गॉखुलधाम सोसायटी (अडल्ट वर्ज़न) - 249

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Oct 20, 2016.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

    //krot-group.ru बाथरूम में अंदर घुसते ही बबिता छोटे से स्लॅप को एक हाथ से पकड़ के खड़ी हो गयी और दूसरे हाथ को अपनी तेज चलती साँसों से घूरने लगी , उसने अपने हाथ को अपने चेहरे पे पास किया और अपने हाथ को सूँघा और उससे सुंगते ही उसकी आँखें बंद हो गयी , उसका दिल जोरों से धड़कने लगा साँसें ज़ोर ज़ोर से उप्पर नीचे होने लगी जिससे उसकी चट्टी ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर होने लगी , उस हाथ को सुंगते हे बबिता का हाथ अपनी गर्दन पे चलने लगा . मानो उसे खुशबू में ही मदहोश हो गयी हो , उसकी नाक से निकलती धीरे साँसें बाथरूम में गूंजने लगी . गर्दन को एक हाथ से सहलते हुए अपना हाथ शर्ट के उप्पर से अपने चुचों से होते हुए नीचे आने लगे और अपनी पेंटी के उप्पर आ गये जो पूरी गीली पड़ा थी , उसकी उंगलियाँ अपनी चुत को हल्के हल्के घिसने लगी , साँसें और ज्यादा भारी हो गयी , आँखें बंद थी , दिमाग में उसे लंड की छवि बनी हुई थी जो उसने कुछ देर पहले पकड़ रखा था नाक से जाती शरीर को हिलती वो खुशबू जो उसके हाथ पे चिपकी हुई थी , " हां.. हां. " मुंह से निकलती गरम साँसें इस कदर गरमी निकल रही थी की बबिता की उंगली चुत को पासीओनलिटी बहुत पॅशनेट्ली घिस रही थी जिससे उसका पूरा शरीर हिल रहा था की तभी गेट खुलने की आवाज़ उसके कानों में पड़ा..

    आवाज़ सुनते ही बबिता की साँसें अटक गयी और उसकी आँखें खुल गयी उसने फौरन अपना हाथ अपने शरीर से हटाया और फौरन पीछे घूम गयी और पीछे घूमते ही उसकी आँखों को एक झटका लगा , उसकी तेज चलती साँसें मानो थाम से गयी , शरीर कांपने सा लगा उससे ज्यादा उसके होंठ कांप रहे थे. उसकी आँखों के सामने जेठालाल बनियान और कच्चे में खड़ा था , ये बबिता के लिए ताज्जुब की बात थी ही उसके साथ साथ जो हाल जेठालाल का नीचे से था उससे उसका ज्यादा बुरा हाल था , वो फूला हुआ लोड्‍ा इतना बड़ा और मोटा की वो बाहर से दानव जैसा दिख रहा था पर हैरान और हिला देने वाली बात ये थी की जेठालाल का लोड्‍ा उसके कच्चे से आधा बाहर था और आधा अंदर , बाहर वाले हिस्सा का सूपड़ा तक बबिता साफ देख पा रही थी वो आधा बाहर निकला हुआ लोड्‍ा टेडा था थोड़ा और जेठालाल के पियेट की नबी तक पहुंचा हुआ था जो की धीरे धीरे झटके से कहा रहा था. इस लंड को देख के बबिता की हालत खराब हो गयी उसने जेठालाल के लंड से नज़र आता के उसके चेहरे की तरफ देखा . जेठालाल में ना जाने किस बात की शक्ति आ गयी थी की उसके चेहरे पे पूरा विश्वास था. कोई डर नहीं था . वो धीरे धीरे चलते हुए छोटे से बाथरूम में जा घुसा और बबिता से कुछ ही दूर पे जा रुका . बबिता जेठालाल को इतने करीब महसूस करके और तेजी से साँसें लेने लगी. उससे अंदर ही अंदर लगने लगा की जो मज़ाक उसने किया उसका नतीज़ा ये होगा ये उससे पता ना था.

    " जेता.. जी.. " बड़ी मुश्किल से उसने अपनी नजरें जेठालाल से नजरें हटा के साइड कर ली , जेठालाल कुछ ना बोला और बस बबिता को देखता रहा कुछ पल दोनों यूँ ही खड़े रहे , पर बबिता की हालत बहुत खराब हो रही थी , उसकी टाँगों के बीच उसकी चुत में अजीब सी घुटन , अजीब सी खुजली , अजीब सी चीज़ महसूस हो रही थी इसलिए बार बार वो अपनी टाँगों को मोड़ और फैला रही थी .
    जेठालाल बबिता की हालत को शायद समझ रहा था पर उसकी नज़र सिर्फ़ बबिता के चेहरे पे थी जो सुर्ख लाल हो चुका था , वो उसके चेहरे पे कहीं से कहीं तक गुस्सा नहीं देख रहा था कुछ और था जो हर इंसान के चेहरे पे हो अगर वो इस हालत में फँसा होगा तो और वो चीज़ थी कशमकश , जो की जेठालाल बबिता के चेहरे पे साफ देख पा रहा था , उसका लाल सुर्ख चेहरा , उसकी चलती वो साँसें बबिता की दशा साफ बता रही थी की वो किस कदर इस चीज़ से फाँसी हुई जूज रही है और जेठालाल ने बहुत जल्द पढ़ लिया और उसने फिर अपना अगला कदम उठाया.

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    उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और बबिता का हाथ पकड़ के अपने कच्चे से बाहर निकल रहे नंगे लंड पे उसका हाथ रख दिया , बस जैसे ही बबिता का हाथ गरम लंड पे पड़ा जिसकी नसें , जिसकी मोटाई और जिसकी ताक़त कड़क पान का एहसास हुआ उसी पल बबिता के शरीर में करेंट दौड़ गया उसने फौरन अपनी नजरें जेठालाल की तरफ घुमाई और वो जेठालाल को घूरने लगी , उसकी साँसें इस कदर भारी हो गयी की एक पल उससे लगा की वो बिना साँसों के मर ही जाएगी , उसने अपनी नज़र नीचे झुकाई तो देखा की उसका हाथ लंड के उप्पर पड़ा है वो अपना हाथ वहाँ से हटाना चाहती थी लेकिन ना हटा पाई बल्कि उससे पता ही चला की कब बबिता के हाथ ने लंड की नसों को महसूस करते हुए उससे पकड़ लिया . वो खुद हैरान थी की ये कैसे हुआ . बबिता का वही चिपचिपा हाथ जेठालाल के लंड को पकड़े बैठा था .

    " अब कैसा लगा. " जेठालाल में इतना कहा तो बबिता ये सुन के उसकी शकल देखनी लगी , जेठालाल ने बबिता के उप्पर अपना हाथ रख के उससे दबा दिया जिससे बबिता की पकड़ लंड पे और ज्यादा पढ़ गयी , जिससे महसूस करते ही जेठालाल के मुंह से एक हल्की आ निकली और उसने आँखें बंद कर ली और यही बबिता ने भी किया उसने दूसरे हाथ से अपनी शर्ट के स्तनों कस के पकड़ लिए , कुछ पल ऐसे ही खड़े रहने के बाद जेठालाल ने अपना हाथ बबिता के हाथ के उप्पर से हटा लिया , हाथ हटाने के बाद भी बबिता की पकड़ लंड से हल्की नहीं हुई उसने अभी भी उससे वैसा ही पकड़े रखा.

    जेठालाल ने हिम्मत और बड़ाई और आगे तरफ कर बबिता के होठों पे अपने होंठ रख दिए और उन्हें ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा , कुछ पल बबिता बिना कुछ करे खड़ी रही फिर उसके होंठ शायद अपने काबू में ना रही पाया और उसके होंठ चलने लगे जेठालाल के होठों के साथ शायद अब वो भी इस काशकश को खत्म कर देना चाहती थी इसलिए उसने भी अपने होठों को पीछे नहीं रखा और दोनों एक दूसरे के होठों को बुरी तरह से चूसने लगे . नीचे बबिता का हाथ जेठालाल के लंड पे था वो वहाँ हिलने लगा उससे सहलाने लगा और उप्पर दोनों होंठ के साथ अपनी जीभ का उसे करने लगे चाटने लगे जीभ और होंठ के साथ एक दूसरे के चेहरे को किसी पागल भूखे शरीर की तरह एक दूसरे को कहा जानना चाहते हो ऐसे चूस रहे थे वहीं बबिता का हाथ लंड पे था और वो उससे सहला रही थी उप्पर नीचे , बबिता को इतना मजा आ रहा था की वो अपने आप को रोक ही नहीं पा रही थी वहीं जेठालाल को उससे दोगुना मजा आ रहा था उसके सख्त लंड पे इतने सॉफ्ट हाथ घूम रहे थे तो उसका तो बुरा हाल हो रहा था उससे बर्दाश्त करना भारी हो रहा था वो जनता था की उसका उफनता लंड फिर बट्मीज़ी करेगा और वही हुआ उसका लंड ज़ोर ज़ोर से झटके खाने लगा . बबिता इस जाहतकों से समझ गयी की जेठालाल का निकालने वाला है उसने फौरन सुपाडे के आगे अपने हाथ को कटोरी सा बना कर उसके निकलते विरया की बौछार अपने हाथ में लेने लगी .

    लंड से निकलते बौछार उसके हाथ पे पढ़ रही थी जो बबिता को और पागल बना रही थी और वो जेठालाल को और बुरी तरह से किस कर रही थी अपनी जीभ से उसके मुंह के अंदर घूमने लगी , लंड से निकलती पिचकरी का वीर्य उसके हाथ में इकट्ठा हुआ और कुछ नीचे गिर गया , वीर्य की मात्रा इतनी ज्यादा थी की बबिता को विश्वास नहीं हुआ . जब वीर्य की धार बंद हुआ तो बबिता ने जेठालाल को अपने से अलग किया क्यों की वो अपने हाथ को देखना चाहती थी . जेठालाल को थोड़ा अजीब लगा जब बबिता ने उससे अलग किया लेकिन अगले ही पल जब उसने तेज चलती साँसों से बबिता का कारनामा देखा तो उसके लंड ने ज़ोर ज़ोर से झटके खाने शुरू कर दिए जो काफी ज्यादा अभी भी एक दम सख्त था.
     
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