चाची की चुदाई उनके कमरे में अपने मोटे लंड से की

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Aug 30, 2017.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

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    हेलो दोस्तों मेरा नाम बिरजू है। दोस्तों मेरा घर कटिहार (बिहार) में पढता है। मैं जॉइंट फेमिली में रहता हूँ। भरा पूरा परिवार है। घर में दादा, दादी, चाचा, चाची, भैया भाभी, मेरी बहने और सब लोग मिलाकर कुल 40 लोग इस परिवार में है। मैं इस वक्त 20 साल का हूँ और पूरी तरह जवान हो गया हूँ। आज आपको अपनी चाची की चुदाई के बारे में बताने जा रहा हूँ। मेरी चाची का नाम चन्द्रकला था। चाची बहुत गोरी और सुंदर औरत थी। 30 साल की एक जवान, आकर्षक नवयौवना हूँ। उनका बदन भरा हुआ, गठीला और सुडौल था। फिगर कमाल का था। उनकी आँखें बड़ी बड़ी और बेहद खूबसूरत थी। दोस्तों मैं तो उनको एक नजर देख लेता था तो बस देखता ही रह जाता था। उनका चेहरा गोल था और रंग बहुत गोरा था। चाची के होठ तो वाकई बेहद सेक्सी और ताजे गुलाब की पंखुड़ी की तरह थे। वो जब बोलती थी तो लगता था की फूल झड़ रहे है। साड़ी के उपर से ही चाची के कर्वस दिखाई देते थे। वो बहुत सेक्सी और हॉट माल लगती थी। 38, 30, 34 का फिगर था उनका। छरहरा और बिलकुल फिट। चाची को सेक्स करना बहुत पसंद था।
    चाचा का मोटा लंड खाना उसको बहुत पसंद था। इसके अवाला उनको नई नई चुदाई कहानियां पढना और ब्लू फिल्म देखना बहुत पसंद था। जब चाचा घर पर नही होते थे वो अक्सर अपनी चूत में ऊँगली करके मजा ले लेती थी। चाची की चूचियां बहुत बड़ी बड़ी रसीली और हॉट थी। इतने खूबसूरत दूध थे की वो खुद ही कई बार अपने मुंह में चूची लगाकर चाट लेती थी। उनकी निपल्स खूब बड़ी बड़ी थी और उसके चारो तरह काले काले बड़े बड़े गोले थे जो बहुत कामुक लगते थे। बिलकुल मलाई की तरह मुलायम चूचियां थी। चाची के होठ बहुत ही रसीले थे बिलकुल संतरे जैसे लगते थे। चाचा तो उनके होठ चूस चूसकर उनकी चूत मारते थे। खुले बालों में चाची साक्षात काम की देवी लगती थी।



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    दोस्तों मेरी तीन चाचियों में चन्द्रकला चाची ही सबसे जादा खूबसूरत और पढ़ी लिखी थी। वो एम् ए (अंग्रेजी) से पास थी। उसको जो भी काम होता था मुझसे ही बोलती थी। चाची सरकारी नौकरी के फॉर्म्स भर्ती रहती थी और मैं ही अक्सर उनके फॉर्म्स भरने बजार जाता था। एक बार रविवार का दिन था। चाचा और चन्द्रकला चाची अपनी कमरे में चुदाई कर रहे थे। फिर कुछ देर बाद चाचा ने अपना माल चाची की चूत में छोड़ दिया। फिर दोनों नंगे नंगे ही सो गये। मुझे अंग्रेजी की डिक्शनरी का काम पड़ गया था। उनके कमरे का दरवाजा भी खुला हुआ था। अचानक मैं अंदर चला गया। देखा की चाचा और चन्द्रकला चाची पूरी तरह से नंगे थे। चाचा चाची के उपर ही उनको बाहों में भरकर सो रहे थे। चन्द्रकला चाची पूरी तरह से नंगी थी और वो भी आँखें बंद करके लेटी हुई थी। उनकी चूचियां बेहद लाल लाल अनार के जैसी थी और बला की खूबसूरत थी।
    मैंने डिक्शनरी उठा ली और आने लगा तो मन हुआ की क्यों ना चन्द्रकला चाची तो कुछ देर ताड़ लिया जाए। मैं वहीँ पर खड़ा हो गया और चाची को देखने लगा। तभी उन्होंने मुझे देख लिया और जल्दी से बैठ गयी और अपना ब्लाउस पहनने लगी। मैं जल्दी से वहां से भागा। कुछ दिन तक मेरी चन्द्रकला चाची का सामने करने ही हिम्मत नही हुई। एक दिन जब उनके कमरे में कोई नही था उन्होंने मुझे बुलाया।


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    "बिरजू!! सच सच बता की तूने उस दिन क्या देखा????" चन्द्रकला चाची बोली
    "सब कुछ मैंने देख लिया. आप चाचा ने टांग फैलाकर चुदा रही थी" मैंने कहा
    "चाची! मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ" मैंने बोल दिया।
    ये बात सुनकर वो तमतमा गयी और उन्होंने मुझे खींच कर एक चांटा मारा।
    "पागल हो गये हो?? दिमाग खराब है तेरा बिरजू???" चाची गुस्सा होकर बोली
    फिर मैं वहां से चला आया। अब चाची मुझसे कम बात करती थी। क्यूंकि वो जान गयी थी की मैं उनसे प्यार करने लगा लूँ और अगर ये बात घर में किसी को मालूम हुई तो बहुत बड़ा बवाल हो सकता है। दोस्तों एक दिन चन्द्रकला चाची के सिर में पता नही कैसी लोहे की एक कील घुस गयी और खून बहुत जादा मात्रा में बहने लगा। उस वक्त घर में सिर्फ मैं ही था। चाचा और बाकी लोग बाहर थे। मैंने जल्दी से चाची को मोटरसाईकिल पर बिठाया डॉक्टर के पास ले जाकर उनकी मरहमपट्टी करवाई। ये कहानी आप इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। फिर चन्द्रकला चाची मुझसे पट गयी। एक दिन उन्होंने मौका देखकर मुझे बुलाया और दरवाजा अंदर ने बंद कर लिया। मैं समझ गया की आज चन्द्रकला चाची मुझे अपनी चूत देंगी। वो सीधा मुझे अपने बेडरूम में ले गयी। उन्होंने मुझे बाहों में भर लिया और मीठी मीठी बात करने लगी।
    "बिरजू!! मेरे भतीजे! तू तो बहुत प्यारा है रे। मैंने बेकार में तुजझे बुरा भला कहा। आज तू मुझसे प्यार कर सकता है" चन्द्रकला चाची बोली
    फिर दोस्तों हम दोनों ने एक दूसरे को बाहों में भर लिया और किस करने लगे। हम दोनों बिस्तर पर पसर गये थे और एक दूसरे को प्यार कर रहे थे। मैं तो चाची के सेक्सी होठो को पी रहा था। आज के लिए वो मेरी औरत बनने को राजी हो गयी थी। वो भी मेरे होठ मुंह चला चलाकर चूस रही थी। उनकी सांसो की ताजगी मैं महसूस कर रहा था। काफी देर तक मैंने उनका चुम्बन लिया। अब मेरा 9" का मोटा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था।
    "चाची ब्लाउस उतारो" मैंने कहा
    फिर चन्द्रकला चाची अपने ब्लाउस की बटन खोलने लगी। इधर मैंने अपनी टी शर्ट जींस उतार दी। मैंने कच्छा भी निकाल दिया। दोस्तों चाची के नंगे बूब्स देखकर तो मेरा दिमाग की खराब हो गया। इतने खूबसूरत और बड़े बड़े 38" के दूध थे उनके। मैं तो हैरान था और हाथों से उनकी चूची को सहला रहा था। चाची "ओह्ह माँ..ओह्ह माँ.उ उ उ उ उ..अअअअअ आआआआ.." की आवाजे निकालने लगी। चन्द्रकला चाची की चूचियां बेहद खूबसूरत थी। इतने सेक्सी बूब्स मैंने आजतक नही देखे थे। फिर मैंने अपने हाथों से उनके दूध दबाने लगा और मुंह में लेकर चूसने लगा। चाची सिसकने लगी और लम्बी लम्बी सांसे भरने लगी। मैं वासना में पूरी तरह से अंधा हो गया था। जल्दी जल्दी मैं चन्द्रकला चाची के बूब्स को पी रहा था। बिलकुल मक्खन जैसे दूध थे उनके।


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    दोस्तों मैं जल्दी से अपनी खूबसूरत चन्द्रकला चाची को चोद लेना चाहता था। मैं आँखें बंद करके उनके दूध पी रहा था। चाची "ओहह्ह्ह.ओह्ह्ह्ह.अह्हह्हह.अई..अई. .अई. उ उ उ उ उ." बोलकर तडप रही थी और कराह रही थी। उनको भी बहुत मजा आ रहा था। कई बार मेरे दांत उनकी छातियों में गड जाते थे। उनको दर्द होता था पर वो बर्दास्त कर लेती थी। मैंने बदल बदल कर उनकी दोनों चूचियों को पी लिया और चूस लिया। अब मुझे उनकी हरी भरी चूत मारनी थी। फिर उन्होंने अपनी साड़ी और पेटीकोट भी निकाल दिया। अपनी पेंटी चन्द्रकला चाची ने खुद ही खोल डाली। अब वो पूरी तरह से नंगी थी और बला की सेक्सी माल लग रही थी।
    "लो चाची मेरा लंड चूसो" मैंने कहा
    दोस्तों फिर मैं आराम से लेट गया और चन्द्रकला चाची मेरे लंड को हाथ में लेकर जल्दी जल्दी फेटने लगी। मैं उ उ उ उ उ..अअअअअ आआआआ की आवाजे निकाल रहा था क्यूंकि मुझे बहुत सेक्सी फील हो रहा था। चाची तो 1 नम्बर की चुदक्कड़ की आयटम निकली। वो जल्दी जल्दी बिना रुके मेरे लंड को फेट रही थी। मुझे भी बड़ा सेक्सी महसूस हो रहा था। धीरे धीरे मेरा लंड 9" का हो गया और पूरी तरह से खड़ा हो गया था। खूब मोटा और तंदुरुस्त लंड लग रहा था। फिर चाची लेट गयी और मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी। मुझे इतना मजा आजतक जिन्दगी में नही आया था। चाची तो जल्दी जल्दी मुख मैथुन कर रही थी। इस तरह वो चूस रही थी जैसे कोई देसी रंडी हो। हाथ से वो मेरा लंड फेट भी रही थी। मुझे जन्नत जैसा मजा मिल रहा था। इस तरह उन्होंने 20 मिनट तक मेरा लंड मुंह में लेकर चूसा। फिर दोनों पैर खोलकर लेट गयी।
    "बिरजू!! चल बेटा जल्दी से मुझे चोद। अपना लंड मेरी चुद्दी में जल्दी से डाल दे। अब मुझसे और इंतजार नही होता है" चन्द्रकला चाची बोली। ये कहानी आप इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

    दोस्तों मैंने जल्दी से उनके भोसड़े में अपना लंड डाल दिया और उनको चोदने लगा। चाची ने खुद ही अपने दोनों पैर उपर हवा में उठा लिए। वो इस समय मेरे सामने नंगी थी और बेहद खूबसूरत माल लग रही थी। चन्द्रकला चाची "आआआअह्हह्हह...ईईईईईईई..ओह्ह्ह्..अई. .अई..अई...अई..मम्मी.." की कामुक आवाजे निकाल रही थी। मैं जल्दी जल्दी उनको पेल रहा था। उनकी चूत में ताजा मक्खन निकल रहा था। फिर मैंने चाची के खूबसूरत पैरों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया और उनकी रसीली चूत में लंड की सपलाई करने लगा। उनकी चूत से घच्च ..घच्च .पच्छ की आवाज आ रही थी। मेरे ताबड़तोड़ धक्को से वो बार बार आगे को खिसक जाती थी। हम दोनों अब सेक्स करते हुए काफी गर्म हो गये थे। चाची की चुद्दी बहुत गर्म थी। किसी जलती हुई भट्टी की तरह धधक रही थी। मेरा लंड जल्दी जल्दी उनकी चूत चोद रहा था।
    मुझे अजीब सा नशा हो रहा था। मेरे जिस्म में सब तरफ मीठी मीठी जलन हो रही थी। दोस्तों लग रहा था की मैं कोई साईंकिल चला रहा था। चन्द्रकला चाची "..मम्मी.मम्मी...सी सी सी सी.. हा हा हा ...ऊऊऊ ..ऊँ. .ऊँ.ऊँ.उनहूँ उनहूँ.." की कामुक आवाजे निकाल रही थी। मैं उनको ढचाक ढचाक करके पेल रहा था। फिर उन्होंने अपने हाथ में थोडा थूक ले लिया और अपने चूत के दाने को जल्दी जल्दी सहलाने लगी। इससे उनको और अधिक यौन उत्तेजना मिल रही थी। दोस्तों मैं एक सेकंड को भी नही रुका और जल्दी जल्दी चन्द्रकला चाची का गेम बजाता रहा। हम दोनों को पसीना छूट गया। मेरा लंड तो किसी अंगारे की तरह धधक रहा था। मुझे बहुत आनंद मिल रहा था। इस तरह हम दोनों ने 30 मिनट गरमा गर्म सम्भोग किया। फिर मैंने अपना माल उनकी चूत में ही छोड़ दिया। फिर मैंने उनके उपर ही लेट गया।


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