जिस्म की जरूरत-15

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Jan 30, 2018.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

    //krot-group.ru pyasi chut अध्याय 15
    बारात आने को थी सभी तैयार बैठे थे ,घर की सभी लडकियों में डिजाइनर लहंगा पहना था,सभी बहुत ही सुंदर दिख रहे थे ,वही सुमन और लाली ने साड़ी पहने हुई थी,विजय और किशन तीन चार पेग लगाकर काम में बिजी थे ,वही अजय और बाली बड़े आराम से बैठे बाते कर रहे थे ,महमानों के नाम पर गाव के ही कुछ लोग थे,विजय रेणुका के कमरे में पहुचता है,वह रेणुका दुल्हन के लिबाज में तैयार बैठी थी,साथ में ही सुमन,रानी और सोनल भी थे ,विजय को आया देख सोनल के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,
    "क्यों भाई क्या हुआ "सोनल ने पूछा,

    "कुछ नहीं बस कुछ काम था यहाँ पर ,"रानी भी हसने लगी ,तभी निधि आकर सुमन को अपने साथ बुला लिया ,उसके जाते ही सोनल और रानी उठने लगे,
    "चलो जानती हु क्यों आये हो यहाँ ,चलो जल्दी जो बात करना है कर लो पर जल्दी ना हम लोग बस आधे घंटे में आ रहे है ,"सोनल ने जाते हुए हसकर कहा ,उनके जाते ही विजय ने दरवाजा लगाया और रेणुका को पकड़ कर किस करने लगा ,
    "अरे ठाकुर साहब ये क्या कर रहे हो ,पूरा मेकअप ख़राब हो जाएगा,"रेणुका हस्ते हुए कह गयी,
    "अरे मेरी जान आज के बाद पता नहीं कब मौका मिले तुझसे प्यार करने का ,"विजय ने उसके बड़े बड़े उजोरो को दबाते हुए कहा ,
    "हाय क्या कर रहे हो ,और मैं कहा भाग रही हु आपसे दूर यही तो रहने वाली हु ना ,और क्या प्यार प्यार कह रहे हो आप,प्यार करते हो या अपनी आग बुझाते हो ,"रेणुका की बात विजय को चुभ गयी थी ,उसने झटके से उसे छोड़ दिया ,उसका चहरा उतर गया था जो रेणुका को समझते देर ना लगी ,
    "अरे ठाकुर साहब आप तो बुरा मान गए ,हमारा रिश्ता कभी ऐसा नहीं था की हम एक दुसरे को प्यार करे पर मुझे एक बात तो पता है की आपने मुझे कभी धोखा नहीं दिया ,आप ने मुझे जितना सम्मान और मजा दिया है उतना मुझे कोई नहीं दे सकता,"रेणुका उसके पास आई और अपने होठो को उसके होठो पर लगा दिया ,पर विजय उन्हें चुसना ही भूल गया था,रेणुका ने उसके सर को उठाते हुए उसकी नजरो को देखा
    "विजय मुझे देखो ,"विजय ने रेणुका के चहरे को देखा,
    "हम बचपन से साथ है ,हमारे बीच में जो भी हुआ वो बस जिस्म की जरुरत थी पर क्या सचमे ऐसा था ,मैंने हमेशा तुम्हे अपना पति ही माना ,पर हम अलग है हम अब भी सबकुछ कर सकते है पर हम कभी उस रिश्ते में नहीं बंध सकते जिसे शादी कहते है ,"पता नहीं आज विजय को क्या हो रहा था ,उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई उससे उसकी सबसे बड़ी सम्पत्ति छीन रहा हो ,वो भावुक हो गया था,उस लड़की के लिए जिसे उसने हमेशा ही बस एक जिस्म ही समझा था,उसने रेणुका के चहरे को देखा उसके आँखों में आंसू थे और उसका काजल बहने को हो रहा था वो आगे बढकर उसके आँखों का पानी अपने हाथो से साफ करता है,

    "रेणुका मैं नहीं कह सकता की मैं तुम्हे प्यार करता हु ,पर तुम मेरे लिए हमेशा ही बहुत इम्पोर्टेंट रहोगी ,तुम्हे मेरे कारन कभी भी कोई तकलीफ नहीं होगी,ये मेरा वादा है तुमसे और तुम्हारी सभी तकलीफों में मैं तुम्हारे साथ रहूँगा,अगर तुम चाहो तो शादी के बाद कभी तुम्हारे रस्ते में नहीं आऊंगा,"विजय ने रेणुका के माथे को चूम लिया ,इसपर वो हस पड़ी ,
    "क्या ठाकुर साहब आप से दूर जाउंगी ये तो मैं सोच भी नहीं सकती ,और होने वाला तो नाम का पति होगा असली पति तो आप ही होंगे ,और मुझे माँ भी तो आपको ही बनाना है ना "रेणुका ने अपनी शोखिया दिखाई की विजय दीवाना हो गया और उसने रेणुका के होठो को चुसना सुरु किया ,अपनी जीभ रेणुका के होठो में डालकर वो उन्हें चूसने लगा ,वैसे तो दोनों के लिए कोई नयी बात नहीं थी पर आज बात कुछ अलग थी ,दोनों बहुत ही शिद्दत से एक दुसरे से लिपटे हुए थे ,रेणुका एक चमकीले लाल रंग की साड़ी पहने थी,हाथ लाल रंग की चूडियो से भरा था और गले में कुछ जेवर थे ,विजय का हाथ उसके खुले कमर में गया वो उसे मसलने लगा ,रेणुका के मुह से एक आह निकली और उसने विजय के होठो को काट लिया ,विजय ने एक मुस्कान देकर उसकी साड़ी को ऊपर उठाना सुरु किया ,साड़ी कमर से ऊपर हो चुकी थी की गाजे बजे की आवाजे होनी शुरू हो गयी ,बारात आ चुकी थी और उनके पास जादा समय नहीं थी ,विजय ने जल्दी से अपने पेंट को निचे किया और अपने मुसल को निकल कर रेणुका के जन्घो के बीच लाया उसके अन्तःवस्त उसे रोक रहे थे उसने उसे उतरा नहीं बस साईड किया,उसकी बालो से भरी हुई चूत पहले से ही गीली थी ,विजय ने उसे थोडा सा सहलाया और अपने मुसल को निशाने पर लाकर उसके अंदर करने लगा ,
    रेणुका ने उसे अपने बांहों में खीच लिया और अपने जिसमे को उसके हवाले करते हुए उसके बांहों में समां गयी ,विजय उसे पास के दिवार पर टिका दिया और पहले बड़ा झटका मारा ,रेणुका के हाथ विजय के सर के चारो तरफ थे और दोनों के होठ आपस में मिले हुए बस चूस रहे थे ,दोनों आनद के सागर में गोते लगा रहे थे,पहला झटका पड़ते ही रेणुका के चूडियो की आवाज सुनाई दि जिससे विजय का मुसल और भी फुल गया,और उसने अपने सांसो को रोककर तेज झटके लगाने शुरू किये ,एक तूफान सा उस कमरे में आया और दोनों अपनी इज्जत,दर्द ,थकान भूलकर बस एक दुसरे में खोने लगे
    "आह आह आह आह ठाकुर साहब आह विजय मेरी जान आह मैं तुम्हारी हु आह आह आह "
    "हां हां हां हा मेरी रांड ,हा मेरी जान ,हा मैं तुझे माँ बनाऊंगा हां हा हा ,आह आह आह ,"
    "हा बनाओ मुझे माँ ,आह हम्म हूम "विजय अपनी पूरी ताकत लगा रहा था और पुरे कमरे में उनकी कहारे गूंज रही थी,दोनों में अपने में मस्त थे चूडियो की आवाज से पूरा कमरा गूंज गया था ,और अब दोनों के काम रस ने छप छप की आवाजे करनी शुरू कर दि ,विजय ने उसे उठाकर दीवाल के तरफ उसका मुह किया रेणुका अपने हाथो से दिवार का सहारा लिए खड़ी हो गयी ,विजय में पीछे से उसके बालो को पकड़ा और उसके योनी में अपना मुसल पेल दिया ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी घोड़ी की सवारी कर रहा हो ,उसके जन्घो से टकराते रेणुका के निताम्भो की आवाज एक लयबद्ध रूप से थाप पैदा कर रही थी ,रेणुका के नाजुक निताम्भो से ठकराने पर विजय और भी उत्तेजित हो जाता था ,
    "मदरचोद रांड ,तुझे तो मैं जिंदगी भर ऐसे ही चोदुंगा ,आह आह आह "
    "हा हा हा मेरे राजा ऐसे ही ,ऐसे ही ऐसे ही आह आह ऊऊऊ ओओ ओ ओ ओ "विजय उसके मुह में अपनी उंगलिया घुसा देता है जिसे वो चूसने लगती है ,विजय अपनी पूरी ताकत हर एक धक्के में लगा रहा था ,
    इधर कमरे के बहार सोनल और रानी रेणुका को बुलाने आने वाले थे ,जैसे ही वो कमरे के दरवाजे में दस्तक देने वाले होते है ,उन्हें रेणुका की आहे सुनाई देती है ,दोनों को समझ आ चूका था की अंदर क्या हो रहा है ,उनके चहरे पर एक मुसकान फैली और वो कमरे से अलग हो इन्तजार करने लगे ,कुछ ही देर में रेणुका और विजय की एक जोरदार चीख फैलती है की सोनल और रानी आसपास देखने लगते है की कोई पास तो नहीं है ,सोनल जल्दी से दरवाजा खटखटाती है ,यहाँ विजय अपनी मर्दानगी का गढ़ा पानी रेणुका के अंदर छोड़ रहा था ,की दरवाजे में हुई दस्तक से दोनों एक दुसरे को देखकर मुस्कुराते है और अलग होकर अपने कपडे सम्हालते है ,और दरवाजा खुलते ही सोनल आकर विजय के कानो को पकड़ कर खीच लेती है ,
    "अरे ये क्या कर रही है ,"
    "सालो तुमको यहाँ बात करने के लिए छोड़ा था की रासलीला करने "
    "अरे बात ही तो कर रहे थे ,"

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    "हा सालो बात कर रहे थे ,बहार तक आवाज जा रही थी तुम्हारे बात की और अगर निचे वो नगाड़े नहीं बज रहे होते ना तो निचे भी पहुच जाती ,और तुझे शर्म नहीं आती रे ,बाहर तेरा शौहर बारात लेकर खड़ा है और यहाँ तू ,.छि "सोनल ने छि तो कहा पर उसके चहरे पर मुसकान साफ थी अगर रेणुका अपना सर उठाकर देखती तो शायद उसे समझ आ जाता
    "अब सर क्या झुका के खड़ी है जा जाकर बाथरूम से हो आ फिर तुझे निचे भी जाना होगा ,चल "रेणुका भागती बाथरूम में घुस जाती है वही विजय सोनल के कमर को पकड़कर अपने पास खिचता है और उसके गालो में एक चुम्मन ले लेता है ,
    "थैंक्स यार तूने मेरी एक मन्नत पूरी कर दि ,"सोनल अपने को छुड़ाती है ,
    "चल भाग साले तेरी मन्नत नहीं ये तेरी हवस है और जल्दी से निचे जा भईया तुझे ढूंढ रहे है "
    विजय जल्दी से सोनल को एक किस करता है
    "मेरी बहन ग्रेट है "और वहा से निचे चला जाता है ,
     
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