नयना और दीप्ति संग चुदाई का खेल-2

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Dec 2, 2017.

  1. 007

    007 Administrator Staff Member

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    मैं बेशरम होकर दोनों के पैरों के पास नीचे कार्पेट पर बैठ गया। दोनों के बीच में बैठने के कारण एक के पैर मैंने मेरे दोनों हाथों में उठाए और उन्हें चूसना शुरू कर दिया.. बारी-बारी से मैं दोनों के पैर चाट रहा था। यह सब ब्लू फिल्म्स में देखने के कारण.. कि कैसे करते हैं.. ये मुझे पता था.. उनके पैर धुले हुए थे इसलिए मैं गंदा फील नहीं कर रहा था।

    अब धीरे-धीरे मैं भी एंजाय करने लगा.. और वो दोनों भी शायद..

    लगभग 15 मिनट बाद उन दोनों ने मुझे रुकने को कहा और अपनी जगह बदल दी.. जिसकी वजह से अब उनके बचे हुए दो पैर मेरी गोद में थे। लगभग 15 मिनट तक फिर से पैर चूसने के बाद वे दोनों संतुष्ट हुईं और मुझे खड़ा होने को कहा गया।

    नयना- काफ़ी अच्छा मसाज दिया आशीष तुमने.. पहली बार किसी ने मेरे साथ ये किया है.. पर मुझे बहुत अच्छा लगा..
    दीप्ति- हाँ काफ़ी अच्छी तरह से किया है इसने.. और देखो शायद इसके लौड़े ने भी एंजाय किया है.. ये पहले की साइज़ से काफ़ी बड़ा हुआ लग रहा है..

    नयना- आज इसे 'फुल इरेक्ट' करके मुठ्ठ नहीं मारने देंगे.. देखते हैं बिना हाथ लगाए कब तक टिक पता है.. और हाँ.. आशीष अगर तुमने इससे छूने की कोशिश की.. तो तुम्हें उसकी सज़ा भुगतनी पड़ेगी..
    मैं- जी ठीक है..

    नयना- अरे दीप्ति.. तुझे पता है.. इसे लड़कियों की शेव्ड बगलें बहुत पसंद हैं.. उन्हें देखकर भी इसका लंड हवा में उड़ने लगता है।
    दीप्ति- अच्छा.. बहुत हरामी है ये तो.. चल देखते हैं..
    इतना कहकर दीप्ति ने नयना के कान में कुछ कहा और अपना टॉप उतारने लगी।

    उसने अन्दर से समीज पहनी हुई थी और उसके अन्दर मम्मों के ऊपर काले रंग की ब्रा कसी हुई थी।

    टॉप उतारते ही मुझे दीप्ति का क्लीवेज नज़र आया.. आअहह.. अब वो क्या कातिल माल लग रही थी.. दीप्ति ने हाथ ऊपर उठाए और अपने खुले बाल बाँध लिए.. मैं उसके शेव्ड बगलों की तरफ देखे जा रहा था और मेरे लौड़े में हरकत शुरू हो गई.. वो बड़ा होने लगा।

    दीप्ति- सचमुच यार.. यह बहुत ही चुदक्कड़ है.. चल सोफे के पीछे आ जा.. मैं सोफे की पुश्त पर पीछे की तरफ झुकती हूँ.. तू मेरी बगलें चाट..

    मेरा तो जैसे सपना सच होने जा रहा था.. मैं जल्दी से सोफे के पीछे जाकर दीप्ति के सर के पीछे खड़ा हो गया और उसकी दूधिया और मुलायम बगलों पर हाथ फेरने लगा.. धीरे-धीरे नीचे झुककर मैं उसकी बगलों पर जीभ फेरने लगा। मैं अभी इसको एंजाय ही कर रहा था.. तभी मुझ पर दो तरह का हमला हुआ..
    मैं दीप्ति के बिल्कुल पीछे था.. तो उसने एकदम से अपने सीधे हाथ में मेरी गोटियाँ पकड़ लीं और उन्हें ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगी.. खींचने लगी।

    तभी नयना मेरे पीछे आ गई और उसने मेरा सिर पूरी तरह से दीप्ति की बगलों पर दबाए रखा.. मैं दर्द को सहन नहीं कर पा रहा था..और कुछ बोल भी नहीं पा रहा था.. मेरी हमेशा से इच्छा थी कि कोई मेरे गोटियों के साथ खेले.. पर जिस तरह दीप्ति उन्हें मसल रही थी.. उस तरह नहीं..

    लगातार 5 मिनट तक बेरहमी से मसलने के बाद उसने मेरी गोटियाँ छोड़ी और लंड को पकड़ लिया.. पर ये क्या.. नयना का एक हाथ पीछे से मेरी गाण्ड से घूमता हुआ आया और उसने पीछे से मेरी गोटियाँ खींच लीं।
    मेरा दर्द से बुरा हाल हो गया था.. एक तरफ से दीप्ति लंड को खींच रही थी.. तो दूसरी तरफ नयना गोटियों को.. ऐसा लग रहा था.. जैसे इन्हें लंड और गोटियों को अपने आप से अलग करना है।

    दस मिनट तक ये ज़ुल्म ढाने के बाद उन्होंने मुझे आज़ाद किया.. मैं दर्द से तड़प रहा था और उसी की वजह से मेरा हाथ मेरे लंड को सहलाने के लिए बढ़ा.. तभी नयना ने मेरे मुँह पर एक थप्पड़ मार दिया..
    मैं उसका यह रूप देख कर हैरान था..

    उसने कहा- मैंने पहले ही कहा है.. जब तक हम ना कहे.. तब तक अपने लंड को हाथ नहीं लगाना।
    अब वे दोनों ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगीं।

    मुझे फिर से सामने बुलाया गया.. और फिर उन्होंने बताया कि हम दोनों 12वीं क्लास से एक-दूसरे की अच्छी दोस्त हैं पर बारहवीं कक्षा के बाद नयना मेडिकल में चली गई और दीप्ति मैनेजमेंट की तरफ चली गई थी।

    अब नयना ने मुझे टीज़ करने की तैयारी शुरू की और वो धीरे-धीरे अपने टॉप को ऊपर करने लगी। जैसा कि मैंने कहा है शुरूआत में उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी.. तो अगले कुछ मिनटों में उसके बड़े-बड़े कबूतर अपनी ब्राउन चोंच के साथ मेरी आँखों के सामने थे। मेरा जी कर रहा था कि अभी के अभी इन्हें हाथों में लेकर दबाया जाए और चूसा जाए.. एकदम कड़क और भरे हुए मम्मे मेरे सामने नंगे उछलते देखकर मेरी हालत खराब हो गई।

    मेरा लंड पूरी तरह से बेकाबू होकर उछलने लगा था.. पर क्या करूँ मुझे अपने लौड़े पर हाथ लगाने की अनुमति नहीं थी।

    अब नयना जानबूझ कर मुझे इशारे करने लगी.. अपने मम्मों को दबाने लगी.. दीप्ति मेरी तरफ देखकर नयना के मम्मों की चौंचें खींचने लगी।

    ये सब देखकर मुझे रहा नहीं जा रहा था.. मेरी खराब हालत देख कर दीप्ति को मज़ा आ रहा था.. और लगी हुई आग में घी डालने के लिए उसने भी एक चाल खेली।
    दीप्ति एकदम से खड़ी हुई और उसने एक ही झटके में अपनी लेग्गी और पैन्टी एक साथ नीचे खींच कर निकाल दीं।

    आआअहह.. क्या नज़ारा था..!

    दीप्ति की चिकनी टाँगों को मैं ऑफिस में भी देख चुका था.. पर पूरी नंगी टाँगें कसी हुई जाँघें और उनके बीच पूरी तरह से क्लीन शेव्ड उसकी फूली हुई चूत देखकर मेरे होश उड़ गए।

    वो अब उसका हाथ चूत पर फेर रही थी वो वैसे ही इठलाती हुई सोफे के हत्थे पर बैठ गई और मुझे कहा- आ जा.. अब मेरी चूत चाट दे.
    और यह कहते हुए उसने किसी रण्डी की तरह अपने पैर फैला दिए।
    वो संगमरमर जैसी सफेद चूत देखकर मेरा तोता हवा में उड़ने लगा था.. मेरे लंड की चमड़ी पूरी तरह पीछे खिंच चुकी थी..। मुझे दर्द हो रहा था.. पर चूत चाटने के खुमार में मैं वो दर्द भूल गया।
    मैं जल्दी से सोफे पर उल्टा लेट कर दीप्ति की चूत चाटने लगा।
    आआहह. क्या मज़ा आ रहा था..!

    तभी दीप्ति ने मुझे बाजू में हटाया और कहा- रुक.. मुझे लेटने दे..
    वो अब सोफे के हत्थे पर सिर रख कर पीठ के बल लेट गई और जितना हो सकता था.. उतने पैर उसने फैला दिए।

    तभी नयना ने मुझसे कहा- तू मेरी जाँघों पर लेट जा.
    मैंने ठीक वैसे ही किया और मैंने अपना सर दीप्ति के पैरों में अड्जस्ट कर लिया।
    अब मेरी नंगी गाण्ड नयना की जाँघों पर टिकी थी और वो उसे सहला रही थी, मेरी क्लीन शेव्ड गाण्ड पर इतने प्यार से सहलाने से मैं और मस्ती मे आने लगा और ज़ोर-ज़ोर से नमकीन चूत चाटने लगा।

    दीप्ति चूत चटवाने का पूरा आनन्द उठा रही थी और मेरे सर के बाल पकड़ कर मुझे अपनी चूत पर और अन्दर ऐसे खींचे जा रही थी.. जैसे मेरा सर उसे अपनी चुदासी चूत के अन्दर डालना हो।

    तभी नयना ने ज़ोर-ज़ोर से मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ मारना शुरू किया. वो इतने ज़ोर से मारने लगी कि मुझे दर्द होने लगा और उसके थप्पड़ों का निशाना मेरी शेव्ड गाण्ड होने के कारण एक अलग सी जलन होने लगी.. पर दीप्ति की चूत का रस चाटने के आनन्द में मैं उसे नजरअंदाज करता गया।

    दीप्ति एक बार झड़ चुकी थी.. पर फिर भी उसने मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा कर रखा हुआ था.. और अब तो वो अपने कूल्हे ऊपर उठा कर अपनी गाण्ड का छेद भी चटवा रही थी।

    जब उसे लगा कि मैं उसके लिए सर हिला कर मना कर रहा हूँ.. तो उसने पूरा ज़ोर लगा कर मेरा सिर दबा कर रखा। इधर नयना मेरी नंगी गाण्ड पर लगातार चांटे लगाए जा रही थी।
    उसका एकाध चांटा पीछे से मेरी गोटियों पर भी पड़ रहा था..

    ये दोनों जो चाहे वो करवा के रहेंगी आज.. इस बात की फीलिंग आने के बाद मैंने किसी भी चीज़ को इनकार करना छोड़ दिया।
    अब मैं मजे से दीप्ति की गाण्ड का छेद और चूत को बारी-बारी चूसने लगा।

    दूसरी बार झड़ने के बाद ही दीप्ति ने मुझे अलग किया.. मैं दीप्ति का थोड़ा स्वीट और थोड़ा सॉल्टी रस पूरा पी गया था.. और अब मुझे मेरे चूतड़ों के दर्द का एहसास होने लगा था.. तभी नयना ने मेरा सर अपने तरफ खींच कर अपने गोर और उठे हुए मस्त कबूतर मेरे मुँह में ठूंस दिए। दूसरी तरफ से दीप्ति ने मेरी गाण्ड पर चांटे मारना शुरू कर दिए।

    इतनी देर तक दीप्ति की मुलायम चूत का रस पीने के बाद और फिर नयना के बड़े-बड़े मम्मों को चूसने से मेरी हालत खराब हो गई थी।

    तभी दीप्ति ने एक जोरदार चपत मेरे चूतड़ों पर मार दी और मैं एकदम से दीप्ति की जाँघों पर ही झड़ गया।

    मेरे ऐसे अचानक से झड़ने से दीप्ति बहुत नाराज़ और गुस्सा हो गई.. उसने उसी हालत मे मेरी गोटियाँ अपने हाथ में पीछे से पकड़ लीं और गुस्साते हुए कहा- इस तरह से मेरी जाँघों पर अपना वीर्य गिरा कर तुमने बड़ी ग़लती कर दी है.. इससे सुधारने के लिए तुम्हारे पास दो विकल्प हैं.. एक यह कि तुम खुद ये सब चाट कर मेरी जाँघों साफ़ कर दो.. या फिर अपनी गाण्ड का छेद मेरे हवाले कर दो।

    मैं- ओह्ह.. आई एम सॉरी दीप्ति.. मुझे ऐसे अचानक से नहीं झड़ना चाहिए था.. पर मैं क्या करूँ.. मैं खुद को रोक नहीं पाया.. मुझे माफ़ कर दो..
    दीप्ति- ग़लती तो हुई है और उसकी सज़ा तो भुगतनी पड़ेगी.. नयना क्या फ्रिज में ककड़ी या खीरा है?
    नयना- हाँ है ना.. और इस बार तो बाज़ार में बहुत बड़ी-बड़ी ककड़ियाँ मिली हैं और आशीष वैसे भी तुम्हें तुम्हारी गाण्ड हम लोगों को जैसी लगती है ना.. तो आज हमें जो गाण्ड मराने का दर्द होता है.. वो भी तुम महसूस कर ही लो ना.. हा हा हा हा हा..

    मैं- प्लीज़ रहम करो मुझ पर.. ऐसा मत करो..
    दीप्ति- ठीक है.. फिर अपने मुँह से ये सब चाट ले.. और मेरी जाँघों को साफ़ कर दे..

    मैं पूरी तरह से दुविधा में था.. अपना खुद का वीर्य खा लूँ या फिर अपनी गाण्ड में वो सब करने दूँ.. जो वे दोनों करने जा रही हैं। समय कम था.. इसलिए मैंने सोचा कि खुद का वीर्य खाने से अच्छा है मैं अपनी गाण्ड का छेद उसके हवाले कर दूँ।

    तब तक नयना फ्रिज में से एक लंबी ककड़ी लेकर आई थी.. जो मोटी भी लग रही थी।
    नयना- क्या तय किया इसने? यह ले, सबसे लंबी वाली लाई हूँ।
    मैं- मैं मेरी गाण्ड मारने का विकल्प लेने को तैयार हूँ।
    नयना- ठीक है.. अब एक काम कर.. मैं ये तेरा वीर्य दीप्ति की जाँघों से साफ़ कर देती हूँ.. तब तक तू मेरी पैन्ट निकाल दे..

    नयना झुककर दीप्ति की जाँघों पर पड़ा मेरा पूरा वीर्य चाट कर साफ़ करने लगी और मैं उसकी जीन्स की बटन खोल कर पैन्टी के साथ नीचे खींचता चला गया।

    वॉऊ.. क्या चूतड़ थे नयना के.. एकदम राउंडेड.. चिकने और दूध की तरह मुलायम.. !
    मैं उसके चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा। उसके नितंब फैलाकर.. मैंने उसकी योनि के और गाण्ड के छेद के भी दीदार कर लिए..
    तब तक वो दीप्ति की जाँघों से मेरा माल साफ़ कर चुकी थी.. वो उठकर खड़ी हो गई और बोली- वाहह.. क्या मस्त टेस्ट है इसके वीर्य का.. मज़ा आ गया..

    दीप्ति नीचे कार्पेट पर पीठ के बल लेट गई और उसने वो लंबी सी ककड़ी को अपनी चूत के ऊपरी हिस्से में खड़ा पकड़ लिया और कहा- चल.. अब इस पर सवार होकर बैठ जा और राइड कर.. नयना.. ज़रा इसके छेद में तेल लगा दे और थोड़ा ककड़ी के ऊपर भी तेल लगा दे..

    नयना जल्दी से तेल लेकर आई और थोड़ा सा तेल ककड़ी पर लगाकर थोड़ा हाथ में लिया और मुझे झुकने को कहा.. मेरे झुकते ही उसने वो तेल मेरी गाण्ड के छेद पर लगाना शुरू किया और कहा- वॉऊ.. इसका छेद तो सचमुच मुलायम है.. थोड़ा इसको फ्री करती हूँ..
    इतना कहकर उसने एकदम से बीच वाली बड़ी उंगली मेरे छेद के अन्दर डाल दी।
    दो मिनट के लिए मेरी आँखों के सामने अंधेरा सा छा गया और ऐसा लगा कि कोई मेरे छेद को चीरता जा रहा है।
    थोड़ी देर अन्दर-बाहर करके उसने मेरी गाण्ड के छेद को फ्री कर दिया और मैं बिल्कुल ककड़ी के ऊपर अपनी गाण्ड को रखकर बैठ गया.. पर अब तक उसे अन्दर नहीं लिया था.. मैं डर रहा था.
    तभी नयना ने ऊपर से मुझे नीचे की ओर ज़ोर से पुश किया.. मैंने आँखें बंद कर ली थीं.. और वो लंबी सी ककड़ी तेल की वजह से मेरी गाण्ड को चीरती हुई अन्दर समा गई।

    मैं दर्द से बेहाल हो रहा था.. दीप्ति के हाथ का स्पर्श मेरे चूतड़ों पर होते ही.. मैं 2 मिनट के लिए वैसे ही रुक गया.. तभी..
    दीप्ति- सिर्फ़ बैठ मत कुत्ते.. ऊपर नीचे करना शुरू कर..
    दीप्ति के चिल्लाने से मैं जैसे होश में आ गया और धीरे-धीरे उठक बैठक करने लगा।
    नयना मेरी वो हालत देखकर हँसे जा रही थी।

    दीप्ति ने मुझे स्पीड बढ़ाने के लिए कहा.. और मैं ज़ोर-ज़ोर से उठक-बैठक करने लगा।
    पता नहीं कैसे पर मेरा लिंग अब हरकत करने लगा और बड़ा होने लगा.. यह देखकर नयना बोलीन- देख दीप्ति.. यह भी खुद की गाण्ड मरवाना एंजाय कर रहा है.. देख कैसे इसका लंड खड़ा हो रहा है.. हा हा हा हा हा..

    दीप्ति- हाँ यार.. सचमुच बहुत बड़ा हरामी कुत्ता है ये.. चल बोल बे 'फक मी हार्ड मैडम.. गिव मी अ गुड फक, आई एम योर स्लेव..'साले मुझे तेरी आवाज़ ज़ोर ज़ोर से सुनाई देनी चाहिए..

    मैं- आहह.. आअहह.. फक मी फर्दर एंड हार्डर दीप्ति मैम.. मैं आपका गुलाम हूँ.. मुझे अच्छी तरह से चोद दो आज..

    नयना ये सब सुनकर हँसती जा रही थी.. तभी वो नीचे झुकी और दीप्ति के कान में कुछ बोली।
    वैसे ही दीप्ति ने मुझे एकदम से रुकने को कहा.. तब ककड़ी मेरी गाण्ड के छेद के अन्दर घुसी हुई थी..

    दीप्ति ने ककड़ी छोड़ दी और मुझे उसी हालत में पीठ के बल लेटने को कहा, मैं किसी तरह सहन करके पीठ के बल लेट गया.. ककड़ी मेरे छेद में फंसी होने के कारण मुझे अपने पैर हवा में ऊपर करने पड़े।

    मैंने देखा कि दीप्ति ने अपनी ब्रा के हुक निकाल कर उसे अपने शरीर से अलग कर दिया।
    अब हम तीनों बिल्कुल नंगे थे.. क्या मस्त मम्मे थे दीप्ति के वॉऊववव.. बिल्कुल तने हुए.. जैसे उन्हें ब्रा की कोई जरूरत ही नहीं हो.. कड़क ब्राउन निप्पल हवा में खड़े थे।

    दीप्ति मेरे पैरों के बीच बैठ गई और नयना बिल्कुल मेरे मुँह पर अपनी चूत रखकर..।
    दीप्ति ने ककड़ी हाथ में पकड़ने की कोशिश की.. पर तेल की वजह से वो फिसल रही थी। इधर मैं नयना की मुलायम चूत के अन्दर जीभ डाल चुका था..

    किसी तरह दीप्ति ने ककड़ी पर पकड़ जमा ली और एक-दो ज़ोर के झटके दे दिए और ककड़ी बाहर निकाल दी।

    नयना की दूधिया चूत को चूसते हुए मेरा लौड़ा पूरी तरह से सख्त हो चुका था और इस बार दीप्ति ने बड़े ही प्यार से उसे हाथ में पकड़ कर शेक किया.. और फिर वो अपनी जीभ मेरे लंड की नोक पर घुमाने लगी।
    मैं अब पूरी तरह से जन्नत में था.. एक तरफ मैं एक मदमस्त चूत को चाट रहा था.. तो दूसरी तरफ बहुत प्यारे से मुलायम होंठ मेरे लंड को चूस रहे थे।

    दीप्ति ने स्पीड बढ़ा दी और वो अब ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड को चूसने लगी और मेरा सुपारा उसके गले को टच किए जा रहा था.. मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था.. पर मैं उसे बर्दाश्त किए जा रहा था..
    नयना मेरे बालों में हाथ डाल कर मेरा मुँह और खींच रही थी.. मुझे समझ आ गया कि वो जल्द ही झड़ने वाली है.. तो मैंने भी अपनी जीभ को ज़ोर-ज़ोर से चूत के अन्दर घुमाना शुरू कर दिया।
    तभी नयना झड़ गई.. उसने अपनी चूत का पूरा रस मेरे मुँह में छोड़ दिया।

    इधर दीप्ति ने मेरा लंड मुँह से निकाला और हाथ में पकड़ कर खींच लिया.. और लंड के ऊपर एक थप्पड़ भी मार दिया।
    अब तक नयना का मुँह मेरे मुँह की तरफ था.. वो अब उठी और मेरी तरफ पीठ करके वो फिर से मेरे मुँह पर बैठ गई।

    अब उसकी चूत और गाण्ड के छेद दोनों मेरे मुँह के दायरे में थे.. उसका मुँह दीप्ति की तरफ था और दीप्ति भी उसी की तरफ देखते हुए मेरे लंड पर बैठने लगी।

    नयना ने मेरा तना हुआ लंड हाथ में ले लिया और बिल्कुल दीप्ति के चूत के छेद पर टिका दिया.. और तभी दीप्ति नीचे की तरफ बैठ गई.. चूत और लंड दोनों गीले होने के कारण वो मेरा पूरा लंड निगल गई..
    इधर मैं फिर से नयना की चूत और गाण्ड का छेद बारी-बारी से चूसने और चाटने लगा था.. वो भी मचल रही थी, उसके नितंबों की दरार मेरी आँखों के सामने थी।

    जब दीप्ति ने धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाना शुरू किया.. तब शायद वो दोनों एक-दूसरे को किस भी कर रही थीं।
    अब हॉल में सिर्फ़ 'पच.. पच..' की आवाजें गूँज रही थीं। दीप्ति ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड को उछल-कूद कर रही थी।

    तभी मैंने उसकी आवाज़ सुनी- आशीष.. याद रख.. अगर अब तू मेरे चूत में झड़ गया तो तुझे पूरी रात नंगा बाल्कनी में मुर्गा बना कर खड़ा कर दूँगी.

    मैंने नयना के नितंबों को थोड़ा ऊपर उठा कर बात करने के लिए जगह बनाई और कहा।
    मैं- नहीं.. अब मैं दोबारा वो ग़लती नहीं करूँगा.. अगर मुझे ऐसा लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ.. तो मैं नयना के नितंबों पर एक चमाट लगा दूँगा.. तब तुम रुक जाना..
    दीप्ति- ठीक है.. आआहह.. आआअहह..

    लगभग 15-20 मिनट तक लगातार उठक-बैठक करने से दीप्ति झड़ने की कगार पर थी, उसने नीचे बैठ कर मेरे लंड को अन्दर खींच लिया और वो झड़ गई.. अपना रस मेरे लंड के ऊपर छोड़कर वो दो मिनट वैसे ही पड़ी रही।
    उसके रस की गर्माहट से मुझे ऐसा लगा कि मैं झड़ जाऊँगा.. तभी मैंने नयना के नितंबों पर ज़ोर से चमाट मार दी.. और उन्हें सिग्नल मिल गया। वे दोनों उठकर खड़ी हो गईं..
    शायद दीप्ति दो बार मेरे मुँह में और एक बार मेरे लंड पर झड़ने के बाद अब थक गई थी.. तो वो सोफे पर जाकर लेट गई और हमें देखने लगी।

    अब नयना पूरे खुमार में थी और वो मेरी तरफ मुँह करके मेरे लंड पर बैठ गई.. दीप्ति के रस में भीगा हुआ मेरा बिना झड़ा हुआ लंड फटाक से नयना की चूत में दाखिल हो गया.. और अब मैं भी नीचे से झटके मारने लगा।

    दोनों तरफ से झटकों की वजह से हम दोनों बहुत एंजाय कर रहे थे, 'फट.. फटा.. फट..' की आवाजें गूँज रही थीं.. मैंने हाथ बढ़ाकर नयना के उछलते हुए मम्मों को अपने हाथ में पकड़ लिया.. और उन्हें ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा।

    नयना और मस्त हुए जा रही थीं.. लगभग 10-15 मिनट तक चुदाई करने के बाद वो भी दीप्ति की तरह ही मेरे लंड पर बैठ गई और उसने लंड को पूरे ज़ोर से अन्दर खींच लिया.. कुछ समझ में आने से पहले ही वो झड़ गई और उसने खुद को ढीला छोड़ दिया।

    अब उसकी चूत की गरमी और ज़ोरदार पकड़ से मैं भी झड़ने वाला था.. इसलिए मैंने कहा- नयना.. मैं भी झड़ने वाला हूँ.. जल्दी बताओ.. कहाँ झड़ना है?

    यh सुनते ही नयना उठकर खड़ी हो गई और सोफे पर जा बैठी.. साथ ही में दीप्ति भी उठ गई और नयना ने कहा- आओ.. हम दोनों के मुँह में झड़ जाओ..

    मैं यह सुनकर खुश हो गया.. जल्दी से उन दोनों की तरफ जाकर मैंने अपना लंड बिल्कुल उन दोनों के मुँह के सामने रख कर हिलाने लगा.. केवल 2-3 बार मुठियाते ही मैंने वीर्य छोड़ दिया और उन दोनों के मुँह में बारी-बारी से गिरा दिया।
    वे दोनों पूरा का पूरा वीर्य निगल गईं और दोनों ने मेरा लंड बारी-बारी से चाट कर साफ़ कर दिया।
    दो बार झड़ने से और लगभग सारा वीर्य बाहर निकल जाने से मैं भी थक गया था और मेरा लंड भी सिकुड़ गया।
    यह देखकर वे दोनों हँसने लगीं..

    अब हम तीनों पूरी तरह से संतुष्ट हो चुके थे और थक चुके थे, अब हमें नींद की सख्त ज़रूरत थी.. हम जैसे-तैसे एक-दूसरे का सहारा लेकर बेडरूम में चले गए और उसी नंगी हालत में एक-दूसरे की बांहों में बेड पर सो गए।
    एक डॉक्टर और एक एचआर इतनी बड़ी चुदक्कड़ और स्ट्रेट फॉर्वर्ड निकलेंगी.. यह मैंने कभी सोचा नहीं था!
     
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