शादीशुदा दीदी की खुली हुई चूत

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Mar 13, 2017.

  1. 007

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    //krot-group.ru प्रेषक : सुमित .

    हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम सुमित है और मेरी उम्र 18 साल और में बड़ोदा में अपनी मम्मी, पापा के साथ रहता हूँ। दोस्तों आज में आप सभी को जो आपबीती सुनाने जा रहा हूँ, इसको में पिछले कुछ समय से आप लोगों तक पहुँचाने के बारे में विचार बना रहा था, लेकिन डरता था। वैसे इसमें मुझे बहुत मज़ा आया, क्योंकि इस चुदाई में मेरी दीदी ने मुझे वो सब बताया और में उनके कहने से उस काम वैसे ही करता रहा और में उम्मीद करूंगा कि आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने वालों को मेरी यह घटना जरुर पसंद आएगी

    दोस्तों में अपने साथ में पढ़ने वाले दोस्तों के साथ एक इंटरनेट कैफे पर जाने लगा था और में अपने एक बहुत पक्के दोस्त जिसका नाम निखिल है, में उसके साथ हर एक बात करता और उसको में अपनी हर एक बात बताता था, निखिल मुझसे इंटरनेट के बारे में कुछ ज्यादा ही जानता था, इसलिए वो ही ज़्यादा करके साईट खोलता देखता था। एक दिन में उस इंटरनेट केफे पर थोड़ा देर से पहुंचा, तो मैंने देखा कि निखिल कुर्सी पर बैठा हुआ था और वो कामुकता डॉट कॉम पर इंडियन सेक्स कहानियाँ पढ़ रहा था और फिर मैंने ध्यान देकर देखा कि वो ज़्यादातर बहन भाई के बीच सेक्स सम्बंधो की कहानियाँ पढ़ रहा था और फिर उसी समय में निखिल को बोला कि यार तू अब यह सब बंद कर ले, मुझे तेरा यह काम अच्छा नहीं लगा।

    फिर निखिल मुझसे बोला कि यार अभी तुझे उसके बारे में बिल्कुल भी मालूम नहीं और तू इसलिए मुझसे यह बात कह रहा है, तू भी कभी एक बार अपनी दीदी को ऐसी ही गंदी नजर से देख, उनके लिए अपने मन में ऐसे ही गंदे विचार लेकर आ। फिर देख तुझे भी इस काम में बड़ा मज़ा आएगा। फिर में उसके मुहं से यह बात सुनते ही उससे बोला कि नहीं यह सब गलत काम है, में ऐसा कभी भी नहीं सोच सकता, करना तो बहुत दूर की बात है, चल अब यार में अपने घर जाता हूँ। फिर निखिल मुझसे बोला कि बैठ ना यार कुछ देर बाद चला जाना, तू अभी तो आया है और तुझे ऐसा कौन सा जरूरी काम याद आ गया है, जो तू इतनी जल्दी लगा रहा है? तो में उससे बोला कि नहीं यार ऐसा कुछ भी काम नहीं है और वैसे हाँ आज शाम को मेरी दीदी मुम्बई से आने वाली है और वो उनकी शादी के बाद पहली बार हमारे घर पर आ रही है। अब वो मुझसे कहने लगा कि तू इस बार अपनी दीदी के बारे में एक बार जैसा मैंने तुझसे कहा है, वैसे ही सोचकर जरुर देखना और फिर में उसके मुहं से वो बात सुनकर उसको पागल कहते हुए वहां से अपने घर की तरफ निकल पड़ा और में जैसे ही अपने घर पहुंचा। तब मैंने एक बड़ा सा बेग अपने कमरे में रखा हुआ देखा और मुझे मेरे कमरे के बाथरूम से पानी के टपकने गिरने की आवाज़ भी आ रही थी और उस समय मेरी मम्मी किचन में हमारे लिए शाम का खाना बना रही थी और मेरे पापा उस समय कहीं बाहर गये हुए थे। अब में तुरंत किचन में चला गया और मैंने मम्मी से पूछा, क्या दीदी आई है? तो मम्मी बोली कि हाँ वो आ चुकी है। दोस्तों में आप लोगों को अपनी दीदी के बारे में भी थोड़ा विस्तार से बता देता हूँ। मेरी दीदी का नाम सेजल है और उनकी उम्र 28 साल उनका रंग गोरा, दिखने में बड़ी ही सुंदर लगती है। वैसे मेरी दीदी की शादी आठ महीने पहले ही हुई थी और दीदी उनकी शादी के बाद उस दिन पहली बार बड़ोदा आई थी। तभी अचानक से किसी ने पीछे से मुझे हग कर लिया और मेरे गालो को चूमा। फिर मैंने तुरंत पीछे मुड़कर देखा तो वो मेरी सेजल दीदी थी, जो अपने भीगे हुए बालों पर टावल को लपेटे हुए हरे रंग की मेक्सी पहने हुए वो बिल्कुल एक औरत की तरह दिख रही थी, उनके बूब्स, उनके कूल्हे, शरीर का हर एक हिस्सा पहले से ज्यादा भरा हुआ उभरा हुआ बड़ा सेक्सी नजर आ रहा था, जिसको देखकर में बड़ा चकित था। अब मैंने अपनी दीदी से कहा कि दीदी तुम तो बिल्कुल बदल चुकी हो, जब हम मिले थे तब आप कैसी थी और आज कैसी हो गई हो, इतना बदलाव परिवर्तन कैसे आया? और फिर मैंने दीदी ने मुझसे पूछा कि तुम्हारे पेपर कैसे रहे और अब हम दोनों इधर उधर की अपनी बातें करने लगे और जब में दीदी के साथ हंस हंसकर बातें कर रहा था, तभी मुझे मेरे दोस्त निखिल की बातें याद आने लगी, जिसकी वजह से मुझे बड़ा ही अजीब सा महसूस होने लगा था और मेरे ना चाहते हुए भी में अब अपनी दीदी के उभरे हुए गोरे गोलमटोल बूब्स को घूर घूरकर देखने लगा, ऐसा करने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। फिर उसी समय बाहर से मेरे पापा आ गए और वो भी हमारे पास बैठकर मेरी दीदी के साथ बातें करने लगे और उनके हालचाल पूछने लगे। फिर में उनको बातें करता हुआ देखकर वहां से चुपचाप सरकते हुए फोन करने बाहर चला गया। फिर मैंने तुरंत अपने उसी दोस्त निखिल को फोन करके मेरे साथ घटी घटना (अपनी दीदी के बूब्स को देखकर जो मेरी हालत थी) मैंने अपने दोस्त को बताई।

    फिर निखिल मेरी पूरी बात को सुनकर मुझसे बोला कि में तुझसे कहता था कि ऐसा ही मेरे साथ भी पहले हुआ था और सुन ऐसा सबके साथ होता है, क्योंकि हम पहले इंसान है। उसके बाद में हमारे सारे रिश्ते होते है, तुम तो लगे रहो इसी का नाम जिंदगी है और फिर मैंने फोन रख दिया। अब में कुछ देर बाद अपनी दीदी, मम्मी, पापा हम सभी लोग खाना खाने बैठ गए और खाना खाते समय मैंने देखा कि मेरी दीदी बिल्कुल टी.वी. सीरियल की हिरोइन जैसी दिख रही थी। दोस्तों पहले दीदी बहुत पतली थी, लेकिन अब तो सेजल दीदी की गांड पूरी तरह से कुर्सी के दोनों तरफ से बाहर निकल रही थी और मेरी दीदी के वो दोनों बूब्स बड़े आकार के आम की तरह थे, जिनको देखकर में बिल्कुल पागल हो चुका था और वैसे मुझे नहीं पता कि मेरे जीजू ने मेरी दीदी के साथ ऐसा क्या किया था कि जिसकी वजह से मेरी दीदी इतनी भरी भरी हो गयी? फिर हम लोग खाना खाने के बाद टी.वी. देखने लगे। में और मेरी दीदी उस समय सोफे पर बैठे हुए थे और हमारे मम्मी, पापा पास के सोफे पर बैठे हुए थे, तब रात के करीब दस बज चुके थे। फिर कुछ देर टी.वी. देखने के बाद मम्मी और पापा अपने कमरे में सोने के लिए चले गये। फिर दीदी ने अपने आपको सोफे के एक तरफ अपने सर को सोफे के तकिये के ऊपर रखकर उन्होंने अपने दोनों पैरों को मोड़कर वो सोफे पर लेट गई और अब दीदी ने मुझसे कहा कि सुमित मेरे पैर बहुत ज़ोर से दर्द कर रहे है, प्लीज़ तुम इनको दबा दो। फिर मैंने उनसे कहा कि जी दीदी में अभी दबा देता हूँ और फिर दीदी ने अपने दोनों पैरों को मेरी गोद में रख दिया। उसके बाद मैंने दीदी के पैर दबाना शूरू किया। दोस्तों अपनी दीदी के नरम भरे हुए पैरों को दबाते हुए में अब गरम हो रहा था और अब मेरा उनको देखने छूने का नज़रिया बिल्कुल ही बदल चुका था। मेरे मन में उनके लिए कुछ गलत विचार अब आने लगे थे। अब मैंने हिम्मत करके अपने हाथ को थोड़ा सा ऊपर ले जाकर में अपनी दीदी के घुटनों को भी दबाने लगा और मेरे हाथ कभी कभी उनकी गोरी मुलायम जांघो तक भी पहुंचकर उन पर घूमने लगे थे तब मैंने महसूस किया कि दीदी की जांघे नरम होने के साथ साथ बहुत चिकनी भी थी और अब मेरा लंड तनकर खड़ा होकर दीदी के पैरों के नीचे दबा हुआ था और में उसको रोक नहीं पा रहा था। फिर अचानक मेरी दीदी ने मुझसे पूछा कि सुमित क्या तुमने कोई गर्लफ्रेंड बनाई है या नहीं? तब मैंने उनकी बात को सुनकर शरमाते हुए उनसे कहा कि जी नहीं दीदी। फिर दीदी मुझसे बोली कि हाँ इसलिए तुम मेरे पैरों को मेरे घुटनों से ऊपर तक भी दबा रहे हो, में उनकी उस बात को सुनकर तुरंत उसका मतलब समझकर शरमाते हुए मैंने उनको सॉरी बोला। फिर दीदी मुझसे बोली कि अरे पागल इसमें कोई बड़ी बात नहीं है और वैसे भी इस उम्र में ऐसा हर किसी के साथ होता है और फिर दीदी ने मेरी तरफ मुस्कुराकर मुझसे कहा कि चलो अब तुम मेरी कमर भी दबा दो। फिर दीदी को मुस्कुराते हुए यह सब बोलते हुए देख मुझे बहुत अच्छा लगा और फिर दीदी और में हम दोनों वहां से उठकर हमारे कमरे में चले गये। अब दीदी ने अपनी कमर को मेरी तरफ किए और वो बेड पर लेट गई और में दीदी के पास बैठकर दीदी की कमर को मसलने लगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

    अब दीदी मुझसे बोली कि सुमित में देख रही हूँ कि में जब से मुम्बई से आई हूँ तब से तुम मुझे कुछ अलग ही नज़र से देख रहे हो क्या तुम मुझे इतना ज्यादा पसंद कर रहे हो? अब में उनकी उन बातों को सुनकर बड़ा आश्चर्यचकित हुआ और मैंने उनकी उस बात का अपनी तरह से कुछ भी जवाब नहीं दिया। फिर दीदी मुझसे दोबारा बोलने लगी कि तुम बिल्कुल शरमाओ मत में अपने छोटे से भाई को डांटने वाली नहीं हूँ और फिर मैंने अपनी दीदी को मेरे दोस्त निखिल और मेरे बीच में हुई वो सभी बातें बता दी। फिर दीदी ने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए मुझसे कहा तो अब तुम बोलो मेरे नादान भाई में तुम्हारे लिए क्या कर सकती हूँ? फिर मैंने अपना सर अब उनके सामने शरम से नीचे झुका दिया और फिर दीदी मुझसे बोली कि अच्छा एक काम करो तुम रूम की लाइट और दरवाजा बंद करके यहाँ आओ। फिर में उनके कहने पर उठकर गया और मैंने लाइट के साथ साथ दरवाजा भी बंद करके में वापस पलंग की तरफ आ रहा था तब रूम में बहुत अंधेरा था और जैसे ही में पलंग के करीब आया तो उसी समय दीदी ने अचानक मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी गोद में बैठा दिया और उस समय रूम में इतना अंधेरा था कि जब मैंने अपने दो हाथ दीदी की जांघो पर रखे तब मुझे छूकर पता चला कि दीदी ने अंधेरा होते ही तुरंत अपनी मेक्सी को उतारकर वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी और उनके गोरे गरम जिस्म को छूकर मुझे बहुत मज़ा आया। फिर दीदी ने मेरी टी-शर्ट को निकल दिया और उसके बाद उन्होंने मेरी पेंट को भी उतार दिया था और उसके बाद दीदी ने अपनी ब्रा को खोलकर मुझसे मेरे कान में कहा सुमित तुम बस एक मिनट खड़े हो जाओ, तो में अपनी पेंटी को उतार दूँ और फिर में दीदी के कहते ही उनकी गोद से उठकर खड़ा होकर मैंने देखा तो दीदी अब अंधेरे में उनकी सफेद रंग की पेंटी को वो अपने बड़े आकार के कूल्हों को ऊपर करके उतार रही थी और अब वो सेक्सी नजारा देखकर बहुत कुछ छूकर महसूस करके मेरा लंड बहुत कड़क हो चुका था। फिर दीदी ने अपनी दोनों भरी हुई जांघो से मेरी कमर को ज़ोर से जकड़कर मुझे घुटनों के बल पलंग के किनारे आधा झुकाकर खड़ा कर दिया और उसके बाद दीदी ने अपने एक हाथ को नीचे ले जाकर अपनी हथेली को वो मेरे दोनों आंड और लंड पर घुमाने लगी। अब मेरा लंड उठकर ऊपर नीचे होने लगा तो दीदी ने मेरे कान में मुझसे पूछा क्यों सुमित तुम्हे अब अच्छा लग रहा है ना? अब में उनकी बात को सुनकर शरमाकर हंस दिया और तभी दीदी भी हंसने लगी और उन्होंने हंसते हुए मेरा एक हाथ पकड़कर अपने नरम मुलायम बूब्स पर रख दिया फिर मैंने छूकर महसूस किया कि दीदी का बूब्स बहुत ही गरम और आकार में बड़ा था और बूब्स की निप्पल छोटे छोटे आकार की होने के बाद भी वो उठी हुई थी, जिसको छूकर में बहुत अच्छा महसूस कर रहा था।

    फिर दीदी ने मेरा दूसरा हाथ पकड़कर अपनी गीली बालों वाली चूत पर ले जाकर रख दिया और तब मैंने छूकर महसूस किया कि दीदी की चूत का वो हिस्सा बहुत ही गरम उभरा हुआ था और दीदी की चूत के दोनों होंठ मुझे सूजे हुए महसूस हो रहे थे जैसे मानों वो हर दिन बहुत जमकर चुदाई की मार सहकर ऐसे हो चुके हो। फिर दीदी ने मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत के खुले हुए छेद पर रख दिया और वो मुझसे हंसते हुए कहने लगी कि सुमित एक बात का ध्यान रखना कि जब तेरा वीर्य बाहर निकलने को आए तब तू अपने लंड को मेरी चूत से तुरंत बाहर करके वीर्य को बाहर निकाल देना क्योंकि अभी तेरे जीजू को कोई बच्चा नहीं चाहिए और फिर मुझसे इतना बोलते ही दीदी अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को अपनी तरफ करके मेरी कमर से चिपका दिया जिसकी वजह से अब मेरा पूरा का पूरा लंड फिसलता हुआ दीदी की खुली हुई चूत में चला गया। अब मैंने दीदी की तरफ से उनकी चुदाई के लिए हाँ सुनकर मन ही मन बहुत खुश होकर मैंने तुरंत अपने दोनों हाथों से दीदी की गदराई हुई कमर को कसकर पकड़कर मैंने धक्के देते हुए अपनी कमर को हिलाने शुरू कर दिया और फिर मैंने देखा कि अब दीदी ने अपनी चूत को अपने दोनों हाथों के बल से वो मेरे लंड पर दबाने लगी और वो भी मेरा साथ देने लगी उनकी तरफ से धक्के महसूस करके में बहुत खुश था। अब मेरा लंड बहुत ज़ोर से दीदी की गीली चूत में फिसलकर बहुत आराम से अंदर बाहर हो रहा था और में लगातार धक्के देता रहा जिसमे मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था और हम दोनों उस समय बड़े जोश में धक्के देते रहे और में अपने पहले सेक्स अनुभव के बहुत मज़े लेकर मन ही मन बड़ा खुश था, क्योंकि वो सब में उस दिन पहली बार कर रहा था। फिर ज्यादा जोश और मेरी वो पहली चुदाई होने की वजह से में कुछ ही देर बाद झड़ने वाला था और मुझे महसूस होने लगा था कि अब मेरे लंड से वीर्य बाहर निकलने जा रहा था कि तभी उसी समय मैंने अपना लंड अपनी दीदी की चूत से तुरंत बाहर निकाल दिया और मैंने अपनी पहली चुदाई के सारे वीर्य को अपनी दीदी की जांघ पर मुठ मारते हुए गिरा दिए और फिर दीदी ने भी अपनी चूत में अपनी ऊँगली को तेज़ी से रगड़कर अंदर बाहर करके अपनी चूत का पानी बाहर निकाल लिया जिसकी वजह से हम दोनों अब बिल्कुल शांत हो चुके थे और मुझे मेरी दीदी की चूत भी संतुष्ट नजर आ रही थी। फिर उसके बाद दीदी ने मुझे अपने साथ ऐसे ही पूरा नंगा बदन सुला लिया और वो मुझसे एकदम चिपककर लेटी गई। उनके बूब्स मेरी छाती से चिपके हुए थे और में बड़ा खुश था। फिर में अपनी पहली चुदाई को सोचकर ना जाने कब गहरी नींद में चला गया ।।

    धन्यवाद .


     
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