूँगा। फिर अरुण खुश हो गया उसने कहा कि यार सही मे तेरी माँ मे मुझे अपनी माँ नज़र आने लगी है।

    इस बार उनकी ममता की बारीश मे में ही नहाऊंगा।फिर मैंने कहा कि चल में तो जिंदगी भर माँ के साथ रहा हूँ इस बार वो पूरी तेरी माँ है। तभी माँ दरवाज़े पर खड़ी हुई कब से ये सुन रही थी। वो अंदर आई और बोली अरुण जैसे अनुज मेरा बेटा है वैसे अब तू भी मेरा बेटा है। मुझे नहीं पता था कि तुम्हारी माँ गुजर गयी है आज से में तेरी माँ हूँ मेरे दो बच्चो के अलावा तू मेरा तीसरा बच्चा है। ये सुनकर अरुण रो पड़ा और मेरी माँ से लिपट गया। मेरी माँ ने उसके बालों मे हाथ फेरा और उसको चूमने लगी।फिर उन्होने कहा कि चलो खाना ख़ा लो रात बहुत हो गयी है और हम खाना खाने चले गये। जब में घर मे होता था माँ हमेशा मेरे साथ ही सोती थी आज भी माँ ने मेरे साथ बिस्तर लगा लिया और

    में और मेरी माँ बेड पर लेट गये। तभी अरुण बाथरूम से निकला और बेड छोटा था तो वो बोला कि आंटी में कहाँ सोऊ? तभी मैंने बोला कि तू कहाँ जाएगा यहीं पर आजा वो बेड पर आकर मेरे पास मे लेट गया। तभी माँ बोली कि बेटा मेरे साथ लेटने में डर लगता है क्या?तभी अरुण कुछ समझ नहीं पाया फिर मैंने उसे समझाया यार अभी थोड़ी देर पहले तो तू कह रहा था, कि इस बार माँ की सारी ममता तेरी है और तू माँ के साथ लेट भी नहीं रहा। माँ ने मुझे अपनी दूसरी तरफ आने को कहा और खुद बीच मे लेट गयी। माँ ने केवल ब्लाउज और पेटीकोट पहन रखा था और माँ के पपीते (बूब्स) उनकी साँस लेने से ऊपर नीचे हो रहे थे। मेरे लिए तो ये कॉमन था, लेकिन शायद अरुण के लिए नहीं।हमारा बेड बहुत ही छोटा था और
    माँ बहुत मोटी उन्होने दोनों बाजू हमारे सर के नीचे कर दिए और दोनों को अपने से चिपका लिया माँ कम गले का ब्लाउज पहनती थी। इसलिए माँ की बगल के बाल हम दोनों के मुहं मे आ रहे थे। तभी मैंने अपना एक हाथ माँ के गोल मटोल पेट पर रख दिया और अपना पैर माँ की जांघो पर रख कर उनकी बगल के बालो मे मुहं घुसा कर सो गया। माँ ने अरुण की तरफ देखा और कहा कि क्या तुम्हे नींद नहीं आ रही?तभी उसने कहा कि आंटी आ रही है बस में थोड़ी देर मे सो जाऊंगा। मेरी माँ ने कहा कि बेटा तुम मुझसे घबरा क्यों रहे हो। इतनी दूर क्यों हुए जा रहे हो, आओ मुझसे लिपट जाओ। पहले तो तुम्हे माँ का प्यार चाहिए था, अब तुम ले भी नहीं रहे। तभी अरुण बोला कि नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं। माँ बोली

    फिर कैसी बात है और ये कहकर उन्होने अरुण का हाथ अपने बूब्स के जस्ट नीचे रख दिया। माँ के बूब्स और अरुण के हाथ मे थोड़ा ही गेप था और उन्होने अरुण को कहा कि क्या तुझे मुझसे शरम आती है।अनुज को देखो केवल कच्छे मे ही सो रहा है और तुम्हारे पूरे कपड़े लदे हुए है, तो चलो कपडे उतारो और फ्री फील करो। तभी अरुण थोड़ा हिचकिचाने लगा माँ बोली कि अपनी माँ से शर्म आती है क्या अरुण ने ये सुनकर झट अपने कपड़े उतार दिए और अंडरवियर मे आ गया। वो सोचने लगा कि जब अब इन्होने मुझे बेटा मान ही लिया तो कैसी शरम और माँ के बूब्स के जस्ट नीचे हाथ रखकर माँ से लिपट गया और सो गया। मेरी माँ की आँख लग गयी में बीच मे पानी पींने के लिए उठा तो मैंने अरुण को माँ से बुरी तरह लिपटे हुए

    देखा। तभी मेरे चेहरे पर खुशी आ गयी क्योंकि अरुण भी सोते हुए बहुत खुश लग रहा था।में अरुण को हमेशा सच्चा और बहुत अच्छा दोस्त मानता था और उसकी खुशी के लिए में कुछ भी कर सकता था। फिर मैंने सोचा कि क्यों ना अरुण को माँ से उसके बचपन का प्यार दिलाया जाए जो कभी माँ मुझे देती थी। अरुण कितना पतला है। इसको माँ का दूध नहीं मिला, मुझे अपनी माँ का रसीला दूध इसको पिलाना ही पड़ेगा। में कितना हट्टा कट्टा हूँ क्योंकि मैंने माँ का दूध 10-11 साल तक पिया है और अरुण ने तो एक भी बार नहीं। अब मुझे कुछ भी करके अरुण का ध्यान मेरी माँ के बूब्स तक लाना पड़ेगा। इतने बड़े बूब्स देखकर तो कोई भी पागल हो सकता है।फिर अरुण क्यों नहीं।यही सोचकर में माँ के करीब लेट गया और अरुण का हाथ उठाकर माँ के बूब्स पर रख

    दिया अब में सोचने लगा कि कैसे माँ के बूब्स को खोला जाए लेकिन इसकी मेरी हिम्मत नहीं हुई और मैंने भी अपना हाथ माँ के बूब्स पर रखा और सो गया। सुबह जब में उठा तो अरुण सो रहा था और माँ बाहर पापा को नाश्ता दे रही थी। में उठकर माँ के पास किचन मे चला गया और जाकर पानी पीने लगा। तभी माँ मेरे पास आई और बोली कि पता है तुम्हे.. आज सुबह मैंने क्या देखा तुम और अरुण मेरे बूब्स पर हाथ रखकर सो रहे थे।फिर में बोला कि मुझे याद नहीं शायद सोते सोते हाथ चला गया होगा। तभी माँ बोली कि अरे में तुम्हे कुछ थोड़े ही कह रही हूँ। इन बूब्स पर तेरा तेरी बहन का और तेरे पापा का ही तो इधिकार है। बस फर्क ये है तेरे पापा इन्हे देख सकते है और छू भी सकते है और तेरी बहन

    भी इन्हे देख सकती है लेकिन समाज के हिसाब से ना तू इन्हे नंगा देख सकता है और ना छू सकता है। तभी में बोला कि ठीक है आगे से में ध्यान रखूँगा सोते हुए। माँ बोली बुद्दू में ये थोड़े ही कह रही हूँ में तो खुश थी मुझे आज तेरे बचपन की याद आ गयी। जब तू मेरे बूब्स का दीवाना था, पीछा नहीं छोड़ता था, तेरी वजह से तो में ब्लाउज ब्रा पहनना भी भूल गयी। लेकिन आज सुबह जब तेरा हाथ मैंने अपने बूब्स पर पाया मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मुझे लगा मेरा छोटा अनुज वापस आ गया है। फिर में बोला तो माँ क्या में इन्हे आज से छू सकता हूँ, माँ बोली क्यों नहीं, ये तेरे ही तो है इन्हे चाहे तो छू चाहे दबा चाहे खेल या चाहे मेरा दूध पी ये तेरे लिए ही तो इतने बड़े किए है।अब में

    खुश हो गया और बोला लेकिन पापा को ग़लत नहीं लगेगा। तभी माँ बोली कि पापा को मैंने बताया वो बोले इसमे कुछ ग़लत नहीं है। उन्होने तो अपनी माँ का दूध शादी से पहले तक भी पिया था। में ही पागल थी जो तुझे नहीं पीने दिया। में बोला माँ अरुण का क्या उसे तो कभी माँ का दूध ही नहीं मिला।फिर माँ बोली अरे ये दो चूचियाँ किस लिए है। तेरे पापा बाहर रहते है। तेरी बहन छुट्टियों में मामा के यहाँ है, अब इन दोनों बूब्स का रस तुम दोनों ही पीना। में बोला माँ जब अब हम तीन ही घर मे है तो एक नया रीलेशन शुरू करे माँ बोली क्या? समझ लो में और अरुण दोनों छोटे बच्चे है और तुम हम दोनों की माँ अब हम कुछ नहीं करेंगे, तुम ही सब कुछ करोगी। माँ मैंने कभी नहीं देखा तुमने बचपन मे मुझे कैसे

    प्यार किया, में अब ये देखना चाहता हूँ।माँ खुश हो गयी और बोली ठीक है। में अरुण के पास गया तब तक अरुण उठ गया था। में खुशी से बोला अरुण माँ तैयार हो गयी है लेकिन अरुण कुछ समझ नहीं पाया। फिर मैंने बोला कि अरे तूने अपना सारा बचपन माँ के बिना गुज़ार दिया। अब मैंने और माँ ने एक प्लान बनाया है, आज से तू एक छोटा बच्चे की तरह है और तेरी सारी ज़िम्मेदारी माँ के ऊपर है, मतलब तुझे नहलाना धुलाना और तुझे अपनी छाती से दूध पिलाना।तभी अरुण ये सब सुनकर चोंक गया वो बोला सच मे क्या ये मुमकिन है? मैंने बोला कि हाँ माँ का खुद ये मन था। फिर अरुण बोला क्या सच मे मुझे वो आम चूसने को मिलेंगे क्या में आंटी का ताज़ा दूध पीऊंगा। मैंने कहा हाँ मेरे भाई माँ के वो बूब्स अब तेरे है, जा पी

    ले जितना पी सकता है। माँ ने उगाए ही बहुत बड़े है, ताकि सबका पेट भर सके और आज से सुबह और रात को दूध मिलेगा। ना गाय का, ना बकरी का, ना भैंस का मिलेगा तो सिर्फ मेरी माँ का। मेरी प्यारी बड़े बड़े बूब्स वाली मेरी माँ मेरी माँ ये बाते सुन रही थी। माँ अंदर आई और बोली कि जाओ ब्रश कर लो और फ्रेश भी हो जाओ। फिर तुम दोनों को आज से रोजाना भैंस का ताज़ा दूध मिलेगा।फिर हम दोनों ने ब्रश किया और तभी में बोला माँ पहले मुझे दूध पीना है। उसके बाद अरुण बाथरूम से बाहर आया वो पूरा नंगा ही था और अपने लंड को खुजाता हुआ माँ का ब्लाउज खोलने लगा। तभी माँ बोली लगता है बहुत भूख लगी है, अरुण बोला हाँ आंटी बचपन की है। माँ ने कहा फिर देर क्यों लगाता है ब्लाउज खोलने मे फाड़ दे

    इसे ये सुनते ही अरुण ने माँ का ब्लाउज नोच लिया और उसे फाड़ दिया और अंदर जो ब्रा थी उसे भी फाड़ दिया। ब्रा खुलते ही अरुण और मेरी आँखें सन्न रह गयी। ऐसे बूब्स तो हमने ब्लू फिल्म मे भी नहीं देखे थे। माँ के बूब्स उनकी नाभि तक झूल रहे थे और उनके निप्पल भी काफ़ी बड़े थे। अरुण भूखे दरिन्दे की तरह माँ के बूब्स पर टूट गया और माँ का पूरा बूब्स अपने मुहं मे भर लिया और उसमे से जो अमृत निकल रहा था उसको पिये जा रहा था। माँ उसके बालो मे हाथ फैरने लगी और कहने लगी पी मेरे राजा बेटा अपनी माँ भैंस का दूध पी।अरुण का हाथ माँ की गांड पर पहुंच गया और वो माँ के चूतड़ो को सहलाने लगा और माँ के चूतड़ो की लाईन मे अपना हाथ घुसा दिया। मुझे ये सब देखकर जन्नत का मज़ा आ

    रहा था। अरुण ने माँ के पेटिकोट का नाडा खोल दिया और माँ अब पूरी नंगी थी। उन्होने पेंटी नहीं पहनी थी। में माँ की गांड देखना चाहता था। फिर में माँ के पीछे हो गया वाह क्या गांड थी इतनी बड़ी बड़ी गोल मटोल मैंने माँ को कहा माँ आप बेड पर घोड़ी बन जाओ अरुण आपका दूध पी लेगा और में आपकी गांड की सफाई कर दूँगा। तभी माँ राज़ी हो गयी और बेड पर घोड़ी बन गयी और अपना बूब्स फिर अरुण के मुहं मे ठूंस दिया और में उनकी गांड चाटने लगा। वाह क्या गांड थी इतनी टेस्टी क्या बताऊँ। फिर में माँ की गांड बुरी तरह चाटने लगा और अरुण माँ के बूब्स चूस रहा था। माँ को भी बहुत अच्छा लग रहा था और वो अपना पूरा बूब्स अरुण के मुहं मे ठूंस देना चाहती थी।वो ज़बरदस्ती अपना बूब्स उसके मुहं मे घुसा रही

    थी। माँ बोली चूसो पी जाओ मुझे जितना पी सकते हों पी लो, अरुण पी अपनी भैंस का दूध अनुज चाट अपनी चुदी हुई कुतिया की गांड, चाट अच्छे से चाट कुत्ते आज से तुम्हे खाने में यही मिलेगा गांड, चूत और बूब्स और चाटो, चूसो जोर जोर से मेरे शेर। मेरे लिप वो भी चूसो मेरी जीभ उसे भी चूसो आज मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। में ही साली चूतिया थी जो आज तक इस मज़े को नहीं ले पाई।तभी माँ की बाते सुनते सुनते ही मेरा और अरुण का झड़ गया और हम ढेर हो गये। माँ ने पूछा कि क्या हुआ मैंने बोला बस माँ पेट भर गया बाकी बाद में, फिर माँ हँसने लगी और कहा अगली बार से ज़्यादा खाना और पीना क्योंकि तुम दोनों की सेहत बनानी है।दोस्तों अगर कहानी अच्छी लगी हो तो इसे लाईक और शेयर जरुर करें ।।धन्यवाद .

    [Total: 5 Average: 2.6/5]
     
  2. 007

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    हैल्लो दोस्तों मेरा नाम अनुज है। मेरी उम्र 22 साल की है और में कामुकता डॉट कॉम का रेगुलर रीडर हूँ। मैंने जब लोगो को अपनी रियल स्टोरी लिखते हुए देखा तो मेरा मन भी हुआ कि में भी अपनी रियल स्टोरी लिखूं। तो इसलिए आज में आप सभी के लिये अपनी एक सच्ची घटना लेकर आया हूँ। दोस्तों ये घटना कुछ समय पहले मेरे साथ हुई और में बहुत लक्की हूँ कि वो घटना घटी और आज मुझे उस घटना से कितना मज़ा आता है में ही जानता हूँ, दोस्तों में अपनी स्टोरी शुरू करता हूँ।

    ये बात उस समय की है जब में बोर्डिंग मे था और गर्मी की छुट्टियाँ हुई थी। में दो महीने बाद घर जा रहा था और में बहुत उत्साहित भी था। इन दो महीने जब में घर से दूर था। मेरा एक बहुत ही पक्का दोस्त बन गया था। उसका नाम अरुण था। अरुण के पापा किसान थे और माँ उसकी उसके पैदा होने के साथ ही गुज़र गयी थी। वो अपनी माँ के प्यार से वंचित रह गया था। इस बार मैंने उसे कहा कि मेरे घर चल वहाँ पर मेरी माँ से तुझे अपनी सग़ी माँ की तरह प्यार मिलेगा। मेरी माँ एक बहुत ही भोली भाली औरत है और वो दूसरो का दर्द नहीं देख सकती है।

    मेरी माँ वैसे थोड़ी मोटी है लेकिन बहुत ही खूबसूरत है जैसे वो कोई अप्सरा हो। वो अपने कॉलेज मे मिस कॉलेज भी रह चुकी है। उनकी उम्र लगभग 37 साल की होगी और उनके बूब्स और गांड बहुत ही बड़ी है। मैंने उन्हे वैसे कभी नंगा नहीं देखा लेकिन मुझे पता है जिस दिन में उन्हे नंगा देखूँगा मेरा वैसे ही छूट जाएगा। मम्मी का ब्लाऊज बहुत बड़ा होता है और मैंने मम्मी की पेंटी भी देखी है वो भी बहुत बड़ी है। में भी मम्मी का बहुत बड़ा दीवाना हूँ और मेरी भी दिली तमन्ना है की में भी उनके साथ चुदाई करूं, खैर में अपनी कहानी पर आता हूँ। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

    फिर में और मेरा दोस्त अरुण घर पहुंचे। मम्मी मुझे देखकर बहुत खुश हो गयी और मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरी एक पप्पी ले ली और मुझे बहुत कसकर गले लगा लिया। मेरी माँ मुझसे बहुत प्यार करती थी और उनके लिए में ही सब कुछ था। पापा और माँ का रिलेशन भी बहुत अच्छा था। लेकिन वो ज़्यादा मुझसे प्यार करती थी।

    फिर माँ ने अरुण की तरफ देखा और पूछा कि अनुज बेटा ये कौन है? तभी में बोला कि माँ ये मेरा सबसे अच्छा दोस्त है अरुण। माँ ने उसे भी अपने सीने से लगा लिया और उसका भी गाल चूम लिया और कहने लगी कि अरुण तुम्हारा स्वागत है। अरुण मेरी माँ को देखे ही जा रहा था। उसने ऐसी औरत शायद पहले ही कभी देखी थी। खैर फिर हम अंदर आ गये और फ्रेश होने चले गये।

    तभी अरुण बोला यार तेरी मम्मी तो बहुत अच्छी है कितना प्यार करती है तुझसे, काश मेरी भी माँ होती ये कह कर वो बहुत उदास हो गया।

    में बोला यार मेरी माँ तेरी माँ भी तो है देखा उन्होने जैसे मेरे साथ ट्रीट किया वैसा तेरे साथ भी तो किया। फिर वो बोला कि हाँ आंटी वैसे बहुत अच्छी है। मैंने उसे कहा चल अब फ्रेश हो जा, अब दो महीने तू यहीं है और हिचकिचाना मत मेरी माँ से जितनी ममता ले सकता है ले लेना। इस बार में अपनी माँ का प्यार 50-50 कर लूँगा। फिर अरुण खुश हो गया उसने कहा कि यार सही मे तेरी माँ मे मुझे अपनी माँ नज़र आने लगी है। इस बार उनकी ममता की बारीश मे में ही नहाऊंगा।

    फिर मैंने कहा कि चल में तो जिंदगी भर माँ के साथ रहा हूँ इस बार वो पूरी तेरी माँ है। तभी माँ दरवाज़े पर खड़ी हुई कब से ये सुन रही थी। वो अंदर आई और बोली अरुण जैसे अनुज मेरा बेटा है वैसे अब तू भी मेरा बेटा है। मुझे नहीं पता था कि तुम्हारी माँ गुजर गयी है आज से में तेरी माँ हूँ मेरे दो बच्चो के अलावा तू मेरा तीसरा बच्चा है। ये सुनकर अरुण रो पड़ा और मेरी माँ से लिपट गया। मेरी माँ ने उसके बालों मे हाथ फेरा और उसको चूमने लगी।

    फिर उन्होने कहा कि चलो खाना ख़ा लो रात बहुत हो गयी है और हम खाना खाने चले गये। जब में घर मे होता था माँ हमेशा मेरे साथ ही सोती थी आज भी माँ ने मेरे साथ बिस्तर लगा लिया और में और मेरी माँ बेड पर लेट गये। तभी अरुण बाथरूम से निकला और बेड छोटा था तो वो बोला कि आंटी में कहाँ सोऊ? तभी मैंने बोला कि तू कहाँ जाएगा यहीं पर आजा वो बेड पर आकर मेरे पास मे लेट गया। तभी माँ बोली कि बेटा मेरे साथ लेटने में डर लगता है क्या?

    तभी अरुण कुछ समझ नहीं पाया फिर मैंने उसे समझाया यार अभी थोड़ी देर पहले तो तू कह रहा था, कि इस बार माँ की सारी ममता तेरी है और तू माँ के साथ लेट भी नहीं रहा। माँ ने मुझे अपनी दूसरी तरफ आने को कहा और खुद बीच मे लेट गयी। माँ ने केवल ब्लाउज और पेटीकोट पहन रखा था और माँ के पपीते (बूब्स) उनकी साँस लेने से ऊपर नीचे हो रहे थे। मेरे लिए तो ये कॉमन था, लेकिन शायद अरुण के लिए नहीं।

    हमारा बेड बहुत ही छोटा था और माँ बहुत मोटी उन्होने दोनों बाजू हमारे सर के नीचे कर दिए और दोनों को अपने से चिपका लिया माँ कम गले का ब्लाउज पहनती थी। इसलिए माँ की बगल के बाल हम दोनों के मुहं मे आ रहे थे। तभी मैंने अपना एक हाथ माँ के गोल मटोल पेट पर रख दिया और अपना पैर माँ की जांघो पर रख कर उनकी बगल के बालो मे मुहं घुसा कर सो गया। माँ ने अरुण की तरफ देखा और कहा कि क्या तुम्हे नींद नहीं आ रही?

    तभी उसने कहा कि आंटी आ रही है बस में थोड़ी देर मे सो जाऊंगा। मेरी माँ ने कहा कि बेटा तुम मुझसे घबरा क्यों रहे हो। इतनी दूर क्यों हुए जा रहे हो, आओ मुझसे लिपट जाओ। पहले तो तुम्हे माँ का प्यार चाहिए था, अब तुम ले भी नहीं रहे। तभी अरुण बोला कि नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं। माँ बोली फिर कैसी बात है और ये कहकर उन्होने अरुण का हाथ अपने बूब्स के जस्ट नीचे रख दिया। माँ के बूब्स और अरुण के हाथ मे थोड़ा ही गेप था और उन्होने अरुण को कहा कि क्या तुझे मुझसे शरम आती है।

    अनुज को देखो केवल कच्छे मे ही सो रहा है और तुम्हारे पूरे कपड़े लदे हुए है, तो चलो कपडे उतारो और फ्री फील करो। तभी अरुण थोड़ा हिचकिचाने लगा माँ बोली कि अपनी माँ से शर्म आती है क्या अरुण ने ये सुनकर झट अपने कपड़े उतार दिए और अंडरवियर मे आ गया। वो सोचने लगा कि जब अब इन्होने मुझे बेटा मान ही लिया तो कैसी शरम और माँ के बूब्स के जस्ट नीचे हाथ रखकर माँ से लिपट गया और सो गया। मेरी माँ की आँख लग गयी में बीच मे पानी पींने के लिए उठा तो मैंने अरुण को माँ से बुरी तरह लिपटे हुए देखा। तभी मेरे चेहरे पर खुशी आ गयी क्योंकि अरुण भी सोते हुए बहुत खुश लग रहा था।

    में अरुण को हमेशा सच्चा और बहुत अच्छा दोस्त मानता था और उसकी खुशी के लिए में कुछ भी कर सकता था। फिर मैंने सोचा कि क्यों ना अरुण को माँ से उसके बचपन का प्यार दिलाया जाए जो कभी माँ मुझे देती थी। अरुण कितना पतला है। इसको माँ का दूध नहीं मिला, मुझे अपनी माँ का रसीला दूध इसको पिलाना ही पड़ेगा। में कितना हट्टा कट्टा हूँ क्योंकि मैंने माँ का दूध 10-11 साल तक पिया है और अरुण ने तो एक भी बार नहीं। अब मुझे कुछ भी करके अरुण का ध्यान मेरी माँ के बूब्स तक लाना पड़ेगा। इतने बड़े बूब्स देखकर तो कोई भी पागल हो सकता है।फिर अरुण क्यों नहीं।

    यही सोचकर में माँ के करीब लेट गया और अरुण का हाथ उठाकर माँ के बूब्स पर रख दिया अब में सोचने लगा कि कैसे माँ के बूब्स को खोला जाए लेकिन इसकी मेरी हिम्मत नहीं हुई और मैंने भी अपना हाथ माँ के बूब्स पर रखा और सो गया। सुबह जब में उठा तो अरुण सो रहा था और माँ बाहर पापा को नाश्ता दे रही थी। में उठकर माँ के पास किचन मे चला गया और जाकर पानी पीने लगा। तभी माँ मेरे पास आई और बोली कि पता है तुम्हे.. आज सुबह मैंने क्या देखा तुम और अरुण मेरे बूब्स पर हाथ रखकर सो रहे थे।

    फिर में बोला कि मुझे याद नहीं शायद सोते सोते हाथ चला गया होगा। तभी माँ बोली कि अरे में तुम्हे कुछ थोड़े ही कह रही हूँ। इन बूब्स पर तेरा तेरी बहन का और तेरे पापा का ही तो इधिकार है। बस फर्क ये है तेरे पापा इन्हे देख सकते है और छू भी सकते है और तेरी बहन भी इन्हे देख सकती है लेकिन समाज के हिसाब से ना तू इन्हे नंगा देख सकता है और ना छू सकता है। तभी में बोला कि ठीक है आगे से में ध्यान रखूँगा सोते हुए। माँ बोली बुद्दू में ये थोड़े ही कह रही हूँ में तो खुश थी मुझे आज तेरे बचपन की याद आ गयी। जब तू मेरे बूब्स का दीवाना था, पीछा नहीं छोड़ता था, तेरी वजह से तो में ब्लाउज ब्रा पहनना भी भूल गयी। लेकिन आज सुबह जब तेरा हाथ मैंने अपने बूब्स पर पाया मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मुझे लगा मेरा छोटा अनुज वापस आ गया है। फिर में बोला तो माँ क्या में इन्हे आज से छू सकता हूँ, माँ बोली क्यों नहीं, ये तेरे ही तो है इन्हे चाहे तो छू चाहे दबा चाहे खेल या चाहे मेरा दूध पी ये तेरे लिए ही तो इतने बड़े किए है।

    अब में खुश हो गया और बोला लेकिन पापा को ग़लत नहीं लगेगा। तभी माँ बोली कि पापा को मैंने बताया वो बोले इसमे कुछ ग़लत नहीं है। उन्होने तो अपनी माँ का दूध शादी से पहले तक भी पिया था। में ही पागल थी जो तुझे नहीं पीने दिया। में बोला माँ अरुण का क्या उसे तो कभी माँ का दूध ही नहीं मिला।

    फिर माँ बोली अरे ये दो चूचियाँ किस लिए है। तेरे पापा बाहर रहते है। तेरी बहन छुट्टियों में मामा के यहाँ है, अब इन दोनों बूब्स का रस तुम दोनों ही पीना। में बोला माँ जब अब हम तीन ही घर मे है तो एक नया रीलेशन शुरू करे माँ बोली क्या? समझ लो में और अरुण दोनों छोटे बच्चे है और तुम हम दोनों की माँ अब हम कुछ नहीं करेंगे, तुम ही सब कुछ करोगी। माँ मैंने कभी नहीं देखा तुमने बचपन मे मुझे कैसे प्यार किया, में अब ये देखना चाहता हूँ।

    माँ खुश हो गयी और बोली ठीक है। में अरुण के पास गया तब तक अरुण उठ गया था। में खुशी से बोला अरुण माँ तैयार हो गयी है लेकिन अरुण कुछ समझ नहीं पाया। फिर मैंने बोला कि अरे तूने अपना सारा बचपन माँ के बिना गुज़ार दिया। अब मैंने और माँ ने एक प्लान बनाया है, आज से तू एक छोटा बच्चे की तरह है और तेरी सारी ज़िम्मेदारी माँ के ऊपर है, मतलब तुझे नहलाना धुलाना और तुझे अपनी छाती से दूध पिलाना।

    तभी अरुण ये सब सुनकर चोंक गया वो बोला सच मे क्या ये मुमकिन है? मैंने बोला कि हाँ माँ का खुद ये मन था। फिर अरुण बोला क्या सच मे मुझे वो आम चूसने को मिलेंगे क्या में आंटी का ताज़ा दूध पीऊंगा। मैंने कहा हाँ मेरे भाई माँ के वो बूब्स अब तेरे है, जा पी ले जितना पी सकता है। माँ ने उगाए ही बहुत बड़े है, ताकि सबका पेट भर सके और आज से सुबह और रात को दूध मिलेगा। ना गाय का, ना बकरी का, ना भैंस का मिलेगा तो सिर्फ मेरी माँ का। मेरी प्यारी बड़े बड़े बूब्स वाली मेरी माँ मेरी माँ ये बाते सुन रही थी। माँ अंदर आई और बोली कि जाओ ब्रश कर लो और फ्रेश भी हो जाओ। फिर तुम दोनों को आज से रोजाना भैंस का ताज़ा दूध मिलेगा।

    फिर हम दोनों ने ब्रश किया और तभी में बोला माँ पहले मुझे दूध पीना है। उसके बाद अरुण बाथरूम से बाहर आया वो पूरा नंगा ही था और अपने लंड को खुजाता हुआ माँ का ब्लाउज खोलने लगा। तभी माँ बोली लगता है बहुत भूख लगी है, अरुण बोला हाँ आंटी बचपन की है। माँ ने कहा फिर देर क्यों लगाता है ब्लाउज खोलने मे फाड़ दे इसे ये सुनते ही अरुण ने माँ का ब्लाउज नोच लिया और उसे फाड़ दिया और अंदर जो ब्रा थी उसे भी फाड़ दिया। ब्रा खुलते ही अरुण और मेरी आँखें सन्न रह गयी। ऐसे बूब्स तो हमने ब्लू फिल्म मे भी नहीं देखे थे। माँ के बूब्स उनकी नाभि तक झूल रहे थे और उनके निप्पल भी काफ़ी बड़े थे। अरुण भूखे दरिन्दे की तरह माँ के बूब्स पर टूट गया और माँ का पूरा बूब्स अपने मुहं मे भर लिया और उसमे से जो अमृत निकल रहा था उसको पिये जा रहा था। माँ उसके बालो मे हाथ फैरने लगी और कहने लगी पी मेरे राजा बेटा अपनी माँ भैंस का दूध पी।

    अरुण का हाथ माँ की गांड पर पहुंच गया और वो माँ के चूतड़ो को सहलाने लगा और माँ के चूतड़ो की लाईन मे अपना हाथ घुसा दिया। मुझे ये सब देखकर जन्नत का मज़ा आ रहा था। अरुण ने माँ के पेटिकोट का नाडा खोल दिया और माँ अब पूरी नंगी थी। उन्होने पेंटी नहीं पहनी थी। में माँ की गांड देखना चाहता था। फिर में माँ के पीछे हो गया वाह क्या गांड थी इतनी बड़ी बड़ी गोल मटोल मैंने माँ को कहा माँ आप बेड पर घोड़ी बन जाओ अरुण आपका दूध पी लेगा और में आपकी गांड की सफाई कर दूँगा। तभी माँ राज़ी हो गयी और बेड पर घोड़ी बन गयी और अपना बूब्स फिर अरुण के मुहं मे ठूंस दिया और में उनकी गांड चाटने लगा। वाह क्या गांड थी इतनी टेस्टी क्या बताऊँ। फिर में माँ की गांड बुरी तरह चाटने लगा और अरुण माँ के बूब्स चूस रहा था। माँ को भी बहुत अच्छा लग रहा था और वो अपना पूरा बूब्स अरुण के मुहं मे ठूंस देना चाहती थी।

    वो ज़बरदस्ती अपना बूब्स उसके मुहं मे घुसा रही थी। माँ बोली चूसो पी जाओ मुझे जितना पी सकते हों पी लो, अरुण पी अपनी भैंस का दूध अनुज चाट अपनी चुदी हुई कुतिया की गांड, चाट अच्छे से चाट कुत्ते आज से तुम्हे खाने में यही मिलेगा गांड, चूत और बूब्स और चाटो, चूसो जोर जोर से मेरे शेर। मेरे लिप वो भी चूसो मेरी जीभ उसे भी चूसो आज मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। में ही साली चूतिया थी जो आज तक इस मज़े को नहीं ले पाई।

    तभी माँ की बाते सुनते सुनते ही मेरा और अरुण का झड़ गया और हम ढेर हो गये। माँ ने पूछा कि क्या हुआ मैंने बोला बस माँ पेट भर गया बाकी बाद में, फिर माँ हँसने लगी और कहा अगली बार से ज़्यादा खाना और पीना क्योंकि तुम दोनों की सेहत बनानी है।

    दोस्तों अगर कहानी अच्छी लगी हो तो इसे लाईक और शेयर जरुर करें ।।

    धन्यवाद .
     
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