चुदक्कड़ दीदी को टॉप की रांड बनाया

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Aug 26, 2017 at 2:41 AM.

  1. 007

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    प्रेषक : आदि .

    हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम आदि है और में आज सभी को अपनी एक सच्ची घटना के बारे में बताने के लिए कामुकता डॉट कॉम पर आया हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि यह आप सभी को पसंद जरुर आएगी। दोस्तों यह बात करीब 6 महीने पहले की है। मेरी मौसी की लड़की जो मुझसे एक साल बड़ी है और वो मेरी मौसी के साथ हमारे घर आई हुई थी और मौसी ने हमारे घर आकर मेरी माँ से कहा कि यह अब करीब दो तीन महीने इधर ही रहेगी। तो माँ उनके पूछने लगी क्यों? तब मौसी ने कहा कि अरे मैंने तुझे बताया नहीं था क्या कि हमें अमरनाथ और उधर के सभी तीर्थ देखने है? तो माँ बोली कि अरे दीदी में तो बिल्कुल भूल ही गयी थी। तभी मैंने कहा कि माँ तुम जाओगी तो खाना कौन बनाएगा? भाभी भी भैया के साथ बाहर घूमने गये है और अब वो लोग भी दो महीने से पहले नहीं आएँगे। तो मौसी ने कहा कि तुम्हारी नीलू दीदी को खाना बनाने के लिए में इसे इसलिए तो यहाँ पर लाई हूँ। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है।

    फिर नीलू दीदी ने मुझसे पूछा कि तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है? मैंने कहा कि अच्छी चल रही है और फिर हम दोनों इधर उधर की बातें करने लगे। दोस्तों तब तक मेरे मन में उसके लिए कोई भी ग़लत बात नहीं थी, अगले दिन मेरी माँ और मौसी तीर्थ यात्रा पर निकल गये। अब घर पर सिर्फ़ हम दोनों ही थे पूरे दो तीन महीने के लिए। फिर माँ ने जाते हुए मुझसे कहा कि तुम कहीं जाओ तो शाम को जल्दी घर आना और तुम दोनों तुम्हारे साथ साथ घर का भी ध्यान रखना। तो मैंने कहा कि जी माँ और वो लोग चले गये। शाम को दीदी ने खाना बनाया और हम दोनों ने साथ में बैठकर खाना खाया और फिर में टीवी देखने बैठ गया। तभी नीलू दीदी एक गाउन पहनकर आई और उन्होंने मुझसे कहा कि हम दोनों एक ही कमरे में सोएंगे, मैंने कहा कि जी नीलू दीदी। तो नीलू दीदी बोली या तो तू मुझे दीदी बोल नहीं तो नीलू बोल, मैंने कहा कि हाँ ठीक है दीदी और वो मेरे कमरे में चली गयी और में कुछ देर बाद सभी दरवाज़े बंद करके अपने कमरे में चला आया।

    फिर तभी नीलू दीदी मुझसे कहने लगी कि यहाँ तो बस एक ही बेड है, मैंने कहा हाँ तुम बेड के ऊपर सो जाओ, में नीचे सो जाता हूँ। फिर दीदी ने कहा कि नहीं तुम भी मेरे पास ऊपर ही सो जाओ, तब मैंने कहा कि हाँ ठीक है और फिर करीब 11 बजे तक हम दोनों सो चुके थे और रात को करीब एक बजे में बाथरूम के लिए उठकर गया और आकर सिरहाने रखा और पानी पीने लगा तभी मेरी नज़र नीलू दीदी पर पड़ी और उस समय उनके ऊपर की चादर नहीं थी और उनका वो गाउन उनकी जाँघो तक आ चुका था और हल्की लाइट की रोशनी में दीदी की गोरी भरी हुई जांघे बहुत ही चमक रही थी और वहीं मेरा दिमाग़ घूम गया, मैंने मन ही मन में कहा कि वाह क्या मस्त माल है, इसको तो एक बार चखना ही पड़ेगा और यह बात सोचकर में बेड पर बैठ गया और मैंने सोचा कि मुझे किसी भी काम में बिल्कुल भी जल्दीबाजी नहीं करनी है, क्योंकि मेरे पास अभी पूरे तीन महीने है क्योंकि धीरे धीरे आगे बढ़ने में बड़ा मज़ा आएगा और फिर मैंने उनका हल्का सा गाउन ऊपर उठाया और देखा तो नीलू की चूत उस समय पेंटी के अंदर थी, लेकिन वो थोड़ी सी फूली हुई थी कुछ बाल पेंटी से बाहर निकले हुए थे मैंने धीरे से चूत पर फूँक मारी और उसके बाद नीलू दीदी की चूत से लेकर पूरे बदन पर भी फूंक मारी, लेकिन वो तो मस्त गहरी नींद में सोई हुई थी, लेकिन अब मेरा हाल तो बहुत बुरा हो चुका था मेरा मन चाह रहा था कि में अभी उसको पूरा नंगा करके चोद दूँ, लेकिन मैंने सिर्फ़ उस फूँक से ही उसके पूरे बदन का जायजा ले लिया था और उसके बाद में उसके बारे में गंदी बातें सोचकर एक बार मुठ मारकर सो गया। फिर सुबह नीलू दीदी मुझसे पहले उठ गई, लेकिन में तो तब भी गहरी नींद में था तभी नीलू दीदी ने मुझे आवाज़ देकर कहा कि चलो उठ जाओ और उन्होंने मुझे अपने हाथ से हिलाकर उठा दिया, लेकिन जब में उठ गया तब भी रात का वो नजारा याद करके मेरा लंड दोबारा टाइट हो गया।

    फिर मैंने उनसे कहा कि तुम जाओ में अभी आता हूँ और जैसे ही वो मेरे कहते ही कमरे से बाहर चली गयी, में उसी समय तुरंत उठकर नहाने के लिए बाथरूम में चला गया और कुछ देर बाद में नहा धोकर तैयार हो गया और चाय पीने के लिए में रसोई में आ गया। तब मैंने देखा कि नीलू दीदी रोटी बना रही थी और नहाने से उसके बाल बहुत ही अच्छे लग रहे थे, वो पीछे से तो बहुत ही गजब की लग रही थी।

    फिर कुछ देर नाश्ता करने के बाद में बाहर चला गया और जाने पहले मैंने दीदी से कहा कि में जल्दी आ जाऊंगा और शाम को करीब 7 बजे में वापस अपने घर आ गया और फिर रात को खाना खाकर आज हम दोनों जल्दी ही सोने चले गये और रात को करीब एक बजे में उठकर बेड पर बैठ गया। आज भी रात को पहले की तरह ही वो गाउन ऊपर उठा हुआ था, जिसको देखकर मेरा मन ख़ुशी से झूम उठा और आज फिर मैंने उस गाउन को थोड़ा सा ऊपर सरकाकर फूँक मारना चालू किया, लेकिन कुछ देर बाद मैंने मन ही मन में सोचा कि आज कुछ आगे बढ़ते है और यह बात सोचकर मैंने धीरे से अपना हाथ दीदी की चूत पर रख दिया और में उस अहसास से तो एकदम पागल हो गया। मैंने चूत को अपने हाथ से हल्के हल्के सहलाना शुरू किया और तब जाना कि वो चूत कितनी मुलायम थी और हल्के से मैंने उस पर अपना हाथ फिराया और देखा कि दीदी सोई है ना, लेकिन वो तो उस समय बहुत गहरी नींद में थी। अब में खुश होकर उठकर नीलू दीदी के पैरों में बैठ गया और मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर पेंटी के ऊपर से रख दिया। शायद मेरी तेज गरम सांसो से उसको इस बात का अहसास हो गया और वो थोड़ा सा हिल गयी।

    फिर में झट से उठा और अपनी जगह पर आ गया तो मेरा लंड तो अब भी खड़ा होकर बहुत तड़प रहा था और पेंट अंडरवियर तो अब मुझे और भी तकलीफ़ दे रही थी। फिर मैंने अपनी पेंट अंडरवियर दोनों को ही उतार दिया और अब में पूरा नंगा था और थोड़ी देर बाद एक बार फिर से में दीदी की चूत को सूंघने लगा। फिर मैंने देखा कि उनकी पेंटी चूत वाले हिस्से से गीली हो गई थी और वो चूत भी मुझे गरम लग रही थी और मेरी सांसो से भी ज़्यादा गरम थी। तब मैंने सोचा कि अब यह जाग चुकी है और यह सोने का बस नाटक कर रही है। अब मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके मैंने अपनी एक उंगली को पेंटी के अंदर डाल दिया और उसके बाद थोड़ी सी ऊँगली को टेड़ी करके मैंने अब अपनी ऊँगली को चूत के अंदर डाल दिया। तब तक दीदी की चूत बहुत गीली हो चुकी थी और मैंने मन में सोचा कि अब यह गरम हो गयी है।

    फिर मैंने अपना हाथ बाहर लिया और पेंटी को खींच दिया। पेंटी को उसके दोनों पैरों से बाहर निकाल दिया और जब मैंने उस चूत को पहली बार देखा तो में बिल्कुल पागल हो गया, लेकिन दीदी अभी भी सोने का नाटक कर रही थी और मेरा लंड तो एकदम बेकाबू हो गया था। फिर मैंने अब सोचा कि पहले अपने लंड की प्यास बुझाई जाए क्योंकि चूत भी बहुत गरम हो चुकी थी। मैंने अब धीरे से दीदी के दोनों पैरों को उनके घुटनों से मोड़ दिया, जिसकी वजह से अब मेरे सामने उनकी नंगी खुली हुई गीली चूत थी और आज में उसको जी भरकर चटना चाहता था, लेकिन मेरा लंड उसकी चुदाई करके उसमे झड़ने के लिए बहुत बेकरार था। फिर में दीदी के पैरों में बैठ गया और थोड़ा सा आगे झुककर मैंने अपना लंड दीदी की चूत के मुँह पर रख दिया और एक धक्का लगा दिया, लेकिन मेरा लंड निशाने से नीचे फिसल गया और मैंने एक बार फिर से अपने लंड को हाथ से पकड़कर सही जगह पर लगा दिया और फिर से मैंने दूसरा धक्का दे दिया, लेकिन वो एक बार फिर से फिसल गया।

    दोस्तों दीदी की चूत अब तक कुँवारी थी और उनकी चूत का छेद छोटा और बहुत चिकना था, इसलिए बार बार ऐसा हो रहा था और अब मैंने अपने एक हाथ से दीदी की चूत को फैला दिया, लेकिन तभी दीदी के हाथ ने मेरे लंड को पकड़ा और चूत के मुहं में रख दिया। तब मुझे एकदम से धक्का लगा में बहुत चकित हुआ कि यह सब क्या हुआ? और फिर मैंने उस तरफ से अपने ध्यान को हटाकर एक ज़ोर का धक्का लगा दिया जिसकी वजह से मेरा लंड का टोपा चूत के अंदर गया। अब दीदी ने आईईईईइ ऊउईईईईई माँ यह क्या किया तूने? आज तक इसमे एक उंगली तक भी नहीं गई है प्लीज ज़रा ठीक से और धीरे करना मुझे बहुत दर्द हो रहा है।

    फिर मैंने उनके मुहं से यह बात सुनकर मन ही मन बहुत खुश होकर उनसे कहा कि हाँ ठीक है दीदी में दर्द का पूरा ध्यान रखकर अपनी तरफ से पूरी कोशिश करके धीरे ही धक्के दूंगा। तो दीदी मुझसे बोली कि अब तू मुझे नीलू बोल और फिर मैंने अपना दूसरा धक्का भी लगा दिया, जिसकी वजह से मेरा आधा लंड बड़ी ही मुश्किल से अंदर गया था और अब दीदी दोबारा से चीखकर चिल्ला उठी ऊउईईईई माँ में मर गयी उफ्फ्फफ्फ्फ़ प्लीज तू अब इसको बाहर निकाल दे आह्ह्हह्ह बाहर निकाल ले तू फिर कभी करना, अभी बाहर निकल दे मुझे दर्द बहुत ज्यादा है इससे आज मेरी जान ही निकल जाएगी मुझे ऐसा लगता है। फिर मैंने कहा कि नहीं आप इसको कुछ देर ऐसे ही रहने दो अभी सब दर्द खत्म हो जाएगा और अब में उसके ऊपर लेट गया और तब मैंने उनके गाउन को पूरा उतारकर उनके बदन से अलग कर दिया और दीदी के भारी बूब्स को मैंने देखा और में उनको पागलों की तरह चूमने लगा, जिसकी वजह से थोड़ी देर में दीदी अब शांत होने लगी थी, शायद अब उसका दर्द कम हो गया था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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    फिर मैंने सही मौका देखकर और ज़ोर का धक्का लगा दिया जिसकी वजह से लंड अंदर सरक गया, लेकिन वो बड़ी ज़ोर से चिल्लाकर उठ गयी। फिर मैंने उसको दोबारा नीचे लेटा दिया और वो अब उस दर्द से तड़पकर बोल रही थी प्लीज आदी छोड़ दो ना आह्ह्हह्ह प्लीज अब इसको बाहर निकाल दो ना प्लीज, इसके आगे बाद में कभी कर लेना प्लीज ऊह्ह्ह्हह् आईईईइ मुझे बहुत दर्द हो रहा है, प्लीज निकाल लो प्लीज। फिर मैंने अब अपने लंड को उनकी चूत से बाहर निकाल लिया और में जल्दी से उठकर तेल की बोतल ले आया। तभी उसने देखकर कहा कि नहीं अभी नहीं, प्लीज कल करना, तुम अब मेरा पीछा छोड़ दो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। फिर मैंने उससे कहा कि तुम तो एक बार झड़ चुकी हो, लेकिन मेरा क्या तुम क्या एक काम करोगी, मेरे लंड को अपने मुँह में लोगी? तब उसने कहा कि नहीं, मैंने कहा प्लीज और में 69 की पोजीशन में आ गया, मैंने उसको अपने ऊपर चढ़ा दिया और कहा कि इसको अपने मुँह में भर लो और आगे पीछे करो। अब मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ को डाल दिया और चूत के अंदर जीभ के साथ साथ में अपनी एक उंगली से उसको चोदने लगा था जिसकी वजह से वो भी मस्ती में आकर मेरे लंड को चूसकर अंदर बाहर कर रही थी। में जब उसकी चूत को चाट रहा था तभी अचानक से उसने ज़ोर ज़ोर से लंड को अंदर, बाहर करना चालू किया और बीच बीच में वो सिसकियाँ भी लेने लगी थी, उउउम्मह आहहुउऊन्ं आआहहह्ह्ह्ह में उस समय समझ गया कि वो अब झड़ने वाली है। फिर मैंने भी और ज़ोर से उसकी चूत को चटाना शुरू किया और तभी वो मेरे मुँह पर बैठ गई और कुछ दो चार सेकिंड के बाद वो झड़ गयी, तो उसका सारा लावा मेरे मुँह में आ रहा था उसकी खुश्बू से में भी ज़ोर ज़ोर से पागलों की तरह उसको अपनी जीभ से चाट रहा था।

    अब उसने अपनी स्पीड को पहले से ज्यादा बढ़ा दिया था और फिर में भी झड़ गया मेरे लंड से निकला ढेर सारा गरम चिपचिपा वीर्य उसके मुँह में तेज़ी से चला गया और वो बड़े चाव से उसको अपनी जीभ से चाटने चूसने लगी और कुछ देर बाद वो रुककर वैसे ही लेट गयी। उस समय मेरा लंड उसके थूक से एकदम चिकना हो चुका था। फिर मैंने हल्के से नीचे सरककर पूछा क्यों मज़ा आया? उसने कहा कि बहुत मज़ा आया और फिर वो मेरी छाती पर अपना सर रखकर सो गयी, लेकिन थोड़ी देर बाद में उठ गया और मेरा लंड भी तैयार होकर खड़ा था। अब वो गहरी नींद में थी और मैंने उसको आवाज़ दी, लेकिन वो तब भी सोई थी तो मैंने उसको बेड के किनारे पर खींच लिया और उसके पैरों को नीचे छोड़ दिया। उसके बाद में बेड से नीचे आ गया जिसकी वजह से अब उसकी चूत एकदम मेरे लंड के सामने ठीक निशाने पर थी, मैंने बहुत सारा तेल उसकी चूत पर डाल दिया और अपने लंड को भी तेल से एकदम तर कर दिया। फिर उसके बाद अपने एक हाथ से चूत के मुँह को फैलाकर लंड को चूत के मुँह में डाल दिया और एक बहुत ज़ोर का धक्का लगा दिया जिसकी वजह से वो तुरंत ही दर्द की वजह से चिल्लाकर नींद से जाग गयी आाईईईईईई माँ में मर गई उफ्फ्फफ्फ्फ़ मुझे बहुत दर्द हो रहा है, तू मुझे इतनी रात को भी चेन से सोने नहीं देता, ऐसा तुझे क्या हो गया है? तू क्या आज मेरी जान ही निकालकर रहेगा।

    अब मैंने देखा कि मेरा लंड पूरा अंदर चला गया था और उसकी आँखो से आँसू निकल आए थे, तभी मुझे एहसास हुआ कि उसकी चूत की झिल्ली फट गयी है और इसलिए में थोड़ा सा रुककर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा था। फिर थोड़ी देर के बाद अब उसको भी मज़ा आने लगा था और उस दीदी ने मुझसे कहा हाँ और ज़ोर से करो उफफ्फ्फ्फ़ हाँ और ज़ोर से तुम आज फाड़ दो मेरी इस चूत को। अब में इसका दर्द सह लूँगी हाँ तुम पूरा अंदर तक डालो और मुझे तेजी से धक्के देकर चोदो। फिर उनके मुहं से यह जोश भरी बातें सुनकर में तो पागलों की तरह तेज तेज धक्के लगाने लगा था और वो उस दर्द और उसके साथ साथ मस्ती से मुझसे कह रही थी आआहह्ह्ह आआईईईई प्लीज आदि फाड़ दो मेरी इस चूत को हाँ ज़ोर से करो प्लीज और जाने दो पूरा अंदर तक मुझे बहुत मज़ा आ रहा है।

    अब मैंने अपनी स्पीड को पहले से ज्यादा बढ़ा दिया और करीब 15-20 मिनट के बाद हम दोनों ही एक साथ झड़ गये और उस समय दीदी ने मुझे अपने ऊपर खींचकर दबोच लिया और मेरे कंधे पर ज़ोर से अपने दांत गड़ा दिए और उसके दांत मेरे कंधे में चुभ गये और मैंने भी मस्ती में उसके बूब्स को काट लिया, लेकिन हल्का सा काटा था और करीब दस मिनट के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाल दिया। अब ढेर सारा खून और हम दोनों का माल बेड पर गिर गया और फिर उसने मुझसे कहा कि अरे तुम्हारे कंधे से खून निकल रहा है। फिर मैंने उससे कहा कि तुम भी एक बार उठकर नीचे की तरफ देखो तुम्हारी चूत ने तो खून की उल्टी कर दी है और वो मेरे कहने पर तुरंत उठकर नीचे अपनी चूत की तरफ देखने लगी और फिर देखकर उसने बेड पर गिरे खून से तर माल अपने हाथ में ले लिया और वो उसको अपने बदन और बूब्स को लगाने लगी। फिर मैंने पूछा कि दीदी यह आप क्या कर रही हो? तो उसने कहा कि मेरी चूत से पहली बार खून निकाला है और में उसको ऐसे जाया नहीं करूँगी और मस्ती से उस खून को वो अपने बदन पर मसलने लगी। फिर मैंने उसके पास बैठकर दीदी के होंठो को किस किया, तभी नीलू दीदी बोली अब कल से कंडोम होगा तभी तुम्हे चुदाई करने को मिलेगी। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है में पूरे दो तीन पैकेट ही एक साथ ले आता हूँ तब दीदी मेरी बात को सुनकर हंसने लगी और वो बोली कि तू कहीं पूरी दुकान ही मत उठा लाना और फिर में दीदी को पीछे से पकड़कर सो गया।

    फिर सुबह करीब 6 बजे मेरी नींद खुल गई। उस समय दीदी भी नंगी थी और में भी पूरा नंगा था। फिर सुबह सुबह मेरा लंड भी एकदम से कड़क हो गया तो में झट से उठकर बाथरूम में चला गया और पेशाब करके वापस दीदी को पीछे से पकड़कर लेट गया। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने तेल की बोतल ली और दीदी की गांड में तेल डाल दिया और उसके बाद अपने लंड पर भी मैंने तेल लगा दिया। दीदी अब भी सोई हुई थी क्योंकि वो रात की चुदाई से थक कर जो सोई थी। फिर मैंने उसकी गांड को अपने एक हाथ से थोड़ा सा फैला दिया उसके बाद मेरा लंड गांड के मुँह पर रख दिया और एक ज़ोर का धक्का लगा दिया। तभी दीदी जाग गयी और बोली कि आदि तुम यह क्या कर रहे हो? और वो इतना कहकर झट से उठकर बैठ गयी। तब मैंने कहा कि प्लीज दीदी एक बार करने दो। फिर दीदी ने कहा कि नहीं आदि इससे मुझे बहुत दर्द होगा, मैंने उनसे कहा कि में सिर्फ़ आधा ही लंड अंदर डालूँगा अगर आपको दर्द होने लगे आप मुझे बता देना, में रुक जाऊंगा।

    फिर दीदी मेरे कहने पर बड़ी मुश्किल से मान गयी और मैंने उनसे कहा कि रूको ज़रा में थोड़ा सा फिर से आपकी गांड में तेल डालता हूँ और इतना कहकर मैंने दीदी की गांड में बहुत सारा तेल डाल दिया और फिर दीदी से कहा कि दीदी में नीचे सो जाता हूँ तुम ही मेरे ऊपर से बैठो। अब दीदी मेरे कहने पर मेरे ऊपर आ गयी और मैंने अपने लंड को उनकी गांड के छेद पर सेट किया और फिर वो धीरे धीरे मेरे लंड पर बैठने लगी। मेरा लंड तो पहले से ही उनकी गांड में जाने के लिए तैयार था। फिर मैंने अपने दोनों हाथों से दीदी की गांड का मुँह पूरा खोल दिया और अब दीदी धीरे धीरे मेरे लंड को अपनी गांड में लेने लगी थी, लेकिन उस समय मुझे महसूस हुआ कि दीदी की गांड तो उनकी चूत से भी ज़्यादा टाइट थी, क्योंकि बड़ी मुश्किल से मेरे लंड का टोपा उनकी गांड के अंदर गया और दीदी उस दर्द की वजह से कराह रही थी आहहा हुउऊुुुउउ माँ मर गई आईईईईई कर रही थी, लेकिन तभी अचानक से क्या हुआ मुझे पता ही नहीं चला और मैंने देखा कि दीदी अब एकदम से नीचे बैठ गयी और वो ज़ोर से चिल्लाई उउिईईईईइ माँ आहह्ह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़ और अब उनकी आखों से आँसू भी बाहर निकल रहे थे और दीदी की गांड बहुत सख़्त होने की वजह से मेरा लंड भी अब दर्द कर रहा था। फिर जब दीदी अचानक से नीचे बैठ गयी तो मुझे भी दर्द हुआ और दीदी वैसे ही मेरे ऊपर लेट गयी। उस समय मेरा पूरा लंड उसकी गांड में था।

    अब दीदी मेरे होंठो को चूसने लगी और थोड़ी देर बाद फिर दीदी ने धीरे से अपनी गांड को ऊपर किया और धीरे धीरे वो अब ऊपर नीच होने लगी थी और में भी जोश में आ गया। जब वो नीचे आती तो में उस समय अपने लंड से ज़ोर से ऊपर धक्का लगा देता, जिससे बहुत मज़ा आने लगा और जब धक्का लगता तो दीदी दर्द से कराह उठती आआहह ऊउईईईईई और फिर में दोबारा धक्का लगा देता। तभी मैंने उनसे कहा कि दीदी गांड में लंड डालकर झड़ने के लिए कंडोम की ज़रूरत नहीं है ना? फिर दीदी ने कहा कि नहीं और तभी मैंने यह बात सुनने के बाद अपनी एक उंगली को दीदी की चूत में डाल दिया और दीदी तो पहले से ज्यादा जोश में आ गई और उनका जोश देखकर अब तो मेरी उंगली और लंड के धक्को की स्पीड भी बढ़ गई। फिर करीब 10-12 मिनट के बाद दीदी की चूत से लावा बाहर निकल गया और तभी कुछ धक्के देकर मेरे भी लंड ने भी अपना वीर्य छोड़ दिया और दीदी मेरे लंड पर बैठी हुई मेरे ऊपर लेट गयी।

    फिर मैंने अपनी ऊँगली को उनकी चूत से बाहर निकाल दिया और अब में उसको चाटने लगा, उसी समय दीदी ने कहा कि अब बस करो मुझे अब दूसरा काम भी करना है और इसके आगे का काम हम आज रात को करेंगे। फिर मैंने उनसे हाँ कहा और थोड़ी देर बाद दीदी मेरे लंड से उठ गयी और उनके उठते ही फच की आवाज़ के साथ दीदी की गांड से मेरा लंड बाहर निकलने के साथ ही खून वीर्य और तेल भी निकल गया। फिर दीदी ने उसको वहीं उसी जगह पर मल लिया और वो कुछ देर बाद उठकर नहाने चली गयी। दोस्तों इस तरह पूरे तीन महीने तक मैंने अपनी हॉट सेक्सी चुदक्कड़ लंड की प्यासी नीलू दीदी को बहुत बार जमकर चोदा, जिसकी वजह से अब उसकी गांड भी मोटी हो चुकी थी और उसके वो बूब्स भी पहले से ज्यादा सेक्सी आकर्षक दिखने लगे थे। वो ऊपर से लेकर नीचे तक मस्त सेक्सी माल नजर आने लगी थी ।।

    धन्यवाद .


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