हनीमून के नाम पे वाइफ़ स्वैपिंग के मज़े

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Aug 13, 2016.

  1. 007

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    दोस्तो, मैं आपकी चहेती सीमा सिंह.
    जिन लोगों ने मेरी पहली कहानियाँ पढ़ीं हैं वो तो मुझे अच्छी तरह से जानते पहचानते हैं, जिन्होंने नहीं पढ़ीं, वो पढ़ कर देखें और मेरी कामुकता की ऊँचाई देखें कि जब मेरी चूत में आग लगती है तो कितनी लगती है।
    हाँ, यह बात अलग है कि आग तो हर वक़्त लगी ही रहती है।

    खैर अब मुद्दे पर आती हूँ, आज आपको मैं अपनी एक ऐसी बात बताने जा रही हूँ, जिसे मेरे और मेरे पति के अलावा और कोई नहीं जानता।
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    जब मेरी और धीरज की शादी हुई तो मैंने सोचा कि शादी के कुछ दिन बाद हनीमून पे जाएंगे।
    मगर इन्होंने बताया- अभी नहीं, हनीमून पर जाने का प्रोग्राम अभी कुछ दिन बाद का है।

    पता चला कि इनके एक दोस्त की शादी हमसे एक महीना पहले हुई थी, वो भी अभी हनीमून पर नहीं गया, और एक दोस्त की शादी 10 दिन बाद थी।
    इन तीनों दोस्तो का प्रोग्राम था कि अपनी अपनी शादी के बाद हनीमून पर एक साथ जाएंगे।
    एक तो तीन दोस्तों का साथ हो जाएगा और दूसरा तीनों की बीवियाँ भी आपस में दोस्त बन जाएँगी।

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    तो हमारी शादी के करीब 25 दिन बाद हम तीनों युगल अपने हनीमून के लिए दिल्ली से मनाली के लिए चल पड़े।
    मैं सीमा, मेरे पति धीरज, इनका दोस्त कमल, उसकी बीवी ऋतु, दूसरा दोस्त किशोर और उसकी बीवी कविता।
    हम सब के सब 23 से लेकर 28 साल की उम्र के थे, सो सब हम उम्र थे।

    सबसे बड़ा किशोर 28 का और सबसे छोटी ऋतु 23 की, बाकी सब इसके बीच, कोई 24 का, कोई 25 की, 26 का 27 की. सब के सब किशोर की ईनोवा में बैठ कर निकल पड़े।
    हम तीनों लेडीज़ के हाथों में चूड़े, मेहंदी।
    अब सब अच्छे घरों से थे तो सफर में हम तीनों लेडीज़ के भी जींस पहनी थी।

    सारे रास्ते खाते पीते मस्ती करते जा रहे थे। सफर लंबा था तो तय यह हुआ था कि हर कोई बाँट बाँट के गाड़ी चलाएगा, ताकि एक को ही थकावट न हो।
    इसका एक और फायदा यह था कि हर जोड़े को पिछली सीट पर बैठे बैठे मज़े लेने का मौका मिल रहा था।

    जो गाड़ी चला रहा था वो तो सामने देख रहा था, पिछले दो जोड़े आपस में बिज़ी रहते। एक दूसरे के सामने ही लिप किसिंग, बोबे दबाना, गंदे जोक्स, सब चल रहा था।
    मगर हर कोई अपनी पार्टनर के साथ ही कर रहा था, किसी ने भी अपने दोस्त की पार्टनर के साथ कोई भी छेड़खानी या बदतमीजी नहीं की।

    मनाली पहुँचे, होटल में तीन कमरे साथ साथ लिए।
    सबसे पहले जो काम होटल में पहुँच कर हुआ वो था सेक्स।
    सबने कमरे के अंदर घुसते ही रूम लॉक किया और सबसे पहले अपनी अपनी बीवी की बजाई।
    इसका पता साथ वाले कमरे से आने वाली चीख़ों से लग गया, सेक्स के दौरान कविता बहुत शोर मचाती है।

    उसके बाद सब तैयार होकर बाहर आए, शाम को बाज़ारों में घूमे, बाहर ही खाना खाया, रात को हम तीनों लेडीज़ की टाँगें फिर ऊपर उठाई गई।
    अगले दिन सब आस पास के नज़ारे देखने गए।
    मगर इस दौरान भी सब एक दूसरे के सामने अपनी अपनी बीवियों से चूमा चाटी करते रहे।
    और अब तो हम लेडीज़ की शर्म भी उतर गई थी, किसी भी लड़की ने अपने पति को उसके दोस्तों के सामने किस देने में या फिर और कहीं हाथ लगवाने या और कोई हरकत करने पर कोई ऐतराज नहीं होता था।

    हमारा करीब एक हफ्ते का प्रोग्राम था, 2 दिन तो सब ठीक चला, इस दौरान हम सबने खूब खाया, पिया, मीट, दारू और सिगरेट किसी चीज़ का परहेज नहीं किया।
    मतलब हम सब एक दूसरे के इतना करीब आ गए कि एक दूसरे से मुँह से लेकर शराब या सिगरेट पी लेते थे।

    हाथों में मेहंदी, कलाई में लाल चूड़े, मांग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र और हाथ में पेग और सिगरेट।
    सब कुछ एक साथ ही चल रहा था।
    जैसे हम सब स्वर्ग में जी रहे हों।

    मगर एक और चीज़ भी थी, जो हम सब में कॉमन हो रही थी, वो थी बीवियाँ बदल कर फोटोज़ खींचना, और इसमें मर्दों ने तो कुछ ज़्यादा ही बेशर्मी दिखाई, वो होंठ चूमने और बोबे पकड़ कर फोटो खींचने की ज़िद करने लगे।
    मगर इस बात के लिए किसी भी लड़की ने हाँ नहीं कही।

    मगर जब पतियों ने ज़बरदस्ती की तो किसी लड़की ने कोई बहुत ज़्यादा विरोध भी नहीं जताया और ऐसे ही हर मर्द का हरेक औरत के बदन पे अधिकार सा हो गया।
    अब मेरे बोबे हम तीनों लड़कियों में सब से बड़े थे, तो मेरे बोबे सब से ज़्यादा दबाये गए, मेरे चूतड़ों को सबसे ज़्यादा सहलाया गया।
    अब तो हम सब भी इस बात का बुरा नहीं मानती थी कि अगर कोई भी मर्द किसी भी औरत को बाहों में भर लेता, या मज़ाक में उसके सीने या फिर बदन पे और कहीं छू लेता।


    ऐसे ही एक शाम को हम सब ऋतु के रूम में ही बैठे थे, सब नीचे कार्पेट पर बैठे मस्ती मार रहे थे।
    तभी किशोर ने कहा- यार, आज कहीं जाना नहीं, तो एक काम करते हैं, सब मिल कर ताश खेलते हैं।

    सबको आइडिया पसंद आया, मगर दिक्कत यह थी कि हम लड़कियों में से किसी भी ताश खेलनी नहीं आती थी। तो किशोर ने आइडिया दिया कि कोई आसान सी गेम खेलेंगे मगर इसमें फंडा यह होगा कि हारने वाले को जीतने वाले की कोई एक विश पूरी करनी होगी।
    ऐसी गेम तो सबने फिल्मों में भी देखी थी, सब राज़ी हो गए।
    तो सब के सब गोल चक्कर बना कर बैठ गए, पत्ते बाँट दिये गए, हर कोई खेलने लगा।

    पहले पहले तो कुछ बाज़ियाँ ठीक चली, सब को मज़ा आ रहा था।
    फिर एक बाज़ी में किशोर हारा और कमल जीत गया तो कमल ने किशोर को शर्ट उतारने को कहा।
    सबने बहुत खुशी मनाई, बहुत हूटिंग हुई, और किशोर ने अपनी शर्ट उतार दी।

    अगली बाज़ी धीरज जीते और कविता हार गई तो धीरज बोले- कविता, मुझे तुम्हारा टॉप चाहिए।
    इस बार तो हम तीनों लड़कियाँ सन्न रह गई मगर तीनों पतिदेव खुश थे, मैं सोच रही थी कि कविता गेम छोड़ देगी, मगर उसने अपना टॉप उतारा और धीरज को दे दिया।
    गोरे बदन पर नीले रंग की ब्रा और उसके बोबों के क्लीवेज में फंसा उसका मंगल सूत्र!

    अगली बाज़ी में किशोर से मैं हार गई. तो फिर वही सज़ा. किशोर ने मुझे भी टॉप उतारने को कहा।
    मैंने धीरज की तरफ देखा।
    वो बोले- गेम इस गेम डियर, तुम को गेम के रुल्ज़ मानने पड़ेंगे।

    और थोड़ा सा सकुचाते हुये मैंने भी अपना टॉप उतार दिया।
    ब्लैक ब्रा में मेरे बोबे देख कर किशोर बोला- वाऊ, इसे कहते हैं ब्यूटी, सच में सीमा, तुम्हारे बूब्स लाजवाब हैं।
    मैं शरमाई मगर फिर भी गेम खेलती रही।

    इसी दौर में धीरज फिर जीते मगर इस बार उन्होंने कहा- अब ऋतु अपने हाथों से सब को एक एक शॉट टकीला पिलाएगी।
    सबने पी, बीयर तो पहले ही सब पी रहे थे, नशा और बढ़ गया।

    फिर गेम चलती रही और एक एक करके सब के कपड़े उतरते रहे।
    मर्द सिर्फ चड्डियों में रह गए और हम लेडीज़ सिर्फ ब्रा और पेंटीज में।
    हम लेडीज़ को ब्रा पेंटी में देख कर तीनों मर्दों के लंड तन चुके थे और वो हमें उनकी चड्डियों में से अकड़े हुये दिख रहे थे।

    फिर अगली बाज़ी में किशोर की चड्डी गई, फिर कमल की और फिर धीरज की।
    अब तीनों मर्द हमारे सामने बिल्कुल नंगे बैठे थे और उनके तने हुये लंड देख कर हमारा भी मूड बन रहा था।

    अगली बाजियों में हम लेडीज़ के बाकी के कपड़े भी भी गए, 6 के 6 लोग बिल्कुल नंगे हो चुके थे।
    उसके बाद नशे के सुरूर में बात और आगे बढ़ गई।
    यह कहानी आप चोद्काम डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

    अब जब मैं हारी तो मुझे किशोर की गोद में बैठा पड़ा, उसका तना हुआ लंड मेरी चूत से लगा, मेरा तो दिल किया कि ये अंदर ही डाल दे मगर अपने पति के सामने कैसे करती।
    फिर ऐसे ही बाकी लड़कियों को भी गेम हार कर दूसरे मर्दों की गोद में बैठना पड़ा।

    बेशक मुझे लग रहा था कि ये गेम सिर्फ हमें बेवकूफ़ बना कर सेक्स पार्टी मनाने के लिए खेली जा रही थी, मगर शराब के नशे ने दिमाग पर तो जैसे ताला ही जड़ दिया था।

    फिर जब कविता हारी तो तो कमल ने कहा- मैं कविता से सेक्स करना चाहता हूँ।
    एक बार तो कमरे में सन्नाटा सा छा गया मगर कविता उठ कर कमल के पास आ गई और बोली- चलो, कहाँ करोगे?
    हम सब तो उस लड़की की दिलेरी पर हैरान ही रह गए।

    कमल ने उसे वहीं लेटाया और और उसकी टाँगें खोल कर अपना लंड उसने कविता की चूत पे रख दिया और कविता ने खुद अपनी कमर ऊपर उठा कर उसका लंड अपने अंदर ले लिया।
    दोनों के बदन एक हुये, होंठ जुड़े और कमल धीरे धीरे अपनी कमर चलाने लगा।

    यह देख कर धीरज ने ऋतु को पकड़ लिया, वो बोली- नहीं नहीं. मुझे नहीं करना!
    मगर उस गरम माहौल में कौन सुनता।
    धीरज ने तो एक मिनट में अपना लंड ऋतु की चूत में दाखिल करवा दिया, और लंड अंदर घुसते ही ऋतु का विरोध भी शांत हो गया।

    अब बचा किशोर, जब वो मेरे पास आया तो मैं खुद ही लेट गई और अपनी टाँगें खोल दी।
    किशोर मेरे ऊपर आया, मैंने उसका लंड अपने हाथ में पकड़ा और खुद ही अपनी चूत पे रख लिया और किशोर का लंड मेरी गीली चूत में घुस गया।
    मैंने अपनी टाँगें किशोर की कमर के गिर्द लपेट ली और उसका सर पकड़ कर नीचे किया और अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिये।
    तीन मर्द तीन औरतें, मगर तीनों एक दूसरे के पति पत्नी नहीं।
    थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई चली, फिर पार्टनर बदल गए।
    अब किशोर की जगह कमल मेरे ऊपर था, धीरज ऋतु को छोड़ कर कविता को पकड़ लिया।

    जब कमल मुझे चोद रहा था तो बोला- जानती हो सीमा, जब हम इस ट्रिप पर निकले थे तो तभी मेरे दिल में यह ख़्वाहिश थी कि मैं तुमसे सेक्स करूँ, और देखो आज मेरी इच्छा पूरी हो गई, इतने विशाल और बड़े बड़े बोबे, जिन्हें मैं छू सकता हूँ, चूस सकता हूँ।

    फिर मेरी जांघ पर हाथ फेर कर बोला- ये गुदाज़ संगमरमरी जांघें जिन्हें मैं सहला सकता हूँ, तुम बहुत सेक्सी हो सीमा, आई लव यू, डार्लिंग!
    कह कर उसने मेरा बोबा पकड़ा और बच्चों की तरह चूसने लगा।

    यही हाल बाकियों का भी था।
    कविता पूरा शोर मचा रही थी- हाय हाय, आह आह.
    और दूसरी तरफ ऋतु बिल्कुल चुपचाप चुदवा रही थी।
    मैं भी थोड़ी बहुत सिसकारियाँ भर लेती थी, मगर ऋतु तो बिल्कुल शांत थी।

    ऐसे ही बदल बदल के सेक्स का दौर चलता रहा और फिर एक एक करके सभी झड़ने लगे।
    कौन सा मर्द किस औरत की चूत में झड़ा इस से किसी को कोई चिंता नहीं थी।
    मेरी चूत में कमल का वीर्य, धीरज ने ऋतु को अपने वीर्य से भरा और किशोर ने कविता को।

    जब चुदाई का कार्यक्रम समाप्त हो गया तो सब वहीं लेटे लेटे सो गए।
    उसके बाद तो बस पूछो ही मत, पति पत्नी का तो सिस्टम ही खत्म हो गया, हम तीनों लड़कियां उन तीन मर्दों की पत्नियाँ थी, और वो तीनों मर्द हमारे पति।
    उसके बाद जब भी जिसका भी दिल करता उसके साथ सेक्स कर लेता।

    अब मेरे में चुदास सबसे ज़्यादा थी, तो मैंने तो धीरज, कमल, किशोर जिस से भी जब भी दिल करता दिल खोल कर चुदवाती।
    धीरज को हनीमून से संतुष्टि मिली या नहीं, मुझे नहीं पता, मगर मुझे भरपूर संतुष्टि मिली।

    आखिरी एक दिन तो हम सब ने कमरे में ही बिताया और सभी के सभी बिल्कुल नंगे रहे।
    उस एक दिन में मुझे बार बार चोदा गया क्योंकि मेरे बड़े बोबे और गदराया हुआ भरपूर बदन मेरे पति के साथ साथ बाकी दोनों मर्दों को भी बहुत पसंद आया, उन दोनों ने थोड़ा सा सेक्स अपनी वाइफ़ से करना और बाद में फिर मुझे पकड़ लेना।

    वो दोनों भी देख रही थी कि उनके मर्द मुझ पर ही लट्टू थे और मेरे पति उन दोनों लड़कियों को अपने अगल बगल लेटा कर नवाबी शौक पूरे कर रहे थे और उन दोनों के पति मुझे चोद चोद कर अपनी मन की इच्छा पूरी कर रहे थे क्योंकि वो भी जानते थे कि आज ही मौका है बाद पता नहीं इस गुदाज़ सुंदरी को चोदने का मौका मिले न मिले।

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    अब क्योंकि सब मर्द लड़कियों के अंदर ही वीर्य छुड़वा रहे थे, तो इस बात की पूरी संभावना थी कि अगर कोई भी लड़की गर्भवती हो गई तो पता नहीं कौन सी लड़की किस मर्द के बच्चे को जन्म देगी।
    यह बात बाद में पता चली कि इस ताश के खेल का प्लान तीनों पतियों ने ही बनाया था कि अगर बात बात बन गई तो तीनों अपनी अपनी पत्नियाँ आपस में बदल लेंगे।

    आज मेरी प्रेग्नेंसी रिपोर्ट आनी है, देखो क्या रिज़ल्ट निकलता है।

    [email protected]

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