सौतेली माँ को चोदा योजना बनाकर

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Jun 21, 2017.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

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    हेलो दोस्तो,

    तीन लड़कियों से मेरी चुदास नहीं मिटी
    मेरा नाम यश है और मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 22 साल है और लंबाई 6′ है। यह मेरी पहली कहानी है और मेरी निजी है। यह उन लोगों के लिए है!

    जिन्हें चुदाई का भूत सवार होता है। वो पर किसी से भी कहने से डरते हैं। जैसे! मैं पहले डरता था। वैसे! कहने को तो मैं 3 लड़कियों क साथ हूँ। जो मेरी माशूकायें हैं!

    हालांकि! मैं कभी भी पूरी तरह नहीं चोद पाया! जिस तरह से मैं चाहता हूँ! क्योंकि वो मेरी उम्र की हैं और चुदते समय ज्यादा नखरे दिखाती हैं।

    अब मैं सीधा कहानी पर आता हूँ। यह बात करीब ढेड़ महीने पहले की है। जब मेरे पापा का क्लिनिक चंडीगढ़ चला गया था। घर में सिर्फ़ मैं और मेरी सौतेली माँ (क्योंकि मेरी माँ मर चुकी है) रहे थे।

    तीन-तीन माशूका होने के बावजूद! अच्छी तरह चुदाई ना कर पाने से! मैं बहुत निराश हो गया था। ज्यादा सोचने पर! मुझे अपने घर में मेरी सौतेली माँ ही मिली।

    माँ के गदराए जिस्म देख मुठ मारा
    जिसे मैं अब तो ख़ासकर बड़े आराम से चोद सकता था। चूँकि! मेरे सामने मुसीबत इस बात की थी, कि वो मुझे अपने सगे बेटे की तरह मानती थी! मुझे बहुत प्यार करती थी।

    किसी भी बात की परवाह ना करते हुए! मैंने एक दिन सोच लिया! कि कुछ भी हो! मैं सोचता रहूँगा तो कुछ नहीं होगा!

    मैं बस मुठ ही मारता ही रह जाऊँगा! उनकी चूचियाँ, फिगर और गांड को देखकर!

    माँ की चूचियों के साफ दर्शन
    मेरी सौतेली माँ का नाम सोनी है। जो कि पापा प्यार से बुलाते हैं और उनका फिगर 34-30-36 है! रंग गोरा है और लंबाई 5′ 6″ है।

    एक बार की बात है! जब मैं कॉलेज से लौटा, तो माँ घर का काम कर ही थी। काम करते करते उनका बदन पसीने से भर गया था।

    मैं जैसे ही! घर की दरवाजे की घंटी बजाई, तो माँ ने दरवाज़ा खोला और बोली- आ गए बेटा! मेरा पहला ध्यान माँ की चूचियों पर गया! जो की काले ब्रा में साफ झलक रही थी।

    उसी दिन से मैं अपनी सौतेली माँ की याद में मुठ मारना शुरू कर दिया, और उन्हें चोदने का उपाय भी मेरे दिमाग में आया!

    माँ को चोदने हेतू योजना बनाना
    मेरी असली माँ तो हैं नहीं! तो मैं ऐसा कर लूँ! तो क्या बुराई होगी! इसीलिए मैंने योजना शुरू कर दी।

    मैंने ध्यान दिया! कि मेरे पापा को गए हुए 2-3 महीने हो चुके हैं! कई बार मुझे उनकी चुदाई की बहुत ही हल्की आवाजें आती थी!

    ऐसा हो सकता है! कि अभी भी मेरी माँ हस्तमैथुन करती होंगी! यानी खुद से मज़े लेना! अपने आपको उत्तेजित करके! अब मैंने हर रात माँ के कमरे की चौकीदारी शुरू कर दी।

    मैं नसीब वाला था! कि 8वें दिन को ही, जब मैं पानी पीने के बहाने! माँ के कमरे के साथ जो खिड़की है, उसमें से झाँका! तो मेरे होश उड़ गए!

    माँ को चूत में उंगली करते देखा
    माँ जाग रही थी, और अपने पेट पर नाईटी को उठा कर सहला रही थी। वो हल्का हल्का! कभी कभार! अपनी चूत के ऊपर अपना हाथ रख कर थोड़ा सा रगड़ रही थी।

    मेरी माँ को देखा! मैंने तो उनकी जाँघ अँधेरे में भी चमक रहा था। मैंने वहीं अपना लगभग 7 इंच लंबा लण्ड! जो पूरा अकड़ चुका था, उसे निकाल कर हल्का मुठ मारने लगा।

    यह नज़ारा देख कर! मैं समझ गया! कि हो सकता है, माँ हर दिन अपने आपको संतुष्ट कराना चाहती हों! मेरे देखने से पहले ही झड़ कर सो जाती हों!

    मैंने खुद को कहा- अब समय बर्बाद नहीं करना चाहिए! अगले ही दिन! मैं अपने दोस्त की बताई हुई, चुदाई बड़ाने वाली दवा मार्केट से लेकर आया।

    माँ को चुदास बढ़ाने वाली दवा दी
    मुझसे रुका ना गया! तो मैंने सोचा! क्या रात तक का इंतज़ार करूँगा! माँ को किसी तरह पानी में मिला कर खिलवा देता हूँ! और शायद! काम जल्दी हो जाए!

    रात हो ही रही थी! शाम के 7 बज रहे थे! यानी हल्की रात हो गई थी! और माँ जब काम कर रही थी। तब मैंने सोचा! माँ को बोलूँ, कि पानी पी लो और मेरा काम हो जाएगा!

    मैं जब उन्हें पानी पिलाने गया, तो उन्होंने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी! और उनका पेट काफ़ी दिखा रहा था! उस जगह! उस स्थिति को देख कर जिस पर हल्का सा पसीना था!

    मेरा लण्ड मानो बाहर आने क लिए फड़कने लगा! जब माँ ने पानी पी लिया, तो मैं अपने कमरे में चला गया। दवाई विक्रेता ने कहा था, कि दवाई का असर आधे घंटे बाद होगा।

    मैं आधे घंटे का इंतज़ार करने लगा। करीब 15 मिनट बाद! माँ बोली, कि यश बेटा मेरा सर हल्का हल्का भारी हो रहा है। और मैं सेरिडोन लेकर लेटने जा रही हूँ!

    चुदास की असर दोगुना हेतू दी और दवा

    मैंने सोचा! आज तो तुझे चोद कर ही रहूँगा! यह सोचते हुए! जोश मैं आकर मैंने सेरिडोन की जगह, माँ को एक और गोली दे दी ताकि असर बढ़े!

    मैं और पास आकर! बेड के बगल में माँ का हल्का हल्का सिर दबाने लगा। मैंने देखा! कि, मेरी माँ अपने आपे से बाहर होने लग गई थी!

    उनको और ज़्यादा पसीना हो रहा था! और जब मैंने ध्यान से देखा! तो उनकी चूचियाँ बहुत कस चुकी थी! उनकी आँखें बंद हो रही थी! हल्की हल्की और वो मदहोश होने लगी!

    मैंने सोच कर! अपने योजना के मुताबिक! मैंने माँ को कहा, कि माँ मैं एक बात बोलूँ बुरा मत मानना!

    माँ से नीचे में जलन का बहाना बनाया

    माँ ने कहा- हाँ! बोलो बेटा!

    मैंने कहा- माँ कई दिनों से मेरे नीचे बहुत जलन होती है। लगता है! डॉक्टर को दिखाना पड़ेगा!

    मैं जानता था! कि माँ अपने आपे से बाहर हो गई हैं! इसीलिए कुछ जवाब तो देंगी! मगर, माँ ने मुझे बोला- ठीक हैं! बेटा, अभी तू जाकर आराम कर!

    मेरे अरमानो पर! जब पानी फिरते हुए मैंने देखा! तो मैंने कहा, कि आऐ! ईय! ईई माँ!! बहुत ज़्यादा जलन होने लगा गया है, आजकल!

    मैं और एक बीमार की तरह नाटक करने लगा और माँ को कहा- माँ बहुत दर्द हो रहा है! माँ अपनी ममता के साथ बहुत परेशान सी हो गई!

    वो एकदम से उठकर बोली- बेटा बहुत ज़्यादा जलन हो रहा है! कहाँ हो रहा है?

    माँ को अपना लण्ड दिखा दिया

    मैंने एकदम से! असली नाटक करते हुए! बिना शर्म लाज के! माँ के सामने अपनी जीन्स और अंडरवियर के नीचे कर दिए!

    माँ ने मेरे गिरे हुए! मगर अकड़ा हुआ लण्ड देखती ही रह गई! मगर माँ ने उसको छुआ नहीं और आस पास दबाने करने लगी!

    माँ बोली- बेटा अब बता! अब बता!

    मैंने कहा- माँ बहुत जलन हो रहा है, मेरे पैखाने के रास्ते में! तो माँ ने मेरा लण्ड हल्का सा छुआ और वो हल्का सा पानी छोड़ रहा था।

    माँ चुदासी हो मेरा लण्ड सहलाने लगी

    मेरी किस्मत चमकी! तभी जब माँ बिना शर्म के! अपनी हल्की लाल आँखों से मेरे लण्ड! को इस तरह निहार रही थी। जैसे! उसे चूसना चाहती हों जी भरकर! पर कह ना पा रही हों!

    माँ थोड़ा शर्मा रही थी! फिर मैंने जानबूझ कहा, कि माँ हाँ! हाँ! थोड़ा अच्छा लग रहा है! और दर्द कम भी हो रहा है! अब माँ थोड़ा बहकने लगी थी, और दवाई का असर दिखने लग गया था!

    माँ ना चाहते हुए भी! मेरे लण्ड को अपने हाथ से छोड़ ही नहीं रही थी! अब मैंने भी सोचा! कि कुछ देर और नाटक कर लेता हूँ! और वही हुआ, जिसका इंतज़ार था!

    माँ मेरे लण्ड की मुठ मारने लग गई थी! धीरे धीरे! और मैं लेट गया और सोने का नाटक करने लगता! मैंने देखा! मैं सो गया हूँ! यानी नाटक में! फिर भी माँ मेरी मुठ मारने में मस्त हैं!

    माँ के होंठों से लण्ड चुसवाने का मजा

    हिम्मत करते हुए! मैंने माँ की गर्दन को अपने हाथ से पकड़ा और अपने लण्ड की तरफ बढ़ाया! और मैं मानो जनन्त में चला गया!

    जिस औरत के मैं सपने देखा करता था! मेरा लण्ड आज उसके नाज़ुक होंठों के खुद को चुसवा रहा है और मज़ा तब आया! जब मेरा माल हल्का हल्का सा! निकालने लग गया था!

    यानी! मैं अब झड़ रहा था! तब मेरी माँ उसे साथ साथ पी भी रही थी! उस भद्दी चुदाई में, मेरी माँ का थूक और मेरे लण्ड का माल से थोड़ी गंदगी हुई!

    उससे मेरा और माँ का जोश मानो सातवें आसमान में चला गया था! मैंने मन में कहा कि अब माँ कुछ नहीं बोलेगी और शांति से मैं चोद लेता हूँ!

    अब कुछ कहा और माँ होश में आ गई! तो लेने के देने पड़ जाएँगे! मैं अब वो करने लगा! जो जो करने की सोचता था, अब आह! वो करने का समय आ गया था!

    माँ के होंठों को और चूचियों को चूसा

    सबसे पहले मैंने माँ की सीधा लिटाया! और जमकर उनके होंठों को चूसा! करीब 2 मिनट तक! मैं मस्ती के मूड में उनके गले को चाटा!

    मैंने जोश में माँ का ब्लाउज फाड़ दिया! और ब्रा को हटाया। अब गुलाबी-गुलाबी चूचियाँ तो खूब चाटा! चूसा और खींचा!

    माँ वहाँ सिसकियाँ ले रही थी- आआ! हह! आ! हह !!! हुउ! हुन्न्ं! आआ! हह आआ! आआ! ह्ह! मेरा जोश तब बढ़ा!

    जब मैं चूचियों को अच्छे से, 10 मिनट चूसने क बाद! उनकी गोरे गोरे पेट पर आया, और कसम से यार! क्या खुसबू आ रही थी!

    मैं आधे घंटे का इंतज़ार करने लगा। करीब 15 मिनट बाद! माँ बोली, कि यश बेटा मेरा सर हल्का हल्का भारी हो रहा है। और मैं सेरिडोन लेकर लेटने जा रही हूँ!

    चुदास की असर दोगुना हेतू दी और दवा

    मैंने सोचा! आज तो तुझे चोद कर ही रहूँगा! यह सोचते हुए! जोश मैं आकर मैंने सेरिडोन की जगह, माँ को एक और गोली दे दी ताकि असर बढ़े!

    मैं और पास आकर! बेड के बगल में माँ का हल्का हल्का सिर दबाने लगा। मैंने देखा! कि, मेरी माँ अपने आपे से बाहर होने लग गई थी!

    उनको और ज़्यादा पसीना हो रहा था! और जब मैंने ध्यान से देखा! तो उनकी चूचियाँ बहुत कस चुकी थी! उनकी आँखें बंद हो रही थी! हल्की हल्की और वो मदहोश होने लगी!

    मैंने सोच कर! अपने योजना के मुताबिक! मैंने माँ को कहा, कि माँ मैं एक बात बोलूँ बुरा मत मानना!

    माँ से नीचे में जलन का बहाना बनाया

    माँ ने कहा- हाँ! बोलो बेटा!

    मैंने कहा- माँ कई दिनों से मेरे नीचे बहुत जलन होती है। लगता है! डॉक्टर को दिखाना पड़ेगा!

    मैं जानता था! कि माँ अपने आपे से बाहर हो गई हैं! इसीलिए कुछ जवाब तो देंगी! मगर, माँ ने मुझे बोला- ठीक हैं! बेटा, अभी तू जाकर आराम कर!

    मेरे अरमानो पर! जब पानी फिरते हुए मैंने देखा! तो मैंने कहा, कि आऐ! ईय! ईई माँ!! बहुत ज़्यादा जलन होने लगा गया है, आजकल!

    मैं और एक बीमार की तरह नाटक करने लगा और माँ को कहा- माँ बहुत दर्द हो रहा है! माँ अपनी ममता के साथ बहुत परेशान सी हो गई!

    वो एकदम से उठकर बोली- बेटा बहुत ज़्यादा जलन हो रहा है! कहाँ हो रहा है?

    माँ को अपना लण्ड दिखा दिया

    मैंने एकदम से! असली नाटक करते हुए! बिना शर्म लाज के! माँ के सामने अपनी जीन्स और अंडरवियर के नीचे कर दिए!

    माँ ने मेरे गिरे हुए! मगर अकड़ा हुआ लण्ड देखती ही रह गई! मगर माँ ने उसको छुआ नहीं और आस पास दबाने करने लगी!

    माँ बोली- बेटा अब बता! अब बता!

    मैंने कहा- माँ बहुत जलन हो रहा है, मेरे पैखाने के रास्ते में! तो माँ ने मेरा लण्ड हल्का सा छुआ और वो हल्का सा पानी छोड़ रहा था।

    माँ चुदासी हो मेरा लण्ड सहलाने लगी

    मेरी किस्मत चमकी! तभी जब माँ बिना शर्म के! अपनी हल्की लाल आँखों से मेरे लण्ड! को इस तरह निहार रही थी। जैसे! उसे चूसना चाहती हों जी भरकर! पर कह ना पा रही हों!

    माँ थोड़ा शर्मा रही थी! फिर मैंने जानबूझ कहा, कि माँ हाँ! हाँ! थोड़ा अच्छा लग रहा है! और दर्द कम भी हो रहा है! अब माँ थोड़ा बहकने लगी थी, और दवाई का असर दिखने लग गया था!

    माँ ना चाहते हुए भी! मेरे लण्ड को अपने हाथ से छोड़ ही नहीं रही थी! अब मैंने भी सोचा! कि कुछ देर और नाटक कर लेता हूँ! और वही हुआ, जिसका इंतज़ार था!

    माँ मेरे लण्ड की मुठ मारने लग गई थी! धीरे धीरे! और मैं लेट गया और सोने का नाटक करने लगता! मैंने देखा! मैं सो गया हूँ! यानी नाटक में! फिर भी माँ मेरी मुठ मारने में मस्त हैं!

    माँ के होंठों से लण्ड चुसवाने का मजा

    हिम्मत करते हुए! मैंने माँ की गर्दन को अपने हाथ से पकड़ा और अपने लण्ड की तरफ बढ़ाया! और मैं मानो जनन्त में चला गया!

    जिस औरत के मैं सपने देखा करता था! मेरा लण्ड आज उसके नाज़ुक होंठों के खुद को चुसवा रहा है और मज़ा तब आया! जब मेरा माल हल्का हल्का सा! निकालने लग गया था!

    यानी! मैं अब झड़ रहा था! तब मेरी माँ उसे साथ साथ पी भी रही थी! उस भद्दी चुदाई में, मेरी माँ का थूक और मेरे लण्ड का माल से थोड़ी गंदगी हुई!

    उससे मेरा और माँ का जोश मानो सातवें आसमान में चला गया था! मैंने मन में कहा कि अब माँ कुछ नहीं बोलेगी और शांति से मैं चोद लेता हूँ!

    अब कुछ कहा और माँ होश में आ गई! तो लेने के देने पड़ जाएँगे! मैं अब वो करने लगा! जो जो करने की सोचता था, अब आह! वो करने का समय आ गया था!

    माँ के होंठों को और चूचियों को चूसा

    सबसे पहले मैंने माँ की सीधा लिटाया! और जमकर उनके होंठों को चूसा! करीब 2 मिनट तक! मैं मस्ती के मूड में उनके गले को चाटा!

    मैंने जोश में माँ का ब्लाउज फाड़ दिया! और ब्रा को हटाया। अब गुलाबी-गुलाबी चूचियाँ तो खूब चाटा! चूसा और खींचा!

    माँ वहाँ सिसकियाँ ले रही थी- आआ! हह! आ! हह !!! हुउ! हुन्न्ं! आआ! हह आआ! आआ! ह्ह! मेरा जोश तब बढ़ा!

    जब मैं चूचियों को अच्छे से, 10 मिनट चूसने क बाद! उनकी गोरे गोरे पेट पर आया, और कसम से यार! क्या खुसबू आ रही थी!

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