मौसी और माँ को चोदा - Maa-Beta Ke Beech Chudai Ki Kahaniyan

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, May 8, 2016.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

    //krot-group.ru प्यारे दोस्तो मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और यहां प्रकाशित सभी कहानियां मुझे बहुत पसन्द है। अन्तर्वासना पर कहानियां पढने के बाद मेरा भी मन सेक्स करने का होता है लेकिन आज तक कभी मौका नहीं मिला।

    आज में अपने जीवन का वो लम्हा आपके साथ बाँटने जा रहा हूँ जब मेरे लण्ड ने पहली बार चूत का आनन्द उठाया। ये कहानी मेरे जीवन की सत्य कथा है जो करीब एक महीने पुरानी हएै लेकिन उससे पहले मैं आपको अपने आप से और अपने परिवार से परिचित करवा दूँ ताकि आप मेरी कहानी का आनंद उठा सकें।

    मैं अपने माँ बाप का 19 वर्ष का एकलौता बेटा हूँ और अभी प्रथम वर्ष की परीक्षाऐं दी हैं। मेरा शरीर सुडौल है लेकिन रंग सांवला है। हम मुम्बई में किराए का एक कमरा लेकर रहते हैं। जब में पाँच वर्ष का था तब मेरे पिताजी का देहांत हो गया था।

    मेरी माँ की उम्र 38 वर्ष और रंग सांवला है। उनका शरीर मोटा होने की वजह से जब वो चलती है तो उसके चूतड काफी हिलते हैं। उन्होने बडी मेहनत करके मेरी पढाई पूरी करायी और पिछले दो साल से कॉलेज जाने के साथ साथ एक निजी कम्पनी में पार्ट टाइम कम्प्यूटर ऑपरेटर का काम करता हूँ।

    मेरे घर में अब हमारे अलावा मेरी विधवा मौसी भी साथ रहती है जिनकी उम्र 36 साल की हैं। उनके पति का देहांत 3 साल पहले हुआ था। उनके कोई संतान नहीं है इसलिए मेरी माँ ने उन्हें अपने पास बुला लिया और दोनों साथ साथ कारखाने में काम करने लगीं।

    एक ही कमरा होने के कारण हम तीनो साथ ही सोते थे। मेरे बाजू में मौसी और मौसी के बगल में माँ सोती थी। सोते वक्त माँ और मौसी अपने ब्रा और लहंगा उतार कर नाईटी पहन लेती थी और मैं केवल लुंगी और अण्डरवियर पहनकर सोता था।

    एक दिन अचानक रात के करीब 12.30 बजे पेशाब लगने की वजह से मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि मौसी की नाईटी कमर तक उठी हुयी थी और वो धीरे धीरे आहहहह उईईई की आवाजें निकाल रही थी और अपनी एक हाथ की उंगलियों को अपनी चूत में डाल कर अन्दर बाहर कर रही थी और दूसरे हाथ से माँ की चूत को सहला रही थी।

    यह देखते ही मेरा लण्ड तन कर 6 इंच लम्बा और 2.75 इंच मोटा हो गया। कुछ देर के बाद मौसी सो गई शायद उनका पानी झड गया लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी और बार बार मौसी की चूत मेरी आंखों के सामने आ रही थी। खैर कुछ देर के बाद में उठ कर पेशाब करने चला गया और मौसी की चूत को याद करते करते ना जाने कब मुझे नींद आ गयी पता ही नहीं लगा।

    अब में मौसी को वासना की नजरों से देखने लगा। अगले दिन शनिवार था तो में आफिस से आते वक्त शाम के खाने के लिए चिकन ले आया और माँ से बनाने को कहा।

    उस दिन खाना खाने से पहले मैंनें अपनी माँ और मौसी के साथ व्हिस्की पी फिर खाना खाया। अक्सर मेरी माँ पीने में मेरा साथ देती है लेकिन माँ के जबरदस्ती करने पर उस दिन मौसी ने भी पी। माँ और मौसी ने एक एक पैग और मैंने तीन पैग पिए।

    खाना खाने के बाद माँ और मौसी ने सब काम खत्म किया और हम सोने की तैयारी करने लगे। रात के करीब 1.15 बजे में पेशाब करने उठा तो देखा कि मौसी मेरी माँ की तरफ करवट करके लेटी थी और उनका पैर मां के पैर पर था और माँ की नाईटी घुटनों के थोडा उपर उठी हुयी थी जबकि मौसी की नाईटी घुटनों से नीचे सरकी हुयी थी। मैं पेशाब करके लौटा तो देखा कि दोनों गहरी नींद में सोए थे शायद व्हिस्की की वजह से उन्हें गहरी नींद आ गयी थी।

    मैंने धीरे से मौसी की नाईटी को कमर तक हटा दिया। अब मौसी की झांटों से भरी चूत मुझे साफ दिखाई दे रही थी। मौसी का दाहिना पैर माँ के पैर पर होने की वजह से मौसी की चूत की दोनों काली फांके फैली थी और अंदर का गुलाबी भाग साफ नजर आ रहा था। उनकी चूत देखकर मेरा लण्ड टनटना गया और अण्डरवियर से बाहर आ गया।

    मुझसे रहा नहीं गया और सोचा कि मौसी की चूत में लण्ड पेल दूं पर हिम्मत नहीं हो रही थी। फिर मैंनें मौसी की तरफ करवट करके सोने का नाटक करने लगा और अपना लण्ड हाथ से पकडकर मौसी की चूत के पास रख दिया।

    डर की वजह से मैं लंड को उनकी चूत में घुसा नहीं सका क्योंकि अगर मौसी जाग जाएगी तो शायद नाराज हो कर माँ से शिकायत कर देगी इसलिए लण्ड को चूत के पास लगाकर धीरे धीरे लण्ड को रगडने लगा। ऐसा करते हुए कुछ ही देर में लण्ड ने बहुत सारा वीर्य मौसी की चूत पैर और झांटो पर जा गिरा।

    स्ुबह रविवार होने के कारण मैं करीब 11 बजे उठा तो मैंने मौसी और माँ को धीरे आवाज में बात करते सुना। मुझे लगा शायद मौसी मेरी शिकायत कर रही है इसलिए में उनकी बाते ध्यान से सुनने लगा।

    मौसी: दीदी पता है रात को क्या हुआ। माँ ने पुछा कि क्या हुआ।

    मौसी- रात जब मैं करीब 2.30 बजे पेशाब के लिए उठी तो देखा कि दीनू का लण्ड बाहर निकला हुआ था। तो माँ बोली कि शायद उसका अण्डरवियर ढीला होगा इसलिए लुल्ली बाहर आ गयी होगी।

    मौसी- दीदी अब उसकी लुल्ली लुल्ली नहीं रहीए मर्दों की तरह अब लण्ड बन चुका है।

    माँ- अच्छा फिर तो उसकी शादी की तैयारी करनी पडेगी। खैर ये बताओ कितना बडा लण्ड था उसका ।

    मौसी- उसका सिकुडा हुआ लण्ड ही काफी बडा लग रहा था।

    माँ आश्चर्य से: अच्छा तब तो जब उसका लण्ड खडा होगा तो काफी बडा लगेगा।

    मौसी- और दीदी जब में पेशाब करके उठी और चूत को साफ करने लगी तो मेरे हथेली पैर झांट और चूत की फांकों से कुछ चिपचिपा लग गया। शायद नींद में बेटे के लण्ड का पानी गिरा होगा।

    माँ- इसलिए कहती हूँ सोते वक्त अपनी नाईटी का ध्यान रखा कर अक्सर तेरी नाईटी कमर पर आ जाती है।

    ये सब सुन लेने के बाद मैं समझ गया कि रात में जो भी कुछ मैंने किया मौसी को उसका बुरा नहीं लगा। अब मैं नहा धोकर तैयार हो गया और नाश्ते की टेबल पर आ गया।
    तब माँ ने मौसी को मुझे नाश्ता देने को कहा और खुद कपडे सुखाने चली गयी।
    मौसी मेरे लिए नाश्ता लेकर आई और मेरे पास ही बैठ गयी। रात की घटना के बाद मैं मौसी को कामुक नजरों से देखने लगा था। जब मेरी नजर उनकी चूची पर पडी तो उन्होंने पूछा क्या देख रहे हो बेटा। मैंने कहा मौसी आज आप बहुत खूबसूरत लग रही हो तो मौसी हँसकर चली गयी।

    रात को खाना खाने के बाद हम सब सोने की तैयारी करने लगे पर आज मुझे नींद नहीं आ रही थी मैं केवल सोने का नाटक कर रहा था और मौसी को कैसे चोदा जाए ये सोच रहा था। रात के करीब 12.45 बजे मैंने आंख खोली और देखा कि मौसी कि नाईटी आज पूरी कमर तक उपर थी और मुझे उनकी चूत साफ नजर आ रही थी। उनकी चूत देखकर मेरा लण्ड खडा हो गया और मैं मौसी को चोदने के लिए तैयार हो गया तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया।

    मैंने खडे होकर कमरे की लाईट बन्द कर दी और अपने लण्ड पर ढेर सारा तेल लगा आया। अब मैंने मौसी की तरफ करवट करके कल रात की तरह उनकी चूत के मुह पर लण्ड रख दिया। मेरे लण्उ का सुपाडा चिकना होने के कारण थोडा मौसी की चूत में चला गया।
    मुझे मौसी की चूत का एहसास लण्ड पर हुआ जिससे मैं और उत्तेजित हो गया और धीरे से जोर लगा कर आधा सुपारा मौसी की चूत में डाल दिया। आधा सुपारा जाते ही मौसी के शरीर में शरीर में कुछ हरकत हुयी। मैंने सोचा कि शायद मौसी जाग गयी इसलिए कुछ देर ऐसे ही सोने का नाटक करने लगा। जब कुछ देर मेरे शरीर में हरकत नहीं होने पर मौसी ने थोडी गांड मेरी ओर खिसका दी जिससे पूरा लण्ड उनकी चूत में घुस गया।

    मैं समझ नहीं पाया कि मौसी ने नींद में यह हरकत की या जानबूझकर। मैंने हिम्मत करके अपना एक हाथ उनके बूब्स पर रख दिया और धीरे धीरे दबाने लगा। अब मौसी सीधी होकर सो गई जिससे मेरा लण्ड चूत से बाहर निकल गया। थोडी देर बाद मैंने मौसी का हाथ अपने लण्ड पर महसूस किया। वो मेरे लण्ड को आगे पीछे कर रही थी।

    मैं भी एक हाथ से उनके बूब्स को दबा रहा था और दूसरे हाथ से चूत को सहला रहा था। हम लोग ऐसा करीब मिनट तक करते रहे फिर मौसी के कहने से हम 69 की पोजीशन में आ गये और मौसी मेरा लण्ड चाटने लगी और मैं मौसी की चूत को चाटने लगा।

    जब मैंने अपनी जीभ को उनकी चूत की फांको पर रगडा तो वो आआहह. आहह उईई. उउईई. मामाआ कि आवाजें निकालने लगी। कुछ देर बाद उनकी चूत से सफेद पानी आ गया और उस वक्त उन्होने मेरा सिर पूरी तरह से चूत पर दबा रखा था जिस कारण मेरे मुंह पर पूरा चूत का पानी लग गया।

    फिर मौसी ने मुझे अपनी तरफ करते हुए कहा बेटा अब नहीं रहा जाता जल्दी से तुम्हारा ये मोटा लण्ड मेरी चूत में डाल दो।

    मैं भी जोश में आ गया और मौसी की चूत के नीचे तकिया रखकर उनकी चूत को थोडा उठा दिया और अपने लण्ड का सुपारा चूत के मुख पर रखकर जोरदार धक्का लगाया। एक ही धक्के में मैंने आधा लण्ड उनकी चूत में चला गया और जोरदार धक्के के कारण उनके मुह से हल्की सी चीख निकल गयी।

    उउईई मामाआआअ धीईएरीईईए डाआआलअउउ उनकी हल्की चीख सुनकर माँ जाग चुकि थी लेकिन अंधेरा होनेे के कारण वो हमें देख नहीं सकी और पूछा क्या हुआ। मौसी ने धीमे से मा के कान में कहा कुछ नहीं मैंने अपनी चूत में उंगली डाल के अन्दर बाहर कर रही थी तो मेरी चीख निकल गयी।

    माँ ने कहा ठीक है लेकिन आवाज धीरे करो क्योेकि दीनू पास में सोया है। हालाकि उन दोनों ने इतने धीमे आवाज में बातचीत की फिर भी रात होने के कारण मुझे उनकी आवाज सुनायी पड गयी।

    अब मैं कुछ देर रूक गया था मेरा आधा लण्ड अभी भी मौसी की चूत में घुसा हुआ था। थोडी देर बाद मैंने मौसी के होठों को चूमना शुरू किया और फिर से एक जोरदार धक्का मारा तो मेरा पूरा लण्ड चूत में चला गया। मेरा लण्ड जाते ही मौसी ने चिल्लाने की कोशिश की लेकिन मेरा मुंह मौसी के मंुह में था इसलिए वो चिल्ला ना सकी।

    थोडी देर बाद मैं अपना लण्ड अन्दर बाहर करने लगा जिससे मौसी को जोश आ गया और धीरे धीरे उउउईईई उउउफफ ध्ध्म्मम. आआअहहह और चोदो मुझे कहने लगी। करीब 20 मिनिट तक मैं उन्हें चोदता रहा इसी बीच मौसी 4 बार झड चुकी थी। जब मेरा पानी निकलने वाला था तब मैंने अपना लण्ड चूत से निकाल कर उनके मुंह में दे दिया और मेरा पानी मौसी के मुंह में पूरा भर गया और वो उसे गटागट पीने लगी। फिर मैं मौसी के बगल में आकर लेट गया।

    कुछ देर बाद मैंने मौसी के हाथ में अपना सिकुडा हुआ लण्ड पकडा दिया। मौसी मेरे लण्ड को सहलाने लगी और पूछा कि क्या तुम मुझे फिर से चादना चाहते हो।

    मैंने कहा- मौसी मैं आपकी गांड भी मारना चाहता हूँ।
    उन्होंने कहा- बेटा मैंने आज तक कभी गांड नहीं मरवाई और तेरा लण्ड भी काफी बडा और मोटा है। मुझे तकलीफ होगी।

    मैंने कहा- मौसी डरो मत। मैं आहिस्ता से डालूंगा।
    तो मौसी बोली- बेटा पहले अपने लण्ड और मेरी गांड पर ढेर सारा तेल लगाले जिससे लण्ड आसानी से गांड में चला जाएगा।

    मैंने कहा- ठीक है।
    और मैं तेल के बोतल लाकर अपने लण्ड और मौसी की गांड पर तेल लगाने लगा। मौसी ने अपने हाथों से चूतड पकडकर गांड फैला दी जिससे मुझे उनकी गांड पर तेल लगाने में आसानी हो गयी और मैंने ढेर सारा तेल उनकी गांड पर डाल दिया।
    तेल लगाते वक्त मैंने अपनी एक उंगली मौसी की गांड में डाल दी जिससे मौसी चिहुंक उठी। शायद उनको दर्द हुआ इस वजह से उन्होंने मेरी हाथ पकडकर मेरी उंगली बाहर निकाल दी।

    मैंने उनसे कहा कि अपने हाथों से चूतड को फैला दो ताकि गांड में लण्ड डालने में आसानी हो जाएगी। उसने अपने दोनों हाथों से अपने चूतड उठा कर फैला दिए और मैंने अपने लण्ड का सुपाडा उनकी गांड के छेद पर रख कर हल्का सा धक्का दिया। थोडा सा सुपाडा अन्दर जाते ही उन्होंने अपनी गांड सिकोड ली जिससे मेरा लण्ड गांड से बाहर आ गया।
    मैंने पूछा- दर्द हो रहा है क्या?
    उनहोंने सिर्फ गर्दन हिला कर हाँ में जबाब दिया।

    मैंने कहा अपने मुंह में नाईटी का कुछ हिस्सा दबा लो ताकि दर्द होगा तो आवाज नहीं निकलेगी वरना आवाज सुनकर माँ जाग जाएगी।

    उन्होंने अपने मुँह में नाईटी का कुछ हिस्सा दबा लिया। अब मैंने दुबारा चूतड फैलाने को कहा और उनकी गांड के छेद पर लण्ड का सुपाडा लगा कर एक जोर का धक्का मारा और मेरा लण्ड का पूरा सुपाडा उनकी गांड में घुसा गया। उनके मुंह से घुन घुन की आवाज आने लगी क्योंकि मुँह में कपडा लगा हुआ था।

    कुछ देर बाद मैंने एक और जोर का धक्का मारा और मेरा पूरा लण्ड उनकी गांड में घुस गया और दर्द की वजह से मौसी का शरीर कांपने लगा था।

    अब में लण्ड को अन्दर बाहर करने लगा था।

    अभी गांड मारते हुए मुझे 10 मिनट ही हुआ था कि किसी ने अचानक लाइट जला दी और रोशनी में मैंने देखा कि मौसी की जगह माँ लेटी हुयी थी और मैं माँ की गांड मार रहा था। लाइट जलाने वाली मौसी पास ही नंगी खडी मुझे माँ की गांड मारते देख रही थी।

    अचानक माँ को देखकर मैंने अपना लण्ड माँ की गांड से निकाल लिया। माँ ने भी अपने मुंह से कपडा निकाल लिया और कहने लगी कि फिर से मेरी गांड मारो। जब तुमने गांड में पूरा लण्ड डाल दिया तो अब क्या डरना अपनी मांॅ से। मैंने फिर से लण्ड माँ की गांड में घुसा दिया और माँ की गांड मारने लगा।

    मैं जब माँ की गांड मार रहा था तब माँ कह रही थी कि बेटा आज तुमने माँ की गांड की सील तोड दी और जोर से अन्दर बाहर करो अपना ये घोडे जैसा लण्ड। अब मैंने माँ से पूछा माँ ये बताओ तुम मौसी की जगह कैसे आ गयी।

    उन्होंने कहा: दीनू जब तुम मौसी को चोद रहे थे तब मुझे कुछ शक हो गया क्योंकि तुम्हारी मौसी के मुंह से उउउईईईई म्मम्मम्मा. आआआअ की आवाजें आ रही थी और जब तुम तेल लेने गये तब तुम्हारी मौसी ने मुझे सब कुछ बता दिया। इस तरह मौसी की जगह में आ गयी तुमसे गांड मरवाने। चल जल्दी से अब मेरी चूत में अपना लण्ड पेल दे अब नहीं रहा जाता।

    मैंनें तुरन्त अपना लण्ड निकाला और माँ की चूत में डाल कर दनादन पेलने लगा। जब में माँ ही चूत चोद रहा था तब मौसी अपनी चूत को माँ के मुंह पर रगड रही थी।
    करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपना वीर्य माँ की चूत में डाल दिया। इसी दौरान माँ 3 बार झड चुकी थी।

    अब 2 महीने से मैं माँ और मौसी को रोज नई नई स्टाइल में चोदता हूँ।

    दोस्तो! यह थी मेरी एकदम सत्य कहानी। मुझे आप सभी के प्यार भरे ई मेल्स का इंतजार रहेगा।
     
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