सेक्सी माँ और सर की सेक्स कथा

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Sep 5, 2017 at 10:26 AM.

  1. 007

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    //krot-group.ru दोस्तों आज की Antarvasna इस सेक्स कथा में मैं आप को अपनी सेक्सी माँ की चुदाई के बारे में बताने के लिए आया हूँ. मेरी माँ किसी मॉडल से कम खुबसुरत नहीं हे. क्यूंकि उसका फिगर हे ही ऐसा की किसी को भी अपने दीवाना बना ले. जो चीज माँ को बहुत कामुक बनाती हे वो हे की मोटी और गोल चूचियां जिसे देख के किसी का भी मन उसे दबाने या चूसने को करे!

    ये सेक्स कथा तब की हे जब मैं दसवीं में पढता था और अक्सर ट्यूशन पढ़ने के लिए हमारे सर विजय के पास जाया करता था. लेकिन फिर मुझे पता चला की सर पुरे सात दिन के लिए ट्यूशन नहीं करा पाएंगे तो मुझे बहुत बुरा लगा क्यूंकि सर के वहां मेरा अच्छा ख़ासा टाइम निकल जाता था.

    सर के घर में कंस्ट्रक्शन का काम चालू था और मुझे पता नहीं चल रहा था की मैं क्या करूँ! विजय सर रूम ढूंढने में लगे हुए थे. तो मैंने सोचा की अच्छा हे चलो एक मौके का फायदा उठाया जाए और मैंने उन्हें अपने घर पर बुला लिया और उन्हें अपने साथ ले आया. मैंने माँ को बताया नहीं था की मैं अपने साथ सर को भी ले के आया हूँ.

    इसलिए जब उन्होंने गेट को खोला तो वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में ही थी. और सर उन्हें देखते ही रह गए. मैंने माँ को बताया की ये विजय सर हे और रूम ढूंढ रहे हे वो इसलिए मैं उन्हें ले आया. माँ ने उन्हें अन्दर बुलाया और और माँ हम दोनों के आगे चल रही थी.

    मैंने देखा की माँ का पेटीकोट उसकी गांड में फंसा हुआ था. और जब मैंने विजय सर को देखा तो वो मेरी माँ के कूल्हों के ऊपर ही नजरे लगाए हुए थे. माँ ने सर को रूम दिखा दिया और कहा की आप यहाँ रुक सकते हो लेकिन बस थोड़ी सफाई करनी पड़ेगी.

    विजय सर बड़े खुश लग रहे थे. पता नहीं क्यूँ! शायद रूम मिल गया था इसलिए. उन्होंने कहा ठीक हे मैं साफ़ कर लूँगा. और वो आगे बढे तभी उनका पैर फिसल गया और वो मेरी माँ के ऊपर आ गिरे. उन्के दोनों हाथ मेरी सेक्सी माँ के बूब्स के ऊपर थे. और माँ के मुहं से आह निकल गई. सर ने माँ को सोरी बोला और माँ ने मुस्कुराते हुए कहा की कोई बात नहीं!

    फिर रात के वक्त मैं सर के रूम में चला गया. वो लेट के कुछ देख रहे थे और मेरे जाते ही उन्होंने उसे बंद करना चाहा लेकिन वो अच्छे से बंद नहीं हुई और आह आअह्ह्ह उह्ह उह्ह की आवाज सर के मोबाइल से आ रही थी. मैं समझ गया की सर बिपि यानी की ब्ल्यू फिल्म देख रहे थे. सर बोले, सोरी राज. मैंने कहा कोई बात नहीं हे सर. फिर वो बोले अकेला रहता हूँ इसलिए मेरी प्रॉब्लम को तुम समझ ही सकते हो. मैंने कहा हां सर वो तो हे लेकिन आप प्लीज़ मेरी माँ का ध्यान रखना उन्हें ये सब पसंद नहीं आएगा!

    सर ने कहा राज एक बात कहूँगा तो बुरा तो नहीं मानोगे ना? मैंने कहा नहीं सर आप बोलिए. सर ने कहा यार तुम्हारी माँ तो बड़ी ही सेक्सी और हॉट हे. देखते ही लगता हे की वो जवान हे और लगता ही नहीं की तुम्हारे जितनी उम्र का बेटा भी हे उसको. मैं ये सुन के हंस पड़ा और मैंने कहा सर मुझे पता हे.

    शायद सर की हिम्मत और बढ़ गई और वो बोले, राज मुझे लगता हे तेरी माँ बहोत चुदक्कड किस्म की औरत हे. ये सेक्स कथा आप के लिए हिंदी पोर्न स्टोरीस डॉट कॉम ले के आया. पहले तो मुझे ये सुन के गुस्से जैसा आया और मैं सर को बोला सर अपनी तमीज में रहो वो मेरी माँ हे और मैं जानता हूँ की मेरी माँ बहुत ही सीधी औरत हे.

    सर ने मुझे गुस्सा करते हुए देखा तो बोले, सोरी राज मुझे ऐसा नहीं लगता. अगर ऐसा होता तो मेरे चुचियों पर हाथ लगने से वो स्माइल नहीं देती. और शायद तो कुछ मिनिट के लिए मेरे से बात भी नहीं करती. मैंने सर को कहा, सर प्लीज़ इस टॉपिक को बंद कर दीजिये. और आप कल से ही कोई और घर ढूंढ लेना. आप को मैंने अच्छा आदमी समझ के अपने घर में रहने के लिए सेटिंग कर दिया और आप मेरी ही माँ के ऊपर लाइन मार रहे हो. और ये कह के मैं अपने रूम में सोने के लिए चला गया.

    मुझे सर को मारने का मन कर रहा था और उन्हें मन ही मन में गालियाँ देते हुए गया. रात को मुझे सुसु आई तो मैं मुतने के लिए उठा. रात के करीब 12 बज रहे थे उस वक्त. मैंने देखा की माँ के दरवाजे के पास में ही विजय सर खड़े हुए थे! और उनका बदन हिल रहा था. मैं समझ गया की वो मेरी सोयी हुई माँ को देख के अपने लंड को हिला रहा था!

    मुझे बड़ा गुस्सा आया. मैं सर को पीटने के लिए ही आगे बढा था की मेरे कानों में अपनी माँ की आवाज आने लगी. अह्ह्ह अह्ह्ह्ह उम्म्मम्म ओह्ह्ह मैं हैरान हो गया की आखिर साला चल क्या रहा हे. माँ ऐसी आवाजें क्यूँ निकाल रही थी?

    जब मैंने करीब जा के चुपके से देखा तो अन्दर का सिन देख के मेरा मूड एकदम बदल गया. माँ बिस्तर के ऊपर न्यूड लेटी हुई थी. और उसने एक लम्बा सा गाजर अपनी चूत में लिया हुआ था. सर की नजर मेरे ऊपर पड़ी तो वो हंस के मुझे दिखाने लगे. उनका लोडा उस वक्त उन्के हाथ में ही था. तभी कमरे में से माँ की आवाजें और भी तेज हो गई. गाजर का पीछे का सिर्फ ग्रीन भाग बहार था और बाकि का पूरा गाजर मेरी माँ ने अपनी चूत में ले लिया था. और फिर उसकी चूत से पानी निकल गया. माँ गाजर को चूत में रखे हुए ही सो गई!

    सर मेरा हाथ पकड़ के अपने रूम में ले गए और बोले की देख राज मैंने कहा था न की तेरी माँ एक चुदक्कड औरत हे! आज तूने भी देख लिया ना की कैसे वो अपनी चूत को खुद अपने हाथ से गाजर डाल के चोद रही थी. देख उसने मेरे लंड को लाल कर दिया हे. मन तो कर रहा हे की अभी जा के साली की चूत को टाँगे उठा के चोद डालूं! मैंने इस बार सर को कुछ नहीं कहा और सोचने लगा की शायद विजय सर की बात सही हे मेरी माँ सच में एक चुदक्कड़ औरत हे. और शायद मेरी मम्मी को अभी लंड की सख्त जरूरत हे. मैं तो उसे भोली और सीधी सादी समझता था और वो कैसी निकली!

    पर मैंने फिर विजय सर को बोला, देखो सर ये उसका पर्सनल मेटर हे. आप उन्हें छोड़ दो वो बस अपने आप को खुद ख़ुशी दे रही हे न किसी अनजान आदमी से चुदने से अच्छे. तो विजय सर ने कहा अच्छा ये बता क्या उमेश तेरा बाप हे जिसका नाम ले के तेरी माँ अपनी चूत को गाजर से चोद रही थी! मुझे समझ में नहीं आया की अब क्या बोलूं क्यूंकि मेरे पापा का नाम तो गोविन्द पाटिल हे! मैंने भी माँ को उमेश उमेश कहते हुए अपनी चूत को गाजर से चोदते हुए देखा था.

    और फिर सर बोले, देख राज तेरी माँ को लंड चाहिए और मुझे चूत! और अब तू बिच में मत आ वरना अच्छा नहीं होगा. लेकिन मैंने भी कह दिया नहीं आप ऐसा नहीं कर सकते हो. तो विजय सर ने अपना मोबाइल निकाला और उसके अन्दर माँ के गाजर से चुदने की रिकोर्डिंग मुझे दिखा के बोले, ये वीडियो को तेरे बाप को भेज दूंगा जो विदेश में हे और सब की सब पोर्न साइट्स के ऊपर अपलोड भी कर दूंगा. फिर तेरी मम्मी को देख के हजारों लाखों लोग मुठ मारेंगे. हो सकता हे की हमारे इस टाउन के लोगों को भी पता चले की तेरी माँ कितनी बड़ी छिनाल और सेक्सी हे! सोच तेरे बाप पर क्या गुजरेगी जब वो ये सब देखेगा!

    सर ने आगे कहा, तेरी माँ के ऊपर रंडी का लेबल लग जाएगा राज! और मैं इस क्लिप में हूँ ही नहीं इसलिए मैं साफ निकल जाऊँगा ये सब से!

    सर की ये सब बातें सुन के मैं एकदम से डर चूका था. और उस लम्हे को कोस रहा था जब मैं अपने आप सर को अपने घर पर रहने के लिए ले के आया था. मैंने सर को हां कह दिया लेकिन साथ में ये भी कहा की आप जो भी करना मेरी माँ की मर्जी से करना किसी भी तरह की जबरदस्ती मत करना उसके साथ में. सर बोले तेरी माँ कुतिया बन के सामने से मेरा लंड लेगी राज. तू जा के सो जा या फिर देखना हे तो रुक जा की कैसे तेरी माँ लंड की भूखी हे!

    मैं वहां से निकल के अपने रूम में चला गया. और मैं सोचने लगा की क्या माँ सच में ऐसी हे या माँ को फसाया जा रहा हे. मुझे अब नींद नहीं आ रही थी और मैं बार बार उस सिन को याद कर रहा था जब माँ ने अपनी चूत में पूरा गाजर लिया हुआ था और वो कराह रही थी. और अब तो माँ के बारे में सोच के मेरा लंड भी खड़ा हो रहा था! मेरी सेक्सी माँ मुझे भी चुदक्कड लगने लगी थी अब तो!

    पर फिर मैंने खुद को गाली दी, नींद नहीं आ रही थी. मैंने सोचा की क्यूँ ना माँ को एक बार और देखा जाए. मैंने सिष माँ के रूम में घुस गया. माँ को नंगा देख के मेरा हाथ खुद ही लंड की ऊपर चला गया. माँ के मोटे मोटे बूब्स उफ्फ्फ्फ़ मेरा दिमाग भी खराब सा होने लगा. इतने में मेरा ध्यान माँ के फोन पर पड़ा. मैंने उसे उठा के देखा.

    मैंने माँ के व्हाटसएप्प को खोला तो उसमेदेखा की माँ सिर्फ दो लोगो से चेट करती थी. एक तो थी हमारी पड़ोसन आंटी शिला. और दूसरा उमेश नाम था. उमेश नाम देख के मेरा सर चकरा गया. कहीं वो हमारा पडोसी उमेश अंकल तो नहीं था. फिर मैंने चेट खोली तो अन्दर गन्दी गन्दी मेसेज ही. साथ में माँ ने बहुत सब फोटो भेजे थे उसे, नंगी चूत और गांड की सेल्फिस थी अन्दर. सामने से उमेश ने अपने लंड को कडक कर के उसके पिक्स लिए थे जो माँ को भेजे थे उसने.

    उमेश ने अन्दर लिखा था जान कास से तरस रहा हूँ आज मौका दे दे अपनी चूत में घुसाने का. और माँ ने लिखा था आज नहीं मेरे बेटे का सर आया हुआ हे फिर कभी. मैंने पूरी चेट पढ़ी बट उसमे सिर्फ दो दिन का ही था. शायद बाकी की पुरानी चेट को माँ ने डिलीट कर दिया होगा. मैंने फिर शिला आंटी वाला चेट पढ़ा तो वो भी मेरा दिमाग ख़राब करनेवाला ही था.

    आंटी ने अपने पति के ब्लेक लंड की फोटो माँ को भेजी थी और लिखा था देख तेरा नाम लिया तो तेरे जीजा का लंड कैसे खड़ा हो गया. फिर उसने निचे अपनी और अपने पति के सेक्स क्रिया के मस्त फोटो डाले थे. ये सेक्स कथा आप के लिए हिंदी पोर्न स्टोरीस डॉट कॉम ले के आया हे. और निचे लिखा था जल्दी से मिलों ना थ्रीसम के लिए, बहुत याद करते हे वो तुझे!

    माँ ने उसके अन्दर विजय सर के बारे में भी लिखा था. आंटी ने उसे कहा की आज चुचों पर हाथ मारा हे कल को कही तेरी चूत ना मार ले तेरे बेटे का सर.

    फिर मैं वह खड़ा था तो माँ हिली थोडा. मैं घबरा के उसके फोन को वापस रख के अपने कमरे में भाग गया. माँ की इमेज चंद घंटो में ही बदल गई थी. शाम को मैं उसे सीधी समझ के विजय सर को गाली दे रहा था. और अब मैं सोच रहा था की माँ इतनी बड़ी रंडी हे फिर विजय सर उसे चोदना चाहे उसमे क्या बुराइ हे!

    मैं सुबह उठ के बहार गया तो देखा माँ चुपके से कुछ देख रही थी. लेकिन मुझे आते हुए देख के वो वहां से चली गई. फिर मैंने देखा तो माँ चुपके से विजय सर को नहाते हुए ही देख रही थी. वो शायद उन्के लंड को देख के पागल हुई थी.

    मैंने सोचा की साली मेरी सेक्सी माँ सच में बड़ी चुदक्कड हे. वो खुद चुदना चाहती हे और मैं अब चाह के भी उनको रोक नहीं सकता और मैं इस सब के लिए अब अपने बाप को कोसते हुए वहाँ से निकल गया. मैं नाहा धो के रेडी हो गौ और सर मेरे रूम में आ घुसे और बोले, तेरी माँ का रूटीन बता अब वो क्या करेगी तो मैंने कहा अब वो नहाएगी सर. और फिर रम में रेडी हो के बाकी के काम करेगी. सर बोले अच्छा हे तो एक काम कर अब तू घर से निकल जा मैं कह दूंगा की तू खेलने के लिए गया हे. मुझे पता था की सर मुझे निकाल के माँ का फायदा लेना चाहते थे. इसलिए मैं गया नहीं और अपनी माँ के कमरे में जा के छिप गया. मुझे लगा की अब जो भी होगा वो इस कमरे में ही होगा इसलिए मैं वहां छिपा था.

    मैंने देखा की कुछ देर में विजय सर कमरे में आये और वो बेड में बैठ गए. मुझे ये सब मिरर यानी की आईने में दिख रहा था. फिर उन्होंने बिस्तर के ऊपर पड़ी हुई माँ की ब्रा और पेंटी को सूंघ के अपने लंड को खुजाया. थोड़ी देर के बाद माँ भी कमरे में आ गई और शायद उन्होंने सर को बेड पर नहीं देखा और गुनगुनाने अपनी तोवेल को हटा के. वो बाल को पोंछने लगी उफफ्फ्फ्फ़, माँ की गांड क्या जबरदस्त लग रही थी.

    अचानक माँ ने विजय सर को देखा और वो सर को देख कर चिल्ला पड़ी. उनके हाथ से तोवेल गिर चूका था और वो अपने हाथो से अपने अपनी चूचियां और चूत कवर कर ली! सर ने भी ऐसा रिएक्ट किया की जैसे वो गलती से यहाँ आ गए थे और उन्हें पता नहीं था की माँ नहाने के लिए गई थी. वो बोले, सोरी मुझे पता नहीं था की आप नाहा के ऐसे आओगी. मुझे रूम के रेंट के लिए बात करनी थी इसलिए मैं यहाँ आके बैठा हुआ था.

    फिर विजय सर ने तोवेल को अपने हाथ में ले के माँ को दे दिया. माँ ने जल्दी से उसे लपेट लिया. सर माँ के पास खड़े हो के बोले, माफ़ करना मीनू जी! माँ ने बोला की कोई बात नहीं आप जा सकते हो. पर सर का इरादा तो कुछ और था उन्होंने माँ को पकड के अपनी और खिंचा और बोला, मीनू जी एक बात कहूँ आप सच में किसी हिरोइन से कम नहीं मुझे तो आप के पति पर तरस आता हे इतनी अच्छी बीवी होने के बाद भी कोई उस से दूर कैसे रह सकता हे! और ऐसा कह के सर ने अपने हाथ को मेरी सेक्सी माँ की गांड पर फेर दिया.

    फिर से माँ का तोवेल निचे गिर गया. माँ सर के एकदम चिपक गयी और सर बोले मीनू जी बस ऐसे ही रहिये और मेरे साथ चिपके रहो. फिर वो दोनों ऐसे ही चिपके हुए गेट तक गए. और सर गेट के बहार निकल गए. माँ वापस नंगी कमरे में आई और उसने ब्रा पेंटी को उठा के पहन लिया. माँ बेड के ऊपर निचे झुक के अपने कपडे सही कर रही थी तो विजय सर पीछे से आये अपने लंड को माँ की गांड पर रख के उसे जकड लिया अपनी बाहों में. माँ इस हमले के लिए जरा भी रेडी नहीं थी. वो बोली, छोडो मुझे आप ये क्या कर रहे हो???

    तो सर बोले वही जो आप के पति को करना चाहिए आप से, प्यार! तो माँ बोली छोडो मुहे मैं शादीसुदा हूँ. तो सर बोले अच्छा हे ना फिर आप के पति को कुछ पता नहीं चलेगा! इस पर माँ थोडा शरमा गई और बोली, नहीं ये आप गलत कर रहे हो.

    तो सर बोले कुछ गलत नहीं हे मीनू जी मुझेपता ही आप को भी मजा चाहिए क्यूंकि मैंने कल रात को आप को योनी में गाजर लेते हुए देखा था! माँ एकदम से हैरान हो गई की साले इसने कहा से देख लिया.

    सर बोले मैंने तो आप का पूरा शो देखा था आप चूत में ही गाजर डाल के सो भी गई थी! अब भला मीनू जी जब घर में आप के लिए मेरा लंड हे फिर आप योनी को ऐसे गाजर मूली से क्यूँ चोदेंगी!

    माँ अब ढीली हो गई थी. वो सर को कुछ नहीं कह रही थी. सर ने माँ की ब्रा में अपना हाथ डाल के उसके दोनों बूब्स को खूब मसल दिया. माँ ने कहा. दरवाजा तो बंद कर लेने दीजिये, राज आ गया तो प्रॉब्लम होगी.

    सर बोले, मैंने उसे खेलने के लिए भेज दिया हे फिर भी डर लगता हे तो जाओ लगा दो कुण्डी.

    माँ दरवाजे को बंद करने गई थी तब तक सर ने अपने लंड को बहार निकाल लिया.

    सर बोले, देखो जानेमन मेरे आठ इंच के लौड़े को.

    माँ ने हंस के कहा सुबह ही देखा था जब तुम इसके उपर साबुन लगा के पिट रहे थे इस को.

    सर बोले, वाह मेरी रंडी तो तू भी इसे लेने के चक्कर में ही थी छिनाल साली. मुझे तो तुझे देख के ही पता था की तू लंड लेने के लिए रेडी हे. चल अब इसे अपने मुहं में ले ले छिनाल.

    माँ ने घुटनों के ऊपर बैठ के सर के लौड़े को अपने मुहं में ले लिया. सर ने माँ के बालों में हाथ घुमाया. और माँ ने पुरे लंड को एक ही सांस में अन्दर दबा के चुस्से लगाए. माँ के बालों में हाथ फेरते हुए विजय सर आह आह्ह्ह अह्ह्ह ओह ओह कर रहे थे. और माँ थी की किसी पेप्सी कोला के बोतल के जैसे लंड को मुहं में घुसेड के उसे चुस्ती जा रही थी. फिर माँ ने अपनी पेंटी के अन्दर एक हाथ डाला और वो अपनी चूत के साथ खेलने लगी.

    विजय सर ने ये देखा तो बोले, चलो एक दुसरे को प्यार दे!

    माँ समझ गई और वो दोनों 69 पोजीशन बना के एक दुसरे को प्यार करने लगे. माँ की चूत चूसते हुए विजय सर ने उसके बूब्स भी खूब दबाये और गांड में भी ऊँगली की. माँ को पांच मिनिट के अन्दर अपनी जबान के जादू से सर ने मदहोश सा कर दिया. माँ ने भी सर के लंड को मस्त चूस चूस के एक बार उसका पानी छुड़वा दिया. वो सब माल पी गई. फिर सर ने कहा, जान तुम तो बड़ा मस्त लंड चुस्ती हो. क्या उमेश का मेरे से बड़ा हे?

    माँ ने कहा, अरे उमेश तो बगल का एक बूढा हे लेकिन सही चोदता हे!

    सर बोले, आज मेरे से चुदवा लो फिर तुम सब उमेश,. तुमेश को भूल जाओगी.

    माँ ने सर के लंड को अपने हाथ में पकड़ के मसला और बोली, देखते हे!

    सर ने फिर से अपने मुहं को माँ के बुर में घुसा का चूसा. वो ऐसे चूस रहे थे की माँ की बस ही हो गई थी. माँ का पानी भी छुट गया जिसे सर ने चाट लिया. अब सर ने माँ की गांड के बम्स के ऊपर किस दिए और फिर वो माँ के निपल्स को मुहं में भर के चूसने लगे. आज की ये सेक्स कथा आप हिंदी पोर्न स्टोरीस डॉट कॉम पर पढ़ रहे हो. माँ की सिसकियाँ साफ़ साफ़ मेरे कान पर पड़ रही थी.

    कुछ देर माँ को गरम करने के बाद सर बोले, तुम्हे कैसे लेना पसंद हे?

    माँ बोली, अंदर तक जाना चाहिए बस!

    सर बोले, फिर एक काम कर मेरी जान, कुतिया बन जा मैं मस्त डाल दूंगा अन्दर तक.

    माँ सर के सामने अपने घुटनों के बल कुतिया बन गई. सर ने पीछे से अपने नुकीले लंड को थूंक से गिला किया. और फिर माँ ने अपने एक बम को हटाया. माँ का काला चूत का छेद दिखा. सर ने बिना किसी परेशानी के लंड को होल में फिट कर दिया. माँ को तृप्ति मिली और उसकी अन्तर्वासना शांत सी हुई! वो अपनी गांड को धीरे धीरे से हिलाने लगी. और सर उसे जोर जोर से ठोकने लगे.

    माँ की चूत में सर का लंड पच पच की आवाज से हिल रहा था. माँ भी अहह्ह्ह अह्ह्ह्हह हम्म्म्म अहह्म्म्म कर के अपनी मोटी गांड को हिलाती गई. और सर थे की जैसे शिलाजीत खा के आये थे. वो माँ की कमर पर प्यार से हाथ घुमा रहे थे. तो कभी माँ की गांड पर हाथ घुमाते थे. माँ को ऐसे टच के साथ अपनी चूत की चुदाई बड़ी भा रही थी. वो सिसकियों पर सिसकियाँ ले रही थी और सर को बता भी रही थी की उसे मजा आ रहा था.

    माँ बोली, अह्ह्ह विजय ऐसे ही चोदते रहो मुझे, बहुत मजा आ रहा हे जब लंड अंदर तक घुसता हे तुम्हारा, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह हम्म्म्म.

    सर बोले, मीनू रानी लेती जाओ मेरे लंड को ऐसे ही, आह्ह्ह्ह उम्म्म्म चुदवा ले मेरे मोटे लंड से आंटी जी!

    और फिर माँ के दोनों बम्स को सर ने अपनी हाथ की मुठ्ठी में पकड़ा और वो जोर जोर से लंड को पूरा निकाल के अन्दर डालने लगे. माँ तो और भी चुदासी आवाजे निकालने लगी अपने मुहं से. और वो और कस कस के अपनी गांड को सर के लंड पर मारने लगी थी. सर की जांघ की नशे साफ़ दिख रही थी. वो पूरी ताकत से माँ को चोद जो रहे थे.

    कुछ देर ऐसे चोदने के बाद सर बोले, मीनू जी अब आप मेरी गोदी में चढ़ जाओ.

    और सर ने माँ की लसलसी चूत से अपने लंड को बहार निकाला. वो एकदम कडक और मोटा था अभी भी. फिर सर बिस्तर में बैठे और उनकी दोनों टाँगे निचे फर्श पर थी. माँ ने सर के लंड को अपने हाथ से पकड़ा और वो उसे सेट कर के उसके ऊपर आ बैठी. सर ने निचे से धक्के लगाए और माँ के बूब्स को चूसने लगे. माँ भी ऊपर उछल उछल के अपनी मरवा रही थी.

    माँ का बदन सर की जांघ से टकराता था तो ठप ठप की आवाज आती थी और चूत और लंड की चुदाई की पच पच आवाज आती थी.

    माँ के बालों को सर ने अपने हाथो से खोला और बोले, मीनू मेरी जान तेरी चूत तो कमाल की हे.

    माँ बोली, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह हम्म्म्म विजय आप के लंड का भी जवाब नहीं हे.

    वो दोनों पसीने में भीग चुके थे और माँ थक भी गई थी. सर ने तभी मेरी माँ को अपने दोनों हाथो से जकड़ लिया और बोले, ये ले मेरे गरम गरम पानी का मजा मेरी जान.

    माँ ने उछलना बंद कर दिया और अपनी चूत कोसर के लंड के ऊपर जकड़ सा लिया. सर ने अपने सब वीर्य को माँ की चूत में ही खाली कर दिया. वो दोनों की साँसे फूली हुइ थी. माँ ने कुछ देर तक बीना हिले सर के सब वीर्य को चूत में ले लिया. और वो उठी और उसकी गांड के ऊपर से सर के पानी की बुँदे टपक रही थी.

    माँ बोली, मैं जल्दी से कपडे पहन लूँ और आप भी कपडे पहन लो विजय जी, राज आ जाएगा तो मुश्किल होगी.

    सर ने कपडे पहने और बोले, आज रात को मैं तुम्हारे कमरे में आऊंगा.

    माँ बोली, हां और मैं आप के लिए एक सरप्राईज ले के रखूंगी!

    दोस्तों माँ फिर से नहाने के लिए चली गई तो मैं उसके कमरे से बाहर निकल आया. सर के पास गया तो वो अपनी चड्डी में बैठे हुए थे. मुझे देख के वो बोले, आ गए राज?

    मैंने कहा हां सर.

    वो बोले, तेरी माँ तो बड़ी छिनाल निकली, साला इतना मजा तो रंडी के साथ भी नहीं आता हे.

    मैं चूप रहा और सर आगे बोले, आज रात को तेरी हॉट माँ फिर से मेरा लंड लेगी. मैं कहता था न की तेरी माँ बहुत बड़ी चुदक्कड हे!

    दोस्तों ये थी मेरी सेक्सी माँ की चुदाई गाथा. आप को ये सेक्स कथा कैसी लगी? माँ ने विजय सर को क्या सरप्राइज दिया वो पूछ रहे हो ना? दोस्तों उसके लिए मैं आप को दूसरी कहानी जल्दी ही लिख के भेजूंगा. तब तक के लिए आप लोगो को मेरी तरफ से बाय!
     
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