एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Story- 52

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  1. 007

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    This story is part 52 of 60 in the series

    एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Story- 52
    अगली सुबह सिकेण्दर रोहित की जगह जाय्न करने से पहले सीधा रोहित के घर पहुँच गया. रोहित ने गरम्जोशी से उष्का सावागत किया.

    " सरकार आपसे इसे केस में मार्गदर्सन की आशा रखता हूँ. उम्मीद है की आप मुझे इसे केस के हर पहलू से अवगत करवाएँगे." सिकेण्दर ने कहा.

    "बिल्कुल मैं आपकी हर संभव मदद करूँगा. पहले आप ये बतायें की इतनी दिलचस्पी क्यों थी आपको यहा आने की और इसे केस को लेने की."

    "वो सब छोड़िए सरकार. हर कोई किशी ना किशी काम में दिलचस्पी रखता है. हमें बस साएको को पकड़ने पर ध्यान रखना चाहिए."

    प़ड़्‍मिनी बुरी तरह सबक रही थी चटाई पर पड़ी हुई. दिल कुछ इसे कदर भारी हो रहा था की ज़ोर-ज़ोर से रोना चाहती थी वो पर राजू की फटकार ने उष्की आवाज़ दबा दी थी. वो अंदर ही अंदर घुट रही थी. आँखो से आँसू लगातार बह रहे थे. बहुत कोशिश कर रही थी की मूह से कोई आवाज़ ना हो पर रही-रही कर सबक ही पड़ती थी.

    राजू बिस्तर पर बैठा चुपचाप सब शन रहा था.

    "रोती रहो मुझे क्या है. तुम खुद इशके लिए ज़िम्मेदार हो." राजू ने मन ही मन सोचा और लेट गया बिस्तर पर चुपचाप.

    प्यार में गुस्सा ज़्यादा देर तक नही टिक सकता. प्यार वो आग है जीशमे की जीवन की हर बुराई जल कर खाक हो जाती है. गुस्सा तो बहुत छोटी चीज़ है. जब आप बहुत प्यार करते हैं किशी को तो उसके प्राति मन में गुस्सा ज़्यादा देर तक नही टिक पाता. संभव ही नही है ये बात.

    राजू का गुस्सा शांत हुवा तो उसे प़ड़्‍मिनी की शिसकियों में मौजूद उस दर्द का अहसास हुवा जो उसने उसे दिया था."हे भगवान मैने ये क्या किया? क्या कुछ नही कह दिया मैने प़ड़्‍मिनी को." राजू ने सोचा और तुरंत उठ कर प़ड़्‍मिनी के पास आ कर बैठ गया.

    प़ड़्‍मिनी अभी भी सबक रही थी. राजू ने प़ड़्‍मिनी के सर पर हाथ रखा और बोला, "बस प़ड़्‍मिनी चुप हो जाओ."

    प़ड़्‍मिनी की दबी आवाज़ जैसे आज़ाद हो गयी और वो फूट-फूट कर रोने लगी. राजू घबरा गया उस यू रोते देख.

    "प़ड़्‍मिनी प्लीज़.ऐसे रोता है क्या कोई..प्लीज़ चुप हो जाओ मेरा दिल बैठा जा रहा है तुम्हे यू रोते देख कर." राजू ने भावुक आवाज़ में कहा.

    "क्यों आए हो मेरे पास तुम. ना मैं प्यार के लायक हूँ ना शादी के लायक हूँ."

    "प्लीज़ ऐसा मत कहो तुम तो भगवान की तरह पूजा के लायक हो. मैने वो सब गुस्से में बोल दिया था. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो. "

    "गुस्से में दिल की बात ही तो कही ना तुमने. और सच ही कहा. मैं बिल्कुल लायक नही हूँ तुम्हारे प्यार के. अतचा हो की साएको मेरी आर्ट बना दे ताकि धराती से कुछ बोझ कम हो. मैं और नही जीना चाहती."

    "प़ड़्‍मिनी! खबरदार जो ऐसी बात की तुमने."

    "तो क्या करूँ मैं अगर ऐसा ना कहूँ तो. तुम मुझे नही समझते. मेरे दर्द और तकलीफ़ का अहसास तक नही तुम्हे. मेरे पास बस एक ही चीज़ के लिए आते हो जबकि बहुत सारी उम्मीदे लगाए रखती हूँ मैं तुमसे. मेरे लिए ये प्यार कुछ और है और तुम्हारे लिए कुछ और. मैं अकेली हूँ बिल्कुल अकेली जिसे कोई नही समझता. मैं धराती पर बोझ हूँ जिसे मर जाना चाहिए."

    "अगर ऐसा है तो मैं मर जाता हूँ पहले. कहा है मेरी बंदूक." राजू उठ कर कमरे की आल्मिरा की तरफ बढ़ा. बंदूक वही रखी थी उसने घर में घुस्स कर.

    ये शुंते ही प़ड़्‍मिनी तर-तर काँपने लगी. इंसान अपनी मौत के बड़े मे तो बड़ी आसानी से सोच सकता है मगर जिसे वो बहुत प्यार कराता है उष्की मौत के ख्याल से भी काँप उठता है. प़ड़्‍मिनी फुआरन उठ खड़ी हुई. राजू अंधेरे में कहा है उसके कुछ नज़र नही आ रहा था. उसने भाग कर कमरे की लाइट जलाई. तब तक राजू पिस्टल निकाल चुका था आल्मिरा से और अपनी कन्पाती पर रखने वाला था. प़ड़्‍मिनी बिना वक्त गवाए राजू की तरफ भागी और बंदूक राजू के सर से हटा दी. गोली दीवार में जा कर धँस गयी.

    प़ड़्‍मिनी लिपट गयी राजू से और रोते हुवे बोली, "तुम्हे नही खो सकती राजू.बहुत कुछ खो चुकी हूँ.. तुम्हे नही खो सकती. मेरा कोई नही है तुम्हारे शिवा."

    "तो सोचो क्या गुज़री होगी मेरे दिल पर जब तुम मरने की बात कर रही थी. दिल बैठ गया था मेरा. आज के बाद मरने की बात कही तुमने तो तुरंत गोली मर लूँगा खुद को. प्यार कराता हूँ मैं तुमसे..कोई मज़ाक नही."

    दोनो एक दूसरे से लिपटे खड़े थे. दोनो की ही आँखे टपक रही थी.

    "राजू मैं जानती हूँ तुम मुझे बहुत प्यार करते हो. पर ये प्यार मेरे शरीर पर ही आकर क्यों रुक गया है. मेरे शरीर में मेरा दिल भी है और मेरी आत्मा भी. मुझे तुम्हारी बहुत ज़रूरात है राजू.मैं बहुत अकेला फील कराती हूँ. तुम मेरे पास आकर बस मेरे शरीर को प्यार करके हाथ जाते हो. कभी मेरे अंदर भी झाँक कर देखो राजू. इसे शुनदर शरीर के अंदर एक अंधेरा भरा हुवा है जहा सिर्फ़ दर्द और तन्हाई के शिवा कुछ और नही है."

    रोहित ने साएको के केस की सभी डीटेल्स सिकेण्दर को बता दी.

    "सरकार इश्का मतलब बात कर्नल के घर पर आकर अटक गयी है. आपको क्या लगता है ये सीसी कौन हो सकता है." सिकेण्दर ने पूछा.

    "कोई भी हो सकता है. आप भी हो सकते हैं." रोहित ने मज़ाक में कहा.

    "सरकार मुझे तो पैंटिंग के नाम से ही डर लगता है. स्कूल में एक आपल तक ठीक से नही बना पता था. आपल बनाते बनाते भींडी की तस्वीर बन जाती थी." सिकेण्दर ने कहा.

    "ऐसा क्यों सरकार भींडी बहुत पसंद थी क्या आपको?" रोहित ने चुस्की ली.

    "छोड़िए सरकार अब क्या रखा है इन बातों में. चलता हूँ मैं और जाकर जाय्न कराता हूँ. जब भी कोई शंका होगी आपसे कॉंटॅक्ट करूँगा."

    "बिल्कुल बेझीजक मुझे कॉल कर लेना." रोहित ने कहा.

    ........................

    सुबह नींद में प़ड़्‍मिनी मीठी-मीठी आहें भर रही थी. उसे होश ही नही था की जिसे वो सपना समझ रही है वो हक़ीक़त है. प़ड़्‍मिनी पीठ के बाल पड़ी थी और राजू उष्की तरफ करवट लिए उस से चिपक कर पड़ा था. उष्का हाथ प़ड़्‍मिनी के उभार पर था और उसे हल्का हल्का मसल रहा था. ईसी कारण प़ड़्‍मिनी आहें भर रही थी. राजू प़ड़्‍मिनी की आहें शन कर मधाम-मधाम मुश्कुरा रहा था. उभार को मसलते हुवे उसने प़ड़्‍मिनी के कान में कहा, "उठ जाओ प़ड़्‍मिनी जुंग शुरू हो चुकी है और लगता है तुम हार रही हो."

    प़ड़्‍मिनी की तुरंत आबख खुल गयी. उसने राजू के हाथ को अपने उभार से हटाया और उठ कर बैठ गयी. प़ड़्‍मिनी दिल पर हाथ रख कर बोली, "तो ये सपना नही था?"

    "क्या सपना नही था प़ड़्‍मिनी हहेहहे."

    "और क्या कुछ किया तुमने मेरे साथ नींद में" प़ड़्‍मिनी ने पूछा.

    "कुछ और नही कर पाया बस अभी-अभी आँख खुली थी.आपके शुनदर उभारो से जुंग लड़ रहा था."

    प़ड़्‍मिनी का चेहरा लाल हो गया शर्म से. अचानक उष्का ध्यान दीवार घड़ी पर गया.

    "अरे 9 बज गये.हम इतनी देर तक शोते रहे." प़ड़्‍मिनी ने कहा.

    "बहुत लेट शोए थे हम.ये तो होना ही था. चलिए आप फ्रेश हो जाओ मैं आपके लिए नाश्ता बनाता हूँ."

    "तुम नाश्ता बनाओगे.मज़ाक मत करो?"

    "जी हाँ मैं बनावँगा और आपसे अतचा बनावँगा"

    "नही राजू मेरे होते हुवे ये सब करने की कोई ज़रूरात नही है तुम्हे.मैं खुद बनावँगी.अभी फ्रेश हो कर आती हूँ."

    प़ड़्‍मिनी उठ कर वॉशरूम की तरफ चल दी.

    "हे रूको." राजू ने पीछे से आवाज़ दी.

    "हाँ बोलो."

    "सॉरी फॉर एवेरितिंग."

    प़ड़्‍मिनी राजू की तरफ मुश्कुरा दी और वॉशरूम में घुस्स गयी.

    .....................

    एक महीने से शहर में शांति है. साएको ने कोई नयी वारदात नही की है. रोहित और मोहित ने इसे दौरान कर्नल को तलासने की खूब कोशिश की. वो दोनो देल्ही और मुंबई भी गये कर्नल के रालटिवेस से मिलने. मगर उन्हे कर्नल के बड़े मे कुछ पता नही चला. कर्नल के सभी रिलेटिव्स से सीसी के बड़े मे पूछा गया मगर वो सभी किशी सीसी को नही जानते थे.

    एक दिन अचानक मोनिका ने राजू को फोन करके बताया की संजय घर लौट आया है. राजू ने ये बात तुरंत रोहित को बताई. रोहित और मोहित दोनो संजय से मिलने उसके घर गये. संजय ने बताया की वो सिमरन की कार लेकर देल्ही चला गया था और कुछ दिन वही रहा.

    "आप अपनी बीवी को यहा अकेला छोड कर देल्ही चले गये.वेरी स्ट्रेंज. एक-दो दिन तो चलता है मगर इतने दिन कैसे आप अपनी बीवी को अकेला छोड सकते हैं." मोहित ने कहा.

    "उस से आपको कोई मतलब नही होना चाहिए.ये मेरा पर्सनल मामला है. " संजय ने कहा.

    रोहित और मोहित बिना किशी ठोस जानकारी के घर से बाहर आ गये.

    "मेरा सस्पेन्षन नही हुवा होता तो साले के मूह में बंदूक घुस्सा कर पूचेटा की बता कैसे हुवा ये तेरा पर्सनल मामला." रोहित ने कहा.

    "कोई बात नही अब ये वापिस आ गया है तो इसे पर हम कड़ी नज़र रखेंगे." मोहित ने कहा.

    "यार मोहित ये सीसी का फुल फॉर्म क्या हो सकता है."




    "कुत्ते कामीने हो सकता है.काला कव्वा हो सकता है.होने को कुछ भी हो सकता है."

    "यही तो दिक्कत है. साला क्लू मिला भी तो ऐसा की कुछ समझ में नही आता की क्या करें. ये सीसी सुरिंदर को भी जानता था और कर्नल को भी. तुम्हे क्या लगता है क्या सुरिंदर और कर्नल भी एक दूसरे को जानते थे." रोहित ने कहा.

    "ऐसा कुछ मिला नही जीश से ये कह सकें की सुरिंदर और कर्नल एक दूसरे को जानते थे."

    "साएको कोई शुराग नही छोड़ता अपने बड़े मे. उसने सुरिंदर को मर दिया था. मोस्ट प्रॉबब्ली उसने कर्नल को भी मर दिया है वरना वो कही तो मिलना चाहिए था. वो ऐसे कैसे गायब हो सकता है."

    "मुझे भी यही लगता है. साएको ने कर्नल से उष्का घर हथिया कर उसे जान से मर दिया होगा. और शायद उष्की लाश को कही गाड़ दिया होगा. कोई ऐसे ही बिना मतलब दुनिया से गायब नही हो जाता, कुछ तो कारण ज़रूर रहता है."

    "सही कह रहे हो. अतचा मोहित मुझे तुरंत घर जाना है. तुकझे बताया था ना आज शादी में जाना है."

    "हाँ बताया था पर तुझे वाहा इन्वाइट नही किया गया है."

    "यार रीमा के लिए जाना ही पड़ेगा मुझे. प्यार बेशकनही हुवा उस से पर हम अतचे दोस्त तो बन ही गये थे. सूभकामना देने तो जाना ही चाहिए."

    "बेशकजाओ रोहित. पर चौहान से बच कर रहना."

    "शादी के माहॉल में वो ज़्यादा पंगा नही करेगा और वैसे भी मैं बस रीमा को एक बार देख कर और उसे विश करके वापिस आ जाउंगा."

    "तुम्हारी मेडम भी होंगी वाहा ज़रा ध्यान रखना कही कोई ग़लत फ़हमी हो जाए."

    "मेडम को पता है सब कुछ."

    "हाँ पर खुद अपनी आँखो से देखने से दिल पर चुत लगती है. वैसे शादी डिले क्यों हो गयी रीमा की." मोहित ने कहा.

    "लड़के वालो ने थोड़ा वक्त माँगा था शायद. ई आम नोट शुरू." रोहित ने कहा.

    "ह्म ठीक है तुम निकलो मैं भी निकलता हूँ. पूजा को कॉलेज से पिक करना है. हमारा आज बाहर डिन्नर का प्रोग्राम है." मोहित ने कहा.

    मोहित टाइम से पूजा के कॉलेज पहुँच गया. कॉलेज से लड़कियों की भीड़ बाहर आ रही थी. मगर मोहित को पूजा कही नज़र नही आ रही थी.

    "कम ऑन जान कहा रही गयी तुम.जल्दी आओ.हमें खूब एंजाय करना है आज."

    मगर कॉलेज के दरवाजा से सभी बाहर आ गये पर पूजा नही आई. वॉचमेन ने दरवाजा बंद कर दिया. मोहित ने वॉचमेन से पूछा, "कोई लड़की अंदर तो नही रही गयी."

    "नही मैं चेक करके आया हूँ. सब जा चुके हैं."

    "ऐसा कैसे हो गया मैं तो बाहर ही खड़ा था."

    मोहित ने नगमा को फोन मिलाया.

    "हेलो नगमा.पूजा घर पहुँच गयी क्या?"
    "नही वो तो नही आई अब तक.क्यों क्या हुवा सब ठीक तो है."

    "मैं बाद में बात कराता हूँ.अभी थोड़ा बिज़ी हूँ."

    मोहित को टेन्षन होने लगी की पूजा कहा गयी.

    "कहा गयी होगी मेरी जान. ऐसे तो कभी कही नही जाती. उसे पता भी था की मैं उसे लेने .आऊगा."
    मोहित सोच में पड़ गया.

    तभी अचानक उसे ख्याल आया की कही पूजा को साएको ने तो किडनॅप नही कर लिया. ये ख्याल आते ही उष्की रूह काँप उठी. पूजा से बहुत प्यार कराता था मोहित उसके लिए कोई भी बुरी बात नही सोच सकता था.

    मोहित ने रोहित को फोन मिलाया और उसे सारी बात बता दी.

    "अगर पूजा को साएको ने किडनॅप किया है तो वो ज़रूर तुझसे कॉंटॅक्ट करेगा. तू ऐसा कर अपने घर जा. हो सकता है वाहा उसने कोई मेसेज चोदा हो तेरे लिए."

    "यार मेरे हाथ पाँव काम नही कर रहे. पूजा को कुछ हो गया तो मैं कही का नही रहूँगा."

    "समझ सकता हूँ मोहित. तुम ऐसा करो अपने घर पहुँचो. मैं भी वही पहुँचता हूँ." रोहित ने कहा.

    मोहित तुरंत बाएक स्टार्ट करके अपने घर की तरफ चल दिया. घर पहुँच कर जैसे ही उसने अपना दरवाजा खोला उसे दरवाजे के पास एक काग़ज़ पड़ा मिला उस पर कुछ लिखा था. मोहित ने उसे उठाया और पढ़ने लगा.

    "मिस्टर मोहित, कैसे हो तुम. तुमने मुझे बहुत परेशान किया है. मगर अब मेरी बड़ी है. कब से तुम्हारे लिए एक प्लान ढुंड. रहा था. समझ में नही आ रहा था की कैसी मौत दी जाए तुम्हे. तुम पर नज़र रखी तो पता चला की तुम एक लड़की पर फिदा हो. मेरा काम आसान हो गया.पूजा मेरे कब्ज़े में है. बिल्कुल नंगी पड़ी है मेरे सामने. वैसे मैं अपने विक्टिम से सेक्स नही कराता पर तुम्हारी पूजा ने तो खड़ा कर दिया मेरा लंड. बाला की खूबसूरात है साली. मन कर रहा है इश्कि लेने का. ले लॅंड क्या हाहहहाहा. मेरे दूसरे लेटर का इंतेज़ार करना. और हाँ अपने दोस्त रोहित से बोलना की रीमा की शादी में ज़रूर जाए. वाहा उसके लिए कुछ ख़ास करने वाला हूँ मैं हिहिहीही."

    मोहित की आँखे गुस्से से लाल हो गयी. "तुझे वो मौत दूँगा मैं की तेरी रूह काँप उठेगी साले कुत्ते कामीने साएको." मोहित छील्लाया.

    जब रोहित मोहित के घर पहुँचा वो बेड पर सर पकड़ कर बैठा था. रोहित को देख कर मोहित ने कहा, "जीशका डर था वही बात हुई.कामीने ने मेरी पूजा को उठा लिया."

    "कैसे पता चला तुम्हे ये?" रोहित ने पूछा.

    मोहित ने वो काग़ज़ रोहित की तरफ बढ़ा दिया, "जब मैं घर में घुस्सा तो दरवाजे के पास पड़ा था ये."

    रोहित ने वो काग़ज़ पढ़ा तो उसके चेहरे पर भी चिंता की लकीरें उभर आई.

    "मोहित गुजर चुका हूँ इसे सब से मैं. लेकिन ऐसे सर पकड़ कर बैठने से फ़ायदा नही होगा. जितना मैं उसे जान पाया हूँ, अभी वो उसके कुछ नही करेगा. सेकेंड लेटर का इंतेज़ार करते हैं."

    "मैं मर जाउंगा यार अगर मेरी पूजा को कुछ हुवा तो. मेरी जींदगी है वो."

    "कुछ नही होने देंगे हम उसे तुम हॉंसला रखो. अभी वक्त है हमारे पास. उसने मुझे रीमा की शादी में बुलाया है. इश्का मतलब वो वाहा आएगा. बहुत अतचा मोका है मोहित उसे पकड़ने का. वो हाथ आ गया तो पूजा भी मिल जाएगी. चलो वक्त यू मूह लटका कर बैठने का नही है. हमें उसे सबक सीखना है. वो हर बार अपनी बेहूदा गेम खेल कर नही निकल सकता.

    "तो क्या मैं भी तुम्हारे साथ रीमा की शादी में चलूं."

    "हाँ बिल्कुल.तेरे बिना बात कैसे बनेगी यार.चल उठ."

    "पर उसने दूसरे लेटर का इंतेज़ार करने को बोला है. मैं कैसे जा सकता हूँ."

    "यहा किशी और को छोड देते हैं. रुक एक मिनिट मैं भोलू को बोलता हूँ की वो यहा रुक जाए. वो लेटर डालने वाले पर नज़र भी रखेगा." रोहित ने कहा.

    "हाँ ये ठीक रहेगा?"

    "चल फिर अपनी पिस्टल उठा आज हमें साएको का शिकार करना है."

    रोहित ने फोन करके भोलू को मोहित के घर बुला लिया और उसे वही छोड कर रीमा की शादी में शामिल होने के लिए निकल दिए.

    "राजू को भी सतर्क कर दम इसे बड़े मे" रोहित ने कहा.

    "हाँ बिल्कुल"

    रोहित ने राजू को फोन मिलाया. रिंग्टोणे जाती रही पर राजू ने फोन नही उठाया. फिर उसने प़ड़्‍मिनी का फोन ट्राइ किया. प़ड़्‍मिनी ने भी फोन नही उठाया.

    "बिज़ी होंगे दोनो शायद किशी काम में." रोहित ने कहा.

    "हाँ नया नया प्यार हुवा है दोनो को. बिज़ी तो रहेंगे ही."

    रोहित के पास प़ड़्‍मिनी के घर पर तैनात एक कॉन्स्टेबल का नंबर था उसने वो ट्राइ किया.

    "राजवीर से बात करवाव मेरी."

    "सर वो तो यहा नही हैं. कोई 2 घंटे पहले मेडम को लेकर निकले थे अभी तक लौटे नही."

    "ये लड़का भी ना" रोहित ने इरिटेशन में कहा.

    "क्या हुवा?"

    "प़ड़्‍मिनी को लेकर गया हुवा है राजू कही. शायद कही घूमने रहे होंगे दोनो. इतना बड़ा ख़तरा मोल लेने की क्या ज़रूरात है. क्या थोड़ा इंतेज़ार नही कर सकते दोनो."

    "कल दोनो की बहुत लड़ाई हुई थी.किशी बात पर. प़ड़्‍मिनी नाराज़ हो गयी थी राजू से. शायद उसे मना-ने के लिए कही घुमाने ले गया होगा."

    "वो तो ठीक है घूमते-घूमते साएको मिल गया तो. हर वक्त नज़र रखता है वो हम लोगो पर. पूरी प्लॅनिंग से काम कराता है. मैने समझाया भी था उसे पर मेरी कोई शुणे तब ना." रोहित ने कहा.
    "रोहित एक बात शुन्ओ." मोहित ने कहा.

    "हाँ बोलो."

    "हम भेष बदल कर जायें वाहा तो ज़्यादा अतचा है. क्या कहते हो."

    "हाँ आइडिया बुरा नही है.लेकिन टाइम कम है हमारे पास."

    "मैं एक ऐसे व्यक्ति को जानता हूँ जो मिंटो में हमारा हुलिया बदल देगा."

    "चल फिर देर किश बात की है.."

    रोहित और मोहित नकली दाढ़ी मूच लगा कर पहुँचे शादी में.

    "तुम्हे क्या लगता है साएको क्या करने की सोच रहा है यहा." रोहित ने कहा.

    "भाई बुरा मत मान-ना पर मेरा पूरा ध्यान पूजा पर लगा हुवा है. बहुत कोशिश कर रहा हूँ पर.."
    एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Story- 52

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