Meri Jarurat - 2

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Apr 27, 2016.

  1. 007

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    //krot-group.ru Meri Jarurat - 2

    This story is part 2 of 9 in the series

    मैने उसका लहंगा की दूर ढीली की और वो सार्क के नीचे गिर गई. फिर उसको गोद मे उठा के बिस्तर पे बिठा दिया और वो सर्माते हुए अपने को पास पड़े चादर से ढकने का प्रयास करने लगी.......इसे बीच मैने अपने सारे कपड़े उतार दिए केवल आंडरवेयर छोड़कर और उसके पास जा के बोला जानेमन अपना से सुंदर राति के जैसा जिस्म मुझे देखने दो मेरी आँखो को तृप्त होने दो....व्प बोली मुझे बहुत शर्म आ रही है ....मैने कहा ये शरमाने की रात नही हद से पार जाने की रात है श्मा जाओ मुझेमे और उसकी चादर को चेचते हुए उसस्से लिपट गया पर उसके गहनो मुझे कुछ चुभन महशुस हुए तो मैने हाँश्ते हुए कहा अपने को मुझसे दूर करने के आच्छे तरीके निकले है तुमने वो इतना सुनते ही खिलखिला के हांश पड़ी और बोली आप उदार दो .......मैने उसके झूमको को चूमते हुए उसे उतार दिया फिर उसके गले के हार को फिर मांगटिका हंतो का बाज़ुबंद सब उतार दिया और एक बार फिर उसके होंठो मे खो गया उसके होंठो से होता हुआ उसकी गर्दन फ्िए उसकी चुचियो पे मैं टूट पड़ा कभी दबाता अभी मसलता ब्रा के ऊपर से चूस्ता रहा और वो ....शिसकती रही अफ अफ कराती रही बबदबड़ाती रही जब मैने उसके नाभी को ज़ोर से चूमा तो वो शीष्कारी लेती हुए झाड़ गई थी........और काश के मुझसे लिपट गई थी और मैं धीरे धीरे उसे चंता रहा वो फिर से गरम हो गैमैने उसके ब्रा को जैसे ही उसके जिस्म से अलग किया उसकी चुचि उछाल के बाहर ही आ गई मैं उसकी चुचिया देखकर पागल हो गयी आता एक तनी हुए पहाड़ की तरह और ऊपर से गुलाबी घुंडी क्या कमाल थे वो उसके चुचियो को जैसे ही मैने मूह मे लेके किस किया व्प बर्दस्त नही कर पा रही थी उसके मूह से.....उऊहह....उउफ्फ....उउंमा.......मर जाउगी.........चोद डालो मेरे रज़ा...........अब बर्दस्त नही होता........फाड़ डालो मेरे चुत को........जन्मो से प्यासी हू..................तृप्त कर दो .....अया मेरे .......रज़ा.........उऊहह...................मरगई ..............जल बिन मछली तरह तड़प उठी थी वो और खुद ही अपनी पैंटी को अपने जिस्म से अलग कर दिया था उसने ..........वो पहली बार मेरे सामने पूर्णतया नंगी थी.........एकदम तराशा बदन मुझे बुला रहा था की आओ ओए बुझा दो मेरी आग.........मैने अपना आंडरवेयर निकल के उसे पागलो की तरह चूमने लगा और वो मचलती रही ............उसकी चुत अभी एकदम गुलाबी थी ओए उसका छेद भी बहुत छोटा था लग ही नही रहा था की वो अब कुँवारी नही है............मैने उसके जाँघो को किस किया तो वो बोली मेरे देवता मुझे आप के लंड को अपने हाथो मे लेना है तो मैने खुशी उससे दे दिया लॅंड पकड़ते ही बोली हे भगवान इतना मोटा और लंबा कैसे जाएगा मेरी चुत मे वो घबरा सी गई थी.............मैने कहा जाना आज़ वो मज़ा दूँगा की सारी ज़िंदगी भूल नही पाओगी इसे चुदाई की रात को ......इतना कह के मैने उसे लिटा के उसके पीठ के नीचे एक तकिया लगा दिया और उसके चुत पे लंड सेट करके एक ज़ोरदार धक्का दे मारा आधा लंड उसकी चुत मे शमा गया था रश्मि की ससांशे आतक गई थी और वो आँखे बंद करके अपने होंठो को दबा के लॅंड अपने चुत मे अड्जस्ट करने की कोशिश कर रही थी .....मैने कहा अगर दर्द हो रहा है तो बाहर निकल लू एस्पर वो बोली इसे दर्द के लिए कब से तड़प रही थी वो आप चिंता ना करो आप बस मुझे चोदते रहो मैने फ्िए एक धाक्क दिया और इसे बार पूरा लंड अंदर जाकर उसके बच्चेड़ानी को ठोकर मारा वो करहने लगी.....फिर माुसी पोज़िशन मे रुक कर उसके चुचियो को आँतो से दबाने लगा और होंठो को चूसने लगा जब उसका दर्द कम होने लगा और वो चूसा और दबाई का मज़ा लेने लगी तो मैने धीरे धीरे धक्को को स्टार्ट का दिया उसके मूह से हल्की हल्की आहे निकलना शुरु हो गई थी............मैने धीरे धीरे बढ़ता बढ़ा दी.....और वो रगड़ती हुए बबदबाड़ाने लगी...........ऊ मेरे राजा मेरे सोना मेरे बाबू........चोद डालो फाड़ डालो अपनी बीवी की चुत को ......रंडी बना दो मुझे जी भर के चोदा जैसा मन करे वैसे चोदा दिन मे रात मे जब मन तब चोदा मेरी चुचि की अकड़ निकल दो बहुत दुख देती थी ये निचोड़ दो मस्त दो ............चूष लो.......अया...ऊ.......आआइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई सिसस्स्स्स्स्स्स्स्स्सीसिसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सश................मरगई...............और तेज .................और तेज........सोना............वो ना जाने क्या क्या बकती रही और मैं चोदता रहा चोदता रहा तभी वो अकड़ने लगी.........बोली जाना मैं आ रही हू बरसो की आग निकालने व्वाली हाईईईईईई............इसे आग को अपने लंड के रस से भीगा दो...................उसकी ये बात सुन कर मैने अपने धक्को की रफ़्तार एकदम तेज कर दी .............................................और उसके झड़ने के थोड़ी देर बाद उसकी चुत मे झाड़ गया..............वो हाँफती हुए मेरे गले लग गई काफ़ी देर हम एक दूसरे की बाँहो मे पड़े रहे और मेरा लंड उसके चुत रूपी घर मे ......................वो आखे बाद किए मेरे सिने से चिपकी थी और मैं उसके सौंड्रया मे खोया उसे निहार रहा था

    रात ऐसे ही रश्मि के बाँहो मे बीत रही थी थोड़ी देर बाद उसने अपनी आँखें खोली और
    बोली ऐसे क्या देख रहे हो मुझे कभी देखा नही क्या, मैने कहा इसे रूप की देवी को अपने आँखो मे ब्सा लेना चाहता हू तभी उसने उठने की कोशिश की पर थकावट के मारे उठ ना पाई मैने कहा क्या हुआ जान तो वो बोली वॉश रूम जाना है मैं सहारा देकर उसे वॉश रूम तक ले गया और बड़े प्यार से उसकी योनि को गर्म पानी से सॉफ किया
    उसने भी लॅंड को सॉफ किया, तभी मैने शवर ऑन कर दिया और ह्म उसमे भीगने लगे
    मैं उसके नरम होंठो का रस पीने लगा वो भी धीरे धीरे दुबारा गर्म होने लगी और मेरा साथ देने लगी कभी उसके मम्मो को दबाता उसकी चुत को छेड़ता और उसके
    गान्ड को खोदता वो फिर से मस्त होने लगी.

    आदि मेरे जाना आज़ मुझे ऐसा लग रहा है की मैं आज़ ही पहली बार दुल्हन बनी हू और आज़ ही मेरी पहली सुहागरात है .....उसकी मदहोश कर देने वाली आवाज़े महॉल को और गर्म बन रही थी तभी उसने कहा जाना "डाल दो ना अंदर तक" मैने छेड़ते हुए पूछा कहा डाल दु....उसने शर्मा के बोला मेरी चुत मे अपना लोडा देखो
    ना कैसे तड़प रहा है तुम्हारे बिना....मैने कहा आप के ये पहाड़ है ना बहुत प्यारे है मन कराता है रात भर बस इसे ऐसे ही निचोड़ता रहू ..रस्मी
    पागल हो बोली निचोड़ लेने पर पहले मेरी फुददी की आग को शांत कर दो ये गर्म पानी मुझे जला रहा है. मैने उससे घोड़ी के स्टाइल मे झुकने को कहा और उसकी चुत से लॅंड सत्कार एक जोरदार प्रहार किया मेरा पूरा लंड सीधा उसकी चुत मे उसकी ससन्शे ही रुक गई फिर धीरे धीरे वो धक्को का साथ आनंद के साथ देने लगी उसकी शीष्कारियो ने मुझपर ऐसा जादू किया की मैं भी उसे चोदता रहा .....वो बोले जा रही थी मेरे बच्चो के पापा चोदा मुझे मेरी बहन को भी तुम रंडी बना दोगे ...उफ़फ्फ़........है......
    क्या करू..........उहह....

    चोद मुझे और चोद चोद ना .......चोद दे अपनी बीवी को .......तेरे लिए ही एतना साज़ी थी आज़ चोद द्दाल उफ़फ्फ़ है.......उसका शरीर एकदम तन सा गया और वो झाड़ गई थोड़ी देर मे मैं भी उसकी चुत मे खल्लश हो गया फिर बेदिंग के बाद उसको अपनी गोद मे उठाकर कमरे मे लाकर उसको ताओलिए से आहिस्ते आहिस्ते पूछा उसने भी मुझे पोछा और फिर नंगे ही ह्म बिस्तर मे चले गये नहाने के बाद ह्म कब सोए हमे पता ही नही चला .....सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैने देखा ..........रश्मि न्हा के कपड़े चेंज कर के बालकनी मे खड़ी थी अफ क्या लग रही थी वो पिंक कलर के शुत मे उसने हल्का मेकप और मॅचिंग लिपस्टिक उसे किया था.....मुझे देख ....कर मुश्कुरई और बोली जाना उठा गये चलिए फ्रेश हो जाइए मैं ब्रेकफास्ट ऑर्डर कर देती हू ........मैं सीधा वॉशरूम मे चला गया और ज़ल्दी से फ्रेश होकर बाहर आ गया तब तक ब्रेकफास्ट आ गया था .........ह्म ब्रेकफास्ट करने लगे तभी रस्मी ने कहा और क्या प्लान है आज़ का ....मैने शरारात के साथ उत्तर दिया दिन भर चुदाई का और क्या उसने कहा हहा वो तो मेरा भी मन है पर मेरा शिमला देखने का बहुत मन है .......मैने कहा एक काम करो कुछ सेक्सी सी ड्रेस पहन लो चलते है .....वो बोली एज़्म क्या खराबी है....मैने कहा ज़िंदगी भर शुत ही पहनना है जो मैं तुम्हाए लिए लाया हू उसमे से कुछ ट्राइ कर लो.




    रश्मि तैयार होने के लिए कमरे मे चली गई.........कुछ देर बाद स्लीव्ले पिंक टी-शर्ट और लोंग स्कर्ट मे आई मोत्ियप की ज्यूयेल्री बहुत जाच रही ही उसपे ...आते ही बोली कैसी लग रही हू मैने कहा एकदम स्वीटहार्ट रूको तुम्हारे एक दो स्नॅप ले लेता हू और मैने उसकी कुछ सेक्सी पोज़ ले लिया . फिर हम शिमला गु
    हमने निकल गये घूमते घूमते कब शाम हुए पता ही नही चला शाम को लौट एल फ्रेश होके हम नीचे आ गये डिन्नर कर के वापस रूम पे........आज़ रस्मी ने रीड स्लीव्ले निगतषुत पहना था क्या लग रही थी उसमे वो मेरे पास आते ही मेरे बाँहो मे बाहे डाल के बोली आज़ माई आप को बहुत प्यार करना चाहती हू .......उसके बाद उसके और मेरे होंठ एक दूसरे से जुड़ गये मेरा हाथ अपने आप उसकी चुचियो पे चला गया मदहोशी बढ़ने लगी थी हम एक दूसरे के होंठ और जीभ को बेठहाशा चुस्ष रहहे थे उस्क्कि चुचिया एकदम पत्थर हो गई थी....धीरे से मैने उसका शुत उतार दिया अब वो पागलो की तरह मुझे किस कर रही थी तभी उसने धक्का से कर मुझे बिस्तर पे गिरा दिया और मेरे ऊपर आगाई पहले मेरे होंठो को चूसने के बाद शिधे मेरे लंड को अपने मूह मे लेकर लोलीपोप की तरह चूकने लगी काफ़ी देर चुस्साई के बाद जब मुझे लगा की मैं अब बर्दस्त नही कर पवँगा तो मैने एक झतक से उससे हटा दिया वो मुझे आँके फाड़ फाड़ के देख रही थी की मुझे क्या हुआ ....मैने कहा जाना ये लंड है तुम्हे अब जन्नत की शायर कराएगा और मैने उससे बाँहो मे ले लिया वो बोली जाना मेरी चुल मे बड़ी खुजली हो रही रही चोद दा ना...... पर मैं उससे और परेशन करने के लिए उसके चुत को चातने लगा और उसकी चुचिया दाबनाए लगा....उसके मूह से शीष्कारिया निकल पड़ी थी..........है मेरे राजा ब्जा दो मेरा बजा......ओह........उहह.......शी.......शी........और ज़ोर से चाटो ना.....मेरी चुचियो को भी दबाओ.....उफ़फ्फ़ जाना लंड डाल दो ना अब नही बर्दस्त होता डालो ना लंड .......डालो .....तभी मैने एक ज़ोर डर शॉट मारा और पूरा लंड उसकी चुत मे ...बोला रंडी छीनाल किस किस से चुदेगी तेरी प्यास है की भुजती नही ....रश्मि ने मचलते हुए कहा राजा बस आप से ही चुद़ूँगी पूरी जिंदगी चूड़ना किसे कहते है आप ने ही तो बताया है.....है मेरे राजा जरा धीरे धीरे बहुत आच्छा लग रहा है चोदा और चोदा.......है स्वीट हार्ट .........उफफफ्फ़.......तभी उसकी बहन मधु का फोन आ जाता है ....औ वो फोन उठाकर बकबककने लगती है.......मधु तेरा होने वाला पती बहुत जानदार है काश के चोदता है मुझे सुनेगी ले सुन ......है ......अफ ....छोड़व ना .........काश के .....फाड़ डालो मेरी चुत को ....रंडी बना दे ......मेरी बहन को भी ऐसे ही चोदना ......मधु भी शायद मज़े लेकर इसे चुदाई का आनंद ले रही थी ......तभी रस्मी ने फोन लाउडस्पिकर पे डाल दिया मधु बोली मेरे जाना दीदी को बच्चा दे कर ही आना तुम्हारी प्यारी..........मैं जोश मे आगया और अश्मी को अपने गोद मे उठाकर काश काश के ढहहे मरने लगा ......रश्मि भी चुदवाने लगी उसके बूब्स पे मेरे ददांटो के निशान सॉफ नज़र आ रहे थे .....तभी वो अकड़ने लगी और एक चीख के साथ झाड़ गई............मैं भी दो चार ढाके लगा झाड़ गया ..........फिर हम एक दूसरे की बाँहो मे सो गए.

    ये हमारा शिमला मे आखड़ी दिन था. दोपहर हो रही थी मैं बार मे बैठ कर रूम के स्माल पेग ले रहा था. तभी रश्मि होटल के कमरे से नीचे आई. मैं उसको देखा और देखता रही गया उसने ब्लॅक कलर की शादी विद स्लीवलेशस ब्ल्ौसे क्या लग रही थी लेकिन कुछ परेशन लग रही थी मैने पूछा क्या हुआ तो वो बोली बाबूराम वापस आ गये है मुझे फोन किया है वापस बुला रहे है मैने बोला की बहन के यहाँ हू कल आ जवँगी लेकिन वो नही मन रहे बोलते है तुम आती हो की मैं अओ मैने जल्दी से बोल दिया की आच्छा मैं रात 9:00पीयेम तक आती हू वो बहुत परेशन थी वो रोते हुए बोली आज़ की रात माई आपसे पूरी तरह चूड़ना चाहती थी. लेकि बहुत डर रही हू कैसे पहुचेंगे हम.

    मैने उससे कहा परेशन मत हो. मैं कुछ कराता हू होटल के रेस्पेक्टिओं मे जाके चाँदी गर्रह के लिए टॅक्सी की फिर शाम 5 बज़े की फ्लाइट बुक कियओर वापस आके बोला की फटा फॅट तैयार हो जाओ हमे अभी निकला है.

    वो ज़ल्दी से सिंपल सा ब्लू कलर का टाइट फिटिंग शुत पहन के तैयार हो गई , सच मानिए ग़ज़ब लग रही थी वो. ह्म शाम सात बज़े मधु के फ्लॅट पे थे, मधु ने दरवाज़ा खोला और हमे देख कर मुस्कुरई मैने उसे सारी बात पहले ही मधु को समझा दी थी वहा से रस्मी फ्रेश हो कर अपने घर चली गई और मैं वही रुक गया की कही बाबूराम को शक ना हो जाए.

    राशि के जाने के बाद मैने मधु को देखा और वो मुस्कुरई और मैने उसको अपने बाहों मे काश लिया. और मेरे हाथ मधु के कमर से लेकर उसके चुतड़ों तक टहल रहे थे. मधु मेरी बाहों मैं कसमसें लगी.

    मधु: (कन्पाती हुई आवाज़ मैं) क्या कर रहे हो आप. मुझे आप के इरादे ठीक नही लग रहे. थोड़े दिन और सब्र कर लो. फिर मुझे अपनी बाहों मैं समेटे रखना.

    और ये कहते हुए मधु ने मेरे लिप्स पर एक छोटा सा किस कर दिया. मैने अपनी आँखों से मधु के आँखों मैं देखा. मधु की आँखें भी मेरी इसे हरकत से लाल हो चुकी थी.

    श जान अगर हम शादी कर ही रहें हैं. तो इसमे हराज ही क्या है.

    मधु: प्ल्स मेरे बात को संजने के कोशिश करो. मैं शुआग रात को तुम्हें अपना कुँवारापन गिफ्ट मैं देना छठी हूँ.

    मैं: श अच्छा ये बात है. चलो तब तक के लिए मुझे तुमसे थोड़ा प्यार ही करें दो.

    मधु मेरी ये बात सुन कर शरमा गये. और आकर के मेरे गोद मैं बैठे हुए मुझसे चिपक गये. मधु के पीठ को सहलता हुआ उसके के नेक पर अपने होंठो को रगड़ेन लगा. वो मेरी गोद मैं बेठी चटपटी जा रही थी. मधु के साँसें तेज़ी से चलने लगी.मधु के नेक को किस कराता हुआ उसके के क्लेआवगे को चूमने लगा. मधु मस्ती मैं आकर हे सीईइ उंह करने लगी

    आस जाना मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नही रही सकता.

    मधु: मैं भी आप के बिना नही रही सकती. आस मुज़ीईए जल्दी से अपने घरर ले चलो. मैं अब तुम्हारे बिना नही रही पाउंगी.

    मैं ने अपना एक हाथ आगे लाकर मधु के उँची चुचयों पर रख दया. और धीरे से दबा दिया. मधु के मूह से आ निकल गये. और वो मेरी बाहों मैं कसमसें लगी.

    मधु ने मेरे फेस को अपने दोनो हाथों मैं लेकर ऊपेर उठाया. और मेरी आँखों मैं देखने लगी. मधु तेज़ी से साँसे लेते हुए हाँफ रही थी. उसकी आँखें मस्ती के कारण पूरी तरहन खुल नही पा रही थी.

    मधु: ओह जानन्न तुम मुजीए क्या कर रहे हो. मैं बहक जाउगी.

    तो बहक जाओ ना. मुझे अपने रसीले होंठो को एक बार चूसें तो दो.

    मधु ने मस्ती मैं आकर अपनी आँखों को बंद करके अपने होंठो को मेरे होंठो पर रख दया. हम दोनो पागलों के तरहन एक दूसरे के होंठो को किस कर रहे थी. मधु मेरे गोद मैं बेठी मेरी बाहों मैं पीगलने लगी थी. मैने अपना हाथ उसकी चुचि से हाता कर धीरे -2 नीचे लाना शुरू कर दया. जैसे-2 मेरा हाथ नीचे आ रहा था. मधु के बदन मैं मैं वासना का टॉफ्फ़ान ज़ोर पकड़ रहा था. मधु का पूरा बदन कनप रहा था.

    मैं पागलो की तरह उसके गुलाबी रस भरे होंठो को चूस्ता हुआ अपना हाथ मधु के मखमले बदन पर सहला रहा था. धीरे - 2 मेरा हाथ उसके राइट टाइट पर आ गया. मधु के बदन मैं मस्ती के लहर दौड़ गये. मधु ने अपने होंठो को अलग करते हुए अपने फेस को मेरे चोरी सीना मैं छुपा लिया. और अपने गुलाबी होंठो को मेरे चोरी चेस्ट मैं रगड़ेन लगी.

    मैं भी अपने अप्पे से बाहर हो गया और मैने अपना हाथ सरका कर मधु के दोनो झंगों के बीच मैं रख दिया. मधु के गरम झंगों मैं जेसे ही मेरा हाथ गया मेरा लंड एक दम से तन गया. और मधु के चुतड़ों के ड्रार मैं पत्याला सलवार के ऊपेर से धँस गया. मधु के मूह से आ निकल गये. मधु ने अपने दोनो हाथों से मेरे श्रित को काश के पकड़ लिया.

    मधु: अहह क्ये कर रही हो अप्प्प मैंन्ननणणन् मूजी कुछ हूऊओ रहा हाीइ.

    मधु ने अपनी झंगों को काश के भींच लिया टंकी मेरा हाथ उसकी कुँवारी नाज़ुक चुत तक ना जा पाए. पर मैने धीरे -2 अपने हाथ से मधु के झंगों को शालता हुआ अपने हाथ को आगे बढ़ा रहा था.

    मधु ईतनी मस्त हो चुकी थी. की उसका बदन भी उसका साथ नही दी रहा था. उसके पैर ढीले पढ़ने लगी और मेरा हाथ मधु की चुत पर उसकी सलवार और पैंटी के ऊपेर से सात गया.

    मधु: अहह जनन्न्नुऊऊुुुउउ हतत्तत्त जऊऊऊ नहियीई तो मैंन्नणणन् अपनईए आप पर कबुऊ नहियीई रख पौँगीए. ओह प्लस्ससस्स जानुउऊुउउ

    और मैने मधु की बात पर ध्यान डाइ बिना. सलवार और पैंटी के ऊपेर से मधु की चुत को मसलिए जा रहा था. मधु के पैंटी मैं गीला पान होने लगा था. आख़िर कर मधु के पैर ढीले पढ़ गये.
    मैं लगभग मधु के ऊपर चाहता चला जा रहा था और वो भी मदहोश होती जा रही थी,
    तभी रश्मि का फोन आया की वो सकुशल पह्िच गई है, इसे बीच मधु ने अपने को उसे मदहोशी से बाहर निकल कर के मुझसे बोली जान मैं आप की ही हू और अपना कुँवारापन आपको गिफ्ट देना चाहती हू अपनी सुहागरात मे प्लीज़ मुझे अपना ये अरमान पूरा करने दो अगर आप आगे बढ़े तो मैं अपने पे काबू नही रख पवँगी और सब हो जाएगा, मैने कहा की मैं तुम्हारी बहुत इज़्ज़त और प्यार कराता हू ऐसा ही होगा और मैं उससे अलग हो कर वही सोफे पे लेट गया अगले दिन सुबह मैं अपने फ्लॅट पे आ गया,

    वहा बाबूराम ने मेरा स्वागत किया बोला सर घर पे सब ठीक है ना मैने कहा ह्म ठीक है वो मुझे अपने ड्राइंगरूम मे ले आया और रश्मि चाय ले आए बहुत सिंपल लग रही थी आज़ वो एक ग्रीन कलर के शुत मे बिना मेकप के, मुझे देख कर मुस्कुराइ और अंदर चली गई , मैं भी ज़ल्दी से चाय ख़त्म कर के अपने रूम मे चला गया और ज़्ज़लदी से फ्रेश हो ऑफीस चला गया, एधर कुछ दीनो काम मे इतना बिज़ी हुआ की 2 हफ्ते कहा बीत गये पता ही नही चला. एक दिन बाबूराम मेरे पास आया कुछ परेशान था वो उसे दिन बोला उससे दो दिन की छुट्टी चाहिए मैने कहा क्यू क्या बात है बोला गाँव जाना है कुछ ज़मीन का मामला है मैने छुट्टी दे दी. माई भी यही चाहता था क्यूंकी रस्मी के साथ वक्त गुज़ारे मुझे भी बहुत दिन हो गये थे.

    मैने रस्मी को फोन करके रात के लिए तैयार रहने को कहा बहुत खुश हो गई थी वो मेरी ये बात सुनकर.

    आगे की उसे रात की दास्ठान रस्मी की ज़ुबानी :

    आआदिय के आज़ रात मेरे साथ होने की बात सुनकर मैं बहुत खुश हुए और शाम का इंतज़ार करने लगी मैने कुछ आचका सा खाना पक्या फिर कारेब 8:30 पे नहाने को चली गई.

    में बाथरूॉमे में गयी फटाफट मैने अपने कपड़े उतरे फिर धीरे से मैने अपने ब्रा और पैंटी उतेरी और मैने शवर ऑन किया और खुशबूदार सभुन वोही मेरा फाओॉराते पेर्ज़ साहबुन से मस्त नहाने लगी मैं अपनी चिकनी चमेली पर खूब शॅमपू लगे और उसे मक्खन की तरह क्लीन और चिकना कर दिया, फिर में बिना टवल लिए नंगी ही अपने रूम आने आए, मैने अपने सारे बदन को निहारा और मैने रीड कलर की ग-स्ट्रिंग पैंटी पहनी और मॅचिंग ब्रा.

    अब में सोच में पड़ गयी की क्या पहनु.

    वन पीस या सलवार कमीज़ या नाइटी या होतपंतस & टी-शर्ट या सारी फिर मैने सोचा की क्यूँ ना सलवार सूट ही पहना जाए. मैने सलवार कमीज़ ली और डिसाइड किया के यही पहनुँगी.

    पहनी फिर मैने वो टाइट फिटिंग वाला रीड सलवार सूट पहना मुझे सलवार सूट पहनने में काफ़ी मशक्कत करना पाडी क्यूंकी फिटिंग काफ़ी टाइट थी. मैने अपनी फाओॉराते रीड कलर की लिपस्टिक निकली और वो मेरे नशीले गुलाबी होंठों पर लगाई अब में ऊपर से नीचे तक लाल ही लाल नज़र आ रही थी फिर मैने अपने बाल खुले रखे एक मदहोश करने वाली पेरफूं लगाया. और इतने में दरवाजे पर आदित्या ने नॉक किया.
    जैसे ही में जा कर दरवाजा खोला वो मुझे देखता ही रही गया उसका मूह खुला का खुला रही गया उसके मूह से लार टपकने लगी वो बीलूक़क भूके शेयर की तरह मेरे मुम्मो को घूर रहा था जो की आधे ही ढके हुए थे. मैने शरमाते हुए कहा.

    रश्मि: ऐसे की देख रहे है क्या में अच्छी नही दिख रही हू इस शुत में.

    आदित्या: तुम बाला की ख़ूसूरात लग रही हो.काषह.क़सशह..

    रश्मि : क्या काश

    Meri Jarurat - Indian Sex Story
     

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