एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Story- 53

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Apr 27, 2016.

  1. 007

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    This story is part 53 of 60 in the series

    एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Story- 53
    "देख मोहित हम पूजा के लिए ही आए हैं यहा. अगर यू खोए रहोगे तो कुछ भी नही कर पाओगे अपनी पूजा के लिए. अपना पूरा ध्यान यहा रखो."

    "वो तो ठीक है यार.मेरी जान किश हाल में होगी सोच कर ही रूह काँप रही है मेरी. वो बहुत डराती है रोहित. बहुत डराती है वो. नही सह पाएगी इतना कुछ.नही सह पाएगी." मोहित बहुत एमोशनल हो रहा था. ये सावभाविक भी था.

    "सब समझ रहा हूँ भाई.तू ऐसे करेगा तो मेरी भी हिम्मत जवाब दे जाएगी. संभाल खुद को. वो इंतेज़ार कर रही होगी तेरा की तू कुछ करेगा."

    "मुझे पता है तभी तो एमोशनल हो रहा हूँ. अगर कुछ कर नही पाया तो मेरा प्यार उस साएको के आगे हार जाएगा."

    "ऐसा कुछ नही होगा. उम्मीद का दामन आख़िर तक नही छोड़ना चाहिए. वक्त चाहे कितना भी बुरा आ जाए हमें उम्मीद रखनी चाहिए. वक्त कब करवट लेगा हम कह नही सकते."
    "सॉरी यार. बहुत ज़्यादा एमोशनल हूँ पूजा के लिए मैं. इश्लीए ऐसी बाते कर रहा हूँ. अब ठीक हूँ. चल देखते हैं क्या करने वाला है ये साएको. इसे से पहले की वो अपनी गेम में कामयाब हो हमें उसे पकड़ना होगा."

    "ये हुई ना बात."

    "अभी तो यहा शांति लग रही है. हमें हर व्यक्ति पर कड़ी नज़र रखनी होगी."

    "मुझे एक बात समझ में नही आई. यहा मेरे लिए क्या ख़ास करेगा वो."

    "तेरी मेडम आ रही है ना यहा."

    "बस यार सुबह सुबह बोल. बड़ी मुश्किल से बची थी पीचली बार वो साएको के जाल से."

    "देखा नही होता ना बर्दास्त. अब पता चला की क्या बीत रही है मेरे दिल पर."

    "वो पहले से समझा हुवा हूँ..एक मिनिट."

    "क्या हुवा?"

    "मेडम से मिल कर आता हूँ."

    "अरे वो तुम्हे नही पहचानेगी?"

    "देखा जाएगा तू यही रुक."

    रोहित शालिनी की तरफ बढ़ा. वो पिंक सारी में थी और एक दूसरी लेडी से बात कर रही थी.

    शालिनी के पास आकर रोहित ने कहा, "एक्सक्यूस मे मेडम, आपसे ज़रूरी बात करनी है."

    "दो ई नो यू?"

    "शायद." रोहित ने कहा.

    "गेट लॉस्ट फ्रॉम हियर. तुम्हे पता नही मैं कौन हूँ और क्या कर सकती हूँ." शालिनी को लगा की उसे छेड़ा जा रहा है.

    "आस्प साहिबा हैं आप और मुझे जैल में डाल सकती हैं. लेकिन फिर भी जोखिम लेने को तैयार हूँ. प्लीज़ थोड़ा सा इधर आकर मेरी बात शन लीजिए." रोहित थोड़ी आवाज़ बदल कर बोल रहा था इश्लीए शालिनी उसे पहचान नही पाई. लेकिन वो उसके साथ एक कोने में आ गयी.

    "हाँ बोलो क्या बात है."

    "अपने दिल की बात बोल क्यों नही देती आप उसे."

    "एक्सक्यूस मे..क्या बकवास है ये."

    "रोहित को बोल देना चाहिए आपको सब कुछ."

    "ई हटे हिं. कैसे काहु उसे ये कड़वा सच."

    "क्या कहा आपको नफ़रात है रोहित से." रोहित अब अपनी आवाज़ में बोल पड़ा.

    "जी हाँ बहुत ज़्यादा नफ़रात है. आपको क्यों तकलीफ़ हो रही है इसे बात से."

    "हे हेट्स यू टू." रोहित कह कर चल दिया.

    "रोहित रूको"

    "तो आपने मुझे पहचान लिया."

    "तुम्हारी आँखो से तुम्हे भीड़ में भी पहचान सकती हूँ."

    "मेडम साएको यहा कोई गेम खेलने वाला है. उसने मुझे यहा बुलाया है. मेरे दोस्त मोहित की गर्ल फ्रेंड को अगवा कर लिया है उसने. वो वापिस आ गया है और अब लगता है बहुत कुछ करने के मूड में है. आप यहा से चली जाओ."

    "वैसे मैं कुछ ही देर में जाने वाली थी पर अब तो बिल्कुल नही जवँगी मैं कही."
    "मेडम आप यहा रहेंगी तो मेरा ध्यान आप पर रहेगा."

    "तुम्हे छोड कर नही जवँगी रोहित. मुझे लाइयबिलिटी मत समझो तुम. आस्प हूँ मैं ऐसे रिस्क लेना मेरी ड्यूटी है."

    "हाँ आप आस्प हैं और मैं इनस्पेक्टर जो सस्पेंड हो चुका है. मेरी बात क्यों मानेगी आप."

    "कैसी बात करते हो रोहित. वो सब अपनी जगह है और तुम्हारा मेरा रिश्ता अपनी जगह है."

    "मेरा और आपका रिश्ता? बस थोड़ा सा और आगे बढ़िए और बोल दीजिए आज अपने दिल की बात."

    "चलो-चलो अपना रास्ता देखो."

    "मेडम प्लीज़ यहा से चली जाओ.मुझे कुछ अजीब होने की आसंका हो रही है. उसने मुझे यहा बुलाया है. हो सकता है वो मुझे परेशान करने के लिए आपको टारगेट करे. मुझे डर लग रहा है."

    "क्यों डराते हो मेरे लिए."

    "पता है आपको."

    "तुम मुझे तो कहते रहते हो की बोल दो.बोल दो. खुद तो तुमने अब तक नही कहा कुछ."

    "मेरी औकात ही क्या है आपके सामने. कही ठुकरा ना दिया जाऊ. डराता हूँ इसे बात से"

    "इसमे औकात की बात कहा से आ गयी. जाओ तुम मुझे तुमसे कोई बात नही करनी."

    "सॉरी मेडम."

    "सॉरी की कोई ज़रूरात नही है. तुम जाओ यहा से."

    "ठीक है मैं जाता हूँ. आप अपना ख्याल रखना. मुझे साएको को ढुंडना है. इसे से पहले की वो कुछ करे मुझे उसे पकड़ना है."

    रोहित कह कर चल दिया.

    "रूको." शालिनी चल कर उसके पास आई और बोली, "तुम भी अपना ख्याल रखना."

    "ओके." रोहित मुश्कुरा कर आगे तरफ गया.

    रोहित वापिस मोहित के पास आ गया.

    "कुछ दीखा ऐसा वैसा कुछ." रोहित ने कहा

    "इतने सारे लोग हैं यहा. सब पर कैसे फोकस करें." मोहित ने कहा.

    "मेरे लिए रीमा की शादी में ख़ास क्या हो सकता है?" रोहित सोच में पड़ गया.

    "कही वो रीमा की आर्ट तो नही बना रहा."

    "ऑम्ग ये तो मैने सोचा ही नही. चल देखते हैं की रीमा कहा है." रोहित ने कहा.

    दोनो भाग कर पूचेटे हुवे उस जगह पहुँचे जहा रीमा को शादी के लिए तैयार किया जा रहा था.

    "एक्सक्यूस मे रीमा कहा है." रोहित ने एक लेडी से पूछा.

    "वो ज़रा फ्रेश होने गयी है. जैमला के लिए अभी टाइम है. आप चिंता ना करें वो टाइम से पहुँच जाएगी."

    "कौन से कमरे में है वो" रोहित ने पूछा.

    "जीशके सामने मैं खड़ी हूँ."

    रोहित ने तुरंत दरवाजा पीतना शुरू कर दिया. तब तक छुआहं भी वाहा पहुँच गया था.

    "हे कोन हो तुम और ये दरवाजा क्यों पीट रहे हो."

    "सर मैं रोहित हूँ. रीमा की जान को ख़तरा है."

    "क्या बकवास कर रहे हो. दफ़ा हो जाओ यहा से."

    मगर रोहित ने चौहान की एक ना शुनि. उसने वो दरवाजे पर इतनी ज़ोर से धक्का मारा की वो गिर गया. जब रोहित अंदर घुस्सा तो उसके रोंगटे खड़े हो गये. वो देख नही पाया अंदर का दृश्या.

    कमरे में खून से लथपथ रीमा की नंगी लाश पड़ी थी. सर से लेकर पाँव तक वो खून के रंग में रंगी थी. कमरे के शीसे पर साएको कुछ लिख गया था. जिसे पढ़ कर किशी की भी रूह काँप जाएगी

    "मेरे हाथो से कोई बच जाता है तो मुझे बर्दास्त नही होता. लेकिन कोई एक बार बच सकता है दूसरी बार नही. दूसरी बार मेरा प्लान और भी ज़्यादा भयानक होता है. मिस्टर रोहित पांडे.रीमा को लाल सारी की बजाए लाल खून से रंग दिया है मैने. रीमा की शादी मुमारक हो तुम्हे."

    रोहित खुद को थाम नही सका और रो पड़ा. चौहान तो बेहोश हो कर गिर गया वही.

    "सॉरी रीमा.कुछ नही कर पाया तुम्हारे लिए. मैने आने में देर कर दी."

    मोहित ने ध्यान दिया की कमरे की खिड़की खुली पड़ी है.

    "रोहित वो मर्डर करके खिड़की से भगा है." मोहित ने कहा.

    "छोड़ेंगे नही साले को..आओ देखते हैं" रोहित छील्लाया.

    दोनो खिड़की से कूद कर बाहर आते हैं. उन्हे एक साया भागता हुवा नज़र आता है.

    रोहित और मोहित दोनो उसके पीछे भागते हैं.

    "हे रुक जाओ वरना गोली मर दूँगा." रोहित छील्लता है.

    पर वो साया नही रुकता.

    वो साया भागता हुवा किशी चीज़ से टकरा कर गिर जाता है और रोहित और मोहित उसे दबोच लेते हैं.

    "अरे चोदा मुझे कोन हो तुम लोग. इनस्पेक्टर सिकेण्दर पर हाथ डालने का आज़ाम बहुत बुरा होगा जान लो."

    रोहित ने सिकेण्दर के सर पिस्टल रख दी और बोला, "क्या कर रहे थे तुम यहा और जब हम रुकने को बोल रहे थे तो रुके क्यों नही. जल्दी बोलो वरना भेजा उसा दूँगा. मेरा दिमाग़ घुमा हुवा है अभी."

    "सिकेण्दर का कोई बाल भी बांका नही कर सकता पांडे जी. पीछे हटिए बंदूक मेरे पास भी है."

    "पहले तुम ये बताओ यहा कर क्या रहे थे."

    "मैने किशी को खिड़की से कूद कर भागते देखा. उशी का पीछा कर रहा था मैं."

    "झूठ बोल रहे हो तुम. हमने किशी को नही देखा तुम्हारे आगे. तुम अकेले ही भागे जा रहे थे."

    "सिकेण्दर वॉक्स अलोन इन थे डार्क लेकिन आज मैं अंधेरे में किशी का पीछा कर रहा था. मेरा यकीन करो."

    "रोहित ज़रूर कुछ गड़बड़ है. हमने किशी को भी नही देखा. बस ये अकेला भगा जा रहा था." मोहित ने रोहित के कान में कहा.

    राजू और प़ड़्‍मिनी अपने प्यार की खुमारी में खोए थे. उन्हे ज़रा भी अंदाज़ा नही था की पूजा को किडनॅप कर लिया है साएको ने और रीमा को मर दिया है. दोनो दुनिया की हर बात से बेख़बर थे. राजू प़ड़्‍मिनी को बाहर डिन्नर करवा कर आज फिर से अपने घर ले आया था.

    "पूरे एक महीने बाद वापिस आए हैं हम इसे छोटे से घर में. हमारी जुंग अभी भी जारी है."

    "वो तो जारी रहेगी राजू.हार मान-ने वालो में से नही हूँ मैं."

    "मैने भी जींदगी में हारना नही सीखा. मैं जीतूँगा ज़रूर एक दिन. हो सकता है आज ही जीत जाऊ."

    "कुछ भी हो राजू. ई लव यू फ्रॉम थे बॉटम ऑफ माई हार्ट."

    "ई लव यू टू बेबी. अगर ऐसा है तो आज हार मन लो तुम.दूरी बर्दस्त नही हो रही तुमसे."

    "एमोशनल करने की कोशिश कर रहे हो. खूब समझ रही हूँ मैं. कुछ भी कर लो शादी से पहले कुछ नही."

    "अफ.कब होगा डाइवोर्स तुम्हारा. मेरी तो जान पर बन आई है. कोई आशिक़ अपनी महबूबा के लिए इतना नही तडपा होगा जितना मैं तड़प्ता हूँ तुम्हारे लिए."

    "धीरज रखो मेरे दीवाने. डाइवोर्स फाइल कर तो दिया है ना. थोड़ा वक्त तो लगता ही है इन बातों में"

    "तड़प तड़प कर मर ना जाए ये दीवाना." राजू ने कहा.

    प़ड़्‍मिनी राजू से लिपट गयी और बोली, "ऐसे मत बोलो..ई लव यू सो मच."

    राजू ने प़ड़्‍मिनी के नितंबो को दोनो हाथो से थाम लिया और उसे ज़ोर से अपनी तरफ खींचा.

    "क्या कर रहे हो."

    "जुंग लड़ रहा हूँ और क्या..मेरा हत्यार महसूस नही हो रहा क्या तुम्हे"

    "अफ फिर से शुरू हो गये.क्या करूँ तुम्हारा मैं."

    "अतचा बस एक बात मन लो मेरी."

    "क्या?"

    "जैसे हम दोनो चुंबन लेते हैं होंठो से होंठ मिला कर. कम से कम एक बार एक चुंबन तो ले लेने दो दोनो को."

    प़ड़्‍मिनी की साँसे तेज चलने लगी ये शन कर.

    "प्लीज़ राजू ऐसी बाते मत करो."

    "पर सच कह रहा हूँ.आज बहुत तड़प रहा हूँ मैं. तुम इशे हवस कहो या कुछ और.पर मैं तुम में समा जाना चाहता हूँ आज."

    प़ड़्‍मिनी को राजू का लिंग ठीक अपनी योनि के ऊपर महसूस हो रहा था. राजू की बातें और लिंग की चुवन कुछ अजीब सा जादू कर रही थी प़ड़्‍मिनी पर. मगर वो फिर भी खुद को संभाले हुवे थी.

    "आज कुछ ज़्यादा ही दीवाने लग रहे हो."

    "सब तुम्हारे कारण है. क्या लग रही हो तुम आज.कसम से तुम्हे कच्छा चबाने का मन कर रहा है. वैसे एक बात कहूँ."

    "हाँ बोलो."

    "तुम्हारे नितंबो को थामे खड़ा हूँ.कुछ बोल नही रही आज तुम."

    "ओह हाँ भूलो गयी. हटाओ हाथ जल्दी."

    "नही हथवँगा.कर लो जो करना है."

    "अफ आज तुम ख़तरनाक मूड में हो. मुझे डर लग रहा है तुमसे."

    "डरना भी चाहिए हहहे."

    राजू ने अपने हाथो से प़ड़्‍मिनी के नितंबो को मसनला शुरू कर दिया. प़ड़्‍मिनी की साँसे उखाड़ने लगी.

    "राजू नही..आआअहह" प़ड़्‍मिनी ने कहा और राजू को धक्का दे कर उष्की बाहों से आज़ाद हो गयी.




    "क्या हुवा जानेमन.इतना करीब तो हम रोज ही रहते हैं."

    "आज बर्दास्त नही हो रही ये नझडीकियाँ."

    "मतलब आप जुंग हार रही हैं.वेरी गुड"

    "हार नही मानूँगी मैं."

    "ज़बरदस्ती मत करो अपने साथ प़ड़्‍मिनी.कभी कभी खुद को आज़ाद छोड दिया करो."

    "वाह.वाह क्या शिकसा दे रहे हो अपनी प्रेमिका को. अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी कह सकते हो तुम" प़ड़्‍मिनी कह कर वॉश रूम की तरफ चल दी.

    "कहा जा रही हो."

    "नहाने जा रही हूँ"

    "ये आग नहाने से नही बुझेगी. इसे आग को बुझाने के लिए एक अलग ही पानी बनाया है भगवान ने. वो पानी मेरे पास है. फ्री ऑफ कॉस्ट तुम्हे देने के लिए तैयार हूँ."

    "मुझे नही चाहिए."

    राजू ने भाग कर प़ड़्‍मिनी को पीछे से दबोच लिया और उष्की गर्दन पर किस करके बोला, "एक बार ट्राइ तो करो.सारी आग ठंडी हो जाएगी"

    "मेरे अंदर कोई आग नही लगी. मैं तो वैसे ही नहाने जा रही थी. चोदा मुझे."

    राजू के डाई तरफ एक छोटी सी टेबल थी. वो प़ड़्‍मिनी को खींच कर वाहा ले आया और उष्का नाडा खोने लगा.

    "राजू नही प्लीज़."

    "नही रोक सकता खुद को मैं अब. चाहे कुछ भी सज़ा देना मुझे बाद में परवाह नही मुझे. अब मैं ये जुंग जीतने जा रहा हूँ."

    "नही राजू प्लीज़.."

    नाडा खोल चुका था राजू और हल्की से सलवार भी नीचे सरका चुका था. प़ड़्‍मिनी ने अपने दोनो हाथो से अपनी सलवार को अपने कुल्हो पर थाम लिया और अपना नाडा वापिस बंद करने की कोशिश करने लगी. राजू ने प़ड़्‍मिनी की परवाह किए बगैर अपने लिंग को बाहर निकाल लिया और बोला, "नही रोक पावगी इसे तूफान को मन लो. खुद को आज़ाद छोड तो इन हवाओं में.प्यार है ये कोई पाप नही."

    राजू ने एक झटके में सलवार नीचे सरका दी प़ड़्‍मिनी की.

    "राजू क्या अपनी प़ड़्‍मिनी की बात नही मानोगे तुम. प्लीज़ रुक जाओ."

    राजू ने पैंटी भी नीचे सरका दी और बोला, "प्लीज़ ऐसा मत कहो.तुम जानती हो मैं रुक नही सकता."

    राजू ने दोनो हाथो से प़ड़्‍मिनी के नग्न नितंबो को थाम लिया.

    "अफ ये मखमली गान्ड..सच में तुम्हारा कोई मुक़ाबला नही प़ड़्‍मिनी. यू अरे मोस्ट ब्यूटिफुल वुमन इन थे वर्ल्ड."

    प़ड़्‍मिनी कुछ भी बोलने की हालत में नही थी. कुछ अजीब सी मदहोशी छा रही थी उस पर. शायद सब राजू के प्यार का असर था.

    "क्या हुवा प़ड़्‍मिनी.कुछ करो यार ये जुंग तुम हार रही हो."

    "तुम्हारी जीत में ही मेरी जीत है राजू. ई लव यू सो मच. तुम्हे तड़प्ता छोड कर मैं जीत भी गयी तो क्या मिल जाएगा मुझे. बहुत प्यार कराती हूँ तुम्हे. कर लो जो करना है तुम्हे. बस मेरा विश्वास मत तोड़ना कभी. हमेशा साथ रहना मेरे."

    "ओह प़ड़्‍मिनी.ई लव यू सो मच. नाउ फर्स्ट लेट देम किस. बहुत तरसे हैं दोनो एक दूसरे के लिए."

    "आआहह राजू तुम चुप नही रही सकते क्या?" राजू की बातें कुछ अजीब सा असर कर रही थी प़ड़्‍मिनी पर.

    राजू ने अपने लिंग को प़ड़्‍मिनी के योनि के द्वार पर रख दिया. प़ड़्‍मिनी के शरीर में मानो जैसे बीजली की लहर दौड़ गयी. वो थर थर काँपने लगी.

    "बहुत प्यारा चुंबन ले रहे हैं दोनो.क्या तुम्हे फील हो रहा है ये चुंबन प़ड़्‍मिनी. मुझे तो मेरी आत्मा तक महसूस हो रहा है. ये अहसास जींदगी भर नही भूलूंगा मैं."

    "आहह राजू तुम जीत गये और मैं हार गयी. लेकिन एक बात याद रखना.सिर्फ़ तुम्हारे लिए हारी हूँ मैं.खुद को थामना मुझे आता है."

    "जानता हूँ.तभी तो इतना प्यार आ रहा है तुम पर. ई लव यू बेबी. क्या मैं अब परवेश करूँ."

    "मना करूँगी तो क्या रुक जाओगे."

    "तुम बोल कर तो देखो."

    "ठीक है फिर यही रुक जाओ.वैसे भी तुम पहले सिर्फ़ चुंबन के लिए बोल रहे थे." प़ड़्‍मिनी ने हंसते हुवे कहा.

    लेकिन अगले ही पल प़ड़्‍मिनी की छींख गूँज उठी कमरे में. राजू का भारी भरकम लिंग 2 इंच प़ड़्‍मिनी की योनि में समा चुका था.

    "आआआअहह रजुउुुुुुुउउ धोकेबाज.मक्कार" प़ड़्‍मिनी कराहते हुवे बोली.

    "ओह सॉरी पीछे हतने की बजाए आगे को पुश हो गया ग़लती से. ई आम रियली सॉरी फॉर डेठ.

    प़ड़्‍मिनी अचानक लिंग के परवेश के कारण छटपटा रही थी. टेबल पर बुक्स का ढेर था. एक के ऊपर एक रखी हुई थी. छटपटाहट में कुछ बुक्स ज़मीन पर गिर गयी. एक किताब में से कुछ तस्वीरे बाहर निकल आई. एक तस्वीर को देख कर प़ड़्‍मिनी सोच में पड़ गयी. मगर अगले ही पल वो फिर से छीनखने पर मजब्ूओर हो गयी. राजू ने 2 इंच और सरका दिया था प़ड़्‍मिनी के अंदर.

    "ऊऊओह... राजू मेरी जान ले लोगे आज तुम. तुम्हारा प्यार बहुत दर्दनाक साहबित हो रहा है...आआअहह"

    "ई लव यू स्वीट हार्ट. ये दर्द का दोड जल्द गुजर जाएगा.फिर धीरे धीरे मज़ा आएगा."

    "एक मिनिट रुकोगे तुम."

    "एनितिंग फॉर माई प़ड़्‍मिनी. बोलो क्या बात है."

    "थोड़ी देर रूको बताती हूँ."

    प़ड़्‍मिनी ने उस तस्वीर को बड़े गौर से देखा. देखते देखते कब उसके चेहरे पर पसीने आ गये और रोंगटे खड़े हो गये उसे पता ही नही चला.

    "राजू ये तस्वीर किशकि है?" प़ड़्‍मिनी ने ज़मीन पर पड़ी तस्वीर की तरफ इशारा किया.

    "ये तो नगमा है. तुम मिल तो चुकी हो उसे. भूल गयी क्या?"

    "अरे नगमा को कैसे भूल सकती हूँ मैं. उष्की तस्वीर के ऊपर जो तस्वीर है उष्की बात कर रही हूँ. कौन है ये." प़ड़्‍मिनी की आवाज़ में डर और ख़ौफ़ सॉफ दीखाई दे रहा था.

    "बात क्या है प़ड़्‍मिनी. तुम डरी हुई सी क्यों लग रही हो."

    "यही साएको है राजू.यही साएको है." प़ड़्‍मिनी ने एक साँस में कहा.

    राजू के तो पैरो के नीचे से ज़मीन निकल गयी ये शन कर.

    "क्या बोल रही हो होश में तो हो तुम. तुम तो कह रही थी की याद नही तुम्हे अब उष्का चेहरा."

    "हाँ भूल गयी थी उष्का चेहरा मैं. लेकिन ये तस्वीर देख कर फिर से याद आ गया. मेरा यकीन करो राजू यही साएको है."

    राजू ने एक ज़ोर का झटका मारा और अपने लिंग को इसे बार पूरा घुस्सा दिया प़ड़्‍मिनी की योनि में.फिर से दर्दनाक छींख गूँज उठी प़ड़्‍मिनी की कमरे में.

    "आआययईीीईईई... आआअहह...क्या कर रहे हो राजू.मैने इतनी इंपॉर्टेंट बात बताई तुम्हे और तुम बस इसमे खोए हो. ई हटे यू." प़ड़्‍मिनी ने गुस्से में कहा.

    "सॉरी.पूरा डाल कर ही निकालना चाहता था बाहर." राजू ने अपने लिंग को बाहर खींचते हुवे कहा.

    "आआहह." प़ड़्‍मिनी कराह उठी.

    "ये बात तुरंत रोहित सर को बठानी होगी." राजू ने कहा.

    प़ड़्‍मिनी ने तुरंत अपनी पैंटी और सलवार ऊपर खींच ली, "आहह ये प्यार दर्द देने वाला है बहुत." प़ड़्‍मिनी कराहते हुवे बोली.

    राजू ने रोहित को फोन मिलाया. उस वक्त रोहित सिकेण्दर पर बंदूक तने खड़ा था. रोहित ने फोन उठाया.

    "हेलो राजू.कहा हो भाई.कितने लापरवाह हो गये हो. फोन भी नही उठाते हो. हो कहा तुम"

    "सर फोन साइलेंट मोड पर था."

    "ओके.क्यों फोन किया अब"

    "सर साएको का पता चल गया है."

    "क्या?"

    "हाँ, प़ड़्‍मिनी ने उसे पहचान लिया है. उसे सब कुछ याद आ गया उष्की तस्वीर देख कर.?"

    "जल्दी बोलो कोन है वो."

    राजू ने जब साएको के बड़े मे बताया तो उसके चेहरे का रंग उस गया. उसे विश्वास ही नही हुवा राजू की बात पर.

    "प़ड़्‍मिनी को फोन देना." रोहित ने कहा.

    राजू ने फोन प़ड़्‍मिनी को थमा दिया, "रोहित सर बात करना चाहते हैं."

    "हाँ प़ड़्‍मिनी राजू ने जो कहा क्या सही है वो सब."

    "हाँ.100 पर्सेंट."

    "ठीक है तुम दोनो वही रहो. कही जाना मत." रोहित ने फोन काट दिया.

    "सरकार उठिए.यू कॅन नाउ वॉक अलोन इन थे डार्क.हम चलते हैं."

    "अजीब बात कर रहे हैं सरकार. वो जो कोई भी था वो तो निकल गया ना हाथ से."

    "तो अतचा है ना.नाउ यू कॅन फ्रीली वॉक अलोन हहहे."

    रोहित सिकेण्दर को वही छोड कर मोहित को लेकर वाहा से चल दिया.

    "मोहित तुम्हारी पूजा को कुछ नही होगा. साएको का पता चल गया है. प़ड़्‍मिनी ने उसे पहचान लिया है."

    "सच कह रहे हो."

    "हाँ एक दम सच. लेकिन हम उसे उसके तरीके से ही मारेंगे. चल साले के लिए एक आर्टिस्टिक मर्डर का प्लान बनाते हैं. पैंटिंग नही आती मुझे मगर मैं उष्की मौत की पैंटिंग ज़रूर बनावँगा. उल्टी सीधी जैसी भी बने.बनावँगा ज़रूर."

    "कोन है वो मुझे बता तो सही."

    रोहित ने मोहित को साएको की पहचान बता दी. मोहित भी हैरान रही गया शन कर.

    रोहित ने अपनी दाढ़ी मूच निकाल कर एक तरफ फेंक दी. मोहित मैं मेडम से मिल कर आता हूँ. तुम यही रूको.

    रोहित को अपनी और आते देख शालिनी एक तरफ को आ गयी लोगो की भीड़ को छोड कर

    "दाढ़ी मूच क्यों उतार दी." शालिनी ने पूछा.

    "जीश काम के लिए यहा आया था वो हो गया इश्लीए उतार दी."

    "क्या मतलब?"

    "साएको का पता चल गया मेडम."

    "क्या! कोन है वो?"

    "अपने स्प साहिब."

    "वॉट.तुम होश में तो हो."

    "जी हाँ पूरे होश में हूँ.प़ड़्‍मिनी ने पहचान ली उष्की फोटो. अब उनका मायाजाल समझ में आया. खुद को हॉस्पिटल में भाराती करवा दिया उसने. ताकि किशी का भी शक ना जाए उस पर. फिर प़ड़्‍मिनी के घर पर हमला हुवा. हम सब हैरान थे की आख़िर साएको सिर्फ़ पैंटिंग रख कर क्यों चला गया. ये सब हमें भटकाने के लिए था. स्प साहिब को डर था की कही उस पर किशी का शक ना जाए इश्लीए ये मायाजाल बुन कर खुद को शक के दायरे से हटा लेना चाहता था वो. मुझे पूरा यकीन है की हॉस्पिटल में नकली इलाज हुवा होगा उष्का. डॉक्टर उष्की जान पहचान का था. ज़बरदस्ती आएक्यू में रहा वो हमें बेवकूफ़ बनाने के लिए."

    "विश्वास नही हो रहा मुझे ये शन कर. पुलिस के इतने बड़े ऑफीसर जिन पर की लोगो की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी है.लोगो को माराते फिर रहे हैं."

    "आपको अभी ये नही पता की यहा क्या किया उसने. जीशकि शादी में आप आई हैं उसे मर दिया हमारे स्प साहिब ने."

    "ओह माई गोद"

    "उसे उशी के तरीके से मारेंगे मेडम. वो एक आर्टिस्टिक मर्डर डिज़र्व कराता है. हम उसे इसे तरह से मारेंगे की उसे गर्व होगा की वो हमारे हाथो मारा गया."

    "मैं तुम्हारे साथ हूँ."

    "एक बात कहनी थी आपसे." रोहित ने कहा.

    "हाँ बोलो."

    रोहित ने शालिनी का हाथ पकड़ा और उसे भीड़ से दूर तन्हाई में ले आया.

    "क्या कर रहे हो.वाहा नही बोल सकते थे क्या?"

    रोहित ने शालिनी को दीवार से सटा दिया और उसके बहुत करीब आ कर बोला, "क्या आप प्यार कराती हैं मुझसे."

    "मुझे नही पता." शालिनी ने टालने की कोशिश की

    इतने करीब खड़े थे वो दीवार के सहारे की दोनो की साँसे टकरा रही थी आपस में.

    "लेकिन मुझे पता है की मैं आपको बहुत प्यार कराता हूँ." रोहित ने कहा.

    शालिनी खामोश रही. रोहित ने शालिनी के होंठो पर अपने होंठ टीकाने की कोशिश की तो उसने अपना चेहरा घुमा लिया. रोहित ने शालिनी के कंधे पर सर रख दिया और दो आँसू टपक गये उष्की आँखो से.

    "इश्लीए झीजक रहा था अपने दिल की बात बोलने से. ठुकरा दिया ना मेरा प्यार." रोहित ने भावुक आवाज़ में कहा.
    एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Story- 53

    एक खौफनाक रात - Hindi Thriller Sex Story
     
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