ससुर और उनके दोस्त ने मुझे

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Jul 14, 2017.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

    //krot-group.ru हेल्लो दोस्तों, Kamukta मैं आबिदा खान आप सभी का नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। मैं पिछले कई सालों से नॉन वेज स्टोरी की नियमित पाठिका रहीं हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती तब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ती हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रही हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी।

    मैं बहुत ग़रीब घर की लड़की थी, मेरे अब्बा एक मजदूर थे। उनके पास मेरी शादी करने के पैसे भी नही थे। पर मैं बहुत खूबसूरत और जवान लडकी थी इसलिए मेरे अब्बा के पास अपने आप शादी के रिश्ते आने लगे। कुछ दिनों बाद एक आदमी आया। वो अपने लड़के की शादी के लिए एक अच्छी और सुंदर लड़की ढूढ़ रहा था। वो बार बार अपने खानदान का बखान कर रहा था। उसका नाम सुलतान था। वो 6 फुट का मोटा तगड़ा आदमी था और देखने में बिलकुल कसाई लगता था। मुझे वो आदमी कुछ ठीक नही लग रहा था। जब मेरे अब्बा ने पूछा की वो कितना दहेज़ लेगा तो वो हसने लगा और कोई दहेज़ लेने से मना कर दिया। मेरे अब्बा ने कहा की उनके पास शादी करने के पैसे भी नहीं है, तो सुलतान ने अब्बू को २ लाख रुपया दे दिया। वो मेरा होने वाला ससुर था।

    मुझे कुछ ठीक नही लग रहा था पर मुझे शादी करनी पड़ी। क्यूंकि मेरी 5 बहने और थी। अगर मैं शादी नही करती तो बाकी बहने भी बैठी रहती। मैंने दिल पर पत्थर रखकर शादी कर ली। निकाह होने के बाद मेरी विदाई हो गयी और मैं ट्रेन से अपने होने वाली पति, ससुर, सास, और बाकी परिवार के साथ औरंगाबाद आ गयी। यहाँ पर रात में मेरे ससुर मेरे कमरे में आ गए और मेरे पति बाहर चले गये। उन्होंने मुझे नंगा करके बेदर्दी से चोदा। मेरी चूत से खूब खून निकला। पूरे १ महीने तक वो मेरी चूत मारते रहे और मेरी गांड भी ससुर जी ने मार ली। बाद में मुझे पता चला की उसके पूरे खानदान में ऐसा ही होता था। औरंगाबाद साइड नई नवेली दुल्हन को ससुर रखता था। वहां पर ऐसी प्रथा थी। ससुर ही बहू की नई चूत को चोदकर उद्घाटन करता था। यहाँ पर लड़को को कम तरजीह दी जाती थी और ससुर का पहला हक बनता था। जब १ महीने बाद मेरे पति मुझे चोदने आये तो मेरी चूत और गांड दोनों ढीली हो चुकी थी। मैं उसके बावजूद भी मैं बहुत मस्त माल थी इसलिए मेरे पति को मेरी चुद्दी मारने में बहुत मजा मिला।

    मैं बहुत रोई भी थी इस बात पर। मन हुआ की अपने पति को तलाक दे दूँ पर फिर मैं कहाँ जाती। मैं चुपचाप सब कुछ सहती रही। मेरी ससुराल वाले तो मुझे नौकर ही समझते थे। सुबह उठकर मैं ३० लोगो का खाना बनाती थी। सबको खिलाती थी। सबके कपड़े धोती थी तब तक शाम हो जाती थी और रात का खाना बनाना शुरू हो जाता था। उपर से मेरे ससुर रोज रात में मुझसे पैर दबवाते थे और तेल लगवाते थे। पूरे बदन में मालिश करवाते थे और जब मन करता था मेरी रसीली चूत में लंड डालकर चोद लेते थे।

    "अब्बू ये सब ठीक नही है। आप कैसे रोज रोज मेरे साथ ये गंदी हरकत कर सकते है??" मैं कई बार विरोध करती थी तो वो तलाक देने की बात करते थे। बस यही समझिय की मैं किसी तरह जिन्दगी काट रही थी। फिर मेरे २ बच्चे भी हो गये। एक दिन मेरे ससुर ने खूब शराब पी ली और अपने एक दोस्त के साथ रात में १० बजे घर आए। उनका दोस्त भी एक मोटा सा काला कलूटा आदमी था। उसका नाम बशीर था। वो मेरे ससुर के साथ फलो की आढत का काम करता था। दूसरे शहरों से आम, अमरुद, केला, सेब के बड़े बड़े ट्रक लाता था और औरंगाबाद की फल मंडी में छोटे छोटे दुकानदारों को बेचता था। वो मेरे ससुर के साथ ही बिजनेस पार्टनर था।

    "आबिदा???? आबिदा??? कहा मर गयी???" अब्बू ने मुझे आवाज लगाई।

    मैं सो रही थी। इसलिए मैं देर में सुन पायी थी। फिर मैं आई।

    "क्या है अब्बू??" मैंने कहा

    "माँ की लौड़ी.एक बार में सुन नही पा रही थी। क्या अपनी माँ चुदा रही थी। जा हम दोनों के पीने के लिए गिलास लेकर आ और कुछ चखना भी लेकर आ" मेरे ससुर चिल्लाकर बोले। मैं दौड़ी दौड़ी गयी और गिलास लाकर दिया। मेरे ससुर बहुत बदतमीज और बददिमाग आदमी थे। वो अक्सर मुझ पर हाथ उठा देते थे। इसलिए मैं उसने बहुत डरती थी। मेरे पति की तो घर में कोई इज्जत ही नही थी। वो पैसा नही कमा पाते थे इसलिए उसकी कोई वेलू नही थी। मेरे ससुर ही पूरे ३० लोगो का खर्चा उठाते थे। मेरी नई नई देवरानी की चूत भी वो नियम से मारते थे। हम दोनों बहुओ की चूत वो खूब चोदते थे क्यूंकि हम दोनों को रोटी वही देते थे। इसलिए हम पर उनका हक था। ऐसा मेरे ससुर का सोचना था। मैं जल्दी जल्दी २ ग्लास में शराब उड़ेलने लगी। ससुर और उनका दोस्त बशीर मजे से शराब पीने लगे।

    फिर बशीर बार बार मुझे घूरने लगा।

    "यार तेरी बहू तो बहुत खूबसूरत है???? बिस्तर गर्म करती है तेरा???" बशीर हंसकर बोला

    "हाँ हाँ करती है। इसकी चूत देख लोगो तो चोदने का दिल करने लग जाएगा" मेरे ससुर ने कहा

    "तो भाई आज दिलवा दे इसकी रसीली चूत" बशीर बोला

    इसके बाद मेरे ससुर ने मुझे पकड़ लिया और मेरे गाल पर चुम्मी लेने लगे। मैं बार बार कह रही थी की अब्बू प्लीस ऐसा मत करो, प्लीस मुझे छोड़ दो पर वो शराब के नशे में आ चुके थे। कुछ देर बाद मेरे ससुर ने मुझे नंगा कर दिया और मेरे कपड़े उतार दिए। हम मुसलमानो में औरतें घर पर सलवार सूट ही पहनती है। इसलिए मैं भी घर पर सलवार सूट पहनती थी। धीरे धीरे मेरे ससुर ने मेरा सूट निकाल दिया। फिर सलवार की नारा खोल दिया और मुझे पूरी तरह से नंगा कर दिया। फिर मेरी ब्रा और पेंटी भी उस दुष्ट आदमी से उतार दी। अब मैं पूरी तरह से नंगी हो गयी थी। फिर मेरे ससुर और उनके दोस्त बशीर ने अपने अपने पकड़े उतार दिए। मैं सब समझ गयी थी की आज मेरा घर में ही गैंगरेप होने वाला था। मैं पूरी तरह से नंगी हो गयी थी।

    मैं बहुत खूबसूरत मस्त चोदने लायक माल लग रही थी। मेरे मम्मे का साइज 40" था जबकि कमर और पिछवाड़ा 32 और 36 का था।

    "अब्बू छोड़ दो!! प्लीस मुझे आने दो! प्लीस मुझे मत चोदो!!" मैंने कई बार कहा तो अब्बू ने मेरे गाल पर कई तमाचे मार दिए।

    "तेरी माँ की चूत। रोज १० १० रोटियाँ सुबह से शाम तक पेलती है और अब चूत मागो तो नौटंकी चोद रही है!!" ससुर बोले और उन्होंने मुझे चांटे चट चट मुंह पर जड़ दिए। मेरा गाल लाल हो गया। फिर ससुर ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। वो मेरे रसीले होठ चूसने लगे। दोस्तों मैं बहुत गोरी, और भरे हुए जिस्म वाली लड़की थी। इसलिए मैं बहुत सेक्सी माल लग रही थी। मेरे मम्मे तो माशाअल्लाह इतने बड़े बड़े थे की ससुर और उनके दोस्त बशीर दोनों के मुंह में पानी आ गया था। ससुर कुछ देर तक मेरे उपर चढ़े रहे और मेरे रसीले होठ चूसते रहे। इमरान हाश्मी की तरह वो मेरे साथ मजे करने लगे। वो हते तो भैनचोद बशीर आकर मेरे होठ चूसने लगा। फिर ससुर ने मेरी दाई चूची मुंह में भर ली और पीने लगे। उधर बशीर ने मेरी दाई चूची मुंह में भर ली और चूसने लगा। मैं पूरी तरह से नंगी थी। मैं अपनी भी रो रही थी पर इसका कोई असर दोनों भैनचोदो पर नही हो रहा था। वो दोनों मेरे मस्त मस्त 40" के आम दबा देते थे और मुंह में लेकर पी रहे थे। कुछ देर बाद मैंने रोना बंद कर दिया क्यूंकि उससे कोई फायदा नही था। वो दोनों मेरी चूत तो मारके ही दम लेते।

    ससुर और बशीर दोनों मेरी रसेदार चूचियों को बार बार दबा देते थे। मैं चिहुक जाती थी। मैं "..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ..अअअअअ..आहा .हा हा हा" बोलकर चिल्ला रही थी। वो दोनों मेरे चूचियों को दांत से काट रहे थे, चबा रहे थे, और मस्ती से पिए जा रहे थे। इधर मुझे काफी दर्द हो गया था। फिर ससुर जी ने अपना 8" का लौड़ा मेरे मुंह में डाल दिया। मुझे साँस भी नही आ पा रही थी। मजबूरन मुझे उनका लौड़ा चुसना पड़ रहा था। उधर उनका चुदासा और वासना का पुजारी दोस्त बशीर मेरी चूत पर आ गया। उसने मेरी दोनों खूबसूरत और गोरी टाँगे खोल दी और मेरी चूत में जीभ डालने लगा। अब मुझे डबल उतेज्जना महसूस हो रही थी। मैं हाथ से जल्दी जल्दी ससुर का लंड फेटने लगी और चूसने लगी, उधर भैनचोद बशीर मेरी चूत पी रहा था। मैं "..अई.अई..अई..अई..इसस्स्स्स्स्स्स्स्...उहह्ह्ह्ह...ओह्ह्ह्हह्ह.." की आवाज बार बार निकाल रही थी। कुछ देर बाद मुझे ये सब अच्छा लगने लगा। मैं हाथ से जल्दी जल्दी अब्बू [ससुर जी] का लंड फेटने लगी। बहुत मोटा लौड़ा था दोस्तों।

    इस लौड़े को मैं बहुत अच्छी तरह से पहचानती थी क्यूंकि इसे ने सुहागरात पर मेरी चूत की सील तोड़कर मुझे चोदा था। मैं मुंह में लेकर जल्दी जल्दी लंड चूस रही थी। मैं मुंह को दबाकर लंड चूस रही थी जिससे उसपर जादा दबाव बने और ससुर जी को जादा मजा आए। नीचे बशीर ने मेरी चूत में कोहराम मचा दिया था। जल्दी जल्दी मुंह लगाकर वो चूत को पिये जा रहा था। उसकी जीभ मेरी चूत को बड़ी कायदे से चाट रही थी। मेरी चूत का नमकीन स्वाद बशीर की जवाब पर आ गया था। फिर उस भैनचोद ने मेरी चूत में अपना अंगूठा ही ठेल दिया और जल्दी जल्दी अंगूठे से मेरी चूत मारने लगा। मैं "आई...आई..आई.अहह्ह्ह्हह...सी सी सी सी..हा हा हा." की आवाज के साथ सिस्कारियां लेने लगी। मैं तडप रही थी। अब मैं जल्दी से लंड खाना चाहती थी क्यूंकि मैं अब बर्दास्त नहीं कर पा रही थी। बशीर तो किसी पागल आदमी की तरह जल्दी जल्दी मेरी चूत में अंगूठा अंदर बाहर करने लगा। मुझे लगा की कहीं मेरा माल ना निकल जाए।

    मेरे ससुर ने मेरे मुंह को २० मिनट चोदा फिर हट गये। अब वो भैनचोद बशीर का गया और उसने अपना 9" का मोटा और तगड़ा लंड मेरे मुंह में घुसेड़ दिया। दोस्तों अब मैं पूरी तरह से चुदासी कुतिया बन गयी थी। मैंने अपनी शर्म ह्या छोड़ दी थी इसलिए मैं भी किसी छिनाल की तरह जल्दी जल्दी बशीर का 9" का लंड हाथ में लेकर फेटने लगी और मुंह में लेकर चूसने लगे। उसे तो बहुत मजा मिल रहा था लंड चुसाने में। कई बार तो वो लंड मेरे मुंह में घुसेड़ देता और कई कई मिनट तक अंदर ही बनाए रखता। बाहर निकालता ही नही। फिर अचानक से जब निकालता तब मेरी अटकी सास आती। मेरी खूबसूरत भरी भरी 40" की चूचियों की निपल्स को उसने अपनी ऊँगली से खुद ऐठा। मेरे मुंह को उसने 15 मिनट तक चोदा। उधर मेरे चूत के आशिक ससुर मेरी चूत पी रहे थे। वो एक बहुत हब्सी आदमी थे। मेरी देवरानी की चुद्दी भी वो नियम से मारते थे। हम बहुओ की घर में कोई इज्जत नही थी।

    बशीर ने मेरे मुंह से लंड कुछ देर बाद निकाल लिया। मैं लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी। फिर वो मेरी चूचियों को फिर से पीने लगा। फिर मेरे ससुर बेड के सिरहाने पर आ गए। वो सिरहाने से पीठ लगाकर बैठ गये। उन्होंने मुझे अपने उपर बिठा लिया। मेरी पीठ उसकी तरह थी। धीरे धीरे मेरे ससुर ने मेरी गांड अपना 8" का लौड़ा डाल दिया। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। फिर उनका वासना का पुजारी दोस्त बशीर भी आ गया और मेरे उपर चढ़ गया। उसने अपना 9" का ताकतवर लौड़ा मेरी चूत के छेद में डाल दिया। मैं चिल्लाने लगी। फिर दोनों मेरी गांड और चूत के छेद को धीरे धीरे चोदने लगे। मैं "आऊ...आऊ..हममममअहह्ह्ह्हह.सी सी सी सी..हा हा हा.." की आवाज कर रही थी क्यूंकि मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मेरी चूत और गांड में एक एक मोटा लौड़ा घुसा हुआ था। धीरे धीरे ससुर और बशीर दोने अपने अपने लौड़े चलाने लगे।

    मैं रोने लगी क्यंकि आजतक मैंने डबल लंड नही खाया था। बशीर का चेहरे मेरे सामने था। जब ससुर जी मेरे ठीक नीचे थे। दोनों के लौड़े मेरे २ छेदों में आपस में जंग कर रहे थे। बशीर मुझे वासना से घूर रहा था और मेरी चूत चोद रहा था। नीचे से ससुर जी मेरी गांड चोद रहे थे। मैं "..उंह उंह उंह हूँ.. हूँ. हूँ..हममममअहह्ह्ह्हह..अई.अई.अई..." कर रही थी। मेरी आँखों के सामने तो अँधेरा ही छाया जा रहा था। पहले तो दोनों गांडू मुझे धीरे धीरे लेते रहे। पर फिर कुछ देर बाद वो दोनों भैनचोद मुझे बहरहमी से चोदने लगे। मैं मरी जा रही थी। लग रहा था की आज चुदवाते चुदवाते मेरी जान ही निकल जाएगी। दोनों ने मुझे आधे घंटे इस तरह चोदा। बशीर नीचे चला गया और ससुर उपर आ गये। अब बशीर मेरी गांड चोद रहा था और ससुर चूत बजा रहे थे। कुछ देर बाद मुझे खूब मजा मिलने लगा। मैं भी मजा करने लगी। फिर आधे घने मेरी ठुकाई हुई। बशीर मेरी गांड में झड़ गया और ससुर मेरी चूत में झड़ गये।

    उसके बाद ससुर ने मुझे बिस्तर से उठा दिया और जमीन पर खड़ा कर दिया। एक मेज पर ससुर ने मुझे झुका दिया और मेरे गोल मटोल पुट्ठों पर वो जल्दी जल्दी कस कसके चांटे मारने लगे। दोस्तों मेरी नाजुक गुलाबी दूधिया पुट्ठे बिलकुल लाल हो गए थे। फिर ससुर ने मेरे दोनों पुट्ठों को हाथ से खोलकर मेरी गांड का छेद चेक किया।

    "बहन की लौड़ी का गांड का छेद अब भी बड़ा नही हुआ है" ससुर बोले।

    फिर उन्होंने मेरी गांड में थूक दिया और जीभ लगाकर छेद को पीने और चूसने लगे। एक बार फिर से वो जानवर बन गए और अपना 8" का मोटा लंड मेरी गांड में डाल दिया और जल्दी जल्दी मेरी गांड चोदने लगे। बशीर दूसरी तरफ से आ गया और मेरे मुंह में उसने लौड़ा दे दिया। ससुर ने 40 मिनट मेरी गांड चोदी मेज पर झुकाकर खड़ा करके मुझे। फिर बसीर ने भी मेरी गांड १ घंटा तक चोदी। दोस्तों आज भी हर रविवार वो लोग रात में आकर मेरी चूत और गांड चोदते है। मेरी गांड का छेद अब बहुत चौड़ा हो गया है। पूरा २ इंच चौड़ा हो गया है। ये कहानी आप नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है
     
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