चुदक्कड़ मकान मालकिन की चूत डिलडो

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, May 23, 2017.

  1. 007

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    //krot-group.ru हाय दोस्तों, मैं घनश्याम गुप्ता आप सभी का नॉन वेज स्टोरी में स्वागत करता हूँ। मेरे एक दोस्त ने कुछ दिन पहले मुझे नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम के बारे में बताया था, तभी से मुझे यही की सेक्सी और मजेदार कहानिया पढने का चस्का लग गया। आज मैं भी आपको अपनी सेक्सी स्टोरी सुनाना चाहता हूँ।

    मैं २३ साल का गबरू जवान लड़का हूँ। मेरा कद ६ फुट का है और मैं रोज जिम जाता हूँ। मैं लखीमपुर का रहने वाला हूँ। मेरे डोले शोले काफी मस्त बने हुए है। पिछले साल की बात है, मैंने शहर में एक कमरा किराए पर लिया था। मैं पी सी एस की तैयारी कर रहा था, इसलिए मैंने लखीमपुर में शहर में ही एक कमरा किराये पर ले लिया था, जहाँ पर सब तरह की कोचिंग थी। मैंने एक कोचिंग में नाम लिखा लिया। मेरी मकान मालकिन बहुत ही गुसैल औरत थी, उसका पति सौदिया में रहता था। लोग ये भी बात करते थे की उसके हिन्दू पति से सौदिया में किसी मुस्लिम लड़की से गुपचुप शादी कर ली थी और उसकी खूब चूत मारता था, पर किसी किरायेदार की मजाल नही थी की मकानमालकिन से ये पूछ ले की क्या तुम्हारे पति से सौदिया में शादी कर ली है।

    मेरी मकान मालकिन देखने में काफी मस्त माल थी, उम्र कोई ३१ ३२ होगी। कम से कम १० १२ किरायेदार से उसे महीने के ३० हजार तो आराम से मिल जाते थे। उसके २ लडके थे जो अभी ९ और १० वी में पढ़ रहे थे। मकान मालकिन बड़ी सफाई वाली औरत थी और जिस मकान में हम सब किरायेदार रहते थे, वो रोज सुबह पानी का पाइप और झाड़ू लेकर पूरी गैलरी साफ़ करती थी। अगर कोई किरायेदार जरा भी गंदगी या कचरा हाल, गैलरी या सीडी पर गिरा दे तो वो फ़ौरन गंदी गंदी गाली बकने लग जाती थी। एक दिन शाम के ७ बजे मैं उसे किराया देने गया तो मेरी तो दिमाग ही हिल गया। मकान मालकिन पूरी तरह से नंगी थी और जोर जोर से अपनी चूत में सीधे हाथ की ३ ऊँगली डालकर फेट रही थी। मैंने देखा तो मैं वही एक कोने में छुप गया। मकान मालकिन के लड़के कहीं बाहर खेलने गये थे। सायद उसे किसी मोटे लौड़े की जरूरत थी, शायद वो चुदवाना चाहती थी, इसीलिए अपनी चूत में ३ ३ ऊँगली डालकर फेट रही थी। मैंने ये सीन देखा तो मेरा लंड खड़ा हो गया। दिल किया की अभी इस रंडी को चोद डालूँ और लंड इसके भोसड़े में डालकर इसको कसके चोद चोदकर तृप्त कर दूँ।

    मकान मालकिन जल्दी जल्दी अपनी बुर में ३ ऊँगली डालकर चला रही थी, उसका माल और पानी छुटने वाला था। उसका चेहरा बता रहा था की उसे बहुत नशीली उतेज्जना महूसस हो रही थी। वो बार बार "आआआआअह्हह्हह..ईईईईईईई.ओह्ह्ह्हह्ह.अई..अई..अई..अई.." करके चिल्ला रही थी और अपनी गांड और दोनों सफ़ेद गोरी जांघे बार बार वो बेड की सतह से उपर की तरफ उठा रही थी। फिर बड़ी देर तक वो अपनी बुर में ऊँगली जल्दी जल्दी डालकर फेटती रही, अंत में उसकी चूत ने अपना सफ़ेद गाढ़ा क्रीम जैसा ढेर सारा पानी पिच्च पिच्च करके छोड़ दिया। मकान मालकिन का मुंह किसी चुदासी औरत की तरह आ आह...हा हा .. कहते हुए ढक्कन की तरह खुल गया। उसकी आँखें चढ़ गयी थी, वो बड़ी देर तक अपनी चूत सहलाती रही। इसी बिच मैं अंदर घुस गया। मैंन कुछ ना देख पाने का नाटक करने लगा।

    "ओह ...सोरी आंटी!!" मैंने उसके नंगे जिस्म को देखकर कहा और फिर बाहर जाकर खड़ा हो गया।

    "आंटी किराया लाया हूँ!!" मैंने बाहर से ही आवाज लगाई

    आनन फानन में मेरी चुदासी मकान मालकिन से किसी तरह अपनी साडी पहनी और मुझे अंदर बुलाया। वो हमेशा बड़े ताव में रहती थी, पर आज उसका काण्ड मैंने अपनी आँखों से देख लिया था, शायद तभी तो मेरे साथ किसी सीधी औरत की तरह पेश आ रही थी, वरना थी वो बड़ी चंट आत्मा।

    "घनश्याम!.. तूने सब देख लिया था किस तरह मैंने मुठ मारी??." उसने सीधा मेरी नजरों में देखकर कहा

    "हाँ.." मैंने जवाब दिया

    वो लजा गयी। हिंदुस्तान में कोई भी औरत चाहे जितनी बड़ी हरामिन हो, पर उसको एक नजर नंगी देख लो, अपने आप डाउन हो जाएगी, ये तो सच है। मैंने किराया उसके हाथ में रख दिया

    "..इसमें आपकी कोई गलती नही है आंटी। हर औरत को जवानी और जिस्म की भूख लगती है, अगर आपका पति सौदिया में उस मुस्लिम लड़की से शादी ना करता तो आपको चोदने और ठोकने वो हर महिना हिंदुस्तान जरुर आता। तब आपको अपनी चूत में ऊँगली नही करती पड़ती!" मैंने कहा।

    उसने सुना तो मानो मैंने उसकी दुखती नब्ज हर हाथ रख दिया

    "बेटा...घनश्याम.तूने सोहल आने सच कहा। मैं पहले ऐसी नही थी, कभी भी अपनी चूत में ऊँगली नही करती थी, पर मेरे पति ने मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा किया और उस बहनचोद ने वही शादी कर ली, मेरी सौत को घर में ले आया है और वही पर रोज उसकी चूत मारता है। और मैं हिंदुस्तान में लंड खाने को तरस जाती हूँ!!" मकान मालकिन बोली और रोने लगी। मैं इस खाली माल को चोदना चाहता था, इसलिए मैं झूठ मूठ उससे हमदर्दी दिखाने लगा। और मैंने उसके कंधे पर हमदर्दी में अपना हाथ रख दिया। वो मेरे हाथ को पकड़कर रोने लगी। फिर उसने मुझे गले ही लगा लिया और रोने लगी।

    "आंटी मत रो.कोई ना कोई मर्द आपकी जिन्दगी में जरुर आएगा तो आपकी शारीरिक जरूरत को पूरा करेगा!!" मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा

    "पर कौन होगा...वो मर्द!!" मकान मालकिन से पूछा

    "...कोई ना कोई तो जरुर होगा आंटी!!" मैंने कहा

    "तू..वही मर्द है.मैं समझ गयी.मैं समझ गयी!!" मकानमालकिन किसी पागल औरत की तरह चिलाये

    "मैं..???" मैंने अनजान बन्ने की कोशिश की, असलियत में उसकी चूत मैं भी चोदना चाहता था

    "हाँ बेटा घनश्याम.तू ही मेरी खाली जिन्दगी को भरने आया है" वो बोली

    "ठीक है आंटी" मैंने कहा

    उसके बाद मकान मालकिन ने मुझे गले लगा लिया और मैं ही उससे चिपक गया क्यूंकि मैंने भी बड़े दिन से किसी माल को चोदना चाहता था। मेरी गुसैल मकान मालकिन मुझे दिलोजान से प्यार करने लगी और अपने गले लगा लिया। आज आज भी काफी खूबसूरत थी, उससे प्यार करने में मेरा सब तरह से फायदा था, चूत भी मिलती और चुदाई भी मिलती। मुझे पूरा विश्वास था की वो मेरा किराया माफ़ मर देगी, अगर मुझसे फंस गयी तो मैंने उससे चिपक गया और उसके गले लग गया। फिर हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे। मेरी मकान मालकिन कई सालों से भूखी थी। लंड से चुदना तो बहुत दूर की बात है, उसने तो कितने साल से कोई लंड देखा ही नही था। हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे। मैंने उठकर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया वरना उसके लड़के मुझे उनकी माँ को चोदते हुए रंगे हाथ पकड़ सकते थे। दरवाजे में अंदर से कुण्डी देने के बाद मैं अपनी मकानमालकिन से प्यार करने लगा। धीरे धीरे हम दोनों ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए, मैंने उसका नीला ब्लाउस खोल और धीरे धीरे उसको पूरा नंगा कर दिया, फिर मैं अपनी मकान मालकिन के दूध पीने लगा। उफ्फ्फ्फ़.कितनी बड़ी बड़ी और चूचियां थी उसकी। वो बाहर से जितनी गोरी थी, उससे जादा अंदर से गोरी थी। थी अभूत मस्त माल।

    "बेटा घनस्याम जब तुमको किराया देना हो सीधा मेरे पास आ जाया करो.मुझे कसकर चोद दिया करो और तुम्हारा किराया माफ़!!" मेरी चुदासी लेकिन दयावान मकान मालकिन बोली। मैं इस वक़्त उसके ३६ साईंज के बुब्बू पी रहा था, कितनी मस्त माल थी वो। गोल चेहरा और चौड़े जबड़े, जबडों पर चौड़े गाल, सुंदर गुलाबी ओंठ। मैंने मस्ती से उसके दूध पीने लगा और वो "आह... सी सी.. हा हा हा . ऊऊऊ ..ऊँ..ऊँ.ऊँ.बेटा घनस्याम..बेटा घनस्याम!!" कराहने लगी। मैं उसकी काली काली निपल्स में जल्दी जल्दी अपनी जीभ टकराने लगा। मकान मालकिन को बड़ी तीव्र उतेज्जना का अहसास होने लगा। इसी तरह मैं उससे उसके पति की तरह प्यार करने लगा। मैं बार बार अपनी जीभ को जल्दी जल्दी हिला रहा था और उसकी कडक खड़ी निपल्स से बार बार टकरा रहा था, उसकी चूत में से माल निकलने लगे। उसका दायां मम्मा मैं मजे से पी चूका था, और अब उसका बाया मम्मा मैं मुंह में भरकर पी रहा था।

    कितना बड़ा और विचित्र संयोग था की हम दोनों ही प्यासे थे। मुझे भी सालभर से कोई बुर चोदने को नही मिली थी, जबकि मेरी मकानमालकिन को भी कई सालों से कोई लौड़ा चुदवाने को नही मिला था, इसलिए हम दोनों मजे से प्यार करने लगे। मैं उसके दूध पीने लगा, वो पिलाने लगी।

    "आहं आहं.. उंह उंह उंह हूँ.. हूँ. हूँ. हमममम अहह्ह्ह्हह.. अई.अई..अई..

    बेटा घनश्याम..हूँ..अब मुझे चोदो बेटा..अब कितनी देर लगाओगे??" मकान मालकिन बड़ी बेचैनी से बोली

    "ठहर जा आंटी..ठहर जा..मेरे पर विश्वास कर। ना तो मैं कहीं भागा जा रहा हूँ और ना ही तू कहीं भागी जा रही है!!...आराम से चोदूंगा तुमको..मस्ती से चोदूंगा!!.फुल मजा आएगा गारंटी मेरी है, बस तुम मेरा किराया माफ़ कर देना पैसे की बड़ी तंगी है!!" मैंने कहा

    और मैं आंटी की चूत पर पहुच गया। अभी १ घंटे पहले मैंने आंटी की बुर के दर्शन कर लिए थे, अब बिलकुल पास से देखने जा रहा था। मैं कुछ देर तक मकान मालकिन आंटी का भोसड़ा गौर से देखता रहा। ओ हो हो..कितना बड़ा और कितना सुंदर भोस्ड़ा था। भई, मुझे तो बहुत पसंद आया। फिर मैंने जीभ लगाकर आंटी का भोसड़ा पीने लगा। उन्होंने अपने बेड के सिरहाने की तरह की एक शेल्फ खोली तो उसमे बहुत सारा माल रखा था। तरह तरह के कंडोम, २ ३ काले डिलडो और वियाग्रा की कई गोलियां। मकान मालकिन आंटी ने मुझे २ मैन्फोर्स कंडोम और १ काला भूत जैसा दिखने वाला डिलडो दे दिया। मैं आंटी का इशारा समझ गया था। मैंने डिलडो लेकर आंटी की चूत में डाल दिया और जल्दी जल्दी अंदर बाहर करने लगा। अब मैं समझा की आंटी ने इतने साल अपने पति के बिना कैसे काटे। ये डिलडो ही अपनी चूत में डालकर मेरी मकान मालकिन मजा लेती थी।

    मैं जल्दी जल्दी बड़े से काले रंग से डिलडो को आंटी के भोसड़े में अंदर बाहर करने लगा उनको बहुत मजा आ रहा था। मैं और तेज तेज अपनी मकान मालकिन की बुर फेटने लगा। वो बार बार अपनी गांड और कमर उठाने लगी। "घनश्याम .. ओह्ह्ह्ह माँ. अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह.. उ उ उ.. और तेज तेज..करो घनश्याम बेटा!!" आंटी बोली

    आधा घंटे तक डिलडो मैंने उसकी मस्त रसीली चूत में डालकर उसकी चूत चोदी, फिर डिलडो निकालकर अपनी मकान मालकिन के मुंह में डाल दिया। वो किसी चुदासी कुतिया की तरह डिलडो चूसने लगी। मैंने अपना मोटा ८ इंची लौड़ा मकान मालकिन के भोसड़े में डाल दिया और उसपर पूरी तरह से मैं लेट गया और उसके गोरे गोरे गाल चूमते चूमते मैं उसको चोदने लगा। आंटी चुपके चुपके मेरा मोटा लौड़ा खाने लगी। उनकी आँखें बंद थी, और चेहरे पर संतुस्टी के भाव ये बता रहे थे की उसको अपार सुख और चुदाई का मजा मिल रहा है। मैं तेज धक्के अपनी मकान मालकिन के चूत में देने लगा और कस कसके उसे पेलने लगा। वो मुझसे ८ साल बड़ी थी, पर मैं तब भी उनको बड़े प्यार और बड़े कायदे से चोद रहा था। उन्होंने मेरी दोनों कलाइयाँ कसकर पकड़ ली थी।

    मैं कमर मटका मटकाकर अपनी मकान मालकिन को चोद रहा था। उन्होंने मुझे २ मैंन फ़ोर्स कंडोम दे दिए थे, मैंने एक पहन लिया था, कहीं आंटी पेट से हो जाती तो पुरे लखीमपुर में कितनी बदनामी होती, इसलिए मैं सेफ्टी के लिए कंडोम पहन लिया था। तेज धक्को के बीच में आंटी फिर से उ उ उ उ उ..अअअअअ आआआआ. सी सी सी सी.. ऊँ..ऊँ.ऊँ करके चिल्लाने लगी। मुझे उसकी कराहने की आवाजे बहुत जादा सेक्सी लग रही थी। कुछ देर बाद मैंने उन पर अपनी अच्छी पकड़ बना ली थी। मैं उन पुर पूरी तरह से झुका हुआ था और उनको चोद रहा था। आंटी की आँखें भले ही बंद हो, पर वो अपना प्यार दूसरी तरह से दिखा रही थी। उनका सीधा हाथ बार बार मेरे सीने को प्यार से सहला रहा था। बहुत ही रोमांटिक मौसम बन गया था मकान मालकिन के साथ। चुदती हुई हर हिन्दुस्तानी औरत की तरह मकान मालकिन ने भी अपने दोनों पैर किसी बतख की तरह उपर हवा में उठा लिए थे। करीब ३५ होने में आये थे, मैं तेज तेज उनकी रसीली चूत में लंड दे रहा था, पर एक बार भी आंटी ने अपने दोनों पैर नीचे नही किये और किसी बतख की दोनों पैर उठाये रही।

    मैं हैरत कर रहा था की क्या उनके पैर में दर्द नही हो रहा है। कुछ देर बाद मैंने अपना माल चूत के अंदर गिरा दिया। मैंने कंडोम पहन रखा था, जिससे आंटी का भोसड़ा गीला नही हुआ। क्यूंकि माल मेरे कंडोम में ही छूट गया। मैंने लंड बाहर निकाल लिया और कंडोम उतारकर वही एक तरह फेक दिया। उसके बाद मैं मकान मालकिन की बुर मजे लेकर पीने लगा। कुछ देर बाद मेरा मौसम फिर से बन गया।

    "आंटी कंडोम पहन कर कुछ मजा नही आ रहा.." मैंने शिकायत के अंदाज में कहा

    "...तो घनश्याम बेटा.मुझे ऐसे ही चोद ले..बस देर तक मुझे ठोंकना!!" मकान मालकिन बोली

    उसके बाद मैं बहुत खुश हो गया। मैंने आंटी को अपने लंड पर बिठा लिया और करीब १ घंटे तक वो बड़े प्यार और दुलार से अपनी कमर हिला हिलाकर खुद ही चुदवाती रही। अब मेरी मकान मालकिन मुझसे पूरी तरह से फंस चुकी है, रोज रात में मेरे कमरे में चूत मरवाने आती है और मुझसे कभी किराया नही लेती। ये कहानी आप नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।
     
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