चाची की बातों ने सेक्स जगाया

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Feb 20, 2018.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

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    प्रेषक : गुमनाम .

    हैल्लो दोस्तों, आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों के सामने मेरा एक नया सेक्स अनुभव को लेकर आया हूँ। दोस्तों आप में आपकी सेवा में यह जो सच्ची घटना लेकर आया हूँ इसमे मुझे अपनी गाँव की चाची को चोदने में मुझे बहुत मज़ा आया था। फिर उनकी चुदाई करने के बाद मेरी हालत एक ऐसे बाघ जैसी हो गयी थी जिसके मुहं को एक बार खून का स्वाद लग गया हो और अब में तो चुदाई के लिए किसी चूत के चक्कर में ही रहने लगा था। अब में हमेशा मन ही मन सोचते हुए उस चूत की चुदाई करके उसकी संतुष्टि और अपने मन को बड़ा खुश महसूस करने लगा और इसलिए अब मुझे उस किसी कामुक चूत के विचार कुछ ज्यादा ही आने लगे थे। फिर इसी बीच एक दिन वो गर्मियों के दिन थे और में अपने घर की छत पर सोया हुआ था और उसी छत पर मेरे घर में ही किराए से रहने वाली एक औरत भी सोई हुई थी, जिसको में हमेशा चाची कहता था। दोस्तों गरमी ज्यादा होने की वजह से मुझे नींद नहीं आ रही थी, लेकिन फिर भी में अपनी दोनों आँखों को बंद करके नींद आने का इंतजार कर रहा था।

    दोस्तों उसी छत के दूसरे हिस्से में मेरी वो किराएदार चाची और उनके पति भी सोए हुए थे और देर रात को करीब 12 बजे मैंने कुछ आहट को सुना। अब मैंने सुना कि मेरी वो चाची अपने पति से बड़ी ही धीमी आवाज में कुछ बातें कर रही थी। दोस्तों मुझे अब एकदम साफ सुनाई दिया वो अपने पेटीकोट को ऊपर करके, मेरे चाचा को उनकी चुदाई करने के लिए कह रही थी, लेकिन उनके पति को चुदाई करने से ज़्यादा पैसे कमाने में ज्यादा रूचि थी। अब चाचा ने उनके पेटीकोट को नीचे करके उनकी चूत को वापस ढक दिया था। उनको चुदाई करने के उस काम में बिल्कुल भी रूचि नहीं थी। फिर मैंने उन दोनों का वो नाटक देखकर मन ही मन सोचा कि उनके पति को सेक्स में कोई रूचि नहीं है और मेरे हिसाब से वो छक्के थे। दोस्तों क्योंकि जिस आदमी का लंड अपने पास लेटी औरत जो अपनी चुदाई करने के लिए तैयार है, उसकी चूत को देखकर खड़ा ना हो उस मर्द को हम छक्का कहे तो कोई गलत बात नहीं है। दोस्तों जैसा कि आप सभी लोग जानते है कि में अपने घर में अकेला ही रहता हूँ और मेरे परिवार के सदस्य कहीं और रहते है और में अपने घर की देखभाल के लिए यहीं पर अकेला रहता हूँ।

    दोस्तों उसके बाद मेरी चाची अपनी चुदाई के लिए तरसती अपनी प्यासी चूत को लिए सो गई और में भी उनको देखकर कुछ बातें सोचते हुए सो गया, लेकिन अब मेरी सोच उनके लिए बिल्कुल बदल चुकी थी और में उनकी उस मजबूरी, उस अधूरेपन और उस कमी को बहुत अच्छी तरह से समझ चुका था और अब में उसकी चुदाई के सपने विचार बनाने लगा था और वही बातें सोचकर मुझे पता नहीं कब नींद आ गई। अब में अपनी चाची के साथ बहुत हंसी मजाक बातें करके हमारे बीच की दूरी को कम करने लगा था और अब में हर समय उनकी चुदाई के सपने देखने लगा था। फिर दो दिन के बाद भगवान ने मेरे मन की बात को सुनकर मुझे एक बहुत ही अच्छा मौका दे दिया और मेरी अच्छी किस्मत से मेरी चाची के पति उनकी खेती के काम से अपने गाँव चले गये। अब पूरे घर में सिर्फ़ में और मेरी चाची ही थी और में मन ही मन दोनों को पूरे घर में अकेला देखकर बहुत खुश था, क्योंकि हम दोनों के मन के अंदर सेक्स की वो भूख एक जैसी थी, लेकिन हम दोनों में से कोई भी अपने मन की उस बात को खुलकर किसी को बता नहीं पा रहे थे और हम दोनों चुप ही रहे।

    दोस्तों किसी बात को सोचकर में शांत ही रहा, मेरी बिल्कुल भी हिम्मत नहीं हुई। वैसे मेरे मन में आगे बढ़ने की बहुत इच्छा थी और फिर रात को करीब आठ बजे अचानक से बिजली भी चली गई, जिसकी वजह से मुझे गरमी ज्यादा महसूस होने पर में हर बार की तरह में उस रात को भी छत पर जाकर लेट गया था। फिर कुछ देर बाद मेरी चाची भी ऊपर आ गई और मेरे बिस्तर से थोड़ी दूरी पर ही चाची ने भी अपना बिस्तर लगा लिया, जहाँ से में उनको उस हल्के अंधेरे में भी साफ देख सकता था। अब हम दोनों में से किसी को नींद नहीं आ रही थी और हम ऐसे ही इधर उधर करवटे बदल रहे थे, लेकिन मुझे यह भी बहुत अच्छी तरह से पता था कि अगर चाची को एक बार खुलकर अपने मन की बात के बारे में बता दिया जाए तो वो बड़े आराम से तैयार हो सकती थी। फिर मैंने यह बात अपने मन में सोचकर हिम्मत करके बिना समय गंवाये अपने हाथ से चाची के हाथ को थोड़ा छू लिया, लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोली और वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा दी। अब में तुरंत समझ गया कि मेरा सोचना समझना एकदम ठीक वैसा ही निकला। उनको मेरे छूने की वजह से किसी भी तरह की कोई भी आपत्ति नहीं है, जिसका मतलब साफ था कि उनके में भी वही सब चल रहा है?

    अब जो मेरे मन में भी था, में उनके थोड़ा सा पास गया और फिर उनके बिल्कुल नज़दीक चला गया जहाँ से हम एक दूसरे की उस गरम गरम तेज गति से चली रही सांसो को बहुत आराम से महसूस कर रहे थे। फिर मैंने सही मौका देखकर अपना एक हाथ उठाकर उनकी कमर पर रख दिया और उनके कूल्हे में चिकोटी काटी, लेकिन वो अब भी शांत ही रही। अब तक बिजली आ चुकी थी और फिर उसी समय चाची ने मुझे इशारे से अपने साथ नीचे चलने को कहा। अब में खुश होकर तुरंत तैयार हो गया और फिर वो मुझे सीधे नीचे अपने बेडरूम में लेकर जा पहुंची और वहां पर पहुंचते ही वो मुस्कुराती हुई अपनी साड़ी के पल्लू को अपनी छाती से हटाने लगी, लेकिन मैंने उन्हे ऐसा करने से रोक दिया और उन्हे एक कटोरी में तेल लाने को कहा और वो झट से जाकर तेल लेकर आ गई। अब मैंने उन्हे अपनी बाहों में भरकर बिस्तर पर लेटा दिया और फिर में उनके पेटीकोट को ऊपर करके उसके अंदर घुसने लगा।

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    दोस्तों तेज गरमी होने की वजह से पसीने से उनके दोनों पैर चिपचिपे से हो रहे थे, लेकिन मुझे वो अब भी बहुत अच्छा लग रहा था। अब में धीरे धीरे उनके पैर को चाटता हुआ अब ऊपर की तरफ बढ़ने लगा था और जब में उनकी दोनों गदराई हुई जांघो के बीच पहुँचा तब जाकर मुझे उनकी चुदाई के लिए प्यासी चूत के दर्शन पहली बार हुए। अब मैंने उसी समय उनकी चूत को चाटना शुरू किया और फिर दस मिनट तक मैंने चाची की चूत को चाटता रहा। फिर इस बीच में उनकी चूत में अपनी एक उंगली से तेल भी लगा रहा था और अपनी ऊँगली से उनकी चूत की चुदाई भी करने लगा था। अब वो जोश में आकर झड़ गई और उसने अपना सारा पानी मेरे चेहरे और छाती पर छोड़ दिया। फिर में बाहर निकला और उस चूत रस को अपनी जीभ से चाटने लगा। फिर कुछ देर बाद मैंने उनको वो रस मेरी छाती से चाटकर साफ करने को कहा और वो बिना कोई हिचकिचाहट के अपने ही रस को चाटने लगी थी। अब में अचानक उसको पटककर उसके ऊपर चढ़ गया और उसके दोनों रसभरे होंठो को चूसने लगा और एक हाथ से उसके ब्लाउज के हुक को खोलने लगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

    अब बिना देर किए मैंने उसकी ब्रा को भी खोल दिया और फिर मैंने उसको कहा कि तुम मुझे अपने बच्चे की तरह इस तरह गोद में लो जैसे तुम अपने बच्चे को दूध पीला रही हो। अब वो मेरे कहते ही तुरंत अपना आसान मारकर वैसे ही बैठ गयी जैसा मैंने उनको कहा था और में उसके बड़े आकार के लटके हुए बूब्स के एक निप्पल को अपने मुहं में भरकर उसको चूसने लगा था और अपने एक हाथ से उसके होंठो को सहला रहा था और दूसरे हाथ से एक बूब्स को दबाकर उसका रस निचोड़ रहा था। फिर करीब बीस मिनट के बाद जोश की वजह से उसके दोनों निप्पल पत्थर के जैसे सख्त हो गए, उसके चेहरे से साफ पता चल रहा था कि अब ज्यादा देर उसके लिए भी रुकना मुश्किल होता जा रहा था। अब मैंने बिना देर किए उसको खड़ा करके उसके सारे कपड़े खोल दिए और उसको उल्टा लेटाकर, उसकी गांड में अपने लंड को डालने की तैयारी करने लगा था, लेकिन वो डर रही थी कि कहीं उसकी गांड फट ना जाए, क्योंकि मेरा लंड अब तनकर सात इंच लंबा और तीन इंच मोटा हो चुका था और मुझे बाद में पता चला कि वो पहली बार गांड में किसी का लंड ले रही थी।

    अब मैंने धीरे धीरे उसकी गांड में अपने लंड को डालना शुरू किया और जब मेरा लंड दो इंच गया, तब वो दर्द से करहाने लगी थी और उसके मुहं से ऊईईईईई आहहह्ह्ह मर गई मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है, की आवाज़ करने लगी थी। अब मैंने उसके दर्द को देखकर अपने लंड को उतने में ही छोड़कर एक चम्मच तेल उसकी गांड के छेद में डाल दिया, जिसकी वजह से उसकी गांड का छेद चिकना होकर उसको दर्द कम होने लगा था और फिर में धीरे धीरे एक बार फिर से अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा था। फिर करीब आठ दस झटके में मेरा लंड उसकी गांड में था और अब उसकी कसी हुई गांड से थोड़ा सा खून भी आने लगा था, लेकिन मैंने अब भी धक्के देना बंद नहीं किया। दोस्तों इस तरह से मैंने उसको करीब दस मिनट तक कभी हल्के कभी तेज धक्के देकर उसकी गांड मारी। वो मेरा अपनी चाची के साथ ऐसा पहला मज़ेदार अनुभव में से एक था। फिर मैंने उसको उसके बाद सीधा लेटाकर दस मिनट तक उसकी चूत में अपने लंड को डालकर जोश में आकर बड़ी तेज गति से धक्के देकर चोदा और उसकी चूत के छेद को पहले से ज्यादा बड़ा कर दिया।

    दोस्तों उसको अब एक साथ दोनों तरफ से मज़े लेने पर बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था और करीब पन्द्रह मिनट के बाद में धक्के देते हुए झड़ गया और मैंने उसकी चूत में ही अपना पूरा वीर्य निकालकर अपने वीर्य से चूत को पूरा भर दिया। अब तक चाची की चूत ने भी अपना पानी छोड़कर उनके जोश को भी ठंडा कर दिया था और इसलिए अब हम दोनों का वो जोश वीर्य के रूप में चाची की चूत से बहता हुआ बाहर आने लगा था और मेरा वीर्य हर एक धक्के के साथ चाची की चूत से बाहर आता गया, जो बहते हुए उनके कूल्हों के बीच में जा पहुंचा और फिर उसके बाद पूरी रात वैसे ही अपने लंड को उसकी चूत में ही अंदर छोड़कर हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर लेट गये। फिर कुछ देर बार उन्होंने अपनी एक मेक्सी निकाली जो आगे से खुलती थी, उसमे हम दोनों एक साथ चिपककर दोबारा चिपककर घुस गये और जब भी रात को मेरी नींद खुलती में उसकी चूत में अपने लंड को डालकर चुदाई करने लगता और चाची के दोनों निप्पल को मैंने पूरी रात दबाया और ना जाने कब में सो गया। फिर सुबह हम दोनों उठे मैंने देखा कि वो चेहरे से बहुत खुश पूरी तरह से संतुष्ट नजर आ रही थी और हम दोनों ने पहले कुछ देर होंठो को चूसा, उसके बाद हम दोनों एक ही साथ टॉयलेट में चले गये।

    फिर हम दोनों ने एक दूसरे के बदन को पानी डालकर साफ किया और हम साथ में ही नहाये और फिर उसके बाद हम बिना कपड़े पहने बाहर वापस कमरे में आ गए और दोबारा मज़े मस्ती करने लगे थे। फिर कुछ देर बाद हम दोनों ने पूरी तरह से जोश में आकर चुदाई वो खेल दोबारा खेलना शुरू किया जिसका हम दोनों को बड़ा मज़ा आया और हर बार की चुदाई में अब वो मेरा पूरी तरह से खुलकर साथ दे रही और में अपनी चाची का वो जोश देखकर चकित और खुश भी था। दोस्तों अब मुझे एक प्यासी चूत और मेरी चाची को उनकी चूत की आग को बुझाने के लिए मेरा दमदार लंड मिल चुका था, जो हर बार उनकी चूत की मस्त चुदाई करके उसकी आग को बुझाकर ठंडा करने के लिए हमेशा तैयार था। दोस्तों उन दो दिनों तक जब तक मेरे चाचा वापस नहीं आ गए मैंने उनको बहुत बार चोदा और हर बार पूरी तरह से संतुष्ट किया। अब जब भी मेरी चाची के पति किसी काम से उनके गाँव जाते है हम अपने सेक्स की आग को जंगली जानवर की तरह हर तरीके से चुदाई के मज़े लेकर पूरा करते है और वो भी मेरा हर बार पूरा पूरा साथ देती है और में खुश होकर उनकी चुदाई का वो काम पूरा करता हूँ ।।

    धन्यवाद .

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