विधवा ने अपनी चूत खुद ही फाड़ ली

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Nov 23, 2017.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

    //krot-group.ru pyasi chut मैं रोशनी जैन, मेरी उम्र 38 साल है, बदन 38D-31-38 है.
    पाँच साल पूर्व मेरी पति की मृत्यु एक कार दुर्घटना में हो गई थी। मेरी कोई औलाद भी नहीं है। पर मेरे पति बहुत आकर्षक थे, मुझे बहुत प्यार करते थे.
    अब मैं उसी प्राइवेट कम्पनी में नौकरी कर रही हूँ जहाँ मेरे पति काम करते थे। पिछले पाँच साल में मुझे किसी का मर्दाना साथ नसीब नहीं हुआ। ऐसा नहीं कि किसी मर्द ने मेरे पास आने की कोशिश ही नहीं की, बल्कि मैंने ही किसी को अपने पास नहीं आने दिया।
    मैं अकेली रहती रही और रहती हूँ!

    मैं अपनी यौन जरूरतें अपनी उंगली, घर में रखी हुए सब्जियों जैसे बैंगन, तोरी, खीरा, केला गाजर से पूरी करती हूँ। कई बार जब बहुत मन चाहता है तो अपनी कुछ ऑफ़िस फ्रेंड्स को बुला लेती हूँ और ब्ल्यू फ़िल्म देख कर आपस में एक दूसरी को मज़ा देती हैं।
    इस कहानी में मैं आपको कुछ रोचक घटनाएं जो पिछले पाँच सालों में मेरे साथ हुई, वो आपको बताऊँगी।


    चूँकि मुझे पता था कि अब मैं शादी नहीं करूँगी इसलिए मैंने अपनी फ़ुद्दी के साथ कुछ अलग ही प्रैक्टिकल किया था, मगर आप लड़कियाँ, बहनें और आंटी प्लीज़ आप ऐसा कुछ करने की कोशिश मत करना, इन सब से दूर ही रहना.

    एक दिन मैं रसोई में तोरी काट रही थी, मैंने काफ़ी दिनों से फ़ुद्दी के बाल साफ नहीं किए थे, मुझे फ़ुद्दी पर खारिश शुरू हो गई, मैं घर में अकेली थी, मैंने एक दो बार फ़ुद्दी पर खुजली की मगर साली खारिश फिर भी लगी हुई थी।

    मेरे हाथ में एक बड़ी दस इन्च लंबी और तीन इन्च मोटी तोरी थी, मुझे अपनी फ़ुद्दी पर बहुत गुस्सा आ रहा था कि मैंने सुबह ही तो स्नान किया था तो अब फ़ुद्दी में खुजली क्यों हो रही है, मैंने सलवार का नाड़ा खोल कर सलवार उतार दी, मैंने वो मोटी तोरी गुस्से में आकर अपनी फ़ुद्दी में पूरी उतार दी जिससे मेरी फ़ुद्दी के लबों से थोड़ा खून भी निकल आया और मैं दर्द के मारे चीखने लगी।

    खैर जब तोरी को फ़ुद्दी में घुमाया तो खून निकलना रुक गया, तो मैं उस मोटी तोरी से अपनी फ़ुद्दी को चोदने लगी।
    दोस्तो, ऐसा मज़ा मुझे पहला कभी नहीं आया था, जो उस दिन आया था, अपने हाथों से अपनी फ़ुद्दी फाड़ कर !

    फिर मैं जिस छुरी से तोरी काट रही थी, उसी से फ़ुद्दी के बाल काटने लगी, एक हाथ की उंगलियों से बाल पकड़ कर उन पर ऐसे छुरी चला रही थी कि जैसे मैंने उन्हें हलाल कर रही हूँ। बाल तो क्या कटने थे, मुझे काफ़ी तकलीफ़ हुई पर इस दोहरी तकलीफ़ में मुझे खूब यौनानन्द मिला और मेरी फ़ुद्दी शांत हो गई, फुद्दी का वीर्य भी निकल आया।

    फ़िर तो वो मैंने तोरी छिलके समेत बिना धोये कुकर में डाल कर पका ली और मज़ा ले ले कर खा गई।
    यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
    मैंने वो सब्जी अपनी पड़ोसन को भी दी, बाद में उसने मुझे बताया कि सब्जी बहुत स्वादिष्ट थी।

    मैंने दिल में सोचा- अपनी फ़ुद्दी फाड़ कर जो पकाई थी।
    मैं आप सब बहनों, भाभियों, आन्टियों और बहु-बेटियों से एक बार फ़िर गुजारिश करती हूं कि ऐसा करने की कोशिश मत कीजिएगा।

    दूसरी घटना:

    होली का दिन था, मेरी ऑफ़िस की तीन सहेलियाँ मुझसे मिलने घर पर आ गईं। उस दिन वैसे ही मेरा मूड ऑफ था, वो सालियाँ मुझे बताने लगी कि उनके पतियों ने उन्हें कस कर चोदा, जिससे मेरा दिल भी लण्ड लेने को करने लगा और वो सालियाँ मज़े से अपनी चुदाई की कहानियाँ सुना रही थी। मुझे गुस्सा आ रहा था मगर मैंने कंट्रोल किया।
    मेरे ज़हन में एक आइडिया आया, मैंने अपनी सहेलियों को हार्ड ड्रिंक की ऑफर की तो उन्होंने मना नहीं किया।
    मैं रसोई में गई, शराब की बोतल निकाली, एक गिलास भरा और बाकी एक जग में पूरी बोतल उलट दी। मैंने अपनी साड़ी को ऊपर किया, पैंटी नीचे की और अपनी फ़ुद्दी से जग में पेशाब करने लगी, मैंने सोचा कि अब सालियों को मज़ा आएगा।

    मैंने जग से दोबारा शराब एक सादी बोतल में डाली और उन रण्डियों के सामने तीन गिलास, बोतल, सोडा वगैरा रख दिया। बार बार रसोई से सामान लाने के चक्करों में मैं अपना गिलास भी ले आई, उन्हें पता नहीं लगने दिया।
    वे सब पैग बना बना कर पीने लगी।

    मैंने पूछा- कैसा लग रहा है?
    सबबे कहा- यह बहुत मजेदार है, लेबल तो है ही नहीं?
    मैं बोली- लेबल कहाँ से होगा, देसी है, गाँव की भट्टी की !
    और मैं दिल में हँसने लगी।

    फिर जब उन्होंने 3-3 पैग लगा लिए तो मैं एक बार फिर बोली- मज़ा आया ना?
    सबने कहा- हाँ, मगर वो नशा नहीं है, जो होता है।
    मैंने कहा- हाँ, तुम्हें शराब का नशा थोड़े ही होगा, तुम तो लण्ड के नशे में रहती हो।
    और वो सब हँसने लगी।

    मैं आप सब बहनों, भाभियों, आन्टियों और बहु-बेटियों से एक बार फ़िर गुजारिश करती हूं कि ऐसा करने की कोशिश मत कीजिएगा।
    तीसरी घटना:
    दोस्तो, वह शनिवार की रात थी, मेरा बहुत मन कर रहा था सेक्स को, मगर कुछ अच्छा नहीं लग रहा था, मैं बहुत उदास थी। मैं पियक्कड़ नहीं हूँ मगर उस दिन मैंने पांच पैग देसी शराब के पी लिए, फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये और पूरी नंगी हो गई, मैंने टेप रेकॉर्डर मैं फास्ट म्यूज़िक की कैसेट चला दी और अकेली नंगी नाचने लगी, झूम कर कभी एक तरफ गिरती, कभी दूसरी तरफ, कभी अपनी फ़ुद्दी में उंगली डालती, कभी चूचियाँ हिला हिला कर थिरकाती, मैं बहुत ज्यादा नशे में थी, जब चूत में उंगली डालने से मेरी चूत गीली होने लगी तो मुझे और कुछ मिला नहीं, मैंने शराब की बोतल उठाई और फ़ुद्दी में उसका पतला सिरा डाल कर नाचने लगी, बोतल को फ़ुद्दी मैं अन्दर-बाहर करने लगी।

    मैं एक बार ज़मीन पर उल्टी लेट गई और शराब की बोतल को फ़ुद्दी के नीचे रख कर ऊपर से ज़ोर लगाने लगी। पौन लिटर वाली बोतल का पतला हिस्सा सारा मेरी चूत में घुस गया था और उसके बाद मोटे वाला हिस्सा भी थोड़ा सा मेरी फ़ुद्दी में घुस गया पर इससे आगे नहीं जा रही थी क्योंकि बोतल बहुत मोटी थी, मैंने बोतल निकाली और इधर उधर कुछ देखने लगी तो मुझे टूथ पेस्ट की बड़ी ट्यूब जो मैंने नई रखी थी नज़र आ गई। मैं टट्टी करने के अंदाज़ में बैठ गई जैसे टायलेट में बैठती हूं और टूथपेस्ट की ट्यूब पूरी अपनी फ़ुद्दी मैं लगाकर घुसा ली और फुद्दी को मज़ा देने लगी और डांस भी कर रही थी।

    बहुत ज्यादा घुमाने और अन्दर-बाहर करने से टूठपेस्ट की ट्यूब मेरी फ़ुद्दी में खुल गई और काफ़ी पेस्ट अन्दर निकल गया व ढक्क्न मेरी फ़ुद्दी के अंदर घुस गया। नशे में तो मुझे समझ नहीं आया और मैं ऐसे ही नंगी फ़ुद्दी को शांत करके सो गई। मगर जब अगले दिन उठी तो मेरी फ़ुद्दी में बहुत जलन हो रही थी, मैंने बाथरूम में जाकर अंदर से अपनी फ़ुद्दी को साफ़ किया तो ट्यूब का ढक्कन निकला और पानी से फ़ुद्दी धोई तो जलन कम तो हो गई मगर ख़त्म नहीं हुई।

    इस घटना को याद कर का मुझे बहुत हँसी आती है और घबराहट भी होती है कि अगर पेस्ट की ट्यूब का ढक्कन मुझसे ना निकल पाता या वो अन्दर मेरी बच्चेदानी में चला जाता तो क्या होता?
    मैं आप सब बहनों, भाभियों, आन्टियों और बहु-बेटियों से एक बार फ़िर गुजारिश करती हूं कि ऐसा करने की कोशिश मत कीजिएगा।

    चौथी घटना-
    ऐसा ही एक और वाकिया, मैंने अपनी फ़ुद्दी का साथ एक प्रॅक्टिकल किया जिसकी वजह से मुझे पूरा एक हफ़्ता बिस्तर पर रहना पड़ा। मुझे एक दफ़ा ख़याल आया कि क्यों ना चूत मैं शराब डाल कर चेक करूँ और देखूँ कैसा लगता है, मैंने देसी शराब की बोतल निकाली, साथ मैं एक लम्बा-मोटा बैंगन भी, और अपना कपड़े उतार कर ब्लू फिल्म देखने लगी और साथ में फ़ुद्दी में लम्बा-मोटा बैंगन डालने लगी, जब मेरी चूत को बैंगन ने पूरी तरह खोल दिया तो मैंने अपनी फ़ुद्दी, जो पहले से ही बहुत बड़ी और खुली हुई थी, मैंने शराब की बोतल उठाई और अपनी चूत को सोफ़े के ऊपर टाँगें खड़ी कर के, फ़ुद्दी को दो उंगलियों से खोल कर दूसरे हाथ से फ़ुद्दी में शराब भरने लगी।
    चूँकि मेरी टाँगें ऊपर की तरफ उठी हुए थी तो शराब फ़ुद्दी में अंदर तक चली गई, और मुझे काफ़ी जलन होने लगी, मैं कुछ देर तो स्जलन सहती हुई लेटी रही मगर जब असहनीय लगने लगा तो मैंने उठ कर चलना फिरना शुरू किया, मुझे ऐसा लगा कि मेरी फ़ुद्दी के अंदर किसी ने आग लगा दी है, जिससे मेरी आँखों से आँसू बहने लगे, मैंने जल्दी से पड़ोस की लेडी डॉक्टर को बुलाया, वो फ़ौरन आ गई, जब मैंने उसे सारी बात बताई तो उसने मुझे हॉस्पिटल चलने को कहा, वहाँ उसने मेरी फ़ुद्दी की जांच की, पता चला कि मेरी फ़ुद्दी के अंदर की नसें काफ़ी खराब हो गई थी। डॉक्टर ने मुझे एक हफ़्ते तक बेड रेस्ट का कहा, पूरा एक महीना मैंने अपनी फ़ुद्दी का साथ कुछ नहीं किया, सिर्फ़ फुद्दी में दवाई लगाती थी और फ़ुद्दी को ठण्डी रखने के लिये बर्फ़ की टकोर करती थी।
    इसके बाद मैंने दोबारा ऐसा नहीं किया।
    पाँचवीं घटना:
    चूंकि मुझे फ़ुद्दी के साथ प्रॅक्टिकल करना का शौक था, इस बार मैंने एक नया काम किया। आप लोग जानते हैं कि मैं अकेली रहती हूँ।
    एक दिन मुझे बहुत तेज़ पेशाब लगा हुआ था, ऐसा लग रहा था कि मेरी फ़ुद्दी में से अभी निकल जाएगा, मैं खाना बना रही थी, जून का महीना था, बहनों आप जानती हैं कि इस हालत में खाना बनाना कितना मुश्किल होता है, वो भी दिन के एक से दो बजे के दरमियान. रसोई में कितनी गर्मी होती है, मेरी फ़ुद्दी पेशाब करने के लिये बेताब थी, मैंने सोचा मुझे कौन सा कोई देख रहा है, क्यों ना मैं अपनी सलवार में ही पेशाब कर लूँ और बाद में नहा लूँ, मैंने जो सोचा, वैसा ही किया।

    मैं खाना पका रही थी, थोड़ा सा ज़ोर लगाया, और सारा पेशाब मेरी सलवार के अंदर से होता हुआ रसोई के फर्श पर रिसने लगा और मुझे सकून मिल गया, इसी दौरान मैंने सोचा कि क्यों ना पेशाब पीकर देखा जाए।

    मैंने खाना बनाते वक़्त कई गिलास पानी पी लिया। फिर खाना तैयार हो गया तो मैंने अपनी गीली सलवार उतार कर एक तरफ़ रख दी, मैंने सोचा कि यार कमीज़ भी उतार लेते हैं, मैंने ऐसा ही किया।
    मैंने भिंडी बनाई थी, मैंने एक प्लेट में अपना खाना लगाया, साथ में एक खाली गिलास उठा कर कमरे में आ गई।

    डीवीडी प्लेयर में एक XXX फिल्म चला कर मैं खाना खाने लगी, साथ साथ फिल्म देखने लगी। खूब सारा पानी पीने के कारण मेरा पेशाब का प्रेशर बन गया तो मैंने गिलास अपनी चूत के पास रख कर उसमें मूता और पूरा गिलास भर गया।

    मुझे बहुत अजीब लग रहा था यह सब, मगर बहुत मज़ा भी आ रहा था, तब मैं फ्रिज में से चॉकलेट पाउडर लाई और दो चम्मच चॉकलेट मैंने अपना पेशाब में मिला दिया। फ़िर मैंने एक स्ट्रॉ गिलास में डाला और यह शर्बत पीने लगी, वॉव. टेस्टी. यम्मी. आहा और मैंने अपने खाने के साथ साथ पूरा गिलास मज़ा ले लेकर पी लिया।
    मैं आप सब बहनों, भाभियों, आन्टियों और बहु-बेटियों से एक बार फ़िर गुजारिश करती हूँ कि ऐसा करने की कोशिश मत कीजिएगा।

    छठी घटना:
    एक बार मुझे मेरे ऑफ़िस की सहेली ने एक बिल्कुल नया आइडिया बताया और एक XXX फिल्म उसी आइडिया की मुझे दी।
    मैं 3 बजे छुट्टी करके घर आ गई। फ़्रिज से खाना निकाल कर गर्म किया और खाना खाने के बाद कुछ आराम किया। शाम का खाना बना कर फ्रेश हो गई, रात के आठ बजे थे, मैंने सोचा जल्दी क्या है, कुछ खा लूँ, मैंने खाना खाना का बाद अपने हैण्ड बैग में से डी वीडी निकाली और चालू कर दी।

    मैंने देखा एक लड़की बिस्तर पर लेटी है और XXX फिल्म देख कर गर्म हो रही है, पहले उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपने बूब्स मसलने लगी, निपल्स को मसलने लगी।
    यह सब उसने 5 मिनट तक किया और फिर अपना मोबाइल उठा कर वाइब्रेशन ओन कर दिया और मोबाइल का आगे का हिस्सा चूत में घुसा दिया और मज़ा से सिर्फ़ बूब्स दबा रही थी और चूत का होंठों को कभी कभी हाथ से मसल देती थी।

    मैंने भी ऐसा ही किया, मैंने अपनी साड़ी खोल कर ब्लाउज-पेटीकोट उतार दिया और फिल्म देख देख कर अपने बूब्स दबाने लगी, फिर नीचे से पैन्टी भी उतार कर नंगी हो गई।

    अब सीन भी बदल गया, 2 लड़कियाँ एक लड़के से चुदवाने लगी।
    वाह. उसका काफ़ी बड़ा और मोटा लण्ड था, मगर मेरी फ़ुद्दी का सामना कुछ नहीं था, मैंने फ़ुद्दी को थोड़ी देर मसलने के बाद तीन उंगलियाँ पूरी अंदर डाल कर फ़ुद्दी की सफ़ाई की और मोबाइल का वाइब्रेटर ओन करके आराम से सोफ़े पर लेट गई और आधा फ़ोन अपनी फ़ुद्दी के अंदर घुसा दिया।

    वॉव इट्स अमेज़िंग यार ! बगैर उंगलियाँ हिलाए फ़ुद्दी में ऐसा लग रहा था जैसा कोई बहुत ज़ोर से अपना लण्ड से ड्रिलिंग कर रहा हो, आह, मुझे आइडिया आया, मैं ऐसे ही उठी और लैण्ड लाइन टेलिफोन सेट के पास चली गए, मोबाइल मेरी फ़ुद्दी में ही था, मैंने अपनी सहेली को फोन किया और सारी बात बता दी, और उसको थैन्क्स भी बोल दिया इतना अच्छा आइडिया मुझे देने के लिये।

    फिर मैं वापिस सोफा पर लेट गई फोन बंद करके और मूवी देख देख कर अपने चूचों को मसलने लगी।
    ऐसा 10 मिनट ही किया था कि मेरी फ़ुद्दी ने पानी निकाल दिया और सारा मोबाइल गीला हो गया।

    मैं अपनी फ़ुद्दी का पानी सारा पानी चाट गई फ़ोन पर से, और फिर ऐसा तीन बार किया। बस एक प्राब्लम थी कि मुझे बार बार बटन दबाना पड़ता था। तीसरी बार मेरी फ़ुद्दी में मोबाइल 20 मिनट तक रहा, और मैं इस दौरान कम से कम चार बार पानी फ़ुद्दी में से निकाल चुकी थी, जिससे मुझे बहुत कमज़ोरी महसूस होने लगी और मुझ सा चला भी नहीं जा रहा था।

    मैंने दो विटमिन और आयर्न की टॅबलेट खाई और साथ मैं एक गिलास दूध भी पी लिया, मगर अगले दिन मुझे ऑफ़िस सा छुट्टी करनी पड़ी क्योंकि मुझे बहुत ज्यादा थकावट हो रही थी और जिस्म भी टूट रहा था।
     
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