एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Story- 48

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Apr 27, 2016.

  1. 007

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    This story is part 48 of 60 in the series

    एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Story- 48
    इसे से पहले की प़ड़्‍मिनी कुछ समझ पती राजू ने अपने होंठ टीका दिए प़ड़्‍मिनी के होंठो पर और दोनो हाथो से प़ड़्‍मिनी के सर को कुछ इसे कदर पकड़ लिया की प़ड़्‍मिनी अपने होंठ उसके होंठो से जुड़ा ना कर पाए. प़ड़्‍मिनी ने पूरी कोशिश की राजू को हटाने की पर अपना राजू कहा रुकने वाला था. अपना प्यार मजबूत करना था उसे इश्लीए प़ड़्‍मिनी के गुलाबी होंठो को पूरी शिदत से चूस्ता रहा अपने होंठो में दबा कर. प़ड़्‍मिनी बस क्यों..क्यों कराती रही.मूह से बोलती भी तो कैसे बोलती कुछ. पूरे 2 मिनिट बाद हटा राजू और बोला, "गुलाब की पंखुड़ियों से भी मुलायम होंठ हैं आपके. कैसी लगी हमारी पहली किस."

    प़ड़्‍मिनी ने कुछ कहने की बजाए थप्पड़ झड़ दिया राजू को, "ऐसी लगी ये बेहूदा किस. तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे ज़बरदस्ती किस करने की. क्या यही प्यार है तुम्हारा. ये किसी रेप से कम नही था. मेरे पास मत आना आज के बाद तुम."

    "मेरा प्यार क्या रेप लगता है आपको. किस प्यार की ज़रूरात होती है. नही तो प्यार मजबूत कैसे होगा. हम इज़हार कैसे करेंगे प्यार का अगर किस नही करेंगे तो. क्या आप मुझे किस नही करना चाहती थी."

    "दूर हो जाओ तुम मेरी नज़रो से. एक तो ग़लत काम करते हो ऊपर से उसे जस्टिफाइ भी करते हो. हर चीज़ का एक तरीका होता है. ये नही की ज़बरदस्ती पकड़ कर जो मन में आए कर लो."

    "ओह सो सॉरी प़ड़्‍मिनी जी. मुझे इसे बात का अहसास ही नही हुवा. मैं किशी के बहकावे में आ गया था और ये सब कर बैठा."
    "किशणे बहक्या तुम्हे."

    "गुरु ने कहा था की किस करने से प्यार मजबूत होगा इश्लीए जल्द से जल्द एक किस कर लो."

    "वो कहेगा कुवें में कूद जाओ तो क्या कूद जाओगे."

    "सॉरी आगे से किशी की बातों में नही .आऊगा. मगर एक बात कहना चाहूँगा."

    "क्या?"

    "मैं आपके होंठ देख कर बहक गया था. कोई मुझे ना भी भड़काता तो भी मैं ये गुस्ताख़ी कर ही देता. थप्पड़ पड़ा आपका. अहसास भी हुवा की ग़लत किया कुछ. मगर जो अहसास मैने पाया है आपके गुलाबी होंठो को चूमने का वो इतना अनमोल है की आप मेरी गर्दन भी काट दें अब तो गम नही होगा क्योंकि कुछ बहुत ही ज़्यादा अनमोल पा चुका हूँ मैं अब. चलता हूँ मैं बाहर. हो सके तो मुझे माफ़ कर दीजिएगा. गोद ब्लेस्स यू." राजू मूड कर चल दिया.

    "रूको."

    "जी कहिए."

    "क्या बस किस ही करनी थी मुझे. क्या बात नही करेंगे हम अब."

    "ऑम्ग.क्या आपने मुझे माफ़ कर दिया. विश्वास नही होता. ऐसा मत कीजिए. मैं बहुत बदमाश हूँ.फिर से जकड़ कर पप्पी ले सकता हूँ आपकी."

    "राजू तुम्हे प्यार कराती हूँ मैं. तुम इतने उतावले क्यों हो रहे हो किस के लिए. हमे पहले एक दूसरे को समझना चाहिए. एक बुनियाद बनानी चाहिए रिश्ते की. ये बातें बहुत बाद में आनी चाहिए."

    "कितनी प्यारी बात कही आपने. जिन होंठो से ये बात कही उन्हे चूमने का मन कर रहा है. अब आप ही बतायें क्या करूँ."

    "एक थप्पड़ और खाओगे मुझसे"

    "मंजूर है हर जुल्मो-शीतम आपका, बस होंठो को होंठो से टकराने दीजिए." राजू ने कहा और प़ड़्‍मिनी की तरफ बढ़ा.

    प़ड़्‍मिनी ने वाकाई एक थप्पड़ और झड़ दिया राजू के मूह पर. मगर राजू नही रुका और प़ड़्‍मिनी को पकड़ कर फिर से उसके होंठो को जकड़ लिया अपने होंठो के बीच में. इसे बार और भी ज़्यादा गहराई से चुंबन लिया राजू ने प़ड़्‍मिनी का. पूरे 5 मिनिट चूस्ता रहा वो प़ड़्‍मिनी के होंठो को.

    5 मिनिट बाद प़ड़्‍मिनी के होंठो को आज़ाद करके राजू बोला, "मुझे नही पता की आपको कैसा लगा. मगर मैने जन्नत पा ली इन पलों में. और हाँ आपके होंठ पूरा शहयोग दे रहे थे वरना चुंबन मुमकिन नही था. धन्यवाद आपका."

    "रूको मैने कोई सहयोग नही किया तुम्हे."

    "जानता हूँ.मैने आपके होंठो को कहा.आपको नही. आपके होंठ मेरे हैं अब. आप चाह कर भी उन्हे मुझसे दूर नही रख सकती. गुड नाइट."

    "तुम्हे कभी माफ़ नही करूँगी मैं इसे सब के लिए. ई हटे यू."

    राजू मुश्कूराता हुवा बाहर आ गया, "नफ़रात झूठी है आपकी. आपके होंठ तो इतना प्यार दे रहे थे की पूछो मत. इट वाज़ मोस्ट ब्यूटिफुल किस ऑफ माई लाइफ. ई कॅन दिए फॉर इट."

    प़ड़्‍मिनी ठगी सी राजू को बाहर जाते हुवे देख रही थी. राजू के जाने के बाद प़ड़्‍मिनी ने तुरंत दरवाजा बंद कर लिया.

    "बदतमीज़ कही का. मुझे नही पता था की ये ऐसा करेगा मेरे साथ. क्यों प्यार कर बैठी हूँ मैं इसे से. इशे तो भले बुरे की समझ ही नही है. प्यार में ज़बरदस्ती किस कराता है क्या कोई. ग़लती कर ली थी मैने इशे घर में बुला कर. आगे से इशे कभी अंदर नही घुसने दूँगी." प़ड़्‍मिनी दरवाजे के सहारे खड़े हो कर सब सोच रही थी.

    अचानक प़ड़्‍मिनी को कुछ ख्याल आया और वो वाहा से चल दी अपने कमरे की तरफ. अपने कमरे में लगे दर्पण के आगे खड़ी हो कर उसने खुद को बड़े गौर से देखा. अंजाने में ही उष्का डायन हाथ खुद-भी-खुद उसके होंठो तक पहुँच गया. उसने अपने होंठो पर उंगलियाँ फिराई और धीरे से बोली, "तुम क्यों उसके साथ मिल गये थे."

    प़ड़्‍मिनी को अपने अंदर से जो जवाब आया उस पर वो विश्वास नही कर पाई. "किस ऐसी भी हो सकती है, कभी सोचा नही था."

    "ची ये सब मैं क्या सोच रही हूँ. ये राजू अपने जैसा ही बनाने पर तुला है मुझे. पर मैं क्या करूँ प्यार कर बैठी हूँ इसे पागल से दूर भी नही रही सकती उस से. वो सुबह बिना बताए चला गया था तो कितनी बेचैन रही थी मैं. ऐसा क्यों होता है प्यार में?" पर प़ड़्‍मिनी के पास अपने स्वाल का कोई जवाब नही था.

    "मुझे हाथ नही उठाना चाहिए था राजू पर. बुरा लगा होगा उसे. पर मैं क्या कराती.अचानक जकड़ लिया उसने मुझे. मुझे सोचने समझने का मोका तक नही दिया.पहली बार मैने किशी को थप्पड़ मारा है. जिसे मारना चाहिए था उसे तो आज तक नही मर पाई और जो मुझे इतना प्यार कराता है उस पर हाथ उठा दिया. मुझे ऐसा नही करना चाहिए था."

    प़ड़्‍मिनी खिड़की के पास आई और पर्दे को हल्का सा हटा कर देखा. राजू अपनी जीप में आँखे बंद किए बैठा था. "कही नाराज़ तो नही हो गया राजू मुझसे." प़ड़्‍मिनी ने मन ही मन सोचा.

    राजू के शरीर में हलचल हुई तो प़ड़्‍मिनी ने फ़ौरन परदा गिरा दिया और दिल पर हाथ रख कर बोली, "कही देख तो नही लिया उसने मुझे. नही.नही..वो नींद में है शायद. अब मुझे भी शो जाना चाहिए."
    लेकिन खिड़के से हतने से पहले प़ड़्‍मिनी ने एक बार फिर परदा हटा कर देखा. राजू वैसे ही आँखे बंद किए पड़ा था. "शुकर है नही देखा ईसणे मुझे.नही तो मज़ाक उसाता सुबह मेरा." प़ड़्‍मिनी मुश्कूराते हुवे सोच रही थी.

    प़ड़्‍मिनी अपने बिस्तर पर आकर गिर गयी और आँखे बंद करके धीरे से बोली," सॉरी राजू.मुझे तुम्हे थप्पड़ नही मारना चाहिए था. प्लीज़ मुझसे नाराज़ मत होना. तुम्हारे शिवा कोई नही है मेरा अब."

    .....................

    रोहित शालिनी के रूम पर पहुँचा तो देखा की अंदर से एक नर्स निकल रही है. रोहित ने उस नर्स को रोका और पूछा, "मेडम जगह रही हैं या शो रही हैं."

    "अभी-अभी इंजेक्षन दे कर आई हूँ उन्हे. वो जगह रही हैं."

    रोहित का चेहरा चमक उठा ये शन कर. वो घुस्स गया कमरे में. शालिनी आँखे मीचे पड़ी थी.

    "मेडम सब ठीक है ना. कोई तकलीफ़ तो नही है." रोहित ने धीरे से कहा.

    "रोहित तुम! तुम यहा क्या कर रहे हो. आराम करने को कहा था ना मैने."

    "आराम ही कर रहा था मैं कमरे में की अचानक" रोहित ने पूरी बात बताई आस्प साहिबा को.

    "ओह.फिर भी दूसरे पुलिस वाले भी हैं यहा."

    "मेडम क्या चौहान को आपने कही भेजा है."

    "नही मैने तो कही नही भेजा." शालिनी ने कहा.

    "ओह.शायद किशी काम से गये होंगे?" रोहित ने कहा.

    "रोहित!" शालिनी ने आवाज़ दी.

    "जी मेडम बोलिए."
    "कुछ नही.जाओ शो जाओ." शालिनी ने गहरी साँस लेकर कहा.

    "क्या बात है बोलिए ना?"

    "नही रहने दो.कोई बात नही है."

    "क्या आप नाराज़ हैन्मुझसे."

    "नही रोहित"

    "फिर बोलिए ना क्या बात है."

    "किशी ने मुझे ऐसे नही दांता कभी जैसे तुमने दांता था वाहा जंगल में."

    "सॉरी मेडम, जो सज़ा देनी है दे दीजिए. चाहे तो सस्पेंड कर दीजिए तुरंत, बुरा नही मानूँगा बिल्कुल भी."

    "नही मेरा वो मतलब नही था."

    "फिर आप अब मुझे दाँत कर दिल की भ ड़ा स निकाल लीजिए."

    "नही वो भी नही करना चाहती"

    "फिर क्या करना चाहती हैं आप."

    "कुछ नही..तुम शो जाओ जाकर. मुझे अब नींद आ रही है."

    रोहित सर खुजाता हुवा बाहर आ गया

    "मेडम कैसी बहकी बहकी बाते कर रही हैं. पता नही क्या चक्कर है .कही वही चक्कर तो नही जो की मैं सोच रहा था. "

    .....................

    बिस्तर पर पड़ते ही प़ड़्‍मिनी गहरी नींद में समा गयी थी. सुबह उष्की आँख दूर बेल से खुली. प़ड़्‍मिनी ने टाइम देखा, सुबह के 8 बज रहे थे.

    "कौन है इसे वक्त?" प़ड़्‍मिनी ने सोचा और खिड़की के पास आ कर बाहर झाँक कर देखा. राजू जीप में नही था.

    "राजू ही है शायद."

    प़ड़्‍मिनी दर्पण के सामने आई और हाथ से अपने बाल संवार कर, आँखे पोंछ कर कमरे से निकल गयी.

    प़ड़्‍मिनी ने दरवाजा खोला.

    "लीजिए सिलिंडर." राजू कह कर चल दिया.

    "नाराज़ हो मुझसे?"

    "आप खुद सोचिए. अपनी प्रेमिका का चुंबन लिया था मैने.कोई गुनाह नही कर दिया था जो की थप्पड़ पे थप्पड़ झड़ दिए आपने. बहुत बुरा लगा मुझे. आप प्यार नही मज़ाक कराती हैं मुझसे."

    "ऐसा नही है.बहुत प्यार कराती हूँ तुमसे मैं. मुझे अपनी ग़लती का अहसास है." प़ड़्‍मिनी ने मासूमियत से कहा.

    राजू तो देखता ही रही गया प़ड़्‍मिनी को. प़ड़्‍मिनी की आँखो में उभर आए प्यार में खो गया था वो.

    "कुछ इसे तरह से कहा है आपने ये सब की थप्पड़ का नामो निशान भूल गया हूँ. अब तक कहा छुपा रखा था ये प्यार आपने. शीतम ढा रही हैं आप मुझ पर अब."

    प़ड़्‍मिनी शरमाये बिना ना रही सकी. वो हल्की सी नज़रे झुका कर बोली, "तो तुमने मुझे माफ़ कर दिया."

    "आपसे नाराज़ हो कर कहा जाउंगा मैं. आप यकीन करें या ना करें मगर आप मेरी जींदगी बन गयी हैं."

    "राजू सच-सच बठाना तुम्हारा मकसद क्या है इसे प्यार में.?"

    "मकसद एक ही है.आपसे शादी करना चाहता हूँ. जींदगी भर आपके साथ रहना चाहता हूँ."

    "क्या तुम्हे पता है की मैं तुमसे उमर में बड़ी हूँ. कोई 3 या 4 साल बड़ी हूँ तुमसे मैं."

    "उस से कुछ फ्रक नही पड़ता प़ड़्‍मिनी जी."

    "ये जी क्यों लगाते हो मेरे नाम के पीछे हर बार तुम. क्या मुझे सिर्फ़ प़ड़्‍मिनी नही कह सकते."

    "ठीक है प़ड़्‍मिनी जी.ओह सॉरी प़ड़्‍मिनी.आज से ही जी को दूर फेंक दिया जाएगा. चलिए मैं ये सिलिंडर अंदर रख देता हूँ." राजू ने कहा.

    प़ड़्‍मिनी सोच में पड़ गयी.

    "इतनी सुबह-सुबह कहा से लाए सिलिंडर तुम."

    "अपने घर से लाया हूँ. वाहा बेकार ही पड़ा था."

    "रहने दो मैं ले जवँगी."

    "कैसी बात कराती हैं आप. आप क्यों ले जाएँगी इशे उठा कर मेरे होते हुवे. हटिए एक तरफ."

    राजू सिलिंडर ले कर अंदर आ गया और उसे किचन में ले जाकर चूल्‍हे से कनेक्ट कर दिया.

    प़ड़्‍मिनी किचन के दरवाजे पर खड़ी सब देखती रही. जब राजू सब काम करके मुड़ा तो प़ड़्‍मिनी ने पूछा, "क्या खाओगे तुम."

    "अगर थप्पड़ नही पड़ेंगे तो एक चीज़ खाना चाहूँगा."

    "नहियीईईई..क्या तुम्हारा मन नही भरा." प़ड़्‍मिनी दो कदम पीछे हाथ गयी.




    "कैसी बात कराती हैं आप. राजू से प्यार किया है आपने. मेरा मन आप जैसी हसीना के लिए कभी नही भरेगा."

    "मैने अभी कोलगेट भी नही किया है?" प़ड़्‍मिनी ने टालने की कोशिश की.

    "कोई बात नही.मैने एक बार कही पढ़ा था की किस मूह में मौजूद बॅक्टीरिया का ख़ात्मा कराती है."

    "झूठ बोल रहे हो?"

    "नही सच बोल रहा हूँ मैं."

    प़ड़्‍मिनी राजू से बचने के लिए अपने कमरे की तरफ भागी.

    "अरे रुकिये कहा भाग रही हैं आप. मुझसे आपको कोई नही बच्चा सकता."

    राजू भी प़ड़्‍मिनी के पीछे भागा. आधी सीढ़ियाँ चढ़ चुकी थी प़ड़्‍मिनी. मगर राजू ने हाथ पकड़ लिया भाग कर. प़ड़्‍मिनी ने मूड कर राजू से हाथ छुड़ाने के लिए झटका दिया. राजू का पाँव फिसल गया और वो लूड़क गया सीढ़ियों से.

    "राजू!" प़ड़्‍मिनी भाग कर आई राजू के पास. माथे से हल्का सा खून बह रहा था राजू के.

    "सो सॉरी राजू.ज़्यादा तो नही लगी."

    राजू ने जवाब देने की बजाए प़ड़्‍मिनी को पकड़ लिया

    "राजू प्लीज़.. चोदा मेरा हाथ.तुम तो पागल हो गये हो." प़ड़्‍मिनी गिड़गिडाई

    राजू प़ड़्‍मिनी का हाथ पकड़े हुवे खड़ा हुवा और उसे दीवार से सटा दिया.

    "अब भागो कहा भागोगी. बहुत सटाया है आपने मुझे. बहुत नाटक झेलें हैं आपके. अब आपसे गिन-गिन कर बदले लूँगा."

    "तो तुम मुझसे बदला ले रहे हो."

    "हाँ ऐसा बदला जीशमे प्यार ही प्यार है."

    "अफ तुम पागल हो गये हो. कहा फँस गयी मैं इसे पागल के साथ."

    राजू ने प़ड़्‍मिनी को बाहों में जकड़ लिया और अपने होंठ प़ड़्‍मिनी के दाहाकते अंगरों पर टीका दिए. प़ड़्‍मिनी चाहती तो अपने होंठ हटा सकती थी. मगर वो लेकिन बनी खड़ी रही. शुरू के कुछ पलों में तो बस राजू चूम रहा था प्दमीनी को. मगर कुछ ही देर बाद प़ड़्‍मिनी भी राजू के होंठो को तरह तरह से अपने होंठो में जकड़ रही थी. 5 मिनिट तक पागलों की तरह चूमते रहे वो एक दूसरे को. वो दोनो चुंबन के शुरूर में खो कर प्यार रूपी समुंदर में गोते लगा रहे थे.

    अचानक प़ड़्‍मिनी को अजीब सी चुभन महसूस हुई अपनी योनि के करीब. प़ड़्‍मिनी ने राजू को खुद से दूर ढकैयल दिया.

    "क्या हुवा?"

    प़ड़्‍मिनी ने अपने दिल पर हाथ रखा और बोली, "जैसे तुम्हे कुछ नही पता."

    राजू ने नज़रे झुका कर अपनी पेंट पर बने उभार को देखा और बोला, "ओह सॉरी.ये मेरे बस में नही है. ये तंबू ईसणे खुद खड़ा किया है."

    "तुम जाओ अब. मुझे फ्रेश होना है." प़ड़्‍मिनी गुस्से में कहा

    "ओह हाँ ऑफ कोर्स. शुकर है थप्पड़ नही पड़ा आज. हिहिहीही." राजू हंसते हुवे चल दिया वाहा से.

    "हे भगवान किश पागल के प्यार में फँस गयी मैं." प़ड़्‍मिनी ने सोचा.
    राजू के जाने के बाद प़ड़्‍मिनी ने तुरंत दरवाजा बंद कर लिया और खुद से बोली, "अब इशे दुबारा अंदर नही आने दूँगी. ये तो पागल है पूरा. क्या ऐसा कराता है कोई.जैसा ये कराता है."

    प़ड़्‍मिनी ने अपने दिल पर हाथ रखा. वो अभी भी ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था. "पर मुझे क्या हो जाता है.क्यों उष्का साथ देती हूँ मैं. क्या उसके हाथो का खिलोना बन गयी हूँ मैं. नही.ऐसा नही होने दूँगी मैं.."

    प़ड़्‍मिनी जितना राजू से प्यार कराती थी. उतना ही अपने चरित्रा के लिए प्रोटेक्टिव भी थी. अजीब सी सिचुयेशन थी प़ड़्‍मिनी के सामने.

    राजू बाहर आकर जीप में बैठ गया था और चुंबन के शुरूर में खो गया था. "सच में प्यार बहुत शुनदर होता है. ऐसी किस किशी से नही मिली. प़ड़्‍मिनी के होंठ मेरे होंठो पर हरकत तो कर रहे थे परंतु एक झीजक सी बरकरार थी. मगर उसके होंठो की हर हरकत छील्ला-छील्ला कर यही कह रही थी की 'मैं तुम्हे बहुत प्यार कराती हूँ राजू'. वैसे वो मानेगी नही ये बात पर मैं जान गया हूँ. शी इस रियली अमेज़िंग. धन्य हो गया हूँ आपसे प्यार करके प़ड़्‍मिनी जी." राजू सोचते हुवे मुश्कुरा रहा था.

    ...........................

    मोहित सुबह होते ही पूजा के घर से निकल गया था. जाते-जाते वो पूजा को बोल गया था की आज सारा दिन बिज़ी रहेगा क्योंकि काफ़ी काम है. दरअसल उसे इन्वेस्टिगेशन पर दिलो-जान से जुतना था. पहले मोहित घर गया और नहा धो कर अपना जासूसी का समान ले कर निकल पड़ा अपने काम पर.

    "सबसे पहले इसे कर्नल की ही इंक्वाइरी कराता हूँ. यही सबसे बड़ा सस्पेक्ट है." मोहित ने कहा.

    मोहित, कर्नल के घर के बिल्कुल सामने बने घर पर पहुँचा. वाहा एक बुजुर्ग से बात की उसने जो की अपनी बीवी के साथ अकेला रहता था.उसे यही पता चला की कर्नल बहुत अतचा इंसान है. बहुत अतचा नेचर है उष्का. बहुत अतचे से शालीनता से बात कराता है. लेकिन एक अजीब बात पता चली मोहित को बताओ बताओ में. वो ये थी की कर्नल अब उस घर में नही रहता है. बुजुर्ग के अनुसार वो घर शायद कर्नल ने किशी को किराए पर दे दिया था.

    "किशको किराए पर दिया था क्या बता सकते हैं?"

    "पता नही कौन है वो. कभी शकल नही देखी उष्की. आँखे भी कमजोर हो चली हैं. ठीक से दीखता भी कहा है. हाँ पर इतना पक्का है की इसे घर में अब कोई और रही रहा था. कभी उस से मुलाक़ात नही हुई."

    "एक नौकर भी रहता था यहा.उसके बड़े मे कुछ जानते हैं."

    "नौकर भी तो अभी देखा मैने. कर्नल ने किशी नौकर को नही रख रखा था घर पर. वो ज़्यादा तर काम खुद ही करते थे अपना. वैसे बेटा तुमने बताया नही की तुम ये सब क्यों पूछ रहे हो."

    " आपको पता ही होगा की ये घर पुलिस ने सील कर दिया है. मैं एक प्राइवेट डीटेक्टिव हूँ बस ये जान-ना चाहता हूँ की यहा क्या हो रहा था ऐसा की ये घर सील हो गया. क्या कुछ बता सकते हैं."

    "एक बात नोट की मैने. जो कोई भी यहा रहता था उन्हे कर्नल की ही तरह पैंटिंग का भी शॉंक था. कुछ दिन पहले ग़लती से पैंटिंग के समान की डेलाइवरी देने यहा हमारे घर आ गया था कोई. मैने उसे कर्नल के घर भेजा था."

    "ह्म.कुछ और बता सकते हैं आप."

    "जितना पता था बता दिया बेटा. और मुझे कुछ नही पता."

    "ह्म मेरा नंबर रख लीजिए. कुछ याद आए तो बता दीजिएगा फोन करके." मोहित कह कर चल दिया.

    मोहित ने आस-प़ड़ोष में कुछ और लोगो से भी बात की. लेकिन किशी को कुछ ज़्यादा जानकारी नही थी. सबको यही पता था की कर्नल ही रहते हैं वाहा. किशी और के रहने की किशी को खबर नही थी.

    "बड़ी बड़ी कोटििया हैं यहा. सब लोग अपने कामो में मग्न रहते हैं शायद. शुन्सान सी सhindi sex stories हैं यहा. उस बुजुर्ग के पास खाली वक्त है और घर भी कॉलोनेक के घर के सामने है इश्लीए गौर कर लिया होगा. वैसे भी जो कोई भी उस घर में आया था.कुछ दिन पहले ही आया था. ये सब बाते अभी तुरंत रोहित को बताता हूँ."

    मोहित ने रोहित को फोन मिलाया.

    "हेलो मोहित.हाउ अरे यू?"

    "सर कुछ बहुत इंपॉर्टेंट पता चला है"

    "हाँ बोलो?''

    "अभी-अभी मैने कर्नल के घर के सामने रहने वाले एक बुजुर्ग से बात की." मोहित ने रोहित को पूरी बात बता दी.

    "जीसस.ये तो मामला और ज़्यादा उलझ गया. अब ये कैसे पता चलेगा की कौन रही रहा था उस घर में. कर्नल का तो कुछ आता पता नही है."

    "सर एक डाउट हो रहा है. हो सकता है कर्नल को मर कर उसके घर और गाड़ी पर कब्जा कर लिया हो साएको ने. सोचा होगा की अतचा ठीकना रहेगा. कर्नल का घर एक सेफ प्लेस मना जा सकता है. और मुझे ये भी लग रहा है की हो सकता है की जो कोई भी यहा रही रहा था वो कर्नल को अतचे से जानता था और यारी दोस्ती में उन्होने ये घर उसे दे दिया हो."

    "इन बातों का जवाब तो कर्नल ही दे सकता है. मगर उष्का कुछ आता-पता नही है. देल्ही और मुंबई में कर्नल के रिलेटिव्स थे. मैने वाहा की लोकल पुलिस से कॉंटॅक्ट करके एंक्वाइरी के लिए कहा है. शायद कुछ पता चल जाए कर्नल के बड़े मे. "

    "ओके जैसे ही कुछ पता चले मुझे भी बता देना सर. मैं फिलहाल संजय की खबर लेने जा रहा हूँ."

    "ओके ऑल थे बेस्ट. बहुत अतचा काम कर रहे हो. बल्कि जो हमें करना चाहिए था वो तुम कर रहे हो. दरअसल सोचने समझने का टाइम ही नही दिया इसे साएको ने पीछले कुछ दिन. तुम लगे रहो. और कुछ पता चले तो तुरंत बठाना."

    रोहित उस वक्त स्प साहिब के कमरे के बाहर खड़ा था उनसे मिलने के लिए. फोन रख कर वो कमरे में घुस्स गया.

    "कैसे हैं सर आप."

    "मैं ठीक हूँ. आस्प साहिबा कैसी हैं."

    "वो भी ठीक हैं सर. 2 दिन बाद छुट्टी कर देंगे. सर क्या बता सकते हैं की कैसे हुवा ये सब."

    हाँ मैं बाथरूम से नहा कर निकल रहा था की अचानक मुझे पीछे से जकड़ कर मेरे मूह पर कुछ रख दिया उसने. मैने साँस रोक ली और उसे दूर ढकैयल दिया. उसके पास चाकू था.मैं खाली हाथ क्योंकि नहा कर निकल रहा था. काई वार किए हराम खोर ने पेट पर. चोदूंगा नही हरामी को बस मिल जाए एक बार."

    "शुकर है सर की ज़्यादा नुकसान नही हुवा. शायद वो आपको बेहोश करके कही ले जाने वाला था. वो ऐसा ही कराता है. अपने ठीकने पर ले जाकर आर्टिस्टिक मर्डर कराता है."

    "बस-बस मुझे हॉरर स्टोरी मत शुनाओ. बिल्कुल पसंद नही मुझे डरावनी बातें."

    "सॉरी सर."

    "मुझे भी शायद 2-3 दिन में छुट्टी मिल जाएगी." स्प ने कहा.

    रोहित स्प से मिलने के बाद शालिनी से मिलने पहुँचा. वो शालीनीन के कमरे में घुस्सा तो देखा की वाहा चौहान खड़ा था.

    "आओ रोहित" शालिनी ने कहा.

    "कैसी हैं मेडम आप?" रोहित ने पूछा.

    "ठीक है मिस्टर चौहान आप जायें और इतमीनान से अपनी बहन की सगाई की तैयारी करें." शालिनी ने कहा.

    "थॅंक यू मेडम" चौहान रोहित को घूराता हुवा कमरे से निकल गया.

    "पता नही कैसी हूँ. जब पेट से ये पट्टी हटेगी तभी पता चलेगा की कैसी हूँ. आज हटा कर देखेंगे इशे."

    "सब ठीक रहेगा मेडम.आप चिंता मत करो."

    "चौहान अपनी सिस्टर की सगाई और शादी करने जा रहा है ईसी हफ्ते. ये अचानक क्या हो गया इशे?" शालिनी ने पूछा.

    रोहित चुप ही रहा. झूठ बोलना नही चाहता था और सच बोलने की हिम्मत नही थी.

    "खैर तुम शुनाओ.कैसे हो.?" शालिनी ने पूछा.

    "ठीक हूँ मेडम. एक नयी डेवालेपमेंट हुई है साएको के केस में."

    "कोई हैरानी नही हुई शन कर. शुरू से यही तो हो रहा है इसे केस में. बताओ क्या डेवालेपमेंट है."

    रोहित ने पूरी बात शालिनी को बता दी.

    "ह्म.मतलब कर्नल की बजाए हमें अब इसे अंजान व्यक्ति को ढुंडना होगा. और ज़्यादा कॉंप्लिकेटेड हो गया मामला तो."

    "जी मेडम.आपकी इजाज़त हो तो मैं भी लग जाऊ काम पर."

    "मेरी इजाज़त चाहिए तुम्हे?"

    "जी हाँ."

    "तुम्हारे घाव भर गये सब?"

    "भर जाएँगे मेडम. चल फिर तो रहा ही हूँ. कोई दिक्कत नही है. ज़्यादा देर यहा नही बैठ सकता मैं. ये केस सॉल्व करना बहुत ज़रूरी है. पुलिस ऑफिसर्स को हॉस्पिटल पहुँचा दिया उसने. बहुत गंभीर बात है ये. मीडीया में तू-तू हो रही है पुलिस की. जल्द से जल्द कुछ करना होगा."

    "हम बदनाम होंगे तो क्या नाम ना होगा. ज़्यादा टेन्षन मत लो मीडीया की. इनका यही काम है."

    "मेडम आप कुछ बदली बदली सी हैं.आप मुझे बहुत कम दाँत रही हैं अब"

    "तुम्हे दाँत खानी है क्या?"

    "नही वो तो नही खानी?"

    "फिर क्यों परेशान हो रहे हो."

    एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Story- 48

    एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Sex Story
     
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